Agni Purana
225
अध्याय 225 / 381

Adhyaya 226

67 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ67 श्लोक

अध्याय 225

श्लोक 1

राजधर्माः पुष्कर उवाच दण्डप्रणयनं वक्ष्ये येन राज्ञः परा गतिः ।त्रियवं कृष्णलं विद्धि पापस्तत्पञ्चकं भवेत्

rājadharmāḥ puṣkara uvāca daṇḍapraṇayanaṃ vakṣye yena rājñaḥ parā gatiḥ / triyavaṃ kṛṣṇalaṃ viddhi pāpastatpañcakaṃ bhavet

हिन्दी अर्थ

अपना भी शुभ होता है। यदि कौआ दरवाजेपर बारंबार आया-जाया करे तो वह उस घरके किसी परदेशी व्यक्तिके आनेकी सूचना देता है तथा यदि वह कोई लाल या जली हुई वस्तु

English

He should not be given (an opportunity) to associate with angry, greedy and dishonoured persons. If not able to inculcate virtue (in the prince, the king) should bind him with pleasures.

अध्याय 225

श्लोक 2

कृष्णलानां तथा षष्ट्या(१) कर्षार्धं रामकीर्तितं ।सुवर्णश् च विनिर्दिष्टो राम षोडशमापकः

kṛṣṇalānāṃ tathā ṣaṣṭyā(1) karṣārdhaṃ rāmakīrtitaṃ / suvarṇaś ca vinirdiṣṭo rāma ṣoḍaśamāpakaḥ

हिन्दी अर्थ

मकानके ऊपर डाल देता है तो उससे आग लगनेकी सूचना मिलती है भृगुनन्दन! यदि वह मनुष्यके आगे कोई लाल वस्तु डाल देता है तो उसके कैद होनेकी बात बतलाता है और यदि कोई पीले रंगका द्रव्य सामने गिराता है तो उससे सोने-चाँदीकी प्राप्ति

English

An obedient prince should be engaged in all posts of authority. The king should avoid hunting, drinking and dice (playing) that destroys the kingdom.

अध्याय 225

श्लोक 3

निष्कः सुवर्णाश् चत्वारो धरणं दशभिस्तु तैः ।ताम्ररूप्यसुवर्णानां मनमेतत् प्रकीर्तितं

niṣkaḥ suvarṇāś catvāro dharaṇaṃ daśabhistu taiḥ / tāmrarūpyasuvarṇānāṃ manametat prakīrtitaṃ

हिन्दी अर्थ

सूचित होती है । सारांश यह कि वह जिस द्रव्यको अपने पास ला देता है, उसकी प्राप्ति और जिस द्रव्यको अपने यहाँसे उठा ले जाता है, उसकी हानिकी ओर संकेत करता है। यदि वह अपने

English

One should avoid passion, anger,' haughtiness, pride.

अध्याय 225

श्लोक 4

ताम्रकैः कार्षिको राम प्रोक्तः कार्षापणो बुधैः ।पणानां द्वे शते सार्धं प्रथमः साहसः स्मृतः(२)

tāmrakaiḥ kārṣiko rāma proktaḥ kārṣāpaṇo budhaiḥ / paṇānāṃ dve śate sārdhaṃ prathamaḥ sāhasaḥ smṛtaḥ(2)

हिन्दी अर्थ

आगे कच्चा मांस लाकर डाल दे तो धनकी, मिट्टी गिरावे तो पृथ्वीकी और कोई रत्न डाल दे तो महान् साम्राज्यकी प्राप्ति होती है। यदि यात्रा करनेवालेकी अनुकूल दिशा (सामने)-की ओर कौआ जाय तो वह कल्याणकारी और कार्यसाधक होता है, परंतु यदि प्रतिकूल दिशाकी ओर जाय

English

Then (he) should subjugate his external enemies. The external enemies are of three kinds — those belonging to the same clan, those having enmity from the period of the ances¬ tors and those who have enmity on account of some particular reason. Among these three each preceding one is greater than the succeeding one.

अध्याय 225

श्लोक 5

मध्यमः पञ्च विज्ञेयः सहस्रमपि चोत्तमः ।चौरैर् अमूषितो यस्तु मूषितो ऽस्मीति भाषते

madhyamaḥ pañca vijñeyaḥ sahasramapi cottamaḥ / caurair amūṣito yastu mūṣito 'smīti bhāṣate

हिन्दी अर्थ

जानना चाहिए। यदि कौआ सामने काँव-काँव करता हुआ आ जाय तो वह यात्राका विघातक होता है। कौएका वामभागमें होना शुभ माना गया है और दाहिने भागमें होनेपर वह कार्यका

English

O Fortunate one! Friends are of three kinds — friend of the father and grandfather, feudatory under the enemy and artificial.

अध्याय 225

श्लोक 6

तत्प्रदातरि भापाले स दण्ड्यस्तावदेव तु ।यो यावद्विपरीतार्थं मिथ्या वा यो वदेत्तु तं

tatpradātari bhāpāle sa daṇḍyastāvadeva tu / yo yāvadviparītārthaṃ mithyā vā yo vadettu taṃ

हिन्दी अर्थ

नाश करता है। वामभागमें होकर कौआ यदि अनुकूल दिशाकी ओर चले तो 'शरेष्ठ' और दाहिने होकर अनुकूल दिशाकी ओर चले तो ' मध्यम' माना जाता है; किंतु वामभागमें होकर यदि वह विपरीत दिशाकी ओर जाय तो यात्राका निषेध करता है। यात्राकालमें घरपर कौआ आ जाय तो बह अभीष्ट कार्यकी सिद्धि सूचित करता है। यदि वह एक पैर उठाकर एक आँखसे सूर्यको

English

The gods and all brahmins should always be worshipp¬ ed and gifts should be given to them (brahmins). Gift made to a brahmin (would be) imperishable and the treasury cannot be destroyed by any of these.

अध्याय 225

श्लोक 7

तौ नृपेण ह्य् अधर्मज्ञौ दाप्यौ तद्द्विगुणं दमं(३) ।कूटसाक्ष्यन्तु कुर्वाणांस्त्रीन् वर्णांश् च प्रदापयेत्

tau nṛpeṇa hy adharmajñau dāpyau taddviguṇaṃ damaṃ(3) / kūṭasākṣyantu kurvāṇāṃstrīn varṇāṃś ca pradāpayet

हिन्दी अर्थ

ओर देखे तो भय देनेवाला होता है। यदि कौआ किसी वृक्षे खोखलेमें बैठकर आवाज दे तो वह महान् अनर्थका कारण है। ऊसर भूमिमें बैठा हो तो भी अशुभ होता है, किंतु यदि वह कीचड़में

English

Not retreating in the battle, protecting the subjects and giving gifts to the brahmins are the supreme good for a king.

अध्याय 225

श्लोक 8

विवासयेद्ब्राह्मणन्तु भोज्यो विधिर् न हीरतः ।निक्षेपस्य समं मूल्यं दण्ड्यो निक्षेपभुक् तथा

vivāsayedbrāhmaṇantu bhojyo vidhir na hīrataḥ / nikṣepasya samaṃ mūlyaṃ daṇḍyo nikṣepabhuk tathā

हिन्दी अर्थ

लिपटा हुआ हो तो उत्तम माना गया है । परशुरामजी! जिसकी चोंचमें मल आदि अपवित्र वस्तुएँ लगी हों, वह कौआ दीख जाय तो सभी कार्योंका साधक होता है। कौएकी भाँति अन्य पक्षियोंका भी फल जानना चाहिए

English

(The king) should likewise arrange for the welfare and livelihood of the poor, destitute and old people, widows and women whose husbands have gone abroad.

