Agni Purana
229
अध्याय 229 / 381

Adhyaya 230

36 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ36 श्लोक

अध्याय 229

श्लोक 1

शकुनानि पुष्कर उवाच तिष्ठतो गमने प्रश्ने पुरुषस्य शुभाशुभं ।निवेदयन्ति शकुना देशस्य नगरस्य च

śakunāni puṣkara uvāca tiṣṭhato gamane praśne puruṣasya śubhāśubhaṃ / nivedayanti śakunā deśasya nagarasya ca

हिन्दी अर्थ

सुगन्ध भी फैलानी चाहिए। विजयकी पताकाएँ है। उसके प्रति देशोचित आचारादिका पालन दिखानी चाहिए, बाजोंका भयंकर समारोह करना चाहिए। इस प्रकार जब युद्धमें विजय प्राप्त हो जाय तो देवताओं और ब्राह्मणोंकी पूजा करनी चाहिए। अमात्यके द्वारा किये हुए युद्धमें जो रत्र

English

BV. 10.91.1.

अध्याय 229

श्लोक 2

सर्वः पापफलो दीप्तो निर्दिष्टो दैवचिन्तिकैः ।शान्तः शुभफलश् चैव दैवज्ञैः समुदाहृतः

sarvaḥ pāpaphalo dīpto nirdiṣṭo daivacintikaiḥ / śāntaḥ śubhaphalaś caiva daivajñaiḥ samudāhṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

आदि उपलब्ध हों, वे राजाको ही अर्पण करने चाहिए। शत्रुकी स्त्रियाँपर किसीका भी अधिकार नहीं होता। स्त्री शत्रुकी हो तो भी उसकी रक्षा ही करनी चाहिए। संग्राममें सहायकोंसे रहित

English

All "blazing" omens are said by omen-thinkers to have sinful fruit; the "calm" are declared by astrologers to have good fruit.

अध्याय 229

श्लोक 3

षट्प्रकारा विनिर्दिष्टा शकुनानाञ्च दीप्तयः ।वेलादिग्देशकरणरुतजातिविभेदतः

ṣaṭprakārā vinirdiṣṭā śakunānāñca dīptayaḥ / velādigdeśakaraṇarutajātivibhedataḥ

हिन्दी अर्थ

शत्रुको पाकर उसका पुत्रकी भाँति पालन करना चाहिए। उसके साथ पुनः युद्ध करना उचित नहीं करना कर्तव्य है॥ ६१--६४॥

English

Six kinds of blazing of omens are stated: by time, direction, place, act, cry and species.

अध्याय 229

श्लोक 4

पूर्वा पूर्वा च विज्ञेया सा तेषां बलवत्तरा ।दिवाचरो रात्रिचरस् तथा रात्रौ दिवाचरः

pūrvā pūrvā ca vijñeyā sā teṣāṃ balavattarā / divācaro rātricaras tathā rātrau divācaraḥ

हिन्दी अर्थ

युद्धमें विजय पानेके पश्चात् अपने नगरमें जाकर “ध्रुव” संज्ञक नक्षत्र (तीनों उत्तरा और रोहिणी)-में राजमहलके भीतर प्रवेश करे। इसके बाद देवताओंका पूजन और सैनिकोंके परिवारके

English

The earlier ones are to be known as more powerful among them. A day-goer, a night-goer, and likewise a day-goer at night:

अध्याय 229

श्लोक 5

क्रूरेषु दीप्ता विज्ञेया ऋक्षलग्नग्रहादिषु ।धूमिता सा तु विज्ञेया याङ्गमिष्यति भास्करः

krūreṣu dīptā vijñeyā ṛkṣalagnagrahādiṣu / dhūmitā sā tu vijñeyā yāṅgamiṣyati bhāskaraḥ

हिन्दी अर्थ

भरण-पोषणका प्रबन्ध करना चाहिए। शत्रुके यहाँसे मिले हुए धनका कुछ भाग भृत्योंको भी बाँट दे। इस प्रकार यह रणकी दीक्षा बतायी गयी है; इसके अनुसार कार्य करनेसे राजाको निश्चय ही विजयकी प्राप्ति होती है

