Agni Purana
206
अध्याय 206 / 381

Adhyaya 206

20 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ20 श्लोक

अध्याय 206

श्लोक 1

अगस्त्यार्घ्यदानकथनं अग्निर् उवाच अगस्त्यो भगवान्विष्णुस्तमभ्यर्च्याप्नुयाद्धरिं ।अप्राप्ते भास्करे कन्यां सत्रिभागैस्त्रिभिर्दिनैः

agastyārghyadānakathanaṃ agnir uvāca agastyo bhagavānviṣṇustamabhyarcyāpnuyāddhariṃ / aprāpte bhāskare kanyāṃ satribhāgaistribhirdinaiḥ

हिन्दी अर्थ

“वासुदेव? आदि नामोंसे एवं श्रीशिवका “ईशान ' आदि नाम-पुष्पोंसे भी पूजन किया जाता है

English

"O Daughter of a king!® Obeisance to you, the wife of the sage (Agastya)! One who is a great devotee! O Governess of the celestials! Accept libation. O Lopa- mudra! One who is famous!

अध्याय 206

श्लोक 2

१ हरिं लेभे तेनैतदिति ग॥ ।हरिं प्राप तेनैतदिति ङ॥ ।हरिं प्राप्तस्तेनैतदिति ज॥ , ट॥ च २ पूजनात्पञ्च उपवासादजव्रतमिति ग॥ , घ॥ , ङ॥ , ज॥ , ञ॥ , ड॥ च :प् २४९ अर्घ्यं दद्यादगस्त्याय पूजयित्वा ह्य् उपोषितः ।काशपुष्पमयीं मूर्तिं प्रदोषे विन्यसेद् घटे

1 hariṃ lebhe tenaitaditi ga.. / hariṃ prāpa tenaitaditi ṅa.. / hariṃ prāptastenaitaditi ja.. , ṭa.. ca 2 pūjanātpañca upavāsādajavratamiti ga.. , gha.. , ṅa.. , ja.. , ña.. , ḍa.. ca :p 249 arghyaṃ dadyādagastyāya pūjayitvā hy upoṣitaḥ / kāśapuṣpamayīṃ mūrtiṃ pradoṣe vinyased ghaṭe

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराणमें "पुष्पाध्याय' नामक दो सौ दोवाँ अध्याय पूरा हुआ अग्निदेव कहते हैं-- वसिष्ठ! अब मैं नरकोंका वर्णन करता हूँ। भगवान् श्रीविष्णुका पुष्पादि उपचारोंसे पूजन करनेवाले नरकको नहीं प्राप्त होते। आयुके समाप्त होनेपर मनुष्य न चाहता

English

They were brothers, both demons.

अध्याय 206

श्लोक 3

मुनेर्यजेत्तां कुम्भस्थां रात्रौ कुर्यात् प्रजागरं ।अगस्त्य मिनिशार्दूल तेजोराशे महामते(१)

muneryajettāṃ kumbhasthāṃ rātrau kuryāt prajāgaraṃ / agastya miniśārdūla tejorāśe mahāmate(1)

हिन्दी अर्थ

हुआ भी प्राणोंसे बिछुड़ जाता है। देहधारी जीव जल, अग्नि, विष, शस्त्राघात, भूख, व्याधि या पर्वतसे पतन-किसी-न-किसी निमित्तको पाकर प्राणोंसे हाथ धो बैठता है। वह अपने कमाके

English

Daughter of the king of Vidarbha.

अध्याय 206

श्लोक 4

इमां मम कृतां पूजां गृह्णीष्व प्रियया सह ।आवाह्यार्घ्ये च सम्मुख्यं प्रार्चयेच्चन्दनादिना

imāṃ mama kṛtāṃ pūjāṃ gṛhṇīṣva priyayā saha / āvāhyārghye ca sammukhyaṃ prārcayeccandanādinā

हिन्दी अर्थ

अनुसार यातनाएँ भोगनेके लिये दूसरा शरीर ग्रहण करता है। इस प्रकार पापकर्म करनेवाला दुःख भोगता है, परंतु धर्मात्मा पुरुष सुखका भोग करता है। मृत्युके पश्चात् पापी जीवको यमदूत बड़े दुर्गम मार्गसे ले जाते हैं और वह यमपुरीके दक्षिण द्वारसे यमराजके पास पहुँचाया जाता है। वे यमदूत बड़े डरावने होते हैं। परंतु धर्मात्मा मनुष्य पश्चिम आदि द्वारोंसे ले जाये जाते हैं। वहाँ

English

Then the brahmins should be given food (as well as) ghee, sweet gruel and sweet balls. Cows, clothes and gold should be given to them as fees.

