Agni Purana
277
अध्याय 277 / 381

Adhyaya 278

63 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ63 श्लोक

अध्याय 277

श्लोक 1

सिद्धौषधानि अग्निर् उवाच आयुर्वेदं प्रवक्ष्यामि सुश्रुताय यमब्रवीत् ।देवो धन्वन्तरिः सारं मृतसञ्जीवनीकरं

siddhauṣadhāni agnir uvāca āyurvedaṃ pravakṣyāmi suśrutāya yamabravīt / devo dhanvantariḥ sāraṃ mṛtasañjīvanīkaraṃ

हिन्दी अर्थ

अशुभ होते हैं । शुक, इन्द्रगोप (बीरवधूटी), एवं चन्द्रमाके समान कान्तिसे युक्त, काकवर्ण, सुवर्णवर्ण तथा चिकने घोड़े सहैव प्रशस्त माने जाते हैं। जिन राजाओंके पास लंबी ग्रीवावाले, भीतरको

English

Gandhara(was born) from Gandira. The mighty five peoples — Gandharas, Keralas, Colas, Pandyas and Kolas (were born) then.

अध्याय 277

श्लोक 2

सुश्रुत उवाच आयुर्वेदं मम ब्रूहि नराश्वेभरुगर्दनम् ।सिद्धयोगान्सिद्धमन्त्रान्मृतसञ्जीवनीकरान्

suśruta uvāca āyurvedaṃ mama brūhi narāśvebharugardanam / siddhayogānsiddhamantrānmṛtasañjīvanīkarān

हिन्दी अर्थ

ओर धँसी आँखवाले, छोटे कानवाले, किंतु देखनेमें मनोहर घोड़े हों, वहाँ विजयको अभिलाषा शुभप्रद होते हैं; परंतु यदि उचित पालन न हो तो दुःखप्रद होते हैं। घोड़े लक्ष्मीके पुत्र, गन्धर्वरूपमें पृथ्वीके उत्तम रत्न हैं। अश्वमेधमें पवित्र होनेके कारण ही अश्वका उपयोग किया

English

Druhyu and Babhrusetu (were the sons of Gandhara). Purovasu(was born) from Babhruselu. Then Gandhara (was born) and Dharma from Gandhara. Ghrta was (born) from Dharma.

अध्याय 277

श्लोक 3

धन्वन्तरिर् उवाच रक्षन् बलं हि ज्वरितं लङ्घितं भोजयेद्भिषक् ।सविश्वं लाजमण्डन्तु तृड्ज्वरान्तं शृतं जलम्

dhanvantarir uvāca rakṣan balaṃ hi jvaritaṃ laṅghitaṃ bhojayedbhiṣak / saviśvaṃ lājamaṇḍantu tṛḍjvarāntaṃ śṛtaṃ jalam

हिन्दी अर्थ

जाता है ॥ ६-१० ३॥

English

Vidu.sa (was born) from Ghrta. Pracetas (was born) from him. He had a hundred sons (among whom) Anadra, Sabhanara, Caksusa and Paramcuka (were foremost).

अध्याय 277

श्लोक 4

मुस्तपर्पटकोशीरचन्दनोदीच्यनागरैः ।षडहे च व्यतिक्रान्ते तित्तकं पाययेद्ध्रुवं

mustaparpaṭakośīracandanodīcyanāgaraiḥ / ṣaḍahe ca vyatikrānte tittakaṃ pāyayeddhruvaṃ

हिन्दी अर्थ

मधुके साथ अड्सा, नीमकी छाल, बड़ी कटेरी और गिलोय--इनकी पिण्डी तथा सिरका स्वेद-ये नासिकामलको नाश करनेवाले हैं। हींग, पीकरमूल, सोंठ, अम्लवेत, पीपल तथा सैन्धवलवण-ये गरम जलके साथ देनेपर शूलका नाश करते हैं। सोंठ, अतीस, मोथा, अनन्तमूल या दूब और बेल--इनका क्राथ घोड़ेको पिलाया

English

Kalanala (was born) from Sabhanara. Sriijaya, was

अध्याय 277

श्लोक 5

स्नेहयेत्तक्तदोषन्तु(१) ततस्तञ्च विरेचयेत् ।जीर्णाः षष्टिकनीवाररक्तशालिप्रमोदकाः

snehayettaktadoṣantu(1) tatastañca virecayet / jīrṇāḥ ṣaṣṭikanīvāraraktaśālipramodakāḥ

हिन्दी अर्थ

जाय तो वह उसके सभी प्रकारके अतिसारको नष्ट करता है। प्रियङ्गु, कालीसर तथा पर्याप्त शर्करासे युक्त बकरीका गरम किया हुआ दूध पी लेनेपर घोड़ेकी थकावट दूर हो जाती है।

English

Prthudarbha, Viraka, Kaikcya and Bhadraka were the four sons of Sibi. There were prosperous regions in their names.

अध्याय 277

श्लोक 6

तद्विधास्ते ज्वरेष्विष्टा यवानां विकृतिस् तथा ।मुद्गा मसूराश् च णकाः कुलत्थाश् च सकुष्ठकाः

tadvidhāste jvareṣviṣṭā yavānāṃ vikṛtis tathā / mudgā masūrāś ca ṇakāḥ kulatthāś ca sakuṣṭhakāḥ

हिन्दी अर्थ

अश्वको द्रोणीमें तैलबस्ति देनी चाहिए अथवा कोष्ठमें उत्पन्न शिराओंका वेधन करना चाहिए। इससे उसको सुख प्राप्त होता है अनारको छाल, त्रिफला, त्रिकटु तथा गुड् इनको सम मात्रामें ग्रहण करके इनका पिण्ड बनाकर घोड़ेको दे। यह अश्वोंको कृशताको दूर करनेवाला है। घोड़ा प्रियङ्गु, लोध तथा मधुके

English

Given as two separate names and subsequent names also differ. See Vi. P. IV. 17.

अध्याय 277

श्लोक 7

१ पक्वदोषन्त्विति ञ॥ :प् २८ आटक्यो नारकाद्याश् च कर्कोटककतोल्वकम् ।पटोलं सफलं निम्बं पर्पटं दाडिमं ज्वरे

1 pakvadoṣantviti ña.. :p 28 āṭakyo nārakādyāś ca karkoṭakakatolvakam / paṭolaṃ saphalaṃ nimbaṃ parpaṭaṃ dāḍimaṃ jvare

हिन्दी अर्थ

साथ अडूसेके रस या पञ्चकोलादि (पीपल, पीपलामूल, चव्य, चीता तथा सोंठ) युक्त दुग्धका पान करे तो वह कासरोगसे मुक्त हो जाता है। प्रस्कन्ध (छलाँग आदि दौड्)-से हुए सभी

English

Satyaratha (was born) from Citraratha. Lomapada (was) his son. Caturahga (was born) from Lomapada. Prthu- laksa (was) his son.

