Agni Purana
264
अध्याय 264 / 381

Adhyaya 265

20 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ20 श्लोक

अध्याय 264

श्लोक 1

विनायकस्नानं पुष्कर उवाच विनायकोपसृष्टानां स्नानं सर्वकरं वदे ।विनायकः कर्मविघ्नसिद्ध्यर्थं विनियोजितः

vināyakasnānaṃ puṣkara uvāca vināyakopasṛṣṭānāṃ snānaṃ sarvakaraṃ vade / vināyakaḥ karmavighnasiddhyarthaṃ viniyojitaḥ

हिन्दी अर्थ

हुए। ये ' दशाह ' नामसे भी प्रसिद्ध थे। दशार्हके पुत्र व्योम और व्योमके पुत्र जीमूत कहे जाते हैं। जीमूतके पुत्रका नाम विकल हुआ और उनके पुत्र भीमरथ नामसे प्रसिद्ध हुए। भीमरथसे नवरथ और नवरथसे इृढ्रथ हुए। दृढ्रथसे शकुन्ति तथा शकुन्तिसे करम्भ उत्पन्न हुए। करम्भसे देवरातका जन्म हुआ। देवरातके पुत्र देवक्षेत्र कहलाये । देवक्षेत्रसे मधु नामक पुत्र उत्पन्न हुआ और मधुसे द्रवरसने

English

O Brahmin! Water for washing the feet (should be offered) with the three (hymns beginning with) hiraiyamrr. Water for sipping ( is offered with the recitation of the hymn) ianna 3po and for bathing with (the hymn) idam&paht.

अध्याय 264

श्लोक 2

गणानामाधिपत्ये च केशवेशपितामहैः ।स्वप्नेवगाहते ऽत्यर्थं जलं मुण्डांश् च पश्यति

gaṇānāmādhipatye ca keśaveśapitāmahaiḥ / svapnevagāhate 'tyarthaṃ jalaṃ muṇḍāṃś ca paśyati

हिन्दी अर्थ

जन्म ग्रहण किया। द्रवरसके पुरुहूत और पुरुहूतके पुत्र जन्तु थे। जन्तुके पुत्रका नाम सात्वत था। ये यदुवंशियोंमें गुणवान् राजा थे। सात्वतके भजमान, वृष्णि, अन्धक तथा देवावृध --ये चार पुत्र हुए।

English

Perfumes (are offered) with the three (hymns) rathe akse and dress with (the hynm) ytwa. Flowers (are given) with ( the recitation of the hymn ) pufpavatify' and • incense with ( the hymn ) dhupo*si.

अध्याय 264

श्लोक 3

विनायकोपसृष्टस्तु क्रव्यादानधिरोहति ।व्रजमानस् तथात्मानं मन्यते ऽनुगतम्परैः

vināyakopasṛṣṭastu kravyādānadhirohati / vrajamānas tathātmānaṃ manyate 'nugatamparaiḥ

हिन्दी अर्थ

इन चारोंके वंश विख्यात हैं। भजमानके बाह्य, वृष्टि, कृमि और निमि नामक पुत्र हुए। देवावृधसे बभ्रुका जन्म हुआ। उनके विषयमें इस श्लोकका गान किया जाता है-- हम जैसा दूरसे सुनते हैं, वैसा ही निकटसे देखते भी हैं। बभ्रु मनुष्योंमें श्रेष्ठ हैं और देवावृध देवताओंके समान हैं।' बश्रुके चार पुत्र हुए। वे सभी भगवान् वासुदेवके भक्त थे। उनके नाम हैं कुकुर, भजमान, शिनि

English

RV. 10.9.1a.

