Agni Purana
227
अध्याय 227 / 381

Adhyaya 228

32 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ32 श्लोक

अध्याय 227

श्लोक 1

स्वप्नाध्यायः पुष्कर उवाच स्वप्नं शौभाशुभं वक्ष्ये दुःखप्रहरणन्तथा ।नाभिं विनान्यत्र गात्रे तृणवृक्षसमुद्भवः

svapnādhyāyaḥ puṣkara uvāca svapnaṃ śaubhāśubhaṃ vakṣye duḥkhapraharaṇantathā / nābhiṃ vinānyatra gātre tṛṇavṛkṣasamudbhavaḥ

हिन्दी अर्थ

अनन्तर पान खाकर बायीं करवटसे थोड़ी देरतक लेटे। प्रतिदिन शास्त्रोंका चिन्तन और योद्धाओं, अन्न-भण्डार तथा शस्त्रागारका निरीक्षण करे। दिनके अन्तमें सायं-संध्या करके अन्य कार्योका

English

The king should levy a fine of one suvarna for one who promises (to give something) and does not give. One who accepts payment and does not do the work should be levied a fine of eight krsrtalas.

अध्याय 227

श्लोक 2

चूर्णं मूर्ध्नि कांस्यानां मुण्डनं नग्नता तथा ।मलिनाम्बरधारित्वमभ्यङ्गः पङ्कदिग्धता

cūrṇaṃ mūrdhni kāṃsyānāṃ muṇḍanaṃ nagnatā tathā / malināmbaradhāritvamabhyaṅgaḥ paṅkadigdhatā

हिन्दी अर्थ

विचार करे और आवश्यक कामोंपर गुप्तचरोंको भेजकर रात्रिमें भोजनके पश्चात् अन्तःपुरमें जाकर रहे। वहाँ संगीत और वाद्योंसे मनोरञ्जन करके सो जाय तथा दूसरोंके द्वारा आत्मरक्षाका पूरा प्रबन्ध रखे। राजाको प्रतिदिन ऐसा ही करना चाहिए॥ १३--१७॥

English

One who accuses his mother or father or elder brother or father-in-law or the preceptor should be levied a fine of one hundred (panas). (The same punishment should be levied) for obstructing the pathway of the preceptor.

अध्याय 227

श्लोक 3

उच्चात् प्रपतनञ्चैव विवाहो गीतमेव च ।तन्त्रीवाद्यविनोदश् च दोलारोहणमेव च

uccāt prapatanañcaiva vivāho gītameva ca / tantrīvādyavinodaś ca dolārohaṇameva ca

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार आदि आग्रेय महापुराणमें “प्रात्यहिक राजकर्मका कथन” नामक दो सौ पैँतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

One of a lower caste should without enquiry be severed

अध्याय 227

श्लोक 4

अर्जनं पद्मलोहानां सर्पाणामथ मारणं ।१ शरद्यश्चेति ञ॥ , ट॥ च :प् ३३० रक्तपुष्पद्रुमाणाञ्च चण्डालस्य तथैव च

arjanaṃ padmalohānāṃ sarpāṇāmatha māraṇaṃ / 1 śaradyaśceti ña.. , ṭa.. ca :p 330 raktapuṣpadrumāṇāñca caṇḍālasya tathaiva ca

हिन्दी अर्थ

संग्राम-दीक्षा-युद्धके समय पालन करनेयोग्य नियमोंका वर्णन पुष्कर कहते हैं-परशुरामजी! अब मैं रणयात्राकी विधि बतलाते हुए संग्रामकालके लिये उचित कर्तव्योंका वर्णन करूँगा। जब राजाको युद्धयात्रा एक सप्ताहमें होनेवाली हो, उस समय

English

The killers of a cow, elephant, horse or camel should have their legs and hands cut off. One who would make a tree barren deserves the fine of a suiarna.

अध्याय 227

श्लोक 5

वराहाश्वखरोष्ट्राणां तथा चारोहणक्रिया ।भक्षणं पक्षिमांसानां तैलस्य कृशरस्य च(१)

varāhāśvakharoṣṭrāṇāṃ tathā cārohaṇakriyā / bhakṣaṇaṃ pakṣimāṃsānāṃ tailasya kṛśarasya ca(1)

हिन्दी अर्थ

पहले दिन भगवान् विष्णु और शंकरजीको पूजा करनी चाहिए। साथ ही मोदक (मिठाई) आदिके द्वारा गणेशजीका पूजन करना उचित है। दूसरे दिन दिक्पालोंकी पूजा करके राजा शयन करे।

English

The organ with which one would steal from others should be removed by the king for the sake of discipline.