अध्याय 225

श्लोक 9

१ तथाचाष्टौ इति छ॥ , ज॥ च २ ताम्रिकैः कार्षिक इत्य् आदिः, साहसः स्मृत इत्य् अन्तः पाठः झ॥ पुस्तके नास्ति ३ यो यावदित्यादिः, तद्द्विगुणं दममित्यन्तः पाठः झ॥ पुस्तके नास्ति :प् ३२३ वस्त्रादिकस्य धर्मज्ञ तथा धर्मो न हीयते ।यो निक्षेपं घातयति यश्चानिक्षिप्य याचते

1 tathācāṣṭau iti cha.. , ja.. ca 2 tāmrikaiḥ kārṣika ity ādiḥ, sāhasaḥ smṛta ity antaḥ pāṭhaḥ jha.. pustake nāsti 3 yo yāvadityādiḥ, taddviguṇaṃ damamityantaḥ pāṭhaḥ jha.. pustake nāsti :p 323 vastrādikasya dharmajña tathā dharmo na hīyate / yo nikṣepaṃ ghātayati yaścānikṣipya yācate

हिन्दी अर्थ

यदि सेनाकी छावनीके दाहिने भागमें कुत्ते आ जायँ तो वे ब्राह्मणोंके विनाशको सूचना देते हैं। इन्द्रध्वजके स्थानमें हों तो राजाका और गोपुर (नगरद्वार) पर हों तो नगराधीशको मृत्यु

English

Of cloth and the like, knower of dharma, so dharma is not diminished. One who has a deposit killed and one who asks without having deposited,

अध्याय 225

श्लोक 10

तावुभौ चौरवच्छास्यौ दण्ड्यौ वा द्विगुणं दम ।अज्ञानाद्यः पुमान् कुर्यात् परद्रव्यस्य विक्रयं

tāvubhau cauravacchāsyau daṇḍyau vā dviguṇaṃ dama / ajñānādyaḥ pumān kuryāt paradravyasya vikrayaṃ

हिन्दी अर्थ

सूचित करते हैं। घरके भीतर भूँकता हुआ कुत्ता आवे तो गृहस्वामीकी मृत्युका कारण होता है। वह जिसके बायें अङ्गको सूँघता है, उसके कार्यको सिद्धि होती है। यदि दाहिने अङ्ग और बायीं भुजाको सूँघे तो भय उपस्थित होता है। यात्रीके

English

both are to be punished like thieves or fined double. A man who through ignorance sells another's goods

अध्याय 225

श्लोक 11

निर्दोषो ज्ञानपूर्वकन्तु चौरवद्दण्डमर्हति(१) ।मूल्यमादाय यः शिल्पं न दद्याद् दण्ड्य एव सः

nirdoṣo jñānapūrvakantu cauravaddaṇḍamarhati(1) / mūlyamādāya yaḥ śilpaṃ na dadyād daṇḍya eva saḥ

हिन्दी अर्थ

सामनेकी ओरसे आवे तो यात्रामें विघ्न डालनेवाला होता है। भृगुनन्दन! यदि कुत्ता राह रोककर खड़ा हो तो मार्गमें चोरोंका भय सूचित करता है; मुँहमें हड्डी लिये हो तो उसे देखकर यात्रा

English

is blameless; but knowingly he deserves thief's punishment. One who takes the price for a craft and does not deliver is punishable;

अध्याय 225

श्लोक 12

प्रतिश्रुत्याप्रदातारं सुवर्णं दण्डयेन्नृपः ।भृतिं गृह्य न कुर्याद्यः कर्माष्टौ कृष्णला दमः

pratiśrutyāpradātāraṃ suvarṇaṃ daṇḍayennṛpaḥ / bhṛtiṃ gṛhya na kuryādyaḥ karmāṣṭau kṛṣṇalā damaḥ

हिन्दी अर्थ

करनेपर कोई लाभ नहीं होता तथा रस्सी या चिथड़ा मुखमें रखनेवाला कुत्ता भी अशुभसूचक होता है। जिसके मुँहमें जूता या मांस हो, ऐसा कुत्ता सामने हो तो शुभ होता है। यदि उसके मुँहमें कोई अमाङ्गलिक वस्तु तथा केश आदि हो तो उससे अशुभकी सूचना मिलती है। कुत्ता जिसके आगे पेशाब करके चला जाता है, उसके ऊपर भय आता है; किन्तु मूत्र त्यागकर यदि वह

English

the king should fine one who promises and does not give a suvarna. One who takes wages and does not do the work: eight krishnalas is the fine;

अध्याय 225

श्लोक 13

अकाले तु त्यजन् भृत्यं दण्ड्यः स्यात्तावदेव तु ।क्रीत्वा विक्रीय वा किञ्चिद्यस्येहानुशयो भवेत्

akāle tu tyajan bhṛtyaṃ daṇḍyaḥ syāttāvadeva tu / krītvā vikrīya vā kiñcidyasyehānuśayo bhavet

हिन्दी अर्थ

किसी शुभ स्थान, शुभ वृक्ष तथा माङ्गलिक वस्तुके समीप चला जाय तो वह उस पुरुषके कार्यका साधक होता है। परशुरामजी! कुत्तेकी ही भाँति गीदड़ आदि भी समझने चाहिए॥ १४--२०॥

English

one who dismisses a servant out of time is fined the same amount. If one regrets having bought or sold anything here,

अध्याय 225

श्लोक 14

सो ऽन्तर्दशाहात्तत्स्वामी दद्याच्चैवाददीत च ।परेण तु दशाहस्य नादद्यान्नैव दापयेत्

so 'ntardaśāhāttatsvāmī dadyāccaivādadīta ca / pareṇa tu daśāhasya nādadyānnaiva dāpayet

हिन्दी अर्थ

यदि गौएँ अकारण ही डकराने लगें तो समझना चाहिए कि स्वामीके ऊपर भय आनेवाला है। रातमें उनके बोलनेसे चोरोंका भय सूचित होता है और यदि वे विकृत स्वरमें क्रन्दन करें तो मृत्युकी सूचना मिलती है। यदि रातमें बैल गर्जना करे तो स्वामीका कल्याण होता है और साँड आवाज दे तो राजाको विजय प्रदान करता है। यदि अपनी

English

within ten days the owner should give back and take it; after ten days one neither takes nor makes to give.

अध्याय 225

श्लोक 15

आददद्धि ददच्चैव राज्ञा दण्ड्यः शतानि षट् ।वरे दोषानविख्याप्य यः कन्यां वरयेदिह(२)

ādadaddhi dadaccaiva rājñā daṇḍyaḥ śatāni ṣaṭ / vare doṣānavikhyāpya yaḥ kanyāṃ varayediha(2)

हिन्दी अर्थ

अभक्ष्य-भक्षण करें और अपने बछड़ोंपर भी स्नेह करना छोड़ दें तो गर्भक्षयकी सूचना देनेवाली मानी गयी हैं। पैरोसे भूमि खोदनेवाली, दीन तथा भयभीत गौएँ भय लानेवाली होती हैं। जिनका

English

One who takes and gives back is fined six hundred by the king. One who here betroths a maiden without disclosing the groom's faults,

अध्याय 225

श्लोक 16

दत्ताप्यदत्ता सा तस्य राज्ञा दण्ड्यः शतद्वयं ।प्रदाय कन्यां यो ऽन्यस्मै पुनस्तां सम्प्रयच्छति

dattāpyadattā sā tasya rājñā daṇḍyaḥ śatadvayaṃ / pradāya kanyāṃ yo 'nyasmai punastāṃ samprayacchati

