Agni Purana
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अध्याय 2 / 381

Adhyaya 2

राजधर्म

3 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ3 श्लोक

अध्याय 2

श्लोक 1

राजा प्रजापालनतत्परः स्यात् ।प्रजाः सुखिताः स्युः सततं यतेत

rājā prajāpālanatatparaḥ syāt | prajāḥ sukhitāḥ syuḥ satataṃ yateta

हिन्दी अर्थ

राजा को प्रजा की रक्षा में तत्पर रहना चाहिए। वह सदा इस प्रयास में रहे कि प्रजा सुखी रहे।

English

A king should be devoted to the protection of subjects. He should always strive to ensure that the subjects are happy.

अध्याय 2

श्लोक 2

न वृथा वाक्यं वदेद् राजा न च सत्यमप्रियम् ।अर्थपूर्णं सप्रियं वाक्यं स राजा वक्तुमर्हति

na vṛthā vākyaṃ vaded rājā na ca satyamapriyam | arthapūrṇaṃ sapriyaṃ vākyaṃ sa rājā vaktumarhati

हिन्दी अर्थ

राजा को व्यर्थ नहीं बोलना चाहिए, और न कटु सत्य बोलना चाहिए। उसे सार्थक और प्रिय वचन बोलने का अधिकार है।

English

A king should not speak in vain, nor should he speak a truth that is unpleasant. The king deserves to speak words that are meaningful and kind.

अध्याय 2

श्लोक 5

आयुर्वेदो वेदशाखा प्राणिनां प्राणरक्षणी ।आहारनियमो मूलं रोगाणां चापनोदनम्

āyurvedo vedaśākhā prāṇināṃ prāṇarakṣaṇī | āhāraniyamo mūlaṃ rogāṇāṃ cāpanodanam

हिन्दी अर्थ

आयुर्वेद वेद की शाखा है, प्राणियों के प्राण की रक्षक। आहार-नियम मूल है; रोगों का निवारण इसी से होता है।

English

Ayurveda is a branch of the Vedas, the protector of life for all beings. Regulation of diet is the root; diseases are dispelled by it.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।