अध्याय 277

श्लोक 8

अधोगे वमनं शस्तमूर्ध्वगे च विरेचनम् ।रक्तपित्ते तथा पानं षडङ्गं शुण्ठिवर्जितम्

adhoge vamanaṃ śastamūrdhvage ca virecanam / raktapitte tathā pānaṃ ṣaḍaṅgaṃ śuṇṭhivarjitam

हिन्दी अर्थ

प्रकारके कष्टमें पहले शोधन श्रेयस्कर होता है। वर्तिकाका प्रयोग श्रेष्ठ माना जाता है। ज्वरयुक्त अश्वोंकी दुग्धसे ही चिकित्सा करे। लोधमूल, करञ्जमूल, बिजौरा नीबू, चित्रक, सोंठ, कूट, वच एवं रासत्र-इनका लेप शोथ, (सूजन)-का

English

Vivajit (was born) from Brhadratha. Karna was from Visvajit. Vrsasena (was the son) of Karna. Prthusena was his son. These are the kings born in the race of Anga. Describe me the race of Puru.

अध्याय 277

श्लोक 9

शक्तुगोधूमलाजाश् च यवशालिमसूरकाः ।सकुष्ठचणका मुद्गा भक्ष्या गोधूमका हिताः

śaktugodhūmalājāś ca yavaśālimasūrakāḥ / sakuṣṭhacaṇakā mudgā bhakṣyā godhūmakā hitāḥ

हिन्दी अर्थ

नाश करनेवाला है। घोड़ेको निराहार रखकर मजीठ, मुलहठी, मुनक्का, बड़ी कटेरी, छोटी कटेरी, लाल चन्दन, खीरेके मूल और बीज, सिंहाड़ेके बीज और कसेरु-इनसे युक्त बकरीका

English

Barley meal, wheat, parched grain, barley, rice, lentils, with kushtha, chickpeas and mudga are edible; wheat preparations are beneficial,

अध्याय 277

श्लोक 10

साधिता घृतदुग्धाभ्यां क्षौद्रं वृषरसो मधु ।अतीसारे पुराणानां शालीनां भक्षणं हितं

sādhitā ghṛtadugdhābhyāṃ kṣaudraṃ vṛṣaraso madhu / atīsāre purāṇānāṃ śālīnāṃ bhakṣaṇaṃ hitaṃ

हिन्दी अर्थ

दूध पकाकर अत्यन्त शीतल करके शक्करके साथ पिलानेसे वह घोड़ा रक्तप्रमेहसे छुटकारा पाता है मन्या, ठुङ्डी तथा ग्रीवाकी शिराओंके शोथ तथा गलग्रहरोगमें उन-उन स्थानोंपर कटुतैलका अभ्यङ्ग प्रशस्त है। गलग्रहरोग और शोथ प्रायः गलदेशमें ही होते हैं। चिरचिरा, चित्रक, सैन्धव

English

prepared with ghee and milk, honey, bull's juice (vasaka) and honey. In diarrhea eating old rice is beneficial.

अध्याय 277

श्लोक 11

अनभिष्यन्दि यच्चान्नं लोध्रवल्कलसंयुतम् ।मारुतं वर्जयेद् यत्नः कार्यो गुल्मेषु सर्वथा

anabhiṣyandi yaccānnaṃ lodhravalkalasaṃyutam / mārutaṃ varjayed yatnaḥ kāryo gulmeṣu sarvathā

हिन्दी अर्थ

तथा सुगन्ध घासका रस, पीपल और हींगके साथ इनका नस्य देनेसे अश्व कभी विषादयुक्त

English

Food that does not cause moisture, with lodhra bark; wind-causing things should be avoided with effort; it should be done in all ways in abdominal tumors.

अध्याय 277

श्लोक 12

वाट्यं क्षीरेण चाश्नीयाद्वास्तूकं घृतसाधितं ।गोधूमशालयस्तिक्ता हिता जठरिणामथ

vāṭyaṃ kṣīreṇa cāśnīyādvāstūkaṃ ghṛtasādhitaṃ / godhūmaśālayastiktā hitā jaṭhariṇāmatha

हिन्दी अर्थ

नहीं होता है। हल्दी, दारुहल्दी, मालकाँगनी, पाठा, पीपल, कूट, बच तथा मधु--इनका गुड़ एवं गोमूत्रके साथ जिह्वापर लेप जिह्ास्तम्भमें हितकर है। तिल, मुलहठी, हल्दी और नीमके पत्तोंसे निर्मित पिण्डी मधुके साथ प्रयोग करनेपर व्रणका शोधन और घृतके साथ प्रयुक्त होनेपर घावको भरती है। जो घोड़े अधिक चोटके कारण तीव्र वेदनासे युक्त होकर लँगड़ाने लगते

English

One should eat vatya with milk, vastuka cooked with ghee. Wheat and rice, bitter things, are beneficial for those with abdominal disease;

अध्याय 277

श्लोक 13

गोधूमशालयो मुद्गा ब्रह्मर्क्षखदिरो ऽभया ।पञ्चकोलञ्जाङ्गलाश् च निम्बधात्र्यः पटोलकाः

godhūmaśālayo mudgā brahmarkṣakhadiro 'bhayā / pañcakolañjāṅgalāś ca nimbadhātryaḥ paṭolakāḥ

हिन्दी अर्थ

हैं, उनके लिये तैलसे परिषेक-क्रिया शीघ्र ही रोगनाश करनेवाली होती है। वात, पित्त, कफ दोषोंके द्वारा अथवा क्रोधके कारण चोट पा जानेसे पके, फूटे स्थानोंके ब्रणके लिये यह क्रम

English

wheat, rice, mudga, brahmarksha, khadira, abhaya, pancha-kola, jangala meats, neem, amalaka and patola;

अध्याय 277

श्लोक 14

मातुलङ्गरसाजातिशुष्कमूलकसैन्धवाः ।कुष्ठिनाञ्च तथा शस्तं पानार्थे खदिरोदकं

mātulaṅgarasājātiśuṣkamūlakasaindhavāḥ / kuṣṭhināñca tathā śastaṃ pānārthe khadirodakaṃ

हिन्दी अर्थ

है। पीपल, गूलर, पाकर, मुलहठी, बट और बेल--इनका अत्यधिक जलमें सिद्ध क्राथ थोड़ा गरम हो तो वह ब्रणका शोधन करनेवाला है। सौंफ, सोंठ, रास्त्रा, मजीठ, कूट, सैन्धव, देवदारु, वच, हल्दी, दारुहल्दी, रक्तचन्दन-इनका स्नेह क्वाथ करके गिलोयके जलके साथ या दूधके साथ उद्दर्तन, बस्ति अथवा नस्यरूपमें प्रयोग सभी लिङ्गित दोषोंमें करना चाहिए। नेत्ररोगयुक्त

English

citron juice, jati, dry radish and rock salt; and for those with skin disease khadira water is praised as drink;

अध्याय 277

श्लोक 15

मसूरसुद्गौ पेयार्थे भोज्या जिर्णाश् च शालयः ।निम्बपर्पटकैः शाकैर् जाङ्गलानां तथा रसः

masūrasudgau peyārthe bhojyā jirṇāś ca śālayaḥ / nimbaparpaṭakaiḥ śākair jāṅgalānāṃ tathā rasaḥ

हिन्दी अर्थ

अश्वके नेत्रान्तमें जोंकद्वारा अभिस्रावण कराना चाहिए। खैर, गूलर और पीपलकी छालके क्वाथसे नेत्रोंका शोधन होता है

English

lentil and mudga for drinking, old rice for food; vegetables with neem and parpataka, and likewise the broth of jangala animals.