हिन्दी अर्थ

शरीर भीगा हो, रोम-रोम प्रसन्नतासे खिला हो और सींगोंमें मिट्टी लगी हुई हो, वे गौएँ शुभ होती हैं। विज्ञ पुरुषको भैंस आदिके सम्बन्धमें भी यही सब शकुन बताना चाहिए जीन कसे हुए अपने घोड़ेपर दूसरेका चढ्ना, उस घोड़ेका जलमें बैठना और भूमिपर एक ही

English

she, though given, is not given; the king should fine him two hundred. One who having given a maiden to another gives her again,

अध्याय 225

श्लोक 17

दण्डः कार्यो नरेन्द्रेण तस्याप्युत्तमसाहसः ।सत्यङ्कारेण वाचा च युक्तं पुण्यमसंशयं

daṇḍaḥ kāryo narendreṇa tasyāpyuttamasāhasaḥ / satyaṅkāreṇa vācā ca yuktaṃ puṇyamasaṃśayaṃ

हिन्दी अर्थ

जगह चक्कर लगाना अनिष्टका सूचक है। बिना किसी कारणके घोड़ेका सो जाना विपत्तिमें डालनेवाला होता है। यदि अकस्मात् जई और गुड़को ओरसे घोड़ेको अरुचि हो जाय, उसके

English

the king should impose on him the highest fine. Merit joined with truthful speech and word is without doubt.

अध्याय 225

श्लोक 18

लुब्धो ऽन्यत्र च विक्रेता षट्शतं दण्डमर्हति ।दद्याद्धेनुं न यः पालो गृहीत्वा भक्तवेतनं

lubdho 'nyatra ca vikretā ṣaṭśataṃ daṇḍamarhati / dadyāddhenuṃ na yaḥ pālo gṛhītvā bhaktavetanaṃ

हिन्दी अर्थ

मुँहसे खून गिरने लगे तथा उसका सारा बदन काँपने लगे तो ये सब अच्छे लक्षण नहीं हैं; इनसे अशुभकी सूचना मिलती है। यदि घोड़ा बगुलों, कबूतरों और सारिकाओंसे खिलवाड़ करे तो मृत्युका संदेश देता है। उसके नेत्रोंसे आँसू बहे तथा वह जीभसे अपना पैर चाटने लगे तो विनाशका सूचक होता है। यदि वह बायें टापसे धरती खोदे, बायीं करवटसे सोये अथवा

English

A greedy seller elsewhere deserves a six-hundred fine. A herdsman who takes food and wages and does not tend the cow

अध्याय 225

श्लोक 19

स तु दण्ड्यः शतं राज्ञा सुवर्णं वाप्यरक्षिता ।१ चौरवद्वधमर्हतोति घ॥ , ञ॥ च २ वरयेद्यदि इति घ॥ , ञ॥ च :प् ३२४ धनुःशतं परीणाहो ग्रामस्य तु समन्ततः

sa tu daṇḍyaḥ śataṃ rājñā suvarṇaṃ vāpyarakṣitā / 1 cauravadvadhamarhatoti gha.. , ña.. ca 2 varayedyadi iti gha.. , ña.. ca :p 324 dhanuḥśataṃ parīṇāho grāmasya tu samantataḥ

हिन्दी अर्थ

दिनमें नींद ले तो शुभकारक नहीं माना जाता। जो घोड़ा एक बार मूत्र करनेवाला हो, अर्थात् जिसका मूत्र एक बार थोड़ा-सा निकलकर फिर रुक जाय तथा निद्राके कारण जिसका मुँह मलिन हो

English

is fined a hundred by the king, or a suvarna, if unguarded. A hundred bows is the surrounding circumference of a village all around;

अध्याय 225

श्लोक 20

द्विगुणं त्रिगुणं वापि नगरस्य च कल्पयेत् ।वृतिं तत्र प्रकुर्वीत यामुष्ट्रो नावलोकयेत्

dviguṇaṃ triguṇaṃ vāpi nagarasya ca kalpayet / vṛtiṃ tatra prakurvīta yāmuṣṭro nāvalokayet

हिन्दी अर्थ

रहा हो, वह भय उपस्थित करनेवाला होता है। यदि वह चढ्ने न दे अथवा चढते समय उलटे घरमें चला जाय या सवारको बायीं पसलीका स्पर्श करने लगे तो वह यात्रामें विघ्न पड्नेकी सूचना देता है। यदि शत्रु-योद्धाको देखकर हींसने लगे और स्वामीके चरणोंका स्पर्श करे तो वह विजय दिलानेवाला होता है

English

twice or thrice for a town. One should make a fence there that a camel cannot see over;

अध्याय 225

श्लोक 21

तत्रापरिवृते धान्ये हिंसिते नैव दण्डनं ।गृहन्तडागमारामं क्षेत्रं वा भीषया हरन्

tatrāparivṛte dhānye hiṃsite naiva daṇḍanaṃ / gṛhantaḍāgamārāmaṃ kṣetraṃ vā bhīṣayā haran

हिन्दी अर्थ

यदि हाथी गाँवमें मैथुन करे तो उस देशके लिये हानिकारक होता है। हथिनी गाँवमें बच्चा दे या पागल हो जाय तो राजाके विनाशकी सूचना देती है। यदि हाथी चढ़ने न दे, उलटे हथिसारमें

English

where grain is unfenced and damaged there is no fine. One who seizes a house, tank, garden or field by threat

अध्याय 225

श्लोक 22

शतानि पञ्च दण्ड्याः स्यादज्ञानाद् द्विशतो दमः ।मर्यादाभेदकाः सर्वे दण्ड्याः प्रथमसाहसं

śatāni pañca daṇḍyāḥ syādajñānād dviśato damaḥ / maryādābhedakāḥ sarve daṇḍyāḥ prathamasāhasaṃ

हिन्दी अर्थ

चला जाय या मदको धारा बहाने लगे तो वह राजाका घातक होता है। यदि दाहिने पैरको बायेंपर रखे और सूँड्से दाहिने दाँतका मार्जन करे तो वह शुभ होता है अपना बैल, घोड़ा अथवा हाथी शत्रुकी सेनामें चला जाय तो अशुभ होता है। यदि थोड़ी ही दूरमें बादल घिरकर अधिक वर्षा करे तो सेनाका

English

is to be fined five hundred; through ignorance, two hundred. All breakers of boundaries are to be fined, the first-degree offence.

अध्याय 225

श्लोक 23

शतं ब्राह्मणमाक्रुश्य क्षत्रियो दण्डमर्हति ।वैश्यश् च द्विशतं राम शूद्रश् च बधमर्हति

śataṃ brāhmaṇamākruśya kṣatriyo daṇḍamarhati / vaiśyaś ca dviśataṃ rāma śūdraś ca badhamarhati

हिन्दी अर्थ

नाश होता है। यात्राके समय अथवा युद्धकालमें है। यदि कौए और मांसाहारी जीव-जन्तु योद्धाओंका ग्रह और नक्षत्र प्रतिकूल हों, सामनेसे हवा आ तिरस्कार करें तो मण्डलका नाश होता है।

English

A Kshatriya who abuses a Brahmin deserves a hundred fine; a Vaishya two hundred, Rama; a Shudra deserves death.

अध्याय 225

श्लोक 24

पञ्चाशद्ब्राह्मणो दण्ड्यः क्षत्रियस्याभिशंसने ।वैश्ये वाप्यर्धपञ्चाशच्छूद्रे द्वादशको दमः

pañcāśadbrāhmaṇo daṇḍyaḥ kṣatriyasyābhiśaṃsane / vaiśye vāpyardhapañcāśacchūdre dvādaśako damaḥ

हिन्दी अर्थ

होता है। लड़नेवाले योद्धा हर्ष और उत्साहमें भरे हों तो प्रिय और शुभ फलकी प्राप्ति करानेवाली हों और ग्रह अनुकूल हों तो यह विजयका लक्षण होती हैं॥ ३५--३७॥ इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराणे 'शकुन-वर्णन” नामक दो सौ बत्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

A Brahmin who accuses a Kshatriya is fined fifty; for a Vaishya half of fifty; for a Shudra twelve is the fine.