English

in cruel (planets) at star, ascendant, planet and the like, it is to be known as blazing. That is called smoky, in which the sun will go to a limb;

अध्याय 229

श्लोक 6

यस्यां स्थितः सा ज्वलिता मुक्ता चाङ्गारिणी मता ।एतास्तिस्रः स्मृता दीप्ताः पञ्च शान्तास् तथापराः

yasyāṃ sthitaḥ sā jvalitā muktā cāṅgāriṇī matā / etāstisraḥ smṛtā dīptāḥ pañca śāntās tathāparāḥ

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार आदि आग्रेय महापुराणमें 'रणदीक्षा-वर्णन' नामक दो सौ छत्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

where he stands, it is blazing; when released, it is considered fiery. These three are remembered as blazing, the other five as calm.

अध्याय 229

श्लोक 7

दीप्तायान्दिशि दिग्दीप्तं शकुनं परिकीर्तितं ।ग्रामो ऽरण्या वने ग्राम्यास् तथा निन्दितपादपः

dīptāyāndiśi digdīptaṃ śakunaṃ parikīrtitaṃ / grāmo 'raṇyā vane grāmyās tathā ninditapādapaḥ

हिन्दी अर्थ

लक्ष्मीस्तोत्र और उसका फल पुष्कर कहते हैं- परशुरामजी! पूर्वकालमें इनद्रने राज्यलक्ष्मीकी स्थिरताके लिये जिस प्रकार भगवती लक्ष्मीको स्तुति को थी, उसी प्रकार राजा भी अपनी विजयके लिये उनका स्तवन

English

An omen in a blazing direction is called direction-blazing; in a village (forest animals), in a forest (village animals), or a censured tree,

अध्याय 229

श्लोक 8

देशे चैवाशुभे ज्ञेयो देशदीप्तो द्विजोत्तमः ।क्रियादीप्तो विनिर्दिष्टः स्वजात्यनुचितक्रियः

deśe caivāśubhe jñeyo deśadīpto dvijottamaḥ / kriyādīpto vinirdiṣṭaḥ svajātyanucitakriyaḥ

हिन्दी अर्थ

इन्द्र बोले जो सम्पूर्ण लोकोंकी जननी हैं, समुद्रसे जिनका आविर्भाव हुआ है, जिनके नेत्र खिले हुए कमलके समान शोभायमान हैं तथा जो भगवान् विष्णुके वक्षःस्थलमें विराजमान हैं, उन

English

and in an inauspicious place is to be known as place-blazing, best of twice-born; act-blazing is declared as one whose act is unfit for its own species;

अध्याय 229

श्लोक 9

रुतदीप्तश् च कथितो भिन्नभैरवनिस्वनः ।जातिदीप्तस् तथा ज्ञेयः केवलं मांसभोजनः

rutadīptaś ca kathito bhinnabhairavanisvanaḥ / jātidīptas tathā jñeyaḥ kevalaṃ māṃsabhojanaḥ

हिन्दी अर्थ

लक्ष्मीदेबीको मैं प्रणाम करता हूँ। जगत्को पवित्र करनेवाली देवि! तुम्हीं सिद्धि हो और तुम्हीं मेधा, श्रद्धा और सरस्वती हो। शोभामयी देवि! तुम्हीं यज्ञविद्या, महाविद्या, गुह्यविद्या तथा मोक्षरूप फल प्रदान करनेवाली आत्मविद्या हो। आन्वीक्षिको

English

cry-blazing is said to be one of broken, terrible sound; species-blazing is to be known as one that feeds only on flesh.

