Brahma Purana
159
अध्याय 159 / 246

Adhyaya 159

49 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ49 श्लोक

अध्याय 159

श्लोक 1

वञ्जरासंगमं नाम तीर्थं त्रैलोक्यविश्रुतम् ऋषिभिः सेवितं नित्यं सिद्धै राजर्षिभिस् तथा

vañjarāsaṃgamaṃ nāma tīrthaṃ trailokyaviśrutam ṛṣibhiḥ sevitaṃ nityaṃ siddhai rājarṣibhis tathā

हिन्दी अर्थ

संक्षिप्त ब्रहापुराण

English

Unable to endure the severity of the heat of her husband, the beautiful woman of good waistline thought, "What should be done by me?"

अध्याय 159

श्लोक 2

दासत्वम् अगमत् पूर्वं नागानां गरुडः खगः मातृदास्यात् तदा दुःखपरिसंतप्तमानसः कदाचिच् चिन्तयाम् आस रहः स्थित्वा विनिश्वसन्

dāsatvam agamat pūrvaṃ nāgānāṃ garuḍaḥ khagaḥ mātṛdāsyāt tadā duḥkhaparisaṃtaptamānasaḥ kadācic cintayām āsa rahaḥ sthitvā viniśvasan

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार स्तुति करनेपर भगवान् शंकर कुबेरके सामने प्रकट हुए। उन्होंने वर माँगनेके लिये कहा, किंतु हर्षातिरिकके कारण कुबेरके मुखसे कोई बात नहीं निकली। इसी समय

English

The extremely intelligent Manu and Yama were her sons born of Vivas van (Sun). The holy river Yamuna (too was her daughter). Listen to that incident which caused surprise.

अध्याय 159

श्लोक 3

त एव धन्या लोके ऽस्मिन् कृतपुण्यास् त एव हि नान्यसेवा कृता यैस् तु न येषां व्यसनागमः

ta eva dhanyā loke 'smin kṛtapuṇyās ta eva hi nānyasevā kṛtā yais tu na yeṣāṃ vyasanāgamaḥ

हिन्दी अर्थ

आकाशवाणी हुई। उसने मानो पुलस्त्य, विश्रवा और कुबेरके हार्दिक अभिप्रायको जानकर यह कल्याणमय वचन कहा-- भगवन्! ये लोग धनका प्रभुत्व प्राप्त करना चाहते हैं। इनके लिये

English

After saying this she went ahead, desirous of peaceful form. After going home U§a mentioned everything to her father. Tvastr was surprised. Being fond of his daughter he said to her:

अध्याय 159

श्लोक 4

सुखं तिष्ठन्ति गायन्ति स्वपन्ति च हसन्ति च स्वदेहप्रभवो धन्या धिग् धिग् अन्यवशे स्थितान्

sukhaṃ tiṣṭhanti gāyanti svapanti ca hasanti ca svadehaprabhavo dhanyā dhig dhig anyavaśe sthitān

हिन्दी अर्थ

भविष्य भूत-सा बन जाय। जिस वस्तुको ये किसीके लिये देना चाहें, वह दी हुईके समान हो जाय तथा जो वस्तु ये स्वयं प्राप्त करना चाहें, वह पहले ही इनके सामने प्रस्तुत हो जाय। ये

English

Thus urged by her father she said ''No, No" again and again. She went to the Northern Kuru country' for performing penance.

अध्याय 159

श्लोक 5

इति चिन्तासमाविष्टो जननीम् एत्य दुःखितः पर्यपृच्छद् अमेयात्मा वैनतेयो ऽथ मातरम्

iti cintāsamāviṣṭo jananīm etya duḥkhitaḥ paryapṛcchad ameyātmā vainateyo 'tha mātaram

हिन्दी अर्थ

भगवान् शंकरको आराधना करके इस बातको अभिलाषा रखते हैं कि हमारे शत्रु परास्त हों, दुःख दूर हो जाय, दिक्पालका पद प्राप्त हो, धनका प्रभुत्व मिले, अपरिमित दान-शक्ति हो।

English

There she assumed the form of a mare and performed a severe penance. U§a steadily meditated upon her husband who was too fierce to be looked at.