अध्याय 225

श्लोक 25

क्षत्रियस्याप्नुयाद्वैश्यः साहसं पूर्वमेव तु ।शूद्रः क्षत्रियमाक्रुश्य जिह्वाच्छेदनमाप्नुयात्

kṣatriyasyāpnuyādvaiśyaḥ sāhasaṃ pūrvameva tu / śūdraḥ kṣatriyamākruśya jihvācchedanamāpnuyāt

हिन्दी अर्थ

यात्राके मुहूर्त और द्वादश राजमण्डलका विचार

English

A Vaishya gets the Kshatriya's offence as before; a Shudra who abuses a Kshatriya gets his tongue cut.

अध्याय 225

श्लोक 26

धर्मोपदेशं विप्राणां शूद्रः कुर्वंश् च दण्डभाक् ।श्रुतदेशादिवितथी दाप्यो द्विगुणसाहसं

dharmopadeśaṃ viprāṇāṃ śūdraḥ kurvaṃś ca daṇḍabhāk / śrutadeśādivitathī dāpyo dviguṇasāhasaṃ

हिन्दी अर्थ

पुष्कर कहते हैं- अब मैं राजधर्मका आश्रय लेकर सबकी यात्राके विषयमें बताऊँगा। जब शुक्र अस्त हों अथवा नीच स्थानमें स्थित हों, अथवा वे प्रतिकूल स्थानमें स्थित या विध्वस्त हों तो यात्रा नहीं करनी चाहिए। बुध प्रतिकूल स्थानमें स्थित हों तथा दिशाका स्वामी ग्रह भी प्रतिकूल हो तो यात्रा नहीं करनी चाहिए। वैधृति, व्यतीपात,

English

A Shudra giving dharma instruction to Brahmins is liable to punishment; one who falsifies learning, country and the like should be fined double.

अध्याय 225

श्लोक 27

उत्तमः साहसस्तस्य यः पापैर् उत्तमान् क्षिपेत् ।प्रमादाद्यैर् मया प्रोक्तं प्रीत्या दण्डार्धमर्हति

uttamaḥ sāhasastasya yaḥ pāpair uttamān kṣipet / pramādādyair mayā proktaṃ prītyā daṇḍārdhamarhati

हिन्दी अर्थ

नाग, शकुनि, चतुष्पाद तथा किंस्तुघ्नयोगमें भी यात्राका परित्याग कर देना चाहिए। विपत्, मृत्यु, प्रत्यरि और जन्म--इन ताराओंमें, गण्डयोगमें तथा रिक्ता तिथिमें भी यात्रा न करे

English

The highest offence is his who casts the worthy down with sins. What I said through heedlessness and the like deserves half the fine by affection.

अध्याय 225

श्लोक 28

मातरं पितरं ज्येष्ठं भ्रातरं श्वशुरं गुरुं ।आक्षारयञ्च्छतं दण्ड्यः पन्थानं चाददद्गुरोः

mātaraṃ pitaraṃ jyeṣṭhaṃ bhrātaraṃ śvaśuraṃ guruṃ / ākṣārayañcchataṃ daṇḍyaḥ panthānaṃ cādadadguroḥ

हिन्दी अर्थ

उत्तर और पूर्व --इन दोनों दिशाओंकी एकता कही गयी है। इसी तरह पश्चिम और दक्षिण- इन दोनों दिशाओंकी भी एकता मानी गयी है। वायव्यकोणसे लेकर अग्निकोणतक जो परिघ- दण्ड रहता है, उसका उल्लङ्घन करके यात्रा नहीं करनी चाहिए। रवि, सोम और शनैश्वर--ये दिन यात्राके लिये अच्छे नहीं माने गये हैं

English

One who curses mother, father, elder brother, brother, father-in-law or teacher is fined a hundred, and one who does not yield the way to a teacher;

अध्याय 225

श्लोक 29

अन्त्यजातिर्द्विजातिन्तु येनाङ्गेनापराध्नुयात् ।तदेव च्छेदयेत्तस्य क्षिप्रमेवाविचारयन्

antyajātirdvijātintu yenāṅgenāparādhnuyāt / tadeva cchedayettasya kṣipramevāvicārayan

हिन्दी अर्थ

कृत्तिकासे लेकर सात नक्षत्रसमूह पूर्व दिशामें रहते हैं। मघा आदि सात नक्षत्र दक्षिण दिशामें रहते हैं, अनुराधा आदि सात नक्षत्र पश्चिम दिशामें रहते हैं तथा धनिष्ठा आदि सात नक्षत्र उत्तर

English

with whatever limb a low-caste man offends a twice-born, that very limb should be cut off at once without deliberation.

अध्याय 225

श्लोक 30

अवनिष्ठीवतो दर्पाद् द्वावोष्ठौ छेदयेन्नृपः ।अपमूत्रयतो मेढ्रमपशब्दयतो गुदं

avaniṣṭhīvato darpād dvāvoṣṭhau chedayennṛpaḥ / apamūtrayato meḍhramapaśabdayato gudaṃ

हिन्दी अर्थ

दिशामें रहते हैं। (अग्निकोणसे वायुकोणतक परिघ- दण्ड रहा करता है; अतः इस प्रकार यात्रा करनी चाहिए, जिससे परिघ-दण्डका उल्लङ्घन न हो।) पूर्वोक्त नक्षत्र उन-उन दिशाओंके द्वार हैं; सभी द्वार उन-उन दिशाओंके लिये उत्तम हैं। अब मैं तुम्हें छायाका मान बताता हूँ॥ ७ ३॥ रविवारको बीस, सोमवारको सोलह,

English

For spitting from arrogance the king should cut both lips; for urinating at him the organ; for breaking wind the anus;

अध्याय 225

श्लोक 31

उत्कृष्टासनसंस्थस्य नीचस्याधोनिकृन्तनं ।यो यदङ्गं च रुजयेत्तदङ्गन्तस्य कर्तयेत्

utkṛṣṭāsanasaṃsthasya nīcasyādhonikṛntanaṃ / yo yadaṅgaṃ ca rujayettadaṅgantasya kartayet

हिन्दी अर्थ

पूर्व नक्षत्रमें पश्चिम या दक्षिण जानेसे परिघदण्डका लङ्कन होगा।

English

for a low man seated on a high seat, cutting below; whoever injures a limb, that limb of his should be cut.