अध्याय 206

श्लोक 5

जलाशयसमीपे तु प्रातर्नीत्वार्घ्यमर्पयेत् ।काशपुष्पप्रतीकाश अग्निमारुतसम्भव(२)

jalāśayasamīpe tu prātarnītvārghyamarpayet / kāśapuṣpapratīkāśa agnimārutasambhava(2)

हिन्दी अर्थ

पापी जीव यमराजको आज्ञासे यमदूतोंद्वारा नरकोंमें गिराये जाते हैं, किंतु वसिष्ठ आदि ऋषियोंद्वारा प्रतिपादित धर्मका आचरण करनेवाले स्वर्गमें ले जाये जाते हैं। गोहत्यारा 'महावीचि' नामक

English

All would get all things by offering libation for seven years. A woman (would get) children and fortune and a girl (would get) a husband born to a king.

अध्याय 206

श्लोक 6

मित्रावरुणयोः पुत्र कुम्भयोने नमो ऽस्तु ते ।आतापिर्भक्षितो येन वातापिश् च महासुरः

mitrāvaruṇayoḥ putra kumbhayone namo 'stu te / ātāpirbhakṣito yena vātāpiś ca mahāsuraḥ

हिन्दी अर्थ

नरकमें एक लाख वर्षतक पीड़ित किया जाता है। ब्रह्मघाती अत्यन्त दहकते हुए 'ताम्रकुम्भ'

English

"Son of Mitra and Varuna, pot-born, homage to you; by whom Atapi and the great demon Vatapi were eaten,

अध्याय 206

श्लोक 7

समुद्रः शोषितो येन सो ऽगस्त्यः सम्मुखो ऽस्तु मे ।अगस्तिं प्रार्थयिष्यामि कर्मणा मनसा गिरा

samudraḥ śoṣito yena so 'gastyaḥ sammukho 'stu me / agastiṃ prārthayiṣyāmi karmaṇā manasā girā

हिन्दी अर्थ

अपहरण करनेवाले पापीको महाप्रलय कालतक 'रौरव-नरक'में धीरे-धीरे दुःसह पीड़ा दी जाती है। स्त्री, बालक अथवा वृद्धोंका वध करनेवाले पापी चौदह इन्द्रोंके राज्यकालपर्यन्त 'महारौरव'

English

by whom the ocean was drunk dry — may that Agastya be before me. I shall pray to Agastya by deed, mind and speech;

अध्याय 206

श्लोक 8

अर्चयिस्याम्यहं मैत्रं परलोकाभिकाङ्क्षया ।द्वीपान्तरसमुत्पन्नं देवानां परमं प्रियं

arcayisyāmyahaṃ maitraṃ paralokābhikāṅkṣayā / dvīpāntarasamutpannaṃ devānāṃ paramaṃ priyaṃ

हिन्दी अर्थ

नामक रौद्र नरकमें क्लेश भोगते हैं। दूसरोंके घर और खेतको जलानेवाले अत्यन्त भयंकर ' महारौरव' नरकमें एक कल्पपर्यन्त पकाये जाते हैं। चोरी करनेवालेको 'तामिस्र' नामक नरकमें गिराया जाता है। इसके बाद उसे अनेक कल्पोंतक यमराजके अनुचर भालोंसे बींधते रहते हैं और फिर 'महातामिस्र' नरकमें जाकर वह पापी सर्पो और जोकोंद्वारा पीड़ित किया जाता है। मातृघाती

English

I shall worship Maitra with desire for the other world, born in another island, dearest to the gods.