अध्याय 277

श्लोक 16

विडङ्गं मरिचं मुस्तं कुष्ठं लोध्रं सुवर्चिका ।मनःशिला च वालेयः कुष्ठहा मूत्रपेषितः

viḍaṅgaṃ maricaṃ mustaṃ kuṣṭhaṃ lodhraṃ suvarcikā / manaḥśilā ca vāleyaḥ kuṣṭhahā mūtrapeṣitaḥ

हिन्दी अर्थ

युक्तावलम्बी अश्वके लिये आँवला, जवासा, पाठा, प्रियङ्गु, कुङ्कुम और गिलोय-इनका समभाग ग्रहण करके निर्मित किया हुआ कल्क हितकर है। कर्णसम्बन्धी दोषमें एवं उपद्रवमें, शिल (अनियमित वृत्ति) -में, शुष्क-शेपमें (लिङ्ग सूखनेको दशामें) और शीघ्र (हानि) करनेवाले दोषमें तत्काल वेधन करना चाहिए। गायका

English

Vidanga, pepper, mustaka, kushtha, lodhra, suvarchika, manahshila and baleya, ground in urine, destroy skin disease.

अध्याय 277

श्लोक 17

अपूपकुष्ठकुल्माषयवाद्या मेहिनां हिताः ।यवान्नविकृतिर्मुद्गा कुलत्था जीर्णशालयः

apūpakuṣṭhakulmāṣayavādyā mehināṃ hitāḥ / yavānnavikṛtirmudgā kulatthā jīrṇaśālayaḥ

हिन्दी अर्थ

इनको गोमूत्रमें पीसकर मर्दन करनेसे खुजलीका नाश होता है। शालकी छालका क्वाथ शीतल हो जानेपर मधु और शर्करासहित नासिकामें डालनेसे एवं उसी प्रकार पिलानेसे घोड़ेका रक्तपित्त नष्ट

English

Cakes, kushtha, kulmasha, barley and the like are beneficial for the urinary-disorder patients; barley preparations, mudga, kulattha, old rice;

अध्याय 277

श्लोक 18

तिक्तरुक्षाणि शाकानि तिक्तानि हरितानि च ।तैलानि तिलशिग्रुकविभीतकेङ्गुदानि च

tiktarukṣāṇi śākāni tiktāni haritāni ca / tailāni tilaśigrukavibhītakeṅgudāni ca

हिन्दी अर्थ

होता है। घोड़ोंको सातवें-सातवें दिन नमक देना चाहिए॥ ३३--३७॥ अश्वोके अधिक भोजन हो जानेपर वारुणी (मदिरा), शरद् ऋतुमें जीवनीयगणके द्रव्य (जीवक, ऋषभक, मेदा, महामेदा, काकोली, क्षीरकाकोली, मुद्गपर्णी (वनमुँग), माषपर्णी

English

bitter, dry vegetables, bitter and green ones; oils of sesame, shigru, vibhitaka and ingudi;

अध्याय 277

श्लोक 19

मुद्गाः सयवगोधूमा धान्यं वर्षस्थतञ्च यत् ।जाङ्गलस्य रसः शस्तो भोजने राजयक्ष्मिणां

mudgāḥ sayavagodhūmā dhānyaṃ varṣasthatañca yat / jāṅgalasya rasaḥ śasto bhojane rājayakṣmiṇāṃ

हिन्दी अर्थ

शक्कर, पिपली और पद्माखसहित प्रतिपानमें देना चाहिए। हेमन्त ऋतुमें अश्वोंको वायबिडंग,

English

mudga with barley and wheat, grain that has stayed a year, and the broth of jangala animals are praised in the diet of consumptives.

अध्याय 277

श्लोक 20

कौलत्थमौद्गको रास्नाशुष्कमूलकजाङ्गलैः ।पूपैर् वा विस्करैः सिद्धैर् दधिदाडिमसाधितैः

kaulatthamaudgako rāsnāśuṣkamūlakajāṅgalaiḥ / pūpair vā viskaraiḥ siddhair dadhidāḍimasādhitaiḥ

हिन्दी अर्थ

चित्रकसे समन्वित प्रतिपान देना चाहिए। वसन्त ऋतुमें लोध, प्रियङ्गु, मोथा, पीपल, सोंठ और मधुसे युक्त प्रतिपान कफनाशक माना गया है। ग्रीष्म ऋतुमें प्रतिपानके लिये प्रियङ्गु, पीपल, लोध, मुलहठी, सोंठ और गुड़के सहित मदिरा दे। वर्षा ऋतुमें अश्वोंके लिये प्रतिपान तैल, लोध, लवण, पीपल और सोंठसे समन्वित होना चाहिए। ग्रीष्म ऋतुमें बढ़े हुए पित्तके प्रकोपसे

English

With kulattha, mudga, rasna, dry radish, and jangala meat, or cakes and vishkara prepared with curds and pomegranate,

अध्याय 277

श्लोक 21

मातुलङ्गरसक्षौद्रद्राक्षाव्योषादिसंस्कृतैः ।यवगोधूमशाल्यन्नैर् भोजयेच्छ्वासकासिनं

mātulaṅgarasakṣaudradrākṣāvyoṣādisaṃskṛtaiḥ / yavagodhūmaśālyannair bhojayecchvāsakāsinaṃ

हिन्दी अर्थ

पीड़ित, शरत्कालमें रक्तघनत्वसे युक्त अश्वको एवं प्रावृट् (वर्षाके प्रारम्भ)-में जिन घोड़ोंका गोबर फूट गया है, उन्हें घृत पिलाना चाहिए। कफ एवं वातको अधिकता होनेपर अश्वोंको

English

refined with citron juice, honey, grapes and the three pungents, one should feed barley, wheat and rice food to one with asthma and cough.

अध्याय 277

श्लोक 22

दषमूलवलारास्नाकुलत्थैर् उपसाधिताः ।पेयाः पूपरसाः क्वाथाः श्वासहिक्कानिवारणाः

daṣamūlavalārāsnākulatthair upasādhitāḥ / peyāḥ pūparasāḥ kvāthāḥ śvāsahikkānivāraṇāḥ

हिन्दी अर्थ

तैलपान कराना चाहिए। जिनके शरीरमें स्रेहतत्त्वके प्राबल्यसे कोई कष्ट उत्पन्न हो, उनका रुक्षण करना चाहिए। मट्ठाके साथ भोजन तथा तीन दिनतक यवागू पिलानेसे अश्वोंका रुक्षण होता है। अश्वोंके बस्तिकर्मके लिये शरद-ग्रीष्ममें घृत,

English

Drinks, cake-juices and decoctions prepared with the ten roots, bala, rasna and kulattha ward off breathlessness and hiccup.

अध्याय 277

श्लोक 23

शुष्कमूलककौलत्थमूलजाङ्गलजैरसैः(?) ।यवगोधूमशाल्यन्नं जीर्णम् सोशीरमाचरेत्

śuṣkamūlakakaulatthamūlajāṅgalajairasaiḥ(?) / yavagodhūmaśālyannaṃ jīrṇam sośīramācaret

हिन्दी अर्थ

जीवकर्षभको मेदा महामेदा काकोली क्षीरकाकोली मुद्गपर्णी माषपर्णी जीवन्ती मधुकमिति दशेमानि जीवनीयानि भवन्ति।

English

With dry radish, kulattha-root and jangala broths; old barley, wheat and rice food with ushira one should take.