अध्याय 225

श्लोक 32

अर्धपादकराः कार्या गोगजाश्वोष्ट्रघातकाः ।वृक्षन्तु विफलं कृत्त्वा सुवर्णं दण्डमर्हति

ardhapādakarāḥ kāryā gogajāśvoṣṭraghātakāḥ / vṛkṣantu viphalaṃ kṛttvā suvarṇaṃ daṇḍamarhati

हिन्दी अर्थ

श्रवण, अभिजित्, उत्तराषाढ्, पूर्वाषाढ़, मूल, ज्येष्ठा, अनुराधा मङ्गलवारको पंद्रह, बुधको चौदह, बृहस्पतिको तेरह, शुक्रको बारह तथा शनिवारको ग्यारह अङ्गुल ' छायामान' कहा गया है, जो सभी कर्मोके लिये विहित है। जन्म-लग्रमें तथा सामने इन्द्रधनुष

English

Killers of cows, elephants, horses and camels should have half the hand and foot (cut); one who makes a tree fruitless deserves a fine of a suvarna;

अध्याय 225

श्लोक 33

द्विगुणं दापयेच्छिन्ने पथि सीम्नि जलाशये ।द्रव्याणि यो हरेद्यस्य ज्ञानतो ऽज्ञानतो ऽपिवा

dviguṇaṃ dāpayecchinne pathi sīmni jalāśaye / dravyāṇi yo haredyasya jñānato 'jñānato 'pivā

हिन्दी अर्थ

उदित हुआ हो तो मनुष्य यात्रा न करे। शुभ शकुन आदि होनेपर श्रीहरिका स्मरण करते हुए विजययात्रा करनी चाहिए

English

for a cut road, boundary or reservoir he should have double paid. One who takes another's goods, knowingly or unknowingly,

अध्याय 225

श्लोक 34

स तस्योत्पाद्य तुष्टिन्तु राज्ञे दद्यात्ततो दमं ।यस्तु रज्जुं घटं कूपाद्धरेच्छिन्द्याच्च तां प्रपां

sa tasyotpādya tuṣṭintu rājñe dadyāttato damaṃ / yastu rajjuṃ ghaṭaṃ kūpāddharecchindyācca tāṃ prapāṃ

हिन्दी अर्थ

परशुरामजी! अब मैं आपसे मण्डलका विचार बतलाऊँगा; राजाकी सब प्रकारसे रक्षा करनी चाहिए। राजा, मन्त्री, दुर्ग, कोष, दण्ड, मित्र और जनपद-ये राज्यके सात अङ्ग बतलाये जाते हैं। इन सात अङ्गोंसे युक्त राज्यमें विघ्न डालनेवाले पुरुषोंका विनाश करना चाहिए। राजाको उचित है कि अपने सभी मण्डलोंमें वृद्धि करे। अपना मण्डल ही यहाँ सबसे पहला मण्डल है।

English

should first satisfy the owner and then pay the fine to the king. One who steals a rope or pot from a well or breaks that water-shed

अध्याय 225

श्लोक 35

स दण्डं प्राप्नुयान् मासं दण्ड्यः स्यात् प्राणिता।रने ।धान्यं दशभ्यः कुम्भेभ्यो हरतो ऽभ्यधिकं बधः

sa daṇḍaṃ prāpnuyān māsaṃ daṇḍyaḥ syāt prāṇitā.rane / dhānyaṃ daśabhyaḥ kumbhebhyo harato 'bhyadhikaṃ badhaḥ

हिन्दी अर्थ

सामन्त-नरेशोंको ही उस मण्डलका शत्रु जानना चाहिए। 'विजिगीषु' राजाके सामनेका सीमावर्ती सामन्त उसका शत्रु है। उस शत्रु-राज्यसे जिसकी सीमा लगी है, वह उक्त शत्रुका शत्रु होनेसे

English

obtains a month's fine, and is punishable on the life-taking road. For one who takes grain beyond ten pots, death;

अध्याय 225

श्लोक 36

शेषे ऽप्येकादशगुणं तस्य दण्डं प्रकल्पयेत् ।सुवर्णरजतादीनां नृस्त्रीणां हरणे बधः

śeṣe 'pyekādaśaguṇaṃ tasya daṇḍaṃ prakalpayet / suvarṇarajatādīnāṃ nṛstrīṇāṃ haraṇe badhaḥ

हिन्दी अर्थ

विजिगीषुका मित्र है। इस प्रकार शत्रु, मित्र, मण्डलके आगे रहनेवाले हैं। इनका वर्णन किया गया; अब पीछे रहनेवालोंको बताता हूँ; सुनिये

English

for the rest an eleven-fold fine should be set. For stealing gold, silver and the like, men or women, death;

अध्याय 225

श्लोक 37

येन येन यथाङ्गेन स्तेनो नृषु विचेष्टते ।तत्तदेव हरेदस्य् प्रत्यादेशाय पार्थिवः

yena yena yathāṅgena steno nṛṣu viceṣṭate / tattadeva haredasy pratyādeśāya pārthivaḥ

हिन्दी अर्थ

पीछे रहनेवालोंमें पहला “पार्ष्णिग्राह है और उसके पीछे रहनेवाला 'आक्रन्द' कहलाता है। तदनन्तर इन दोनोंके पीछे रहनेवाले ' आसार' होते हैं, जिन्हें क्रमशः ' पार्ष्णिग्राहासार' और

English

with whatever limb the thief acts among men, that very limb the king should remove, as a retribution.

अध्याय 225

श्लोक 38

ब्राह्मणः शाकधान्यादि अल्पं गृह्णन्न दोषभाक् ।गोदेवार्थं हरंश्चापि हन्याद्दुष्टं बधीद्यतं

brāhmaṇaḥ śākadhānyādi alpaṃ gṛhṇanna doṣabhāk / godevārthaṃ haraṃścāpi hanyādduṣṭaṃ badhīdyataṃ

हिन्दी अर्थ

' आक्रन्दासार' कहते हैं । नरश्रेष्ठ! विजयकी इच्छा रखनेवाला राजा, शत्रुके आक्रमणसे युक्त हो अथवा उससे मुक्त, उसकी विजयके सम्बन्धमें कुछ निश्चयपूर्वक नहीं कहा जा सकता। विजिगीषु तथा शत्रु दोनोंके असंगठित रहनेपर उनका निग्रह और अनुग्रह करनेमें समर्थ तटस्थ राजा 'मध्यस्थ' कहलाता है। जो बलवान् नरेश इन तीनोंके निग्रह

English

A Brahmin taking a small amount of vegetables, grain and the like is not at fault; even if taking for a cow or god, one should kill an evil one raising a weapon to kill,

अध्याय 225

श्लोक 39

गृहक्षेत्रापहर्तारं तथा पत्न्यभिगामिनं ।अग्निदं गरदं हन्यात्तथा चाभ्युद्यतायुधं

gṛhakṣetrāpahartāraṃ tathā patnyabhigāminaṃ / agnidaṃ garadaṃ hanyāttathā cābhyudyatāyudhaṃ

हिन्दी अर्थ

और अनुग्रहमें समर्थ हो, उसे 'उदासीन' कहते हैं। कोई भी किसीका शत्रु या मित्र नहीं है; सभी कारणवश ही एक-दूसरेके शत्रु और मित्र होते हैं। इस प्रकार मैंने आपसे यह बारह राजाओंके

English

one who takes a house or field, likewise one who goes to another's wife; one should kill an arsonist, a poisoner, and one with raised weapon.

अध्याय 225

श्लोक 40

राजा गवाभिचाराद्यं हन्याच्चैवाततायिनः ।परस्त्रियं न भाषेत प्रतिषिद्धो विशेन्न हि

rājā gavābhicārādyaṃ hanyāccaivātatāyinaḥ / parastriyaṃ na bhāṣeta pratiṣiddho viśenna hi

हिन्दी अर्थ

मण्डलका वर्णन किया है शत्रुओंके तीन भेद जानने चाहिए-कुल्य, अनन्तर और कृत्रिम। इनमें पूर्व-पूर्व शत्रु भारी होता है। अर्थात् ' कृत्रिम'की अपेक्षा ' अनन्तर' और उसकी अपेक्षा 'कुल्य' शत्रु बड़ा माना गया

English

The king should kill those who commit cow-related offences and the aggressors. One should not speak to another's wife; if forbidden he must not enter.