अध्याय 206

श्लोक 9

राजानं सर्ववृक्षाणां चन्दनं प्रतिगृह्यतां(३) ।धर्मार्थकाममोक्षाणां भाजनी पापनाशनी

rājānaṃ sarvavṛkṣāṇāṃ candanaṃ pratigṛhyatāṃ(3) / dharmārthakāmamokṣāṇāṃ bhājanī pāpanāśanī

हिन्दी अर्थ

आदि मनुष्य असिपत्रवन' नामक नरकमें गिराये जाते हैं। वहाँ तलवारोंसे उनके अङ्ग तबतक काटे जाते हैं, जबतक यह पृथ्वी स्थित रहती है। जो इस लोकमें दूसरे प्राणियोंके हृदयको जलाते

English

King of all trees, sandal, be accepted; vessel of dharma, wealth, desire and liberation, destroyer of sin."

अध्याय 206

श्लोक 10

सौभाग्यारोग्यलक्ष्मीदा पुष्पमाला प्रगृह्यतां ।धूपो ऽयं गृह्यतां देव भक्तिं मे ह्य् अचलाङ्कुरु

saubhāgyārogyalakṣmīdā puṣpamālā pragṛhyatāṃ / dhūpo 'yaṃ gṛhyatāṃ deva bhaktiṃ me hy acalāṅkuru

हिन्दी अर्थ

हैं, वे अनेक कल्पोंतक “करम्भवालुका' नरकमें जलती हुई रेतमें भुने जाते हैं। दूसरोंको बिना दिये अकेले मिष्टान्न भोजन करनेवाला 'काकोल' नामक नरकमें कीड़ा और विष्ठाका भक्षण करता है। पञ्चमहायज्ञ और नित्यकर्मका परित्याग करनेवाला 'कुट्टल' नामक नरकमें जाकर मूत्र और रक्तका पान करता है। अभक्ष्य वस्तुका

English

"Accept this garland of flowers, giver of good fortune, health and prosperity; accept this incense, god, and make my devotion unshaking.

अध्याय 206

श्लोक 11

ईप्सितं मे वरं देहि परत्र च शुभाङ्गतिं ।सुरासुरैर्मुनिश्रेष्ठ सर्वकामफलप्रद

īpsitaṃ me varaṃ dehi paratra ca śubhāṅgatiṃ / surāsurairmuniśreṣṭha sarvakāmaphalaprada

हिन्दी अर्थ

भक्षण करनेवालेको महादुर्गन्धमय नरकमें गिरकर रक्तका आहार करना पड़ता है

English

Give me the boon I desire and a good state hereafter, O best of sages, giver of the fruit of all desires, by gods and demons."

अध्याय 206

श्लोक 12

१ तेजोराशे महाद्युते इति ग॥ , घ॥ , छ॥ , ज॥ , झ॥ , ञ॥ , ट॥ च ।तेजोराशे जगत्पते इति ङ॥ २ वह्निमारुतसम्भवेति झ॥ ३ चन्दनं मे प्रगृह्यनामिति ज॥ , ञ॥ च :प् २५० वस्त्रव्रीहिफलैर्हेम्ना दत्तस्त्वर्घ्यो ह्य् अयं(१) मया ।अगस्त्यं बोधयिष्यामि यन्मया मनसोद्धृतं(२)

1 tejorāśe mahādyute iti ga.. , gha.. , cha.. , ja.. , jha.. , ña.. , ṭa.. ca /tejorāśe jagatpate iti ṅa.. 2 vahnimārutasambhaveti jha.. 3 candanaṃ me pragṛhyanāmiti ja.. , ña.. ca :p 250 vastravrīhiphalairhemnā dattastvarghyo hy ayaṃ(1) mayā / agastyaṃ bodhayiṣyāmi yanmayā manasoddhṛtaṃ(2)

हिन्दी अर्थ

दूसरोंको कष्ट देनेवाला 'तैलपाक' नामक नरकमें तिलोंकी भाँति पेरा जाता है। शरणागतका वध करनेवालेको भी 'तैलपाक 'में पकाया जाता है। यज्ञमें कोई चीज देनेकी प्रतिज्ञा करके न देनेवाला “निरुच्छास 'में, रस-विक्रय करनेवाला “वज्रकटाह' नामक नरकमें और असत्यभाषण करनेवाला 'महापात' नामक नरकमें गिराया जाता है

English

"This arghya has been given by me with cloth, rice, fruits and gold; I shall awaken Agastya, what was raised by my mind;