अध्याय 277

श्लोक 24

सोथवान् सगुडां पथ्यां खादेद्वा गुडनागरम् ।तक्रञ्च चित्रकञ्चोभौ ग्रहणीरोगनाशनौ

sothavān saguḍāṃ pathyāṃ khādedvā guḍanāgaram / takrañca citrakañcobhau grahaṇīroganāśanau

हिन्दी अर्थ

हेमन्त-वसन्तमें तैल तथा वर्षा एवं शिशिर ऋतुओंमें घृत-तैल दोनोंका प्रयोग करना चाहिए। जिन घोड़ोंको स्नेह (तैल-घृतादि) पान कराया गया है, उनके लिये (गुरु-भारी) या अभिष्यन्दी (कफकारक) भोजन--भात आदि, व्यायाम, स्रान, धूप तथा वायुरहित स्थान वर्जित हैं। वर्षा ऋतुमें घोडेको दिनमें एक बार स्नान और पान कराये, किंतु घोर दुर्दिनके समय केवल पान ही

English

One with swelling should eat pathya with jaggery or jaggery and ginger; buttermilk and chitraka both destroy sprue disease.

अध्याय 277

श्लोक 25

पुराणयवगोधूमशालयो जङ्गलो रसः ।मुद्गामलकखर्जूरमृद्वीकावदराणि च

purāṇayavagodhūmaśālayo jaṅgalo rasaḥ / mudgāmalakakharjūramṛdvīkāvadarāṇi ca

हिन्दी अर्थ

प्रशस्त है। समशीतोष्ण ऋतुमें दो बार और एक बार स्नान विहित है। ग्रीष्म ऋतुमें तीन बार स्नान और प्रतिपान उचित होता है। पूर्णजलमें बहुत देरतक स्नान कराना चाहिए

English

Old barley, wheat and rice, jangala broth, mudga, amalaka, dates, grapes and jujube;

अध्याय 277

श्लोक 26

मधु सर्पिः पयः शक्रं निम्बपर्पटकौ वृषम् ।तक्रारिष्टाश् च(१) शस्यन्ते सततं वातरोगिणाम्

madhu sarpiḥ payaḥ śakraṃ nimbaparpaṭakau vṛṣam / takrāriṣṭāś ca(1) śasyante satataṃ vātarogiṇām

हिन्दी अर्थ

घोड़ेको प्रतिदिन चार आढ़क भूसासे रहित जौ खिलावे। उसको चना, धान, मूँग या मटर भी खानेको दे। अश्वको (एक) दिन-रातमें पाँच सेर दूब खिलावे। सूखी दूब होनेपर आठ सेर अथवा भूसा हो तो चार सेर देना चाहिए। दूर्वा पित्तका, जौ कासका, भूसी कफाधिक्यका,

English

honey, ghee, milk, sugar, neem and parpataka, vasaka, and buttermilk preparations are always praised for those with wind disease.

अध्याय 277

श्लोक 27

हृद्रोगिणो विरेच्यास्तु पिप्पल्यो हिक्किनां हिताः ।तक्रावलालसिन्धूनि मुक्तानि शिशिराम्भसा

hṛdrogiṇo virecyāstu pippalyo hikkināṃ hitāḥ / takrāvalālasindhūni muktāni śiśirāmbhasā

हिन्दी अर्थ

अर्जुन श्वासका एवं मानकन्द बलक्षयका नाश करता है। दूर्वाभोजी अश्वको कफज, वातज, पित्तज और संनिपातज रोग पीड़ित नहीं कर सकते। दुष्ट घोड़ोंके आगे-पीछे दोनों ओर दो

English

Heart-disease patients are to be purged; pippali is beneficial for hiccup. Buttermilk, avala, salts, released with cool water,

अध्याय 277

श्लोक 28

मुक्ताः सौवर्चलाजादि मद्यं शस्तं मदात्यये(२) ।सक्षौद्रपयसा लाक्षां पिवेच्च क्षतवान्नरः

muktāḥ sauvarcalājādi madyaṃ śastaṃ madātyaye(2) / sakṣaudrapayasā lākṣāṃ pivecca kṣatavānnaraḥ

हिन्दी अर्थ

रज्जुबन्धन करने चाहिए। गर्दनमें भी बन्धन करना चाहिए। घोड़े आस्तरणयुक्त और धूपित स्थानमें बसाने चाहिए। जहाँ कि उपायपूर्वक घासें रखी हों। (वह अश्वशाला) प्रदीपसे आलोकित तथा सुरक्षित होनी चाहिए। घुड्सालमें मयूर, अज वानर और मृगोंको रखना चाहिए

English

released sauvarchala and aja and the like; wine is praised in intoxication. A wounded man should drink lac with honey and milk.

अध्याय 277

श्लोक 29

१ भद्राविष्टाश्चेति ख॥ २ सदामये इति ञ॥ ।दमात्यये इति ट॥ :प् ३० क्षयं मांसरसाहारो वह्निसंरक्षणाज्जयेत् ।शालयो भोजने रक्ता नीवारकलमादयः

1 bhadrāviṣṭāśceti kha.. 2 sadāmaye iti ña.. / damātyaye iti ṭa.. :p 30 kṣayaṃ māṃsarasāhāro vahnisaṃrakṣaṇājjayet / śālayo bhojane raktā nīvārakalamādayaḥ

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार आदि आग्रेय महापुराणमें 'अश्व-चिकित्साका कथन” नामक दो सौ नवासीवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

One should conquer consumption by living on meat-juice, by protecting the digestive fire. Red rice, nivara, kalama and the like in food;

अध्याय 277

श्लोक 30

यवान्नविकृतिर्मासं शाकं सौवर्चलं शटी ।पथ्या तथैवार्शसां यन्मण्डं तक्रञ्च वारिणा(१)

yavānnavikṛtirmāsaṃ śākaṃ sauvarcalaṃ śaṭī / pathyā tathaivārśasāṃ yanmaṇḍaṃ takrañca vāriṇā(1)

हिन्दी अर्थ

शालिहोत्र कहते हैं- सुश्रुत! अब मैं घोड़ोंके रोगोंका मर्दन करनेवाली “अश्वशान्ति'का वर्णन करूँगा; जो नित्य, नैमित्तिक और काम्यके भेदसे तीन प्रकारकी मानी गयी है; इसे सुनो। किसी शुभ दिनको श्रीधर (विष्णु), श्री (लक्ष्मी) तथा उच्चैःश्रवाके पुत्र हयराजको पूजा करके सविता-

English

barley preparations, meat, vegetables, sauvarchala, shati, pathya likewise for the piles; the thin gruel and buttermilk with water;

अध्याय 277

श्लोक 31

मुस्ताभ्यासस् तथा लेपश्चित्रकेण हरिद्रया ।यवान्नविकृतिः शालिर्वास्तूकं ससुवर्चलम्

mustābhyāsas tathā lepaścitrakeṇa haridrayā / yavānnavikṛtiḥ śālirvāstūkaṃ sasuvarcalam

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर ब्राह्मणोंको दक्षिणा दे। इससे अश्वोंको वृद्धि होती है। (शुभ दिनसे आरम्भ करके इस कर्मको प्रतिदिन चालू रखा जाय तो यह नित्य अश्व-शान्ति' है)

English

practice with mustaka, and a paste with chitraka and turmeric; barley preparations, rice, vastuka with sauvarchala;

अध्याय 277

श्लोक 32

त्रपुषर्वारुगोधूमाः क्षीरेक्षुघृतसंयुताः ।मूत्रकृच्छ्रे च शस्ताः स्युः पाने मण्डसुरादयः

trapuṣarvārugodhūmāḥ kṣīrekṣughṛtasaṃyutāḥ / mūtrakṛcchre ca śastāḥ syuḥ pāne maṇḍasurādayaḥ

हिन्दी अर्थ

(अश्व-समृद्धिकी कामनासे) आश्विनके शुक्ल- पक्षकी पूर्णिमाको नगरके बाह्यदेशमें शान्ति-कर्म करे। उसमें विशेषतः अश्विनीकुमारों तथा वरुण- पद्मासनके ऊपर अङ्कित करके उन्हें चारों ओरसे वृक्षकी शाखाओंद्वारा आवृत कर दे। उनको सभी दिशाओंमें समस्त रसोंसे परिपूर्ण कलशोंको वस्त्रसहित स्थापित करे। इसके बाद श्रीदेवीका

English

cucumber, urvaru and wheat joined with milk, sugarcane and ghee are praised in urinary difficulty; in drinks thin gruel, liquor and the like.