अध्याय 227

श्लोक 6

मातुः प्रवेशो जठरे चितारोहणमेव च ।शक्रध्वजाभिपतनं पतनं शशिसूर्ययोः

mātuḥ praveśo jaṭhare citārohaṇameva ca / śakradhvajābhipatanaṃ patanaṃ śaśisūryayoḥ

हिन्दी अर्थ

शय्यापर बैठकर अथवा उसके पहले देवताओंको पूजा करके निम्नाङ्कित (भाववाले) मन्त्रका स्मरण करे--' भगवान् शिव! आप तीन नेत्रोंसे विभूषित, 'रुद्र'के नामसे प्रसिद्ध, वरदायक, वामन, विकटरूपधारी और स्वप्नके अधिष्ठाता देवता

English

One who seizes the house or field (belonging to another, ) one who copulates with another's wife, one who is an incendiary and one who administers poison should be killed. So also in the case of one who attacks with a drawn weapon.

अध्याय 227

श्लोक 7

दिव्यान्तरीक्षभौमानामुत्पातानाञ्च दर्शनं ।देवद्विजातिभूपानां गुरूणाङ्कोप एव च

divyāntarīkṣabhaumānāmutpātānāñca darśanaṃ / devadvijātibhūpānāṃ gurūṇāṅkopa eva ca

हिन्दी अर्थ

हैं; आपको बारंबार नमस्कार है। भगवन्! आप देवाधिदेवोंके भी स्वामी, त्रिशूलधारी और वृषभपर सवारी करनेवाले हैं। सनातन परमेश्वर! मेरे सो जानेपर स्वप्नमें आप मुझे यह बता दें कि “इस

English

Those who have been employed to do certain work if do not do the work of their employers, the king should make those shameless, cruel-minded to be penniless.

अध्याय 227

श्लोक 8

नर्तनं हसनञ्चैव विवाहो गीतमेव च(२) ।तन्त्रीवाद्यविहीनानां वाद्यानामपि वादनं

nartanaṃ hasanañcaiva vivāho gītameva ca(2) / tantrīvādyavihīnānāṃ vādyānāmapi vādanaṃ

हिन्दी अर्थ

युद्धसे मेरा इष्ट होनेवाला है या अनिष्ट ?' उस समय पुरोहितको “यज्जाग्रतो दूरमुहैति० ' (यजु०३४। १)-- इस मन्त्रका उच्चारण करना चाहिए। तीसरे दिन दिशाओंकी रक्षा करनेवाले रुद्रों तथा दिशाओंके अधिपतियोंकी पूजा करे; चौथे दिन ग्रहों और

English

Likewise the king should banish the minister or justice after having taken the entire (property) for doing the work of another (king).

अध्याय 227

श्लोक 9

स्रोतोवहाधोगमनं स्नानं गोमयवारिणा ।पङ्कोदकेन च तथा मशीतोयेन वाप्यथ

srotovahādhogamanaṃ snānaṃ gomayavāriṇā / paṅkodakena ca tathā maśītoyena vāpyatha

हिन्दी अर्थ

पाँचवें दिन अश्विनीकुमारोंका यजन करे। मार्ममें जो देवी, देवता तथा नदी आदि पड़ें, उनका भी पूजन करना चाहिए। द्युलोकमें, अन्तरिक्षमें तथा भूमिपर निवास करनेवाले देवताओंको बलि अर्पण

English

If one violates the bed of the preceptor, (mark of) female generative organ should be made (on the forehead), a pot of wine in case of drinking of wine, a dog in case of stealing and the head of a person in the case of killing a brahmin.