अध्याय 264

श्लोक 4

विमना विफलारम्भः संसीदत्यनिमित्ततः ।कन्या वरं न चाप्नोति न चापत्यं वराङ्गना

vimanā viphalārambhaḥ saṃsīdatyanimittataḥ / kanyā varaṃ na cāpnoti na cāpatyaṃ varāṅganā

हिन्दी अर्थ

और कम्बलबर्हिष। कुकुरके धृष्णु नामक पुत्र हुए। धृष्णुसे धृति नामवाले पुत्रकी उत्पत्ति हुई। धृतिसे कपोतरोमा और उनके पुत्र तित्तिरि हुए। तित्तिरिके पुत्र नर और उनके पुत्र आनकदुन्दुभि

English

RV.Kh. 5-87.1a.

अध्याय 264

श्लोक 5

आचार्यत्वं श्रोत्रियश् च न शिष्यो ऽध्ययनं लभेत् ।धनी न लाभमाप्नोति न कृषिञ्च कृषीबलः

ācāryatvaṃ śrotriyaś ca na śiṣyo 'dhyayanaṃ labhet / dhanī na lābhamāpnoti na kṛṣiñca kṛṣībalaḥ

हिन्दी अर्थ

नामसे विख्यात हुए। आनकदुन्दुभिकी परम्परामें पुनर्वसु और उनके पुत्र आहुक हुए। ये आहुकीके गर्भसे उत्पन्न हुए थे। आहुकसे देवक और उग्रसेन हुए। देवकसे देववान्, उपदेव, सहदेव और देवरक्षित-ये चार पुत्र हुए। इनकी सात बहिनें थीं, जिनका देवकने वसुदेवके साथ ब्याह कर

English

AV. 1.6.4a.

अध्याय 264

श्लोक 6

राजा राज्यं न चाप्नोति स्नपनन्तस्य कारयेत् ।हस्तपुष्याश्वयुक्सौम्ये वैष्णवे भद्रपीठके(१)

rājā rājyaṃ na cāpnoti snapanantasya kārayet / hastapuṣyāśvayuksaumye vaiṣṇave bhadrapīṭhake(1)

हिन्दी अर्थ

दिया। उन सातोंके नाम हैं-देवकी, श्रुतदेवी, मित्रदेवी, यशोधरा, श्रीदेवी, सत्यदेवी और सातवीं सुरापी। उग्रसेनके नौ पुत्र हुए, जिनमें कंस ज्येष्ठ था। शेष आठ पुत्रोंके नाम इस प्रकार हैं-

English

RV. 1.23.22a.

अध्याय 264

श्लोक 7

गौरसर्षपकल्केन साज्येनोत्सादितस्य च(२) ।सर्वौषधैः सर्वगन्धैः प्रलिप्तशिरसस् तथा

gaurasarṣapakalkena sājyenotsāditasya ca(2) / sarvauṣadhaiḥ sarvagandhaiḥ praliptaśirasas tathā

हिन्दी अर्थ

न्यग्रोध, सुनामा, कङ्क, राजा शङ्क, सुतनु, राष्ट्रपाल, युद्धमुष्टि और सुमुष्टिक। भजमानके पुत्र विदूरथ हुए, जो रथियोंमें प्रधान थे। उनके पुत्र राजाधिदेव और शूर नामसे विख्यात हुए। राजाधिदेवके दो पुत्र हुए शोणाश्व और श्वेतवाहन। शोणाश्वके शमी और शत्रुजित् आदि पाँच पुत्र हुए। शमीके पुत्र प्रतिक्षेत्र, प्रतिक्षेत्रके भोज और भोजके हृदिक हुए। हृदिकके दस पुत्र थे, जिनमें कृतवर्मा,

English

Rathe akfefu, AV. 6.38.3m.