अध्याय 277

श्लोक 33

लाजाः शक्तुस् तथा क्षौद्रं शून्यं मांसं परूषकम् ।वार्ताकुलावशिखिनश्छर्दिघ्नाः पानकानि च

lājāḥ śaktus tathā kṣaudraṃ śūnyaṃ māṃsaṃ parūṣakam / vārtākulāvaśikhinaśchardighnāḥ pānakāni ca

हिन्दी अर्थ

पूजन करके उनकी प्रसन्नताके लिये जौ और घीका हवन करे। फिर अश्विनीकुमारों और अश्वोंकी अर्चना करे तथा ब्राह्मणोंको दक्षिणा दे। (यह काम्य शान्ति हुई) । अब नैमित्तिक शान्तिका

English

Parched rice, barley meal, honey, dry meat and parushaka; brinjal, avashikhi, and drinks destroy vomiting.

अध्याय 277

श्लोक 34

शाल्यन्नन्तोयपयसी केवलोष्णे शृते ऽपि वा ।तृष्णाघ्ने मुस्तगुडयोर्गुटिका वा मुखे धृता

śālyannantoyapayasī kevaloṣṇe śṛte 'pi vā / tṛṣṇāghne mustaguḍayorguṭikā vā mukhe dhṛtā

हिन्दी अर्थ

मकर आदिकी संक्रान्तियोंमें अश्वोंका पूजन करे। साथ ही कमलपुष्पोंद्वारा विष्णु, लक्ष्मी, ब्रह्मा, शंकर, चन्द्रमा, सूर्य, अश्चिनीकुमार, रेवन्त तथा उच्चैःश्रवाकी अर्चना करे। इसके सिवा कमलके दस दलोंपर दस दिकक्‍पालोंकी

English

Rice food, water and milk, boiled only warm, destroy thirst; or a pill of mustaka and jaggery held in the mouth.

अध्याय 277

श्लोक 35

यवान्नविकृतिः पूपं(२) शुष्कमूलकजन्तथा ।शाकं पटोलवेत्राग्रमुरुस्तम्भविनाशनम्

yavānnavikṛtiḥ pūpaṃ(2) śuṣkamūlakajantathā / śākaṃ paṭolavetrāgramurustambhavināśanam

हिन्दी अर्थ

तिल, अक्षत, घी और पीली सरसोंकी आहुतियाँ

English

Barley preparations, cakes, dry radish products, vegetables, patola and the tip of cane destroy thigh-stiffness.

अध्याय 277

श्लोक 36

मुद्गाढकमसूराणां सतिलैर् जाङ्गलैरसैः(?) ।ससैन्धवघृतद्राक्षाशुण्ठ्यामलककोलजैः

mudgāḍhakamasūrāṇāṃ satilair jāṅgalairasaiḥ(?) / sasaindhavaghṛtadrākṣāśuṇṭhyāmalakakolajaiḥ

हिन्दी अर्थ

भी पूजा करे । प्रत्येक अर्चनीय देवताके निमित्त दे। एक-एक देवताके निमित्त सौ-सौ आहुतियाँ वेदीपर जलपूर्ण कलश स्थापित करे और उन कलशोंमें अधिष्ठित देवोंकी पूजा करे। इन

English

With broths of mudga, adhaka and lentil, with sesame, jangala broths, with rock salt, ghee, grapes, ginger, amalaka and jujube,

अध्याय 277

श्लोक 37

यूषैः पुराणगोधूमयवशाल्यन्नमभ्यसेत् ।विसर्पी ससिताक्षौद्रमृद्वीकादाडिमोदकम्

yūṣaiḥ purāṇagodhūmayavaśālyannamabhyaset / visarpī sasitākṣaudramṛdvīkādāḍimodakam

हिन्दी अर्थ

देनी चाहिए। अश्वसम्बन्धी रोगोंके निवारणके लिये उपवासपूर्वक यह शान्तिकर्म करना उचित

English

one should practice old wheat, barley and rice food with soups. In erysipelas, water with sugar, honey, grapes and pomegranate;

अध्याय 277

श्लोक 38

रक्तयष्टिकगोधूमयवमुद्गादिकं लघु ।काकमारी च वेत्राग्रं वास्तुकञ्च सुवर्चला

raktayaṣṭikagodhūmayavamudgādikaṃ laghu / kākamārī ca vetrāgraṃ vāstukañca suvarcalā

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार आदि आग्रेय महापुराणमें 'अश्च-शान्तिका कथन” नामक दो सौ बब्बेवाँ अध्याय पूरा हुआ शालिहोत्र कहते हैं-- मैं गजरोगोंका प्रशमन करनेवाली गज-शान्तिके विषयमें कहँगा। किसी भी शुक्ला पञ्चमीको विष्णु, लक्ष्मी तथा नागराज ऐरावतकी पूजा करे। फिर ब्रह्मा, शिव, विष्णु,

English

light things such as red shashtika rice, wheat, barley, mudga; and kakamari, tip of cane, vastuka and sauvarchala;

अध्याय 277

श्लोक 39

वातशोणितनाशाय तोयं शस्तं सितं मधु ।१ पथ्या तथैव काशस्य मण्डं तक्रञ्च वारुणमिति ख॥ , ञ॥ , च २ यूषमिति ख॥ , ज॥ च :प् ३१ नाशारोगेशु च हितं घृतं दुर्वाप्रसाधितम्

vātaśoṇitanāśāya toyaṃ śastaṃ sitaṃ madhu / 1 pathyā tathaiva kāśasya maṇḍaṃ takrañca vāruṇamiti kha.. , ña.. , ca 2 yūṣamiti kha.. , ja.. ca :p 31 nāśārogeśu ca hitaṃ ghṛtaṃ durvāprasādhitam

हिन्दी अर्थ

अग्नि, पृथिवी, आकाश, शेषनाग, पर्वत, विरूपाक्ष, महापद्म, भद्र, सुमनस और देवजातीय आठ हाथियोंका पूजन करे। उन आठ नागोंके नाम ये हैं-कुमुद, ऐरावत, पद्म, पुष्पदन्त, वामन, सुप्रतीक,

English

for destroying wind-blood disease water, sugar and honey are praised; in nose diseases ghee prepared with durva is beneficial;

अध्याय 277

श्लोक 40

भृङ्गराजरसे सिद्धं तैलं धात्रीरसे ऽपि वा ।नश्यं सर्वामयेष्विष्टं मूर्धजन्तूद्भवेषु च

bhṛṅgarājarase siddhaṃ tailaṃ dhātrīrase 'pi vā / naśyaṃ sarvāmayeṣviṣṭaṃ mūrdhajantūdbhaveṣu ca

हिन्दी अर्थ

अञ्जन और नील। तत्पश्चात् होम करे और दक्षिणा दे। शान्ति-कलशके जलसे हाथियोंका अभिषेक किया जाय तो वे वृद्धिको प्राप्त होते हैं। (यह नित्य विधि है) अब नैमित्तिक शान्तिकर्मके विषयमे सुनो

English

oil prepared in bhringaraja juice or amalaka juice; nasal medicine is desired in all diseases and in those arising from head worms.