अध्याय 227

श्लोक 10

आलिङ्गनं कुमारीणां पुरुषाञ्च मैथुनं(३) ।हानिश् चैव स्वगात्राणां विरेको वमनक्रिया

āliṅganaṃ kumārīṇāṃ puruṣāñca maithunaṃ(3) / hāniś caiva svagātrāṇāṃ vireko vamanakriyā

हिन्दी अर्थ

करे। रातमें भूतगणोंको भी बलि दे। भगवान् वासुदेव आदि देवताओं तथा भद्रकाली और लक्ष्मी आदि देवियोंकी भी पूजा करे। इसके बाद सम्पूर्ण देवताओंसे प्रार्थना करे॥ १--८॥ “वासुदेव, संकर्षण, प्रद्युम्न, अनिरुद्ध, नारायण, ब्रह्मा, विष्णु, नरसिंह, वराह, शिव, ईशान, तत्पुरुष, अघोर, वामदेव, सद्योजात, सूर्य, सोम, भौम, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनैश्चर, राहु, केतु, गणेश,

English

The king should kill (criminals belonging to) iUdra and other (communities) and banish the brahmin sinners. The wealth belonging to great sinners should be offered to (god) Varuna (Grod of righteousness).

अध्याय 227

श्लोक 11

दक्षिणाशाप्रगमनं व्याधिनाभिभवस् तथा ।फलानामुपहानिश् च धातूनां भेदनं तथा

dakṣiṇāśāpragamanaṃ vyādhinābhibhavas tathā / phalānāmupahāniś ca dhātūnāṃ bhedanaṃ tathā

हिन्दी अर्थ

कार्तिकेय, चण्डिका, उमा, लक्ष्मी, सरस्वती, दुर्गा, ब्रह्माणी आदि गण, रुद्र, इन्द्रादि देव, अग्नि, नाग, गरुड तथा द्युलोक, अन्तरिक्ष एवं भूमिपर निवास करनेवाले अन्यान्य देवता मेरी विजयके

English

(A king) should kill all those who offer shelter, food and wealth to thieves in the villages also.

अध्याय 227

श्लोक 12

गृहाणाञ्चैव पतनं गृहसम्मार्जनन्तथा ।क्रीडा पिशाचक्रव्यादवानरान्त्यनरैर् अपि

gṛhāṇāñcaiva patanaṃ gṛhasammārjanantathā / krīḍā piśācakravyādavānarāntyanarair api

हिन्दी अर्थ

साधक हों। मेरी दी हुई यह भेंट और पूजा स्वीकार करके सब देवता युद्धमें मेरे शत्रुओंका मर्दन करें। देवगण ! मैं माता, पुत्र और भृत्योंसहित आपकी शरणमें आया हूँ। आपलोग शत्रु-सेनाके पीछे जाकर उनका नाश करनेवाले हैं, आपको हमारा नमस्कार है। युद्धमें विजय पाकर यदि लौटूँगा तो आपलोगोंको इस समय जो पूजा और भेंट दी है, उससे भी अधिक मात्रामें पूजा

English

One should be levied (a fine of) a kdrsdpaa for having committed nuisance on the thoroughfare when there was no adversity and be made to clean the impurity.

अध्याय 227

श्लोक 13

परादभिभवश् चैव तस्माच्च व्यसनोद्भवः ।काषायवस्त्रधारित्वं तद्वस्त्रैः क्रीडनं तथा(४)

parādabhibhavaś caiva tasmācca vyasanodbhavaḥ / kāṣāyavastradhāritvaṃ tadvastraiḥ krīḍanaṃ tathā(4)

हिन्दी अर्थ

छठे दिन राज्याभिषेककी भाँति विजय-सत्रान करना चाहिए तथा यात्राके सातवें दिन भगवान् त्रिविक्रम (वामन)-का पूजन करना आवश्यक है। नीराजनके लिये बताये हुए मन्त्रोंद्वारा अपने

English

See the first verse,

अध्याय 227

श्लोक 14

१ तन्त्रीवाद्यविनोदश्चेत्यादिः, तैलस्य कृशरस्य चेत्यन्तः पाठः छ॥ , झ॥ पुस्तकद्वये नास्ति २ विवाहोत्सव एव चेति ज॥ ३ तासामेव च मैथुनमिति ज॥ ४ हानिश् चैवेत्यादिः।क्रीडनं तथेत्यन्तः पाठः ज॥ पुस्तके नास्ति :प् ३३१ स्नेहपानावगाहौ च रक्तमाल्यानुलेपनं ।इत्यधान्यानि स्वप्नानि तेषामकथनं शुभं