अध्याय 206

श्लोक 13

फलैरर्घ्यं प्रदास्यामि गृहाणार्घ्यं महामुने ।अगस्त्य एवं खनमानः खनित्रैः प्रजामपत्यंबलमीहमानः ।उभौ कर्णावृषिरुग्रतेजाः पुपोष सत्या देवेष्वाशिषोजगाम

phalairarghyaṃ pradāsyāmi gṛhāṇārghyaṃ mahāmune / agastya evaṃ khanamānaḥ khanitraiḥ prajāmapatyaṃbalamīhamānaḥ / ubhau karṇāvṛṣirugratejāḥ pupoṣa satyā deveṣvāśiṣojagāma

हिन्दी अर्थ

पापपूर्ण विचार रखनेवाला “महाज्वाल 'में, अगम्या स्त्रीक साथ गमन करनेवाला ' क्रकच 'में, वर्णसंकर संतान उत्पन्न करनेवाला 'गुडपाक 'में, दूसरोंके मर्मस्थानोंमें पीड़ा पहुँचानेवाला ' प्रतुद 'में,

English

I shall give arghya with fruits; accept the arghya, great sage." "Agastya, thus digging with spades, desiring offspring, progeny and strength, the fiery-splendored sage nourished both ears; true, he came to the blessings among the gods."

अध्याय 206

श्लोक 14

राजपुत्रि नमस्तुभ्यं मुनिपत्नी महाव्रते ।अर्घ्यं गृह्णीष्व देवेशि लोपामुद्रे यशस्विनि

rājaputri namastubhyaṃ munipatnī mahāvrate / arghyaṃ gṛhṇīṣva deveśi lopāmudre yaśasvini

हिन्दी अर्थ

करनेवाला 'क्षुरधार'में, गौ और स्वर्णकी चोरी करनेवाला 'अम्बरीष'में, वृक्ष काटनेवाला ' व्रशस्त्र'में, मधु चुरानेवाला “परीताप 'में, दूसरोंका धन अपहरण करनेवाला 'कालसूत्र'में, अधिक मांस खानेवाला 'कश्मल'में और पितरोंको पिण्ड न देनेवाला 'उग्रगन्ध' नामक नरकमें

English

"Princess, homage to you, wife of the sage, of great vows; accept the arghya, goddess of gods, Lopamudra, glorious."

अध्याय 206

श्लोक 15

पञ्चरत्नसमायुक्तं हेमरूप्यसमन्वितं ।सप्तधान्यवृतं(३) पात्रं दधिचन्दनसंयुतं

pañcaratnasamāyuktaṃ hemarūpyasamanvitaṃ / saptadhānyavṛtaṃ(3) pātraṃ dadhicandanasaṃyutaṃ

हिन्दी अर्थ

यमदूतोंद्वारा ले जाया जाता है। घूस खानेवाले 'दुर्घर' नामक नरकमें और निरपराध मनुष्योंको कैद करनेवाले 'लौहमय मंजूष' नामक नरकमें यमदूतोंद्वारा ले जाकर कैद किये जाते हैं।

English

A vessel furnished with five jewels, with gold and silver, covered with seven grains, joined with curd and sandal,

अध्याय 206

श्लोक 16

अर्घ्यं दद्यादगस्त्याय स्त्रीशूद्राणामवैदिकं ।अगस्त्य मुनिशार्दूल तेजोराशे च सर्वद

arghyaṃ dadyādagastyāya strīśūdrāṇāmavaidikaṃ / agastya muniśārdūla tejorāśe ca sarvada

हिन्दी अर्थ

वेदनिन्दक मनुष्य 'अप्रतिष्ठ' नामक नरकमें गिराया जाता है। झूठी गवाही देनेवाला ' पूतिवकत्र 'में, धनका अपहरण करनेवाला ' परिलुण्ठ "में, बालक, स्त्री और वृद्धकी हत्या करनेवाला तथा ब्राह्मणको पीड़ा देनेवाला 'कराल'में, मद्यपान करनेवाला ब्राह्मण “विलेप 'में और मित्रोंमें परस्पर भेदभाव करानेवाला 'महाप्रेत' नरकको प्राप्त होता है। परायी स्त्रीका उपभोग करनेवाले पुरुष और अनेक

English

one should give as arghya to Agastya; for women and Shudras it is non-Vedic: "Agastya, tiger among sages, mass of splendor and giver of all,