अध्याय 229

श्लोक 10

दीप्ताच्छान्तो विनिर्दिष्टः सर्वैर् भेदैः प्रयत्नतः ।मिश्रैर् मिश्रो विनिर्दिष्टस्तस्य वाच्यं फलाफलं

dīptācchānto vinirdiṣṭaḥ sarvair bhedaiḥ prayatnataḥ / miśrair miśro vinirdiṣṭastasya vācyaṃ phalāphalaṃ

हिन्दी अर्थ

(जीविका-प्रधान कृषि, गोरक्षा और वाणिज्य कर्म) तथा दण्डनीति भी तुम्हीं हो। देवि! तुम स्वयं सौम्यस्वरूपवाली (सुन्दरी) हो; अतः तुमसे

English

The calm is declared from the blazing, by all the distinctions with care; the mixed one by mixtures; its fruit and non-fruit should be told.

अध्याय 229

श्लोक 11

गोश्वोष्ट्रगर्दभश्वानः सारिका गृहगोधिका ।चटका भासकूर्माद्याः कथिता ग्रामवासिनः

gośvoṣṭragardabhaśvānaḥ sārikā gṛhagodhikā / caṭakā bhāsakūrmādyāḥ kathitā grāmavāsinaḥ

हिन्दी अर्थ

व्याप्त होनेके कारण इस जगतका रूप भी सौम्य मनोहर दिखायी देता है। भगवति! तुम्हारे सिवा दूसरी कौन स्त्री है, जो कौमोदकी गदा धारण करनेवाले देवाधिदेव भगवान् विष्णुके अखिल यज्ञमय विग्रहको, जिसका योगीलोग चिन्तन करते हैं, अपना निवासस्थान बना सके। देवि! तुम्हारे त्याग देनेसे समस्त त्रिलोकी नष्टप्राय हो गयी थी; किंतु इस समय पुनः तुम्हारा ही सहारा पाकर

English

Cow, horse, camel, ass, dog, myna, house-lizard, sparrow, bhasa, tortoise and the like are called village-dwellers;

अध्याय 229

श्लोक 12

अजाविशुकनागेन्द्राः कोलो महिषवायसौ ।ग्राम्यारण्या विनिर्दिष्टाः सर्वे ऽन्ये वनगोचराः(१)

ajāviśukanāgendrāḥ kolo mahiṣavāyasau / grāmyāraṇyā vinirdiṣṭāḥ sarve 'nye vanagocarāḥ(1)

हिन्दी अर्थ

यह समृद्धिपूर्ण दिखायी देती है । महाभागे ! तुम्हारी कुपादृष्टिसे ही मनुष्योंको सदा स्त्री, पुत्र, गृह, मित्र और धन-धान्य आदिकी प्राप्ति होती है। देवि! जिन पुरुषोंपर आपकी दयादृष्टि पड़ जाती

English

goat, sheep, parrot, elephant, boar, buffalo and crow are declared both village and forest; all others are forest-ranging.

अध्याय 229

श्लोक 13

मार्जारकुक्कुटौ ग्राम्यौ तौ चैव वनगोचरौ ।तयोर्भवति विज्ञानं नित्यं वै रूपभेदतः

mārjārakukkuṭau grāmyau tau caiva vanagocarau / tayorbhavati vijñānaṃ nityaṃ vai rūpabhedataḥ

हिन्दी अर्थ

है, उन्हें शरीरकी नीरोगता, ऐश्वर्य, शत्रुपक्षकी हानि और सब प्रकारके सुख-कुछ भी दुर्लभ नहीं हैं। मातः! तुम सम्पूर्ण भूतोंकी जननी और देवाधिदेव विष्णु सबके पिता हैं। तुमने और भगवान् विष्णुने इस चराचर जगत्को व्याप्त कर रखा है। सबको पवित्र करनेवाली देवि! तुम

English

Cat and cock are village animals and also forest-ranging; knowledge of those two arises always from difference of form.