1 tantrīvādyavinodaścetyādiḥ, tailasya kṛśarasya cetyantaḥ pāṭhaḥ cha.. , jha.. pustakadvaye nāsti 2 vivāhotsava eva ceti ja.. 3 tāsāmeva ca maithunamiti ja.. 4 hāniś caivetyādiḥ. krīḍanaṃ tathetyantaḥ pāṭhaḥ ja.. pustake nāsti :p 331 snehapānāvagāhau ca raktamālyānulepanaṃ / ityadhānyāni svapnāni teṣāmakathanaṃ śubhaṃ

हिन्दी अर्थ

आयुध और वाहनको भी पूजा करे। साथ ही ब्राह्मणोंके मुखसे 'पुण्याह' और ' जय' शब्दके साथ निम्नाङ्कित भाववाले मन्त्रका श्रवण करे 'राजन्! द्युलोक, अन्तरिक्ष और भूमिपर निवास करनेवाले देवता तुम्हें दीर्घायु प्रदान करें। तुम

English

Drinking and bathing in oil, red garlands and ointment — these are other dreams; not telling them is good;

अध्याय 227

श्लोक 15

भूजश् च स्वपनं तद्वत् कार्यां स्नानं द्विजार्चनं ।तिलैर् होमो हरिब्रह्मशिवार्कगणपूजनं

bhūjaś ca svapanaṃ tadvat kāryāṃ snānaṃ dvijārcanaṃ / tilair homo haribrahmaśivārkagaṇapūjanaṃ

हिन्दी अर्थ

यात्रा देवताओंको यात्रा हो तथा सम्पूर्ण देवता तुम्हारी रक्षा करें।' यह आशीर्वाद सुनकर राजा आगे यात्रा करे। ' धन्वना गा०' (यजु० २।३९) इत्यादि मन्त्रद्वारा धनुष-बाण हाथमें लेकर

English

a bath, worship of Brahmins, oblation with sesame, worship of Hari, Brahma, Shiva, the Sun and Ganapati, likewise

अध्याय 227

श्लोक 16

तथा स्तुतिप्रपठनं पुंसूक्तादिजपस् तथा ।स्वप्नास्तु प्रथमे यामे(१) संवत्सरविपाकिनः

tathā stutiprapaṭhanaṃ puṃsūktādijapas tathā / svapnāstu prathame yāme(1) saṃvatsaravipākinaḥ

हिन्दी अर्थ

“तद्विष्णो: ० ' (यजु० ६।५) इस मन्त्रका जप करते हुए शत्रुके सामने दाहिना पैर बढ़ाकर एवं उत्तरमें जानेके लिये क्रमशः हाथी, रथ, घोड़े तथा भार ढोनेमें समर्थ जानवरपर सवार होवे और जुझाऊ बाजोंके साथ आगेकी यात्रा करे; पीछे फिरकर न देखे

English

recitation of hymns, repetition of the Purusha-sukta and the like should be done. Dreams in the first watch ripen in a year;

अध्याय 227

श्लोक 17

षड्भिर्मासैर् द्वितीये तु त्रिभिर्मासैर् त्रियामिकाः ।चतुर्थे त्वर्धमासेन दशाहादरुणोदये

ṣaḍbhirmāsair dvitīye tu tribhirmāsair triyāmikāḥ / caturthe tvardhamāsena daśāhādaruṇodaye

हिन्दी अर्थ

एक कोस जानेके बाद ठहर जाय और देवता तथा ब्राह्मणोंको पूजा करे। पीछे आती हुई अपनी सेनाको रक्षा करते हुए ही राजाको दूसरेके देशमें यात्रा करनी चाहिए। विदेशमें जानेपर भी अपने

English

in the second in six months; in the third in three months; in the fourth in half a month; at dawn in ten days.

अध्याय 227

श्लोक 18

एकस्यामथ चेद्रात्रौ शुभं वा यदि वाशुभं ।पश्चादृष्टस्तु यस्तत्र तस्य पाकं विनिर्दिशेत्

ekasyāmatha cedrātrau śubhaṃ vā yadi vāśubhaṃ / paścādṛṣṭastu yastatra tasya pākaṃ vinirdiśet

हिन्दी अर्थ

देशके आचारका पालन करना राजाका कर्तव्य है। वह प्रतिदिन देवताओंका पूजन करे, किसीकी आय नष्ट न होने दे और उस देशके मनुष्योंका कभी अपमान न करे। विजय पाकर पुनः अपने नगरमें लौट आनेपर राजा देवताओंकी पूजा करे