अध्याय 277

श्लोक 41

शीततोयान्नपानञ्च तिलानां विप्र भक्षणम् ।द्विजदार्ढ्यकरं प्रोक्तं तथा तुष्टिकरम्परम्

śītatoyānnapānañca tilānāṃ vipra bhakṣaṇam / dvijadārḍhyakaraṃ proktaṃ tathā tuṣṭikaramparam

हिन्दी अर्थ

मकर आदिको संक्रान्तियाँमें हाथियोंका नगरके बहिर्भागमें ईशानकोणमें (पूजन करे)। वेदी या पद्मासनपर अष्टदल कमलका निर्माण करके उसमें केसरके स्थानपर श्रीविष्णु और लक्ष्मीकी

English

Cold water, food and drink, and eating sesame, Brahmin, are said to strengthen the teeth, and are the supreme satisfaction.

अध्याय 277

श्लोक 42

गण्डूषं तिलतैलेन द्विजदार्ढ्यकरं परं ।विडङ्गचूर्णं गोमूत्रं सर्वत्र कृमिनाशने

gaṇḍūṣaṃ tilatailena dvijadārḍhyakaraṃ paraṃ / viḍaṅgacūrṇaṃ gomūtraṃ sarvatra kṛmināśane

हिन्दी अर्थ

अर्चना करे। तदनन्तर अष्टदलोंमें क्रमशः ब्रह्मा, सूर्य, पृथ्वी, स्कन्द, अनन्त, आकाश, शिव तथा चन्द्रमाको पूजा करे। उन्हीं आठ दलोंमें पूर्वादिके क्रमसे इन्द्रादि दिकपालोंका भी पूजन करे। अस्त्रोंको अर्चना करनी चाहिए। दलोंके बाह्यभागमें चक्रमें सूर्य और अश्विनीकुमारोंकी पूजा करे। अष्टवसुओं एवं साध्यदेवोंका दक्षिणभागमें तथा भार्गवाङ्गिरस देवताओंका नैऋत्यकोणमें यजन

English

Gargle with sesame oil is supreme for strengthening the teeth; vidanga powder with cow-urine destroys worms everywhere;

अध्याय 277

श्लोक 43

धात्रीफलान्यथाज्यञ्च शिरोलेपनमुत्तमम् ।शिरोरोगविनाशाय स्निग्धमुष्णञ्च भोजनम्

dhātrīphalānyathājyañca śirolepanamuttamam / śirorogavināśāya snigdhamuṣṇañca bhojanam

हिन्दी अर्थ

करे। वायव्यकोणमें मरुद्गणोंका, दक्षिणभागमें विश्वेदेवोंका एवं रौद्रमण्डल (ईशान) -में रुद्रोंका पूजन करना चाहिए। वृत्तरेखाके द्वारा निर्मित अष्टदल कमलके बहिर्भागमें सरस्वती, सूत्रकार

English

amalaka fruits and ghee are the best head-application; for destroying head disease, oily and warm food;

अध्याय 277

श्लोक 44

तैलं वा वस्तमूत्रञ्च कर्णपूरणमुत्तमम् ।कर्णशूलविनाशाय सर्वशुक्तानि(१) वा द्विज

tailaṃ vā vastamūtrañca karṇapūraṇamuttamam / karṇaśūlavināśāya sarvaśuktāni(1) vā dvija

हिन्दी अर्थ

और देवर्षियोंकी अर्चना करे। पूर्वभागमें नदी, पर्वतों एवं ईशान आदि कोणोंमें महाभूतोंकी पूजा करे। तदनन्तर पदा, चक्र, गदा तथा शङ्कसे सुशोभित चतुष्कोण एवं चतुर्द्वारयुक्त भूपुरमण्डलका निर्माण करके आग्नेय आदि कोणोंमें कलशोंकी भी स्थापना करे तथा चारों ओर पताकाओं और तोरणोंका निवेश करे। सभी द्वारोंपर ऐरावत आदि नागराजोंका पूजन करे। पूर्वादि दिशाओंमें

English

oil or goat's urine is the best filling for the ear; to destroy earache, or all sour things, twice-born.

अध्याय 277

श्लोक 45

गिरिमृच्चन्दनं लाक्षा मालती कलिका तथा ।संयोज्या या कृता वर्तिः क्षतशुक्रहरी तु सा

girimṛccandanaṃ lākṣā mālatī kalikā tathā / saṃyojyā yā kṛtā vartiḥ kṣataśukraharī tu sā

हिन्दी अर्थ

समस्त देवताओंके लिये पृथक्-पृथक् सर्वौषधियुक्त पात्र रखे। हाथियोंका पूजन करके उनकी परिक्रमा करे। सभी देवताओंके उद्देश्यसे पृथक्-पृथक् सौ-सौ आहुतियाँ प्रदान करे। तदनन्तर नागराज,

English

Mountain clay, sandal, lac, jasmine bud, if joined as a wick, it removes the disease of the eye (wound-white);

अध्याय 277

श्लोक 46

व्योषं त्रिफलया युक्तं तुच्छकञ्च तथा जलम् ।सर्वाक्षिरोगशमनं तथा चैव रसाञ्जनं

vyoṣaṃ triphalayā yuktaṃ tucchakañca tathā jalam / sarvākṣirogaśamanaṃ tathā caiva rasāñjanaṃ

हिन्दी अर्थ

अग्नि और देवताओंको साथ लेकर बाजे बजाते हुए अपने घरोंको लौटना चाहिए। ब्राह्मणों एवं गज-चिकित्सक आदिको दक्षिणा देनी चाहिए। तत्पश्चात् कालज्ञ विद्वान् गजराजपर आरूढ़ होकर उसके कानमें निम्नाङ्कित मन्त्र कहे। उस नागराजके मृत्युको प्राप्त होनेपर शान्ति करके दूसरे हाथीके

English

the three pungents with triphala and little water, and likewise rasanjana, calm all eye diseases;

अध्याय 277

श्लोक 47

आज्यभृष्टं शिलापिष्टं लोध्रकाञ्जिकसैन्धवैः ।आश्च्योतनाविनाशाय सर्वनेत्रामये हितम्

ājyabhṛṣṭaṃ śilāpiṣṭaṃ lodhrakāñjikasaindhavaiḥ / āścyotanāvināśāya sarvanetrāmaye hitam

हिन्दी अर्थ

कानमें मन्त्रका जप करे--॥ ५ --१५॥ “महाराजने तुमको ' श्रीगज'के पदपर नियुक्त किया है। अबसे तुम इस राजाके लिये ' गजाग्रणी ' (गजोंके अगुआ) हो । ये नरेश आजसे गन्ध, माल्य

English

fried in ghee, ground on stone with lodhra, kanji and rock salt, it is beneficial for removing watering and all eye diseases.