अध्याय 229

श्लोक 14

गोकर्णशिखिचक्राह्वखरहारीतवायसाः ।कुलाहकुक्कुभश्येनफेरुखञ्जनवानराः

gokarṇaśikhicakrāhvakharahārītavāyasāḥ / kulāhakukkubhaśyenapherukhañjanavānarāḥ

हिन्दी अर्थ

साज-सामान, शरीर और स्त्री-किसीका भी त्याग न करो। भगवान् विष्णुके वक्षःस्थलमें वास करनेवाली लक्ष्मी! मेरे पुत्र, मित्रवर्ग, पशु तथा आभूषणोंको भी न त्यागो। विमलस्वरूपा देवि!

English

Gokarna, peacock, chakravaka, ass, harita, crow, kulaha, kukkubha, hawk, jackal, wagtail and monkey,

अध्याय 229

श्लोक 15

शतघ्नचटकश्यामचासश्येनकलिञ्जलाः ।तित्तिरः शतपत्रञ्च कपोतश् च तथा त्रयः

śataghnacaṭakaśyāmacāsaśyenakaliñjalāḥ / tittiraḥ śatapatrañca kapotaś ca tathā trayaḥ

हिन्दी अर्थ

जिन मनुष्योंको तुम त्याग देती हो, उन्हें सत्य, समता, शौच तथा शील आदि सद्गुण भी तत्काल ही छोड़ देते हैं। तुम्हारी कृपादृष्टि पड़नेपर गुणहीन गुणों तथा पीढ़ियोंतक बने रहनेवाले ऐश्वर्यसे युक्त हो जाते हैं। देवि! जिसको तुमने अपनी दयादृष्टिसे एक बार देख लिया, वही श्लाघ्य (प्रशंसनीय), गुणवान्, धन्यवादका पात्र, कुलीन,

English

shataghna, sparrow, shyama, chasha, hawk, kalinjala, partridge, shatapatra and pigeon — these three;

अध्याय 229

श्लोक 16

खञ्जरीटकदात्यूहशुकराजीवकुक्कुटाः ।भारद्वाजश् च सारङ्ग इति ज्ञेया दिवाचराः

khañjarīṭakadātyūhaśukarājīvakukkuṭāḥ / bhāradvājaś ca sāraṅga iti jñeyā divācarāḥ

हिन्दी अर्थ

बुद्धिमान्, शूर और पराक्रमी हो जाता है । विष्णुप्रिये! तुम जगतूकी माता हो। जिसकी ओरसे तुम मुँह

English

khanjarita, datyuha, parrot, jivaka, cock, Bharadvaja and sarnga — these are to be known as day-goers.

अध्याय 229

श्लोक 17

वागुर्युलूकशरभक्रौञ्चाः शशककच्छपाः ।लोमासिकाः पिङ्गलिकाः कथिता रात्रिगोचराः

vāguryulūkaśarabhakrauñcāḥ śaśakakacchapāḥ / lomāsikāḥ piṅgalikāḥ kathitā rātrigocarāḥ

हिन्दी अर्थ

फेर लेती हो, उसके शील आदि सभी गुण तत्काल दुर्गुणके रूपमें बदल जाते हैं। कमलके समान नेत्रोंवाली देवि! ब्रह्माजीकी जिह्वा भी तुम्हारे गुणोंका वर्णन करनेमें समर्थ नहीं हो मेरा परित्याग न करो

English

Vagurī, owl, sharabha, heron, hare, tortoise, lomasika and pingalika are said to be night-ranging.

अध्याय 229

श्लोक 18

१ सर्वे ऽन्ये च वनेचरा इति झ॥ :प् ३३६ हंषाश् च मृगमार्जारनकुलर्क्षभुजङ्गमाः ।वृकारिसिंहव्याघ्रोष्ट्रग्रामशूकरमानुषाः

1 sarve 'nye ca vanecarā iti jha.. :p 336 haṃṣāś ca mṛgamārjāranakularkṣabhujaṅgamāḥ / vṛkārisiṃhavyāghroṣṭragrāmaśūkaramānuṣāḥ