English

If in one night there is auspicious and inauspicious, the one seen later determines the result;

अध्याय 227

श्लोक 19

तस्मात्तु शोभने स्वप्ने पश्चात्स्वापो न शस्यते ।शैलप्रासादनागाश्ववृषभारोहणं हितं

tasmāttu śobhane svapne paścātsvāpo na śasyate / śailaprāsādanāgāśvavṛṣabhārohaṇaṃ hitaṃ

हिन्दी अर्थ

हो तो पहले दिन हाथी, घोड़े आदि वाहनोंको नहलावे तथा भगवान् नृसिंहका पूजन करे । रात्रिमें छत्र आदि राजचिह्रों, अस्त्र-शस्त्रों तथा भूतगणोंकी अर्चना करके सबेरे पुनः भगवान् नृसिंहकी एवं

English

therefore after an auspicious dream sleeping again is not praised. Climbing a mountain, palace, elephant, horse or bull is beneficial,

अध्याय 227

श्लोक 20

द्रुमाणां श्वेतपुष्पाणां गगने च तथा द्विज ।द्रुमतृणोद्भवो नाभौ तथा च बहुबाहुता

drumāṇāṃ śvetapuṣpāṇāṃ gagane ca tathā dvija / drumatṛṇodbhavo nābhau tathā ca bahubāhutā

हिन्दी अर्थ

सम्पूर्ण वाहन आदिको पूजा करे। पुरोहितके द्वारा हवन किये हुए अग्निदेवका दर्शन करके स्वयं भी उसमें आहुति डाले और ब्राह्मणोंका सत्कार करके धनुष-बाण ले, हाथी आदिपर सवार हो युद्धके लिये जाय। शत्रुके देशमें अदृश्य रहकर प्रकृति-कल्पना (मोर्चाबंदी) करे। यदि अपने पास थोड़े-से सैनिक हों तो उन्हें एक जगह संगठित रखकर युद्धमें प्रवृत्त करे और

English

and of trees with white flowers, and in the sky, twice-born; a tree or grass springing from the navel, many arms,

अध्याय 227

श्लोक 21

तथा च बहुशीर्षत्वं पलितोद्भव एव च ।सुशुक्रमाल्यधारित्वं सुशुक्लाम्बरधारिता

tathā ca bahuśīrṣatvaṃ palitodbhava eva ca / suśukramālyadhāritvaṃ suśuklāmbaradhāritā

हिन्दी अर्थ

यदि योद्धाओंकी संख्या अधिक हो तो उन्हें इच्छानुसार फैला दे (अर्थात् उन्हें बहुत दूरमें खड़ा करके युद्धमें लगावे)

English

many heads, and white hair arising, wearing white garlands, wearing white garments,

अध्याय 227

श्लोक 22

चन्द्रार्कताराग्रहणं परिमार्जनमेव च ।शक्रध्वजालिङ्गनञ्च ध्वजोच्छ्रायक्रिया तथा

candrārkatārāgrahaṇaṃ parimārjanameva ca / śakradhvajāliṅganañca dhvajocchrāyakriyā tathā

हिन्दी अर्थ

थोड़े-से सैनिकोंका अधिक संख्यावाले योद्धाओंके साथ युद्ध करनेके लिये सूचीमुख' नामक व्यूह उपयोगी होता है। व्यूह दो प्रकारके बताये गये हैं -प्राणियोंके शरीरकी भाँति और द्रव्यस्वरूप। गरुडव्यूह, मकरव्यूह, चक्रव्यूह,

English

seizing moon, sun and stars, and wiping them; embracing Indra's banner and raising a banner;

अध्याय 227

श्लोक 23

भूम्यबुधाराग्रहणं(२) शत्रूणाञ्चैव विक्रिया ।जयो विवादे द्यूते च सङ्ग्रामे च तथा द्विज

bhūmyabudhārāgrahaṇaṃ(2) śatrūṇāñcaiva vikriyā / jayo vivāde dyūte ca saṅgrāme ca tathā dvija

हिन्दी अर्थ

प्रसिद्ध हैं। सभी व्यूहोंके सैनिकोंको पाँच भागोंमें विभक्त किया जाता है। दो पक्ष, दो अनृपक्ष और एक पाँचवाँ भाग भी अवश्य रखना चाहिए। योद्धाओंके एक या दो भागोंसे युद्ध करे और