अध्याय 277

श्लोक 48

गिरिमृच्चन्दनैर् लेपो वहिर्नेत्रस्य शस्यते ।नेत्रामयविघातार्थं त्रिफलां शीलयेत् सदा

girimṛccandanair lepo vahirnetrasya śasyate / netrāmayavighātārthaṃ triphalāṃ śīlayet sadā

हिन्दी अर्थ

एवं उत्तम अक्षतोंद्वारा तुम्हारा पूजन करेंगे। उनकी आज्ञासे प्रजाजन भी सदा तुम्हारा अर्चन करेंगे। तुमको युद्धभूमि, मार्ग एवं गृहमें महाराजकी सदा रक्षा करनी चाहिए। नागराज ! तिर्यग्भाव (टेढ़ापन)- को छोड़कर अपने दिव्यभावका स्मरण करो। पूर्वकालमें देवासुर-संग्राममें देवताओंने ऐरावतपुत्र श्रीमान् अरिष्ट नागको ' श्रीगज'का पद प्रदान किया था। श्रीगजका वह सम्पूर्ण तेज तुम्हारे शरीरमें

English

A paste of mountain clay and sandal is praised outside the eye; to ward off eye disease one should always use triphala,

अध्याय 277

श्लोक 49

रात्रौ तु मधुसर्पिर्भ्यां दीर्घमायुर्जिजीविषुः ।शतावरीरसे सिद्धौ वृष्यौ क्षीरघृतौ स्मृतौ

rātrau tu madhusarpirbhyāṃ dīrghamāyurjijīviṣuḥ / śatāvarīrase siddhau vṛṣyau kṣīraghṛtau smṛtau

हिन्दी अर्थ

प्रतिष्ठित है। नागेन्द्र ! तुम्हारा कल्याण हो। तुम्हारा

English

at night with honey and ghee, one wishing long life. Milk and ghee prepared in shatavari juice are aphrodisiac;

अध्याय 277

श्लोक 50

कलम्बिकानि माषाश् च वृष्यौ क्षीरघृतौ तथा ।१ सर्वशुक्लान्नीति ख॥ :प् ३२ आयुष्या त्रिफला ज्ञेया पूर्ववन्मधुकान्विता

kalambikāni māṣāś ca vṛṣyau kṣīraghṛtau tathā / 1 sarvaśuklānnīti kha.. :p 32 āyuṣyā triphalā jñeyā pūrvavanmadhukānvitā

हिन्दी अर्थ

तुम रणाङ्गणमें राजाको रक्षा करो'' राजा पूर्वोक्त अभिषिक्त गजराजपर शुभ मुहूर्तमें आरोहण करे। शस्त्रधारी श्रेष्ठ वीर उसका अनुगमन करें । राजा हस्तिशालामें भूमिपर अङ्कित कमलके बहिर्भागमें दिकपालोंका पूजन करे।

English

kalambika and masha, milk and ghee are aphrodisiac likewise. Triphala is to be known as life-giving, with licorice as before;

अध्याय 277

श्लोक 51

मधुकादिरसोपेता बलीपलितनाशिनी ।वचासिद्धघृतं विप्र भूतदोषविनाशनम्

madhukādirasopetā balīpalitanāśinī / vacāsiddhaghṛtaṃ vipra bhūtadoṣavināśanam

हिन्दी अर्थ

केसरके स्थानपर महाबली नागराज, भूदेवी और सरस्वतीका यजन करे। मध्यभागमें गन्ध, पुष्प और चन्दनसे डिण्डिमकी पूजा एवं हवन करके ब्राह्मणोंको रसपूर्ण कलश प्रदान करे। पुनः

English

with licorice juice and the rest it destroys wrinkles and grey hair. Ghee prepared with vacha, Brahmin, destroys spirit afflictions,

अध्याय 277

श्लोक 52

कव्यं बुद्धिप्रदञ्चैव(१) तथा सर्वार्थसाधनम् ।वलाकल्ककषायेण सिद्धमभ्यञ्जने हितम्

kavyaṃ buddhipradañcaiva(1) tathā sarvārthasādhanam / valākalkakaṣāyeṇa siddhamabhyañjane hitam

हिन्दी अर्थ

गजाध्यक्ष, गजरक्षक और ज्यौतिषीका सत्कार करे। तदनन्तर, डिण्डिम गजाध्यक्षको प्रदान करे। वह भी इसको बजावे। गजाध्यक्ष नागराजके जघनप्रदेशपर आरूढ़ होकर शुभ एवं गम्भीर स्वरमें डिण्डिमवादन करे

English

is fit for ancestral rites, gives intelligence and accomplishes all aims. Oil prepared with decoction and paste of bala is beneficial for anointing;

अध्याय 277

श्लोक 53

रास्नासहचरैर् वापि तैलं वातविकारिणाम् ।अनभिष्यन्दि यच्चान्नं तद्ब्रणेषु प्रशस्यते

rāsnāsahacarair vāpi tailaṃ vātavikāriṇām / anabhiṣyandi yaccānnaṃ tadbraṇeṣu praśasyate

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार आदि आग्रेय महापुराणमें 'गज-शान्तिका कथन” नामक दो सौ इक्यानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

or with rasna and sahachara oil for those with wind disorders. Food that does not cause moisture is praised in wounds;

अध्याय 277

श्लोक 54

शक्तुपिण्डी तथैवाम्ला पाचनाय प्रशस्यते ।पक्वस्य च तथा भेदे निम्बचूर्णञ्च रोपणे

śaktupiṇḍī tathaivāmlā pācanāya praśasyate / pakvasya ca tathā bhede nimbacūrṇañca ropaṇe

हिन्दी अर्थ

धन्वन्तरि कहते हैं-- सुश्रुत! राजाको गौओं और ब्राह्मणोंका पालन करना चाहिए। अब में 'गोशान्ति'का वर्णन करता हूँ। गौएँ पवित्र एवं मङ्गलमयी हैं । गौओंमें सम्पूर्ण लोक प्रतिष्ठित है। गौओंका गोबर और मूत्र अलक्ष्मी (दरिद्रता)- के नाशका सर्वोत्तम साधन है। उनके शरीरको खुजलाना, सींगोंको सहलाना और उनको जल पिलाना भी अलक्ष्मीका निवारण करनेवाला है।

English

barley-meal balls and sourness are praised for ripening; when ripe, in bursting, and neem powder in healing.

अध्याय 277

श्लोक 55

तथा शूच्युपचारश् च(२) बलिकर्म विशेषतः ।सूतिका च तथा रक्षा प्राणिनान्तु सदा हिता

tathā śūcyupacāraś ca(2) balikarma viśeṣataḥ / sūtikā ca tathā rakṣā prāṇināntu sadā hitā

हिन्दी अर्थ

यह 'षडङ्ग' (पञ्चगव्य) पीनेके लिये उत्कृष्ट वस्तु तथा दुःस्वप्नं आदिका निवारण करनेवाला है।

English

Likewise purificatory care, and especially offerings, and the protection of a woman in childbirth are always beneficial to beings.