हिन्दी अर्थ

पुष्कर कहते हैं-इन्द्रके इस प्रकार स्तवन करनेपर भगवती लक्ष्मीने उन्हें राज्यको स्थिरता और संग्राममें विजय आदिका अभीष्ट वरदान दिया। साथ ही अपने स्तोत्रका पाठ या श्रवण

English

Swans, deer, cat, mongoose, bear, serpents, wolf, enemy of lions, lion, tiger, camel, village boar, humans,

अध्याय 229

श्लोक 19

श्वाविद्वृषभगोमायुवृककोकिलसारसाः ।तुरङ्गकौपीननरा गोधा ह्य् उभयचारिणः

śvāvidvṛṣabhagomāyuvṛkakokilasārasāḥ / turaṅgakaupīnanarā godhā hy ubhayacāriṇaḥ

हिन्दी अर्थ

करनेवाले पुरुषोंके लिये भी उन्होंने भोग तथा मोक्ष मिलनेके लिये वर प्रदान किया। अतः मनुष्यको चाहिए कि सदा ही लक्ष्मीके इस स्तोत्रका पाठ और श्रवण करे इस प्रकार आदि आग्रेय महापुराणमें “श्रीस्तोत्रका वर्णन” नामक दो सौ सैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

swavit, bull, jackal, wolf, cuckoo, crane, horse, loin-cloth-wearing men and iguana are both-ranging.

अध्याय 229

श्लोक 20

बलप्रस्थानयोः सर्वे पुरस्तात्सङ्घचारिणः ।जयावहा विनिर्दिष्टाः पश्चान्निधनकारिणः

balaprasthānayoḥ sarve purastātsaṅghacāriṇaḥ / jayāvahā vinirdiṣṭāḥ paścānnidhanakāriṇaḥ

हिन्दी अर्थ

श्रियः । स्तुतिः कृता तथा राजा जयार्थं स्तुतिमाचरेत् ॥

English

At a force's march, all those going in front in flocks are declared victory-bringing; those behind cause death.

अध्याय 229

श्लोक 21

गृहाद्गम्य यदा चासो व्याहरेत् पुरुतः स्थितः ।नृपावमानं वदति वामः कलहभोजने

gṛhādgamya yadā cāso vyāharet purutaḥ sthitaḥ / nṛpāvamānaṃ vadati vāmaḥ kalahabhojane

हिन्दी अर्थ

नमस्ये सर्वलोकानां जननीमब्धिसम्भवाम् । श्रियमुन्निद्रपदमाक्षीं विष्णुवक्षःस्थलस्थिताम्॥

English

When a crow, having gone from the house, calls standing in front, it announces the king's insult; on the left, a quarrel at meals;

अध्याय 229

श्लोक 22

याने तद्दर्शनं शस्तं सव्यमङ्गस्य वाप्यथ ।चौरैर् मोषमथाख्याति मयूरो भिन्ननिस्वनः

yāne taddarśanaṃ śastaṃ savyamaṅgasya vāpyatha / caurair moṣamathākhyāti mayūro bhinnanisvanaḥ

हिन्दी अर्थ

त्वं सिद्धिस्त्वं स्वधा स्वाहा सुधा त्वं लोकपावनि । संध्या रात्रिः प्रभा भूतिर्मेधा श्रद्धा सरस्वती ॥

English

on a journey its sight is praised, or on the left side of the body. A peacock with broken sound announces robbery by thieves.

अध्याय 229

श्लोक 23

प्रयातस्याग्रतो राम मृगः प्राणहरो भवेत् ।ऋक्षाखुजम्बुकव्याघ्रसिंहमार्जारगर्दभाः

prayātasyāgrato rāma mṛgaḥ prāṇaharo bhavet / ṛkṣākhujambukavyāghrasiṃhamārjāragardabhāḥ

हिन्दी अर्थ

यज्ञविद्या महाविद्या गुह्यविद्या च शोभने । आत्मविद्या च देवि त्वं विमुक्तिफलदायिनी ॥