अध्याय 225

श्लोक 41

अदण्ड्या स्त्री भवेद्राज्ञा वरयन्तो पतिं स्वयं ।उत्तमां सेवमानः स्त्री जघन्यो बधमर्हति

adaṇḍyā strī bhavedrājñā varayanto patiṃ svayaṃ / uttamāṃ sevamānaḥ strī jaghanyo badhamarhati

हिन्दी अर्थ

है; उसको दबाना बहुत कठिन होता है। ' अनन्तर' (सौमाप्रान्तवर्ती) शत्रु भी मेरी समझमें ' कृत्रिम ' ही है। पार्ष्णिग्राह राजा शत्रुका मित्र होता है; तथापि प्रयत्रसे वह शत्रुका शत्रु भी हो सकता है।

English

A woman is not to be punished by the king when she herself chooses a husband; a woman serving a higher man; a lower man deserves death.

अध्याय 225

श्लोक 42

भर्तारं लङ्घयेद्या तां श्वभिः सङ्घातयेत् स्त्रियं ।सवर्णदूषितां कुर्यात् पिण्डमात्रोपजीविनीं

bhartāraṃ laṅghayedyā tāṃ śvabhiḥ saṅghātayet striyaṃ / savarṇadūṣitāṃ kuryāt piṇḍamātropajīvinīṃ

हिन्दी अर्थ

इसलिये नाना प्रकारके उपायोंद्वारा अपने पार्ष्णिग्राहको शान्त रखे उसे अपने वशमें किये रहे। प्राचीन नीतिज्ञ पुरुष मित्रके द्वारा शत्रुको नष्ट करा डालनेकी प्रशंसा करते हैं । सामन्त (सीमा-निवासी) होनेके कारण मित्र भी आगे चलकर शत्रु हो जाता है; अतः विजय चाहनेवाले राजाको उचित है कि यदि अपनेमें शक्ति हो तो स्वयं ही शत्रुका विनाश करे; (मित्रकी सहायता न ले) क्योंकि

English

A woman who transgresses her husband, the king should have her torn by dogs; one defiled by one of equal caste he should make live on a lump of food only;

अध्याय 225

श्लोक 43

ज्यायसा दूषिता नारी मुण्डनं समवाप्नुयात् ।वैश्यागमे तु विप्रस्य क्षत्रियस्यान्त्यजागमे

jyāyasā dūṣitā nārī muṇḍanaṃ samavāpnuyāt / vaiśyāgame tu viprasya kṣatriyasyāntyajāgame

हिन्दी अर्थ

मित्रका प्रताप बढ़ जानेपर उससे भी भय प्राप्त होता है और प्रतापहीन शत्रुसे भी भय नहीं होता। विजिगीषु राजाको धर्मविजयी होना चाहिए तथा वह लोगोंको इस प्रकार अपने वशमें करे,

English

a woman defiled by a superior should get head-shaving. For a Brahmin going to a Vaishya woman, for a Kshatriya going to a low-caste woman,

अध्याय 225

श्लोक 44

क्षत्रियः प्रथमं वैश्यो दण्ड्यः शूद्रागमे भवेत् ।गृहीत्वा वेतनं वेश्या लोभादन्यत्र गच्छति

kṣatriyaḥ prathamaṃ vaiśyo daṇḍyaḥ śūdrāgame bhavet / gṛhītvā vetanaṃ veśyā lobhādanyatra gacchati

हिन्दी अर्थ

जिससे किसीको उद्वेग न हो और सबका उसपर इस प्रकार आदि आग्नेय महापृराणमें “यात्रामण्डलचिन्ता आदिका कथन” नामक दो सौ तैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

a Kshatriya should be fined first-degree; a Vaishya going to a Shudra woman likewise. A courtesan who, having taken her fee, goes elsewhere from greed

अध्याय 225

श्लोक 45

वेतनन्द्विगुणं दद्याद्दण्दञ्च द्विगुणं तथा ।भार्या पुत्राश् च दासाश् च शिष्यो भ्राता च सोदरः

vetanandviguṇaṃ dadyāddaṇdañca dviguṇaṃ tathā / bhāryā putrāś ca dāsāś ca śiṣyo bhrātā ca sodaraḥ

हिन्दी अर्थ

दण्ड, उपेक्षा, माया और साम आदि नीतियोंका उपयोग

English

should pay double the fee and double the fine. Wife, sons, servants, pupil and uterine brother

अध्याय 225

श्लोक 46

कृटापराधास्ताड्याः सूरज्वा वेणुदलेन वा ।पृष्ठे न मस्तके हन्याच्चौरस्याप्नोति किल्विषं

kṛṭāparādhāstāḍyāḥ sūrajvā veṇudalena vā / pṛṣṭhe na mastake hanyāccaurasyāpnoti kilviṣaṃ

हिन्दी अर्थ

पुष्कर कहते हैं- परशुरामजी! साम, भेद, दान और दण्डको चर्चा हो चुकी है और अपने राज्यमें दण्डका प्रयोग कैसे करना चाहिए ?-- यह बात भी बतलायी जा चुकी है। अब शत्रुके देशमें इन चारों उपायोंके उपयोगका प्रकार बतला रहा हूँ

English

who commit offences should be beaten with a rope or bamboo split on the back, not on the head; otherwise one gets a thief's guilt.

अध्याय 225

श्लोक 47

रक्षास्वधिकृतैयस्तु प्रजात्यर्थं विलुप्यते ।तेषां सर्वस्वमादाय राजा कुर्यात् प्रवासनं

rakṣāsvadhikṛtaiyastu prajātyarthaṃ vilupyate / teṣāṃ sarvasvamādāya rājā kuryāt pravāsanaṃ

हिन्दी अर्थ

'गुप्त' और 'प्रकाश'-दो प्रकारका दण्ड कहा गया है। लूटना, गाँवको गर्दमें मिला देना, खेती नष्ट कर डालना और आग लगा देना ये “प्रकाश दण्ड' हैं। जहर देना, चुपकेसे आग

English

Those appointed to protection who plunder the subjects — the king should take all their property and banish them.

अध्याय 225

श्लोक 48

ये नियुक्ताः स्वकार्येषु हन्युः कार्याणि कर्मिणां ।निर्घृणाः क्रूरमनसस्तान्निःस्वान् कारयेन्नृपः

ye niyuktāḥ svakāryeṣu hanyuḥ kāryāṇi karmiṇāṃ / nirghṛṇāḥ krūramanasastānniḥsvān kārayennṛpaḥ

हिन्दी अर्थ

लगाना, नाना प्रकारके मनुष्योंके द्वारा किसीका वध करा देना, सत्पुरुषोंपर दोष लगाना और पानीको दूषित करना -ये ' गुप्त दण्ड' हैं भृगुनन्दन! यह दण्डका प्रयोग बताया गया; अब 'उपेक्षा'की बात सुनिये-जब राजा ऐसा समझे कि युद्भमें मेरा किसीके साथ वैर-विरोध नहीं है, व्यर्थका लगाव अनर्थका ही कारण

English

Those appointed to their own tasks who destroy the tasks of workers, cruel and hard-hearted — the king should make them destitute.

अध्याय 225

श्लोक 49

अमात्यः प्राड्विवाको वा यः कुर्यात् कार्यमन्यथा ।तस्य सर्वस्वमादाय तं राजा विप्रवासयेत्

amātyaḥ prāḍvivāko vā yaḥ kuryāt kāryamanyathā / tasya sarvasvamādāya taṃ rājā vipravāsayet

हिन्दी अर्थ

होगा; संधिका परिणाम भी ऐसा ही (अनर्थकारी) होनेवाला है; सामका प्रयोग यहाँ किया गया, किंतु लाभ न हुआ; दानको नीतिसे भी केवल धनका क्षय ही होगा तथा भेद और दण्डके सम्बन्धसे

English

A minister or judge who does a case otherwise — the king should take all his property and expel him.