English

seizing earth, Mercury and the stars, and the discomfiture of enemies; victory in dispute, gambling and battle, twice-born;

अध्याय 227

श्लोक 24

भक्षणञ्चार्द्रमांसानाम्पायसस्य च भक्षणं ।दर्शनं रुधिरस्यापि स्नानं वा रुधिरेण च

bhakṣaṇañcārdramāṃsānāmpāyasasya ca bhakṣaṇaṃ / darśanaṃ rudhirasyāpi snānaṃ vā rudhireṇa ca

हिन्दी अर्थ

तीन भागोंको उनकी रक्षाके लिये रखे। स्वयं राजाको कभी व्यूहमें नियुक्त नहीं करना चाहिए; क्योंकि राजा ही सबकी जड़ है, उस जड़के कट जानेपर सारे राज्यका विनाश हो जाता है; अतः स्वयं राजा युद्धमें प्रवृत्त न हो। वह सेनाके पीछे एक कोसकी दूरीपर रहे। वहाँ रहते हुए राजाका यह कार्य बताया गया है कि वह युद्धसे भागे हुए सिपाहियोंको उत्साहित करके धैर्य बँधावे।

English

eating raw meat and pudding, seeing blood or bathing in blood,

अध्याय 227

श्लोक 25

२ भूम्यम्बुधीनां ग्रहणमिति क॥ , छ॥ , ञ॥ च :प् ३३२ सरारुधिरमद्यानां पानं क्षीरस्य वाप्यथ ।अस्त्रैर् विचेष्टनं भूमौ निर्मलं गगनं तथा

2 bhūmyambudhīnāṃ grahaṇamiti ka.. , cha.. , ña.. ca :p 332 sarārudhiramadyānāṃ pānaṃ kṣīrasya vāpyatha / astrair viceṣṭanaṃ bhūmau nirmalaṃ gaganaṃ tathā

हिन्दी अर्थ

सेनाके प्रधान (अर्थात् सेनापति)-के भागने या मारे जानेपर सेना नहीं ठहर पाती । व्यूहमें योद्धाओंको न तो एक-दूसरेसे सटाकर खड़ा करे और न बहुत दूर-दूरपर ही; उनके बीचमें इतनी ही दूरी

English

drinking blood, liquor or milk; moving with weapons on the ground; a clear sky;

अध्याय 227

श्लोक 26

मुखेन दोहनं शस्तं महिषीणां तथा गवां ।सिंहीनां हस्तिनीनाञ्च बडवानां तथैव च

mukhena dohanaṃ śastaṃ mahiṣīṇāṃ tathā gavāṃ / siṃhīnāṃ hastinīnāñca baḍavānāṃ tathaiva ca

हिन्दी अर्थ

रहनी चाहिए, जिससे एक-दूसरेके हथियार आपसमें टकराने न पावें जो शत्रु-सेनाकी मोर्चाबंदी तोड़ना चाहता हो, वह अपने संगठित योद्धाओंके द्वारा ही उसे

English

milking with the mouth is praised, of buffaloes and cows, lionesses, elephants and mares;

अध्याय 227

श्लोक 27

प्रसादो देवविप्रेभ्यो गुरुभ्यश् च तथा द्विज ।अम्भसा चाभिषेकस्तु गवां शृङ्गच्युतेन च

prasādo devaviprebhyo gurubhyaś ca tathā dvija / ambhasā cābhiṣekastu gavāṃ śṛṅgacyutena ca

हिन्दी अर्थ

तोड़नेका प्रयत्न करे तथा शत्रुके द्वारा भी यदि अपनी सेनाके व्यूह-भेदनके लिये प्रयत्न हो रहा हो तो उसकी रक्षाके लिये संगठित वीरोंको ही नियुक्त करना चाहिए। अपनी इच्छाके अनुसार

English

favor from gods, Brahmins and teachers, twice-born; consecration with water or what has fallen from cow's horns,

अध्याय 227

श्लोक 28

चन्द्राद् भ्रष्टेन वा राम ज्ञेयं राज्यप्रदं हि तत् ।राज्याभिषेकश् च तथा छेदनं शिरसो ऽप्यथ

candrād bhraṣṭena vā rāma jñeyaṃ rājyapradaṃ hi tat / rājyābhiṣekaś ca tathā chedanaṃ śiraso 'pyatha