अध्याय 277

श्लोक 56

भक्षणं निम्बपत्राणां सर्पदष्टस्य भेषजम् ।तालनिम्बदलङ्केश्यं जीर्णन्तैलं यवाघृतम्

bhakṣaṇaṃ nimbapatrāṇāṃ sarpadaṣṭasya bheṣajam / tālanimbadalaṅkeśyaṃ jīrṇantailaṃ yavāghṛtam

हिन्दी अर्थ

गोरोचना विष और राक्षसोंको विनाश करती है। गौओंको ग्रास देनेवाला स्वर्गको प्राप्त होता है। जिसके घरमें गौएँ दुःखित होकर निवास करती हैं, वह मनुष्य नरकगामी होता है दूसरेको गायको ग्रास देनेवाला स्वर्गको और गोहितमें तत्पर ब्रह्मलोकको प्राप्त होता है । गोदान, गो-माहात्म्य- कीर्तन और गोरक्षणसे मानव अपने कुलका उद्धार कर देता है। यह पृथ्वी गौओंके श्वाससे पवित्र

English

Eating neem leaves is the remedy for one bitten by a snake; palm and neem leaves, hair-benefiting, old oil, ghee of barley;

अध्याय 277

श्लोक 57

धूपो वृश्चिकदष्टस्य शिखिपत्रघृतेन वा ।अर्कक्षीरेण संपिष्टं लोपा वीजं पलाशजं

dhūpo vṛścikadaṣṭasya śikhipatraghṛtena vā / arkakṣīreṇa saṃpiṣṭaṃ lopā vījaṃ palāśajaṃ

हिन्दी अर्थ

होती है। उनके स्पर्शसे पापोंका क्षय होता है।

English

for one bitten by a scorpion, fumigation or with peacock-feather ghee; ground with arka milk, lopa, seeds of palasha;

अध्याय 277

श्लोक 58

वृश्चिकार्तस्य कृष्णा वा शिवा च फलसंयुता(३) ।अर्कक्षीरं तिलं तैलं पललञ्च गुडं समम्

vṛścikārtasya kṛṣṇā vā śivā ca phalasaṃyutā(3) / arkakṣīraṃ tilaṃ tailaṃ palalañca guḍaṃ samam

हिन्दी अर्थ

कुशका जल एवं एक दिन उपवास चाण्डालको भी शुद्ध कर देता है। पूर्वकालमें देवताओंने भी समस्त पापोंके विनाशके लिये इसका अनुष्ठान किया था। इनमेंसे प्रत्येक वस्तुका क्रमशः तीन- तीन दिन भक्षण करके रहा जाय, उसे ' महासान्तपन

English

or krishna and shiva with fruit for one tormented by a scorpion; arka milk, sesame, oil, sesame paste and jaggery in equal parts;

अध्याय 277

श्लोक 59

पानाज्जयति दुर्वारं श्वविषं शीघ्रमेव तु ।पीत्वा मूलं त्रिवृत्तुल्यं तण्डुलीयस्य सर्पिषा

pānājjayati durvāraṃ śvaviṣaṃ śīghrameva tu / pītvā mūlaṃ trivṛttulyaṃ taṇḍulīyasya sarpiṣā

हिन्दी अर्थ

ब्रत' कहते हैं। यह व्रत सम्पूर्ण कामनाओंको सिद्ध

English

by drinking, quickly conquers the dog-poison hard to ward; having drunk root of trivrit equal with ghee, of tanduliya,

अध्याय 277

श्लोक 60

सर्पकीटविषाण्याशु जयत्यतिबलान्यपि ।चन्दनं पद्मकङ्कुष्ठं लताम्बूशीरपाटलाः

sarpakīṭaviṣāṇyāśu jayatyatibalānyapi / candanaṃ padmakaṅkuṣṭhaṃ latāmbūśīrapāṭalāḥ

हिन्दी अर्थ

करनेवाला और समस्त पापोंका विनाश करनेवाला है। केवल दूध पीकर इक्कीस दिन रहनेसे 'कृच्छ्रातिकृच्छ व्रत’ होता है। इसके अनुष्ठाने श्रेष्ठ मानव सम्पूर्ण अभीष्ट वस्तुओंको प्राप्तकर पापमुक्त हो स्वर्गलोकमें जाते हैं। तीन दिन गरम

English

one quickly conquers the poisons of snakes and insects, even very strong. Sandal, padmaka, kushtha, lata, ambu, ushira, patala,

अध्याय 277

श्लोक 61

१ कन्ठ्यं वृद्धिप्रदञ्चैवेति ख॥ २ प्रत्युपचारैश्चेति ख॥ ३ कलसंयुतेति क॥ :प् ३३ निर्गुण्डी शारिवा सेलुर्लूताविषहरो गदः ।शिरोविरेचनं शस्तं गुडनागरकं द्विज

1 kanṭhyaṃ vṛddhipradañcaiveti kha.. 2 pratyupacāraiśceti kha.. 3 kalasaṃyuteti ka.. :p 33 nirguṇḍī śārivā selurlūtāviṣaharo gadaḥ / śirovirecanaṃ śastaṃ guḍanāgarakaṃ dvija

हिन्दी अर्थ

और तीन दिन गरम वायु पीकर रहे। यह 'तप्तकृच्छु व्रत’ कहलाता है, जो समस्त पापोंका प्रशमन करनेवाला और ब्रह्मलोककी प्राप्ति करानेवाला है। यदि इन वस्तुओंको इसी क्रमसे

English

nirgundi, sariva, selu — a medicine removing spider poison. Head-purging with jaggery and ginger is praised, twice-born;

अध्याय 277

श्लोक 62

स्नेहपाने तथा वस्तौ तैलं धृतमनुत्तमम् ।स्वेदनीयः परो वह्निः शीताम्भःस्तम्भनं परम्

snehapāne tathā vastau tailaṃ dhṛtamanuttamam / svedanīyaḥ paro vahniḥ śītāmbhaḥstambhanaṃ param

हिन्दी अर्थ

शीतल करके ग्रहण किया जाय, तो ब्रह्माजीके द्वारा कथित 'शीतकृच्छु' होता है, जो ब्रह्मलोकप्रद है एक मासतक गोव्रती होकर गोमूत्रसे प्रतिदिन स्नान करे, गोरससे जीवन चलावे, गौओंका अनुगमन करे और गौओंके भोजन करनेके बाद भोजन करे । इससे मनुष्य निष्पाप होकर गोलोकको

English

in oil-drinking and enema, oil and ghee are best. Fire is best for sweating; cold water for staunching;

अध्याय 277

श्लोक 63

त्रिवृद्धि रेचने श्रेष्ठा वमने मदनं तथा ।वस्तिर्विरेको वमनं तैलं सर्पिस् तथा मधु ।वातपित्तबलाशानां क्रमेण परमौषधं

trivṛddhi recane śreṣṭhā vamane madanaṃ tathā / vastirvireko vamanaṃ tailaṃ sarpis tathā madhu / vātapittabalāśānāṃ krameṇa paramauṣadhaṃ

हिन्दी अर्थ

प्राप्त करता है। गोमती विद्याके जपसे भी उत्तम गोलोकको प्राप्ति होती है। उस लोकमें मानव विमानमें अप्सराओंके द्वारा नृत्य-गीतसे सेवित होकर प्रमुदित होता है। गौएँ सदा सुरभिरूपिणी

English

trivrit is best in purging, madana in vomiting; enema, purgation, emesis, oil, ghee and honey are in order the supreme medicines for wind, bile and phlegm.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

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आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

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