अध्याय 264

श्लोक 8

चतुर्भिः कलसैः स्नानन्तेषु सर्वौषाधौ क्षिपेत् ।अश्वस्थानाद्गजस्थानाद्वल्मीकात् सङ्गमाद्ध्रदात्

caturbhiḥ kalasaiḥ snānanteṣu sarvauṣādhau kṣipet / aśvasthānādgajasthānādvalmīkāt saṅgamāddhradāt

हिन्दी अर्थ

शतधन्वा, देवाह और भीषण आदि प्रधान हैं। देवारह॑से कम्बलबर्हि और कम्बलबर्हिसे असमौजाका जन्म हुआ। असमौजाके सुदंष्ट, सुवास और धृष्ट नामक पुत्र हुए। धृष्टकी दो पत्नियाँ थीं-गान्धारी

English

Gf. Bloomfield, Vedie Concordance p -93.

अध्याय 264

श्लोक 9

मृत्तिकां रोचनाङ्गन्धङ्गुग्गुलुन्तेषु निक्षिपेत् ।सहस्राक्षं शतधारमृषिभिः पावनं कृतम्

mṛttikāṃ rocanāṅgandhaṅguggulunteṣu nikṣipet / sahasrākṣaṃ śatadhāramṛṣibhiḥ pāvanaṃ kṛtam

हिन्दी अर्थ

और माद्री। इनमें गान्धारीसे सुमित्रका जन्म हुआ और माद्रीने युधाजितूको उत्पन्न किया। धृष्टसे अनमित्र और शिनिका भी जन्म हुआ। शिनिसे देवमीढुष उत्पन्न हुए। अनमित्रके पुत्र निघ्न और निध्नके प्रसेन तथा सत्राजित् हुए। इनमें प्रसेनके भाई सत्राजित्को सूर्यसे स्यमन्तकमणि प्राप्त हुई थी, जिसे लेकर प्रसेन जंगलमें मृगयाके लिये विचर रहे थे। उन्हें एक

English

RV. 10.97-3b.

अध्याय 264

श्लोक 10

तेन त्वामभिषिञ्चामि पावमान्यः(३) पुनन्तु ते ।भगवन्ते वरुणो राजा भगं सूर्यो वृहस्पतिः

tena tvāmabhiṣiñcāmi pāvamānyaḥ(3) punantu te / bhagavante varuṇo rājā bhagaṃ sūryo vṛhaspatiḥ

हिन्दी अर्थ

सिंहने मारकर वह मणि ले ली। तत्पश्चात् जाम्बवानूने उस सिंहको मार डाला (और मणिको अपने अधिकारमें कर लिया)। इसके बाद भगवान् श्रीकृष्णने जाम्बवानूको युद्धमें परास्त किया और

English

Of. dkar asi. Tail. Sam. 1. 1.4.1.

अध्याय 264

श्लोक 11

भगमिन्द्रश् च वायुश् च भगं सप्तर्षयो ददुः ।यत्ते केशेषु दौर्भाग्यं सीमन्ते यच्च मूर्धनि

bhagamindraś ca vāyuś ca bhagaṃ saptarṣayo daduḥ / yatte keśeṣu daurbhāgyaṃ sīmante yacca mūrdhani

हिन्दी अर्थ

उनसे जाम्बवती तथा मणिको पाकर वे द्वारकापुरीको लौट आये। वहाँ आकर उन्होंने वह मणि सत्राजितूको दे दी, किंतु (मणिके लोभसे) शतधन्वाने सत्राजित॒को मार डाला। श्रीकृष्णने शतधन्वाको मारकर वह मणि छीन ली और यशके भागी हुए। उन्होंने बलराम और मुख्य यदुवंशियोके सामने वह

English

In the absence of an image (of Lord Vi?Eiu) ( the deity should be invoked) on the altar or in water or - in 'a pot full (with water) or on the banks of a river or in a lotus. One would thus accomplish the propitiation by worshipping (lord) Vi§nu.

