ऐच्छिक सहयोग व सेवा
Voluntary Support for Dharma Granth
ॐ परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः परोपकाराय वहन्ति नद्यः ।
परोपकाराय दुहन्ति गावः परोपकारार्थमिदं शरीरम् ॥
Trees bear fruit for all; rivers flow for all; cows give nourishment for all; this life itself is for selfless welfare and knowledge.
धर्म ग्रंथ एक स्वतंत्र, विज्ञापन-मुक्त और निःशुल्क डिजिटल ज्ञान-स्थल है। यदि इस ग्रंथालय ने आपके अध्ययन, साधना अथवा जीवन-दृष्टि को समृद्ध किया है, तो आप अपनी श्रद्धा और सामर्थ्यानुसार इसका संवर्धन कर सकते हैं।
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सहयोग के पश्चात यदि आप कोई सुझाव, संशोधन या प्रतिक्रिया साझा करना चाहते हैं, तो आप GitHub Issues अथवा संपर्क पते पर लिख सकते हैं।
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How your contribution sustains Dharma Granth
१००% विज्ञापन-मुक्त व पवित्र पठन
100% Ad-Free Reading Sanctuary
कोई व्यावसायिक विज्ञापन, ट्रैकिंग या पॉपअप नहीं। पाठक का मन केवल पवित्र श्लोकों और शांत अध्ययन में लीन रहता है।
पांडुलिपि व भाष्य संवर्धन
Scripture & Commentary Preservation
गीताप्रेस, बोरी (BORI) व प्रामाणिक संस्करणों का सूक्ष्म अध्ययन, उच्च गुणवत्ता देवनागरी ओसीआर और बहुभाषी व्याख्या का संपादन।
तीव्र गति व अखंड वैश्विक सर्वर
Global High-Speed Edge Infrastructure
क्लाउड होस्टिंग, सीडीएन (CDN) और डोमेन नवीनीकरण ताकि भारत और विश्वभर के पाठक बिना किसी रुकावट के तुरंत श्लोक पढ़ सकें।
सदा सर्वदा निःशुल्क व सार्वजनिक
Always Free & Public Knowledge
कोई भी श्लोक, टीका या अध्ययन साधन पेवॉल (Paywall) के पीछे नहीं है। विद्या सभी जिज्ञासुओं के लिए निष्काम भाव से उपलब्ध है।
जिज्ञासा व स्पष्टीकरण · Transparency & Questions
Frequently asked questions about voluntary contributions
ऐच्छिक स्वरूप: यह सहयोग पूर्णतः ऐच्छिक है। धर्म ग्रंथ पर किसी भी ग्रंथ, श्लोक, अनुवाद, भाष्य अथवा साधन के अध्ययन के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता और न ही कभी लिया जाएगा।
कर-छूट (80G) सूचना: धर्म ग्रंथ वर्तमान में आयकर अधिनियम की धारा 80G के अंतर्गत पंजीकृत नहीं है। यह सहयोग व्यक्तिगत ऐच्छिक सहायता (personal gift/voluntary assistance) के रूप में सर्वर व तकनीकी रखरखाव के लिए प्रयुक्त होता है।
गोपनीयता संकल्प: धर्म ग्रंथ किसी भी पाठक की बैंकिंग अथवा व्यक्तिगत वित्तीय जानकारी को संग्रहीत नहीं करता। सम्पूर्ण लेनदेन भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI UPI) के माध्यम से सीधे आपके बैंक खाते से अधिकृत खाते के बीच संपन्न होता है।
ॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै ।
तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
May the divine protect us together; may we be nourished together; may we work together with great energy; may our study be radiant; may there be no animosity between us.