अध्याय 225

श्लोक 50

गुरुतल्पे भयः कार्यः सुरापाणे सुराध्वजः ।स्तेयेषु श्वपदं विद्याद् ब्रह्महत्याशिरः पुमान्

gurutalpe bhayaḥ kāryaḥ surāpāṇe surādhvajaḥ / steyeṣu śvapadaṃ vidyād brahmahatyāśiraḥ pumān

हिन्दी अर्थ

भी कोई लाभ नहीं है; उस दशामें 'उपेक्षा'का आश्रय ले (अर्थात् संधि-विग्रहसे अलग हो जाय) । जानेपर भी मेरी कोई हानि नहीं कर सकता तथा मैं भी इस समय इसका कुछ बिगाड़ नहीं सकता, उस समय 'उपेक्षा' कर जाय। उस अवस्थामें राजाको उचित है कि वह अपने शत्रुको अवज्ञा

English

For the teacher's bed a brand of the organ; for drinking liquor a liquor-banner; for thefts know the dog's foot; for Brahmin-killing a headless man.

अध्याय 225

श्लोक 51

शूद्रादीन् घातयेद्राजा पापान् विप्रान् प्रवासयेत् ।महापातकिनां वित्तं वरुणायोपपादयेत्

śūdrādīn ghātayedrājā pāpān viprān pravāsayet / mahāpātakināṃ vittaṃ varuṇāyopapādayet

हिन्दी अर्थ

(उपेक्षा)-से ही उपहत करे

English

The king should kill Shudras and others who sin, but expel Brahmins. The wealth of the great sinners should be given to Varuna.

अध्याय 225

श्लोक 52

ग्रामेष्वपि च ये केचिच्चौराणां भक्तदायकाः ।भाण्डारकोषदाश् चैव सर्वांस्तानपि घातयेत्

grāmeṣvapi ca ye keciccaurāṇāṃ bhaktadāyakāḥ / bhāṇḍārakoṣadāś caiva sarvāṃstānapi ghātayet

हिन्दी अर्थ

अब मायामय (कपटपूर्ण) उपायोंका वर्णन करूँगा । राजा झूठे उत्पातोंका प्रदर्शन करके शत्रुको उद्ठेगमें डाले। शत्रुकी छावनीमें रहनेवाले स्थूल पक्षीको पकड़कर उसकी पूँछमें जलता हुआ लूक बाँध दे; वह लूक बहुत बड़ा होना चाहिए । उसे बाँधकर पक्षीको उड़ा दे और इस प्रकार यह दिखावे कि ' शत्रुकी छावनीपर उल्कापात हो

English

Also in villages any who give food to thieves, and who give storehouses and treasuries — one should kill them all too.

अध्याय 225

श्लोक 53

राष्ट्रेषु राष्ट्राधिकृतान् सामन्तान् पापिनो हरेत् ।सन्धिं कृत्वा तु ये चौर्यं रात्रौ कुर्वन्ति तस्कराः

rāṣṭreṣu rāṣṭrādhikṛtān sāmantān pāpino haret / sandhiṃ kṛtvā tu ye cauryaṃ rātrau kurvanti taskarāḥ

हिन्दी अर्थ

रहा है।' इसी प्रकार और भी बहुत-से उत्पात दिखाने चाहिए। भाँति-भाँतिकी माया प्रकट करनेवाले मदारियोंको भेजकर उनके द्वारा शत्रुओंको उद्विग्न करे। ज्यौतिषी और तपस्वी जाकर शत्रुसे

English

In realms, sinful officials and feudatories one should remove. Those thieves who after making a breach commit theft at night,

अध्याय 225

श्लोक 54

तेषां च्छित्वा नृपो हस्तौ तीक्ष्णे शूले निवेशयेत् ।तडागदेवतागारभेदकान् घातयेन्नृपः

teṣāṃ cchitvā nṛpo hastau tīkṣṇe śūle niveśayet / taḍāgadevatāgārabhedakān ghātayennṛpaḥ

हिन्दी अर्थ

कहें कि 'तुम्हारे नाशका योग आया हुआ है।' इस तरह पृथ्वीपर विजय पानेकी इच्छा रखनेवाले राजाको उचित है कि अनेकों उपायोंसे शत्रुको भयभीत करे। शत्रुओंपर यह भी प्रकट करा दे कि 'मुझपर देवताओंकी कृपा है-मुझे उनसे वरदान मिल चुका है।' युद्ध छिड़ जाय तो अपने सैनिकोंसे कहे “वीरो! निर्भय होकर प्रहार करो, मेरे मित्रोंकी सेनाएँ आ पहुँची; अब शत्रुओंके

English

the king should cut off their hands and place them on a sharp stake. The king should kill those who break tanks and temples.

अध्याय 225

श्लोक 55

समुत्सृजेद्राजमार्गे यस्त्वमेध्यमनापदि ।स हि कार्षापणन्दण्ड्यस्तममेध्यञ्च शोधयेत्

samutsṛjedrājamārge yastvamedhyamanāpadi / sa hi kārṣāpaṇandaṇḍyastamamedhyañca śodhayet

हिन्दी अर्थ

पाँव उखड़ गये हैं -वे भाग रहे हैं '--यों कहकर गर्जना करे, किलकारियाँ भरे और योद्धाओंसे कहे --' मेरा शत्रु मारा गया।' देवताओंके आदेशसे वृद्धिको प्राप्त हुआ राजा कवच आदिसे सुसज्जित

English

One who relieves oneself on the royal road without distress is fined a karshapana and must clean the impurity.

अध्याय 225

श्लोक 56

प्रतिमासङ्क्रमभिदो दद्युः पञ्चशतानि ते ।समैश् च विषमं यो वा चरते मूल्यतो ऽपि वा

pratimāsaṅkramabhido dadyuḥ pañcaśatāni te / samaiś ca viṣamaṃ yo vā carate mūlyato 'pi vā

हिन्दी अर्थ

होकर युद्धमें पदार्पण करे॥ ८-१३ ३ ॥ अब 'इन्द्रजाल'के विषयमें कहता हूँ। राजा समयानुसार इन्द्रकी मायाका प्रदर्शन करे । शत्रुओंको दिखावे कि “मेरी सहायताके लिये देवताओंकी चतुरङ्गिणी सेना आ गयी।' फिर शत्रु-सेनापर

English

Those who break images or bridges should pay five hundred. One who deals with unequal for equal or in price too,

अध्याय 225

श्लोक 57

समाप्नुयान्नरः पूर्वं दमं मध्यममेव वा ।द्रव्यमादाय वणिजामनर्घेणावरुन्धतां

samāpnuyānnaraḥ pūrvaṃ damaṃ madhyamameva vā / dravyamādāya vaṇijāmanargheṇāvarundhatāṃ

हिन्दी अर्थ

रक्तकी वर्षा करे और मायाद्वारा यह प्रयत्न करे कि महलके ऊपर शत्रुओंके कटे हुए मस्तक दिखायी दें

English

a man gets the first or the middle fine. Those who take merchants' goods and hold them back at an unfair price,

अध्याय 225

श्लोक 58

राजा पृथक् पृथक् कुर्याद्दण्डमुत्तमसाहसं ।द्रव्याणां दूषको यश् च प्रतिच्छन्दकविक्रयी

rājā pṛthak pṛthak kuryāddaṇḍamuttamasāhasaṃ / dravyāṇāṃ dūṣako yaś ca praticchandakavikrayī

हिन्दी अर्थ

अब मैं छः गुणोंका वर्णन करूँगा; इनमें ‘संधि’ और “विग्रह' प्रधान हैं। संधि, विग्रह, कहे गये हैं। किसी शर्तपर शत्रुके साथ मेल

English

the king should fine separately the highest fine. One who spoils goods and sells imitations

अध्याय 225

श्लोक 59

मध्यमं प्राप्नुयाद्दण्डं कूटकर्ता तथोत्तमं ।कलहापकृतं देयं दण्डश् च द्विगुणस्ततः

madhyamaṃ prāpnuyāddaṇḍaṃ kūṭakartā tathottamaṃ / kalahāpakṛtaṃ deyaṃ daṇḍaś ca dviguṇastataḥ

हिन्दी अर्थ

करना 'संधि' कहलाता है। युद्ध आदिके द्वारा उसे हानि पहुँचाना 'विग्रह' है। विजयाभिलाषी राजा जो शत्रुके ऊपर चढ़ाई करता है, उसीका नाम “यात्रा” अथवा “यान” है। विग्रह छेड़कर

English

gets the middle fine; a forger gets the highest. What is damaged in a quarrel is to be paid and the fine doubled.