English

A deer in front of one who has set out, Rama, may take life. Bear, rat, jackal, tiger, lion, cat, ass

अध्याय 229

श्लोक 24

प्रतिलोमास् तथा राम खरश् च विकृत्रस्वनः ।वामः कपिञ्जलः श्रेष्ठस् तथा दक्षिणसंस्थितः

pratilomās tathā rāma kharaś ca vikṛtrasvanaḥ / vāmaḥ kapiñjalaḥ śreṣṭhas tathā dakṣiṇasaṃsthitaḥ

हिन्दी अर्थ

आन्वीक्षिकी त्रयी वार्ता दण्डनीतिस्त्वमेव च। सौम्या सौम्यं जगद्रूपं त्वयैतद्देवि पूरितम्॥ का त्वन्या त्वामृते देवि सर्वयज्ञमयं वपुः। अध्यास्ते देवदेवस्य योगिचिन्त्यं गदाभृतः ॥ त्वया देवि परित्यक्तं सकलं भुवनत्रयम् । विनष्टप्रायमभवत् त्वयेदानीं समेधितम्॥

English

in reverse, Rama, and an ass with a distorted voice; the kapinjala on the left is best, and likewise standing on the right;

अध्याय 229

श्लोक 25

पृष्ठतो निन्दितफलस्तित्तिरिस्तु न शस्यते ।एणा वराहाः पृषता वामा भूत्वा तु दक्षिणाः

pṛṣṭhato ninditaphalastittiristu na śasyate / eṇā varāhāḥ pṛṣatā vāmā bhūtvā tu dakṣiṇāḥ

हिन्दी अर्थ

सुखम् । देवि त्वद्दृष्टिदृष्टानां पुरुषाणां न दुर्लभम्॥ देवदेवो हरि: पिता । त्वयैतद् विष्णुना चाम्ब जगद् व्याप्तं चराचरम् ॥ मानं कोषं तथा कोष्ठं मा गृहं मा परिच्छदम् । मा शरीरं कलत्रं च त्यजेथाः सर्वपावनि॥ मा पुत्रान् मा सुहद्वर्गान् मा पशून् मा विभूषणम् । त्यजेथा मम देवस्य विष्णोर्वक्षःस्थलालये॥

English

from behind it has a censured fruit; the partridge is not praised. Deer, boars and spotted deer, being on the left and then on the right,

अध्याय 229

श्लोक 26

भवन्त्यर्थकरा नित्यं विपरीता विगर्हिताः ।वृषाश्वजम्बुकव्याघ्राः सिंहमार्जारगर्दभाः(१)

bhavantyarthakarā nityaṃ viparītā vigarhitāḥ / vṛṣāśvajambukavyāghrāḥ siṃhamārjāragardabhāḥ(1)

हिन्दी अर्थ

त्वयावलोकिताः सद्यः

English

always bring wealth; the reverse are censured. Bull, horse, jackal, tiger, lion, cat and ass

अध्याय 229

श्लोक 27

वाञ्छितार्थकरा ज्ञेया दक्षिणाद्वामतो गताः ।शिवा श्यामाननाच्छूच्छूः पिङ्गला गृहगोधिका

vāñchitārthakarā jñeyā dakṣiṇādvāmato gatāḥ / śivā śyāmānanācchūcchūḥ piṅgalā gṛhagodhikā

हिन्दी अर्थ

सद्यो वैगुण्यमायान्ति शीलाद्याः सकला गुणाः । पराङ्मुखी जगद्धात्री यस्य त्वं विष्णुवल्लभे ॥ न ते वर्णयितुं शक्ता गुणान् जिह्वापि वेधसः । प्रसीद देवि पद्माक्षि मास्मांस्त्याक्षीः कदाचन॥

English

are to be known as granters of the desired when going from right to left. Jackal-woman, shyamanana, chuchchu, pingala, house-lizard,