हिन्दी अर्थ

सेनाका ऐसा व्यूह बनावे, जो शत्रुके व्यूहमें घुसकर उसका भेदन कर सके। हाथीके पैरोंकी रक्षा करनेके लिये चार रथ नियुक्त करे। रथकी रक्षाके लिये चार घुड़सवार, उनकी रक्षाके लिये उतने ही ढाल लेकर युद्ध करनेवाले सिपाही तथा ढालवालोंके बराबर ही धनुर्धर वीरोंको तैनात करे। युद्धमें सबसे आगे ढाल लेनेवाले योद्धाओंको स्थापित करे। उनके पीछे धनुर्धर योद्धा, धनुर्धरोंके

English

or from the moon, Rama — that is known to give kingdom. Royal consecration and cutting off one's head,

अध्याय 227

श्लोक 29

मरणं वह्निलाभश् च वह्निदाहो गृहादिषु ।लब्धेश् च राजलिङ्गानां तन्त्रीवाद्याभिवादनं

maraṇaṃ vahnilābhaś ca vahnidāho gṛhādiṣu / labdheś ca rājaliṅgānāṃ tantrīvādyābhivādanaṃ

हिन्दी अर्थ

पीछे घुड़सवार, घुड्सवारोंके पीछे रथ और रथोंके पीछे राजाको हाथियोंकी सेना नियुक्त करनी चाहिए

English

death, obtaining fire, burning of houses and the like; obtaining royal insignia and playing a lute —

अध्याय 227

श्लोक 30

यस्तु पश्यति स्वप्नान्ते राजानं कुञ्जरं हयं ।हिरण्यं वृषभङ्गाञ्च कुटुम्बस्तस्य वर्धते

yastu paśyati svapnānte rājānaṃ kuñjaraṃ hayaṃ / hiraṇyaṃ vṛṣabhaṅgāñca kuṭumbastasya vardhate

हिन्दी अर्थ

पैदल, हाथीसवार और घुड्सवारोंको प्रयत्रपूर्वक धर्मानुकूल युद्धमें संलग्न रहना चाहिए। युद्धके मुहानेपर शूरवीरोंको ही तैनात करे, डरपोक स्वभाववाले सैनिकोंको वहाँ कदापि न खड़ा होने दे। शूरवीरोंको आगे खड़ा करके ऐसा प्रबन्ध करे, जिससे वीर स्वभाववाले योद्धाओंको केवल शत्रुओंका जत्थामात्र दिखायी दे (उनके भयंकर पराक्रमपर उनकी दृष्टि न पड़े); तभी वे शत्रुओंको

English

one who sees at dream's end a king, elephant, horse, gold or bull — his family prospers.

अध्याय 227

श्लोक 31

वृषेभगृहशैलाग्रवृक्षारोहणरोदनं ।घृटविष्ठानुलेपो वा अगम्यागमनं तथा

vṛṣebhagṛhaśailāgravṛkṣārohaṇarodanaṃ / ghṛṭaviṣṭhānulepo vā agamyāgamanaṃ tathā

हिन्दी अर्थ

भगानेवाला पुरुषार्थ कर सकते हैं। भीरु पुरुष आगे रहें तो वे भागकर सेनाका व्यूह स्वयं ही तोड़ डालते हैं; अतः उन्हें आगे न रखे। शूरवीर आगे रहनेपर भीरु पुरुषोंको युद्धके लिये

English

Climbing a bull, elephant, house, mountain peak or tree and weeping, being smeared with ghee or filth, or going to the forbidden,

अध्याय 227

श्लोक 32

सितवस्त्रं प्रसन्नाम्भः फली वृक्षो नभो ऽमलं

sitavastraṃ prasannāmbhaḥ phalī vṛkṣo nabho 'malaṃ

हिन्दी अर्थ

सदा उत्साह ही प्रदान करते रहते हैं। जिनका कद ऊँचा, नासिका तोतेके समान नुकोली, दृष्टि कलहप्रिय, सदा हर्ष और उत्साहमें भरे रहनेवाले तथा कामपरायण हों, उन्हें शूरवीर समझना चाहिए

English

white cloth, clear water, a fruit tree, a clear sky.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।