अध्याय 225

श्लोक 60

अभक्ष्यभक्ष्ये विप्रे वा शूद्रे वा कृष्णलो दमः ।तुलाशासनकर्ता च कूटकृन्नाशकस्य च

abhakṣyabhakṣye vipre vā śūdre vā kṛṣṇalo damaḥ / tulāśāsanakartā ca kūṭakṛnnāśakasya ca

हिन्दी अर्थ

अपने ही देशमें स्थित रहना 'आसन' कहलाता है। (आधी सेनाको किलेमें छिपाकर) आधी सेनाके साथ युद्धकी यात्रा करना 'द्वैधीभाव' कहा गया है। उदासीन अथवा मध्यम राजाकी शरण लेनेका नाम 'संश्रय' है॥ १६-१९ ३॥

English

For feeding forbidden food to a Brahmin or Shudra the fine is a krishnala. A maker of false weights and decrees and a forger and destroyer

अध्याय 225

श्लोक 61

एभिश् च व्यवहर्ता यः स दाप्यो दममुत्तमं ।विषाग्निदां पतिगुरुविप्रापत्यप्रमापिणीं

ebhiś ca vyavahartā yaḥ sa dāpyo damamuttamaṃ / viṣāgnidāṃ patiguruviprāpatyapramāpiṇīṃ

हिन्दी अर्थ

जो अपनेसे हीन न होकर बराबर या अधिक प्रबल हो, उसीके साथ संधिका विचार करना चाहिए। यदि राजा स्वयं बलवान् हो और शत्रु अपनेसे हीन-निर्बल जान पड़े, तो उसके साथ

English

and one who deals with these should be made to pay the highest fine. A woman who gives poison or fire, or kills husband, teacher, Brahmin or child,

अध्याय 225

श्लोक 62

विकर्णकरनासौष्ठी कृत्वा गोभिः प्रवासयेत् ।क्षेत्रवेश्मग्रामवनविदारकास् तथा नराः

vikarṇakaranāsauṣṭhī kṛtvā gobhiḥ pravāsayet / kṣetraveśmagrāmavanavidārakās tathā narāḥ

हिन्दी अर्थ

विग्रह करना ही उचित है। हीनावस्थामें भी यदि अपना पार्ष्णिग्राह विशुद्ध स्वभावका हो, तभी बलिष्ठ राजाका आश्रय लेना चाहिए। यदि युद्धके लिये यात्रा न करके बैठे रहनेपर भी राजा अपने शत्रुके कार्यका नाश कर सके तो पार्ष्णग्राहका स्वभाव शुद्ध न होनेपर भी वह विग्रह ठानकर चुपचाप बैठा रहे। अथवा

English

having cut ears, hands, nose and lips, should be banished with cows; those who break fields, houses, villages, forests,

अध्याय 225

श्लोक 63

राजपत्न्यभिगामी च दग्धव्यास्तु कटाग्निना ।ऊनं वाप्यधिकं वापि लिखेद्यो राजशासनं

rājapatnyabhigāmī ca dagdhavyāstu kaṭāgninā / ūnaṃ vāpyadhikaṃ vāpi likhedyo rājaśāsanaṃ

हिन्दी अर्थ

पार्णिग्राहका स्वभाव शुद्ध न होनेपर राजा ट्वैधीभाव- नीतिका आश्रय ले। जो निस्संदेह बलवान् राजाके विग्रहका शिकार हो जाय, उसीके लिये संश्रय- नीतिका अवलम्बन उचित माना गया है। यह

English

and one who goes to the king's wife should be burned in a straw fire. One who writes a royal order less or more,

अध्याय 225

श्लोक 64

पारजायिकचौरौ च मुञ्चतो दण्ड उत्तमः ।राजयानासनारोढुर्दण्ड उत्तमसाहसः

pārajāyikacaurau ca muñcato daṇḍa uttamaḥ / rājayānāsanāroḍhurdaṇḍa uttamasāhasaḥ

हिन्दी अर्थ

'संश्रय' साम आदि सभी गुणोंमें अधम है। संश्रयके योग्य अवस्थामें पड़े हुए राजा यदि युद्धकी यात्रा करें तो बह उनके जन और धनका नाश करनेवाली बतायी गयी है। यदि किसीकी शरण लेनेसे पीछे अधिक लाभकी सम्भावना हो तो राजा संश्रयका अवलम्बन करे। सब प्रकारकी शक्तिका नाश हो जानेपर ही दूसरेको शरण लेनी चाहिए

English

and who releases an adulterer or thief, gets the highest fine. One who mounts the king's vehicle or seat gets the highest offence fine.

अध्याय 225

श्लोक 65

यो मन्येताजितो ऽस्मीति न्यायेनापि पराजितः ।तमायान्तं पराजित्य(१) दण्डयेद् द्विगुणं दमं

yo manyetājito 'smīti nyāyenāpi parājitaḥ / tamāyāntaṃ parājitya(1) daṇḍayed dviguṇaṃ damaṃ

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार आदि आग्नेय महापृराणमें 'बाड्गुण्यका वर्णन” नामक दो सौ चौंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

One who thinks "I am not defeated" though defeated by law, having defeated him again as he comes, one should fine double.

अध्याय 225

श्लोक 66

आह्वानकारी बध्यः स्यादनाहूतमथाह्वयन् ।दाण्डिकस्य च यो हस्तादभिमुक्तः पलायते

āhvānakārī badhyaḥ syādanāhūtamathāhvayan / dāṇḍikasya ca yo hastādabhimuktaḥ palāyate

हिन्दी अर्थ

राजाकी नित्यचर्या पुष्कर कहते हैं परशुरामजी! अब निरन्तर किये जाने योग्य कर्मका वर्णन करता हूँ, जिसका प्रतिदिन आचरण करना उचित है। जब दो घड़ी रात बाको रहे तो राजा नाना प्रकारके वाद्यों,

English

A summoner is to be killed if he summons the uninvited; one who flees, released from the officer's hand,

अध्याय 225

श्लोक 67

हीनः पुरुषकारेण तद् दद्याद्दाण्डिको धनं

hīnaḥ puruṣakāreṇa tad dadyāddāṇḍiko dhanaṃ

हिन्दी अर्थ

बन्दीजनोंद्वारा को हुई स्तुतियों तथा मङ्गल-गीतोंकी ध्वनि सुनकर निद्राका परित्याग करे। तत्पश्चात् गूढ़ पुरुषों (गुप्तचरों)-से मिले। वे गुप्तचर ऐसे हों, जिन्हें कोई भी यह न जान सके कि ये

English

lacking manly effort, that wealth the officer should give.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।