अध्याय 264

श्लोक 12

ललाटे कर्णयोरक्ष्णोरापस्तद्घ्नन्तु सर्वदा ।दर्भपिञ्जलिमादाय वामहस्ते ततो गुरुः

lalāṭe karṇayorakṣṇorāpastadghnantu sarvadā / darbhapiñjalimādāya vāmahaste tato guruḥ

हिन्दी अर्थ

मणि अङ्रूरको अर्पित कर दी। इससे श्रीकृष्णके मिथ्या कलङ्कका मार्जन हुआ। जो इस प्रसङ्गका पाठ करता है, उसे स्वर्गकी प्राप्ति होती है। सत्राजित्को भङ्गकार नामसे प्रसिद्ध पुत्र और

English

Tait. Sam. 1.1.10.3

अध्याय 264

श्लोक 13

१ हस्तपुष्याश्वयुक्सौम्यवैष्णवेषु शुभेषु चेति घ॥ , ञ॥ च २ साज्येनासादितस्य चेति क॥ , छ॥ च ३ इमा आप इति छ॥ , ञ॥ :प् ४७० स्नातस्य सार्षपन्तैलं श्रुवेणौडुम्बरेण च ।जुहुयान्मूर्धनि कुशान् सव्येन परिगृह्य च

1 hastapuṣyāśvayuksaumyavaiṣṇaveṣu śubheṣu ceti gha.. , ña.. ca 2 sājyenāsāditasya ceti ka.. , cha.. ca 3 imā āpa iti cha.. , ña.. :p 470 snātasya sārṣapantailaṃ śruveṇauḍumbareṇa ca / juhuyānmūrdhani kuśān savyena parigṛhya ca

हिन्दी अर्थ

सत्यभामा नामकी कन्या हुई, जो भगवान् श्रीकृष्णकी प्यारी पटरानी हुई थी। अनमित्रसे शिनिका जन्म हुआ। शिनिके पुत्र सत्यक हुए। सत्यकसे सात्यकिकी उत्पत्ति हुई। वे “युयुधान' नामसे भी प्रसिद्ध थे। उनके धुनि नामक पुत्र हुआ। धुनिका पुत्र युगन्धर हुआ। युधाजित्से स्वाह्यका जन्म हुआ। स्वाह्यसे ऋषभ और क्षेत्रकी उत्पत्ति हुई। ऋषभसे श्वफल्क उत्पन्न हुए। श्वफल्कके पुत्रका

English

CSonsisting of curd, clarified butter, water, honey and candied sugar.

अध्याय 264

श्लोक 14

मितश् च सम्मितश् चैव तथा शालककण्टकौ ।कुष्माण्डो राजपुत्रश् च एतैः स्वाहासमन्वितैः

mitaś ca sammitaś caiva tathā śālakakaṇṭakau / kuṣmāṇḍo rājaputraś ca etaiḥ svāhāsamanvitaiḥ

हिन्दी अर्थ

नाम अक्रूर हुआ और अक्रूरसे सुधन्वकका जन्म

English

Cf. AV. 20.127.9b and TB. 3.7.6.13.

अध्याय 264

श्लोक 15

नामभिर्बलिमन्त्रैश् च नमस्कारसमन्वितैः(१) ।दद्याच्चतुष्पथे शूर्पे कुशानास्तीर्य सर्वतः

nāmabhirbalimantraiś ca namaskārasamanvitaiḥ(1) / dadyāccatuṣpathe śūrpe kuśānāstīrya sarvataḥ

हिन्दी अर्थ

हुआ। शूरसे वसुदेव आदि पुत्र तथा पृथा नामवाली कन्या उत्पन्न हुई, जो महाराज पाण्डुकी प्यारी पत्नी हुई। पाण्डुकी पत्नी कुन्ती (पृथा)-के गर्भ और धर्मके अंशसे युधिष्ठिर हुए, वायुके अंशसे भीमसेन और इन्द्रके अंशसे अर्जुनका जन्म हुआ। (पाण्डुकी दूसरी पल्ली) माद्रीके पेटसे (अश्विनीकुमारोंके अंशसे) नकुल और सहदेव उत्पन्न हुए। वसुदेवसे रोहिणीके गर्भसे बलराम,

English

RV. 10.121.1a.