अध्याय 206

श्लोक 17

इमां मम कृतां पूजां गृहीत्वा व्रज शान्तये ।त्यजेदगस्त्र्यमुद्दिश्य धान्यमेकं फलं रसं

imāṃ mama kṛtāṃ pūjāṃ gṛhītvā vraja śāntaye / tyajedagastryamuddiśya dhānyamekaṃ phalaṃ rasaṃ

हिन्दी अर्थ

पुरुषासे सम्भोग करनेवाली नारीको 'शाल्मल' नामक नरकमें जलती हुई लौहमयी शिलाके रूपमें अपनी उस प्रिया अथवा प्रियका आलिङ्गन करना पड़ता है

English

having accepted this worship done by me, go for peace." One should give up one grain, one fruit, one juice in Agastya's name;

अध्याय 206

श्लोक 18

ततो ऽन्नं भोजयेद्विप्रान् घृतपायसमोदकान् ।गां वासांसि सुवर्णञ्च(४) तेभ्यो दद्याच्च दक्षिणां

tato 'nnaṃ bhojayedviprān ghṛtapāyasamodakān / gāṃ vāsāṃsi suvarṇañca(4) tebhyo dadyācca dakṣiṇāṃ

हिन्दी अर्थ

नरकोंमें चुगली करनेवालोंकी जीभ खींचकर निकाल ली जाती है, परायी स्त्रियोंको कुदृष्टिसे देखनेवालोंकी आँखें फोड़ी जाती हैं, माता और पुत्रीक साथ व्यभिचार करनेवाले धधकते हुए अंगारोंपर फेंक दिये जाते हैं, चोरोंको छुरोंसे काटा जाता है और मांस-भक्षण करनेवाले नरपिशाचोंको उन्हींका मांस काटकर खिलाया जाता है । मासोपवास, एकादशीव्रत अथवा भीष्मपञ्चकव्रत करनेवाला

English

then one should feed Brahmins with food, ghee, pudding and sweets; a cow, garments and gold, and a fee one should give them.

अध्याय 206

श्लोक 19

घृतपायसयुक्तेन पात्रेणाच्छादिताननं ।सहिरण्यञ्च तं कुम्भं ब्राह्मणायोपकल्पयेत्(५)

ghṛtapāyasayuktena pātreṇācchāditānanaṃ / sahiraṇyañca taṃ kumbhaṃ brāhmaṇāyopakalpayet(5)

हिन्दी अर्थ

मनुष्य नरकोंमें नहीं जाता

English

With a vessel containing ghee and pudding covering its mouth, with gold, one should arrange that pot for a Brahmin.

अध्याय 206

श्लोक 20

१ दत्तस्त्वर्घ्यो ऽक्षय इति ङ॥ २ मनसेप्सितमिति ग॥ , घ॥ , झ॥ च ।मनसेहितमिति ङ॥ ३ सप्तधान्ययुतमिति ज॥ ४ प्रतिमाञ्च सुवर्णञ्चेति क॥ ५ ब्राह्मणायोपपादयेदिति घ॥ , ङ॥ , ज॥ , ञ॥ च :प् २५१ सप्तवर्षाणि दत्वार्घ्यं सर्वे सर्वमवाप्नुयुः ।नीरा पुत्रांश् च सौभाग्यं पतिं कन्या नृपोद्भवं

1 dattastvarghyo 'kṣaya iti ṅa.. 2 manasepsitamiti ga.. , gha.. , jha.. ca / manasehitamiti ṅa.. 3 saptadhānyayutamiti ja.. 4 pratimāñca suvarṇañceti ka.. 5 brāhmaṇāyopapādayediti gha.. , ṅa.. , ja.. , ña.. ca :p 251 saptavarṣāṇi datvārghyaṃ sarve sarvamavāpnuyuḥ / nīrā putrāṃś ca saubhāgyaṃ patiṃ kanyā nṛpodbhavaṃ

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार आदि आग्नेय महापृराणमें 'एक सौ नवासी नरकोके स्वरूपका वर्णन” नामक दो सौ तीनवाँ अध्याय पूरा हुआ अग्निदेव कहते हैं मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठ! अब व्रतोंसे अपनी शक्तिका मासोपवासव्रत करना चाहिए। वानप्रस्थ, संन्यासी

English

Having given arghya for seven years, all obtain everything: water, sons, good fortune, a husband for the maiden, a royal-born one.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

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व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

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