अध्याय 229

श्लोक 28

शूकरी परपुष्टा च पुन्नामानश् च वामतः ।१ प्रतिलोमास्तथेत्यादिः, सिंहमार्जारगर्दभा इत्य् अन्तः पाठः ज॥ भ॥ पुस्तकद्वये नास्ति :प् ३३७ स्त्रीसञ्ज्ञा भासकारूषकपिश्रीकर्णश्छित्कराः

śūkarī parapuṣṭā ca punnāmānaś ca vāmataḥ / 1 pratilomāstathetyādiḥ, siṃhamārjāragardabhā ity antaḥ pāṭhaḥ ja.. bha.. pustakadvaye nāsti :p 337 strīsañjñā bhāsakārūṣakapiśrīkarṇaśchitkarāḥ

हिन्दी अर्थ

स्वस्तोत्रपाठश्रवणकर्तृणां

English

sow, cuckoo and masculine-named ones on the left; feminine-named: bhasa, karusha, kapishrikarna, chhitkara;

अध्याय 229

श्लोक 29

कपिश्रीकर्णपिप्यीका(१) रुरुश्येनाश् च दक्षिणाः ।जातीक्षाहिशशक्रोडगोधानां कीर्तनं शुभं

kapiśrīkarṇapipyīkā(1) ruruśyenāś ca dakṣiṇāḥ / jātīkṣāhiśaśakroḍagodhānāṃ kīrtanaṃ śubhaṃ

हिन्दी अर्थ

(अग्निपुराण २३७। १-१९) श्रीरामके द्वारा उपदिष्ट राजनीति

English

kapishrikarna, pipyika, ruru and hawks on the right. Mention of jati, iksha, snake, hare, boar and iguana is auspicious;

अध्याय 229

श्लोक 30

ततः सन्दर्शनं नेष्टं प्रतीपं वानरर्क्षयोः ।कार्यकृद्बली शकुनः प्रस्थितस्य हि यो ऽन्वहं

tataḥ sandarśanaṃ neṣṭaṃ pratīpaṃ vānararkṣayoḥ / kāryakṛdbalī śakunaḥ prasthitasya hi yo 'nvahaṃ

हिन्दी अर्थ

अग्निदेव कहते हैं-- वसिष्ठ! मैंने तुमसे पुष्करकी कही हुई नीतिका वर्णन किया है। अब तुम लक्ष्मणके प्रति श्रीरामचन्द्रद्वारा कही गयी विजयदायिनी नीतिका निरूपण सुनो। यह धर्म

English

then their sight is not wanted; reversed for monkey and bear. An omen that does the work and is powerful, for one who has set out, daily,

अध्याय 229

श्लोक 31

भवेत्तस्य फलं वाच्यं तदेव दिवसं बुधैः ।मता भक्ष्यार्थिनो बाला वैरसक्तास्तथैव च

bhavettasya phalaṃ vācyaṃ tadeva divasaṃ budhaiḥ / matā bhakṣyārthino bālā vairasaktāstathaiva ca

हिन्दी अर्थ

आदिको बढानेवाली है श्रीराम कहते हैं — लक्ष्मण! न्याय (धान्यका छठा भाग लेने आदि)-के द्वारा धनका अर्जन करना, अर्जित किये हुए धनको व्यापार आदि द्वारा बढ़ाना, उसकी स्वजनों और परजनोंसे रक्षा करना

English

its fruit should be told by the wise on that very day. Children seeking food and those attached to enmity are considered thus,

अध्याय 229

श्लोक 32

सीमान्तमभ्यन्तरिता विज्ञेया निष्फला द्विज ।एकद्वित्रिचतुर्भिस्तु शिवा धन्या रुतैर् भवेत्

sīmāntamabhyantaritā vijñeyā niṣphalā dvija / ekadvitricaturbhistu śivā dhanyā rutair bhavet

हिन्दी अर्थ

तथा उसका सत्पात्रमें नियोजन करना (यज्ञादिमें तथा प्रजापालनमें लगाना एवं गुणवान् पुत्रको सौंपना) -- ये राजाके चार प्रकारके व्यबहार बताये गये हैं। (राजा नय और पराक्रमसे सम्पन्न एवं भलीभाँति