अध्याय 264

श्लोक 16

कृताकृतांस्तण्डुलांश् च पललौदनमेव च ।मत्स्यान्पङ्कांस्तथैवामान् पुष्पं चित्रं सुरां त्रिधा

kṛtākṛtāṃstaṇḍulāṃś ca palalaudanameva ca / matsyānpaṅkāṃstathaivāmān puṣpaṃ citraṃ surāṃ tridhā

हिन्दी अर्थ

सारण और दुर्गम -ये तीन पुत्र हुए तथा देवकीके उदरसे पहले सुषेणका जन्म हुआ, फिर कीर्तिमान्, भद्रसेन, जारुख्य, विष्णुदास और भद्रदेह उत्पन्न हुए। इन छहों बच्चोंको कंसने मार डाला।

English

RV. 10.90.1a.

अध्याय 264

श्लोक 17

मूलकं पूरिकां पूपांस्तथैवैण्डविकास्रजः ।दध्यन्नं पायसं पिष्टं मोदकं गुडमर्पयेत्

mūlakaṃ pūrikāṃ pūpāṃstathaivaiṇḍavikāsrajaḥ / dadhyannaṃ pāyasaṃ piṣṭaṃ modakaṃ guḍamarpayet

हिन्दी अर्थ

तत्पश्चात् बलराम और कृष्णका प्रादुर्भाव हुआ तथा अन्तमें कल्याणमय वचन बोलनेवाली सुभद्राका जन्म हुआ। भगवान् श्रीकृष्णसे चारुदेष्ण और साम्ब आदि पुत्र उत्पन्न हुए। साम्ब आदि रानी जाम्बवतीके पुत्र थे

English

This and the following three are different celestial gods.

अध्याय 264

श्लोक 18

विनायकस्य जननीमुपतिष्ठेत्ततो ऽम्बिकां ।दूर्वासर्षपपुष्पाणां दत्वार्घ्यं पूर्णमञ्जलिं

vināyakasya jananīmupatiṣṭhettato 'mbikāṃ / dūrvāsarṣapapuṣpāṇāṃ datvārghyaṃ pūrṇamañjaliṃ

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार आदि आग्रेय महापुराणमें “यढुवंशका वर्णन” नामक दो सौ पचहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

A particular group of deities ten in number and supposed to be sons ofVisvli.

अध्याय 264

श्लोक 19

रूपं देहि यशो देहि सौभाग्यं सुभगे मम ।पुत्रं देहि धनं देहि सर्वान् कामांश् च देहि मे

rūpaṃ dehi yaśo dehi saubhāgyaṃ subhage mama / putraṃ dehi dhanaṃ dehi sarvān kāmāṃś ca dehi me

हिन्दी अर्थ

श्रीकृष्णकी पत्नियों तथा पुत्रोंके संक्षेपसे नामनिर्देश तथा अग्निदेव कहते हैं- वसिष्ठ! महर्षि कश्यप वसुदेवके रूपमें अवतीर्ण हुए थे और नारियोंमें श्रेष्ठ अदितिका देवकीके रूपमें आविर्भाव हुआ था। वसुदेव और देवकोसे भगवान् श्रीकृष्णका

English

A female deity. The physician of the gods.

अध्याय 264

श्लोक 20

भोजयेद्ब्राह्मणान्दद्याद्वस्त्रयुग्मं गुरोरपि ।विनायकं ग्रहान्प्रार्च्य श्रियं कर्मफलं लभेत्

bhojayedbrāhmaṇāndadyādvastrayugmaṃ gurorapi / vināyakaṃ grahānprārcya śriyaṃ karmaphalaṃ labhet

हिन्दी अर्थ

प्रादुर्भाव हुआ। वे बड़े तपस्वी थे। धर्मको रक्षा, अधर्मका नाश, देवता आदिका पालन तथा हैत्य आदिका मर्दन-यही उनके अवतारका उद्देश्य

English

The deity that presides over the foundation of a house.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

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