English

and those on the border within are to be known as fruitless, twice-born. A jackal-woman with one, two, three or four cries is fortunate;

अध्याय 229

श्लोक 33

पञ्चभिश् च तथा षड्भिरधन्या परिकीर्तिता ।सप्तभिश् च तथा धन्या निष्फला परतो भवेत्

pañcabhiś ca tathā ṣaḍbhiradhanyā parikīrtitā / saptabhiś ca tathā dhanyā niṣphalā parato bhavet

हिन्दी अर्थ

उद्योगशील होकर स्वमण्डल एवं परमण्डलकी लक्ष्मीका चिन्तन करे।) नयका मूल है विनय और विनयकी प्राप्ति होती है, शास्त्रके निश्चयसे। इन्द्रिय-जयका ही नाम विनय है जो उस विनयसे युक्त होता है, वही शास्त्रोंको प्राप्त करता है। (जो शास्त्रमें निष्ठा रखता है, उसीके हृदयमें शास्त्रके अर्थ (तत्त्व) स्पष्टतया प्रकाशित होते हैं । ऐसा होनेसे स्वमण्डल और परमण्डलको श्री?

English

with five and likewise six she is declared unfortunate; with seven fortunate; beyond that fruitless.

अध्याय 229

श्लोक 34

नृणां रोमाञ्चजननी वाहनानां भयप्रदा ।ज्वालानला सूर्यमुखी विज्ञेया भयवर्धनी

nṛṇāṃ romāñcajananī vāhanānāṃ bhayapradā / jvālānalā sūryamukhī vijñeyā bhayavardhanī

हिन्दी अर्थ

प्रसन्न (निष्कण्टकरूपसे प्राप्त) होती है उसके लिये लक्ष्मी अपना द्वार खोल देती हैं)

English

One producing horripilation in men and fear in vehicles — fire-flame, sun-faced — is to be known as increasing fear.

अध्याय 229

श्लोक 35

प्रथमं सारङ्गे दृष्टे शुभे देशे शुभं वदेत् ।संवत्सरं मनुष्यस्य अशुभे च शुभं तथा

prathamaṃ sāraṅge dṛṣṭe śubhe deśe śubhaṃ vadet / saṃvatsaraṃ manuṣyasya aśubhe ca śubhaṃ tathā

हिन्दी अर्थ

शास्त्रज्ञान, आठः गुणोंसे युक्त बुद्धि, धृति (उद्वेगका अभाव), दक्षता (आलस्यका अभाव), प्रगल्भता (सभामें बोलने या कार्य करनेमें भय अथवा संकोचका न होना), धारणशीलता (जानी- सुनी बातको भूलने न देना), उत्साह (शौर्यादि गुणः), प्रवचन-शक्ति, दूढ़ता (आपत्तिकालमें क्लेश सहन करनेकी क्षमता), प्रभाव (प्रभु-शक्ति),

English

When a sarnga is first seen in an auspicious place one should say good; for a man for a year; and in inauspicious, good likewise;

अध्याय 229

श्लोक 36

तथाविधन्नरः पश्येत्सारङ्गं प्रथमे ऽहनि ।आत्मनश् च तथात्वेन ज्ञातव्यं वत्सरं फलं

tathāvidhannaraḥ paśyetsāraṅgaṃ prathame 'hani / ātmanaś ca tathātvena jñātavyaṃ vatsaraṃ phalaṃ

हिन्दी अर्थ

शुचिता (विविध उपायोंद्वारा परीक्षा लेनेसे सिद्ध हुई आचार-विचारको शुद्धि), मैत्री (दूसरोंको अपने प्रति आकृष्ट कर लेनेका गुण), त्याग (सत्पात्रको दान देना), सत्य (प्रतिज्ञापालन),

English

so a man should see the sarnga on the first day; and by one's own being so the year's fruit should be known.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।