अध्याय 159

श्लोक 6

कस्यापराधान् मातस् त्वं पितुर् वा मम वान्यतः दासीत्वम् आप्ता वद तत्कारणं मम पृच्छतः

kasyāparādhān mātas tvaṃ pitur vā mama vānyataḥ dāsītvam āptā vada tatkāraṇaṃ mama pṛcchataḥ

हिन्दी अर्थ

साथ ही स्त्री और पुत्रका सुख भी बना रहे।'

English

In the meantime, O dear one, the shadow Chaya who had assumed the form of Usa, cohabited with her husband. Children were born to her.

अध्याय 159

श्लोक 7

साब्रवीत् पुत्रम् आत्मीयम् अरुणस्यानुजं प्रियम्

sābravīt putram ātmīyam aruṇasyānujaṃ priyam

हिन्दी अर्थ

कुबेरने वह आकाशवाणी सुनकर त्रिशूलधारी भगवान् शंकरसे कहा-- देव! ऐसा ही हो।' 'तथास्तु' कहकर शिवने उस हैवी वाणीका अनुमोदन किया। इस प्रकार पुलस्त्य, विश्रवा

English

O Tvasty, mount me on to the lathe and chisel off my splendorous parts for pleasing Usa who has performed excellent

अध्याय 159

श्लोक 8

नैव कस्यापराधो ऽस्ति स्वापराधो मयोदितः यस्या वाक्यं विपर्येति सा दासी स्यान् मयोदितम्

naiva kasyāparādho 'sti svāparādho mayoditaḥ yasyā vākyaṃ viparyeti sā dāsī syān mayoditam

हिन्दी अर्थ

और कुबेरका वरदानसे अभिनन्दन करके भगवान् शिव अन्तर्धान हो गये। तबसे उस तीर्थके तीन नाम पड़े-पौलस्त्यतीर्थ, धनदतीर्थ और वैश्रवसतीर्थ । वह समस्त कामनाओंको देनेवाला शुभ तीर्थ है।

English

After saying ''So be it", Tvastr began to cut off the splendorous parts of the Sun in the presence of Somanatha. They know it as Prabhasa.

अध्याय 159

श्लोक 9

कद्रूश् चापि तथैवाहं सा मया संयुता ययौ कद्र्वा ममाभवद् वादश् छद्मनाहं तया जिता

kadrūś cāpi tathaivāhaṃ sā mayā saṃyutā yayau kadrvā mamābhavad vādaś chadmanāhaṃ tayā jitā

हिन्दी अर्थ

वहाँ स्नान आदि जो कुछ भी पुण्यकर्म किया जाता है, वह अधिक पुण्यदायक होता है।

English

"And Kadru likewise; I went with her, and a dispute arose between me and Kadru; I was defeated by her through a trick.

अध्याय 159

श्लोक 10

विधिर् हि बलवांस् तात कां कां चेष्टां न चेष्टते एवं दासीत्वम् अगमं कद्र्वाः कश्यपनन्दन यदा दासी तु जाताहं दासो ऽभूस् त्वं द्विजन्मज

vidhir hi balavāṃs tāta kāṃ kāṃ ceṣṭāṃ na ceṣṭate evaṃ dāsītvam agamaṃ kadrvāḥ kaśyapanandana yadā dāsī tu jātāhaṃ dāso 'bhūs tvaṃ dvijanmaja

हिन्दी अर्थ

पौलस्त्यतीर्थके बाद अग्नितीर्थं है। वह सब यज्ञोंका फल देनेवाला और समस्त विघ्नोंको शान्त करनेवाला है। उस तीर्थका फल सुनो। अग्निके भाई जातवेदा हैं, जो देवताओंके पास

English

Fate is mighty, dear one; what effort does it not make? Thus I became a slave to Kadru, son of Kashyapa; and when I became a slave, you, twice-born, became a slave too."

अध्याय 159

श्लोक 11

तूष्णीं तदा बभूवासौ गरुडो ऽतीव दुःखितः न किंचिद् ऊचे जननीं चिन्तयन् भवितव्यताम्

tūṣṇīṃ tadā babhūvāsau garuḍo 'tīva duḥkhitaḥ na kiṃcid ūce jananīṃ cintayan bhavitavyatām

हिन्दी अर्थ

हविष्य पहुँचाया करते हैं। एक दिनकी बात है-- गोदावरीके तटपर ऋषियोंके यज्ञमण्डपमें यज्ञ हो

English

Then Garuda became silent, exceedingly distressed; he said nothing to his mother, reflecting on what was bound to be.

अध्याय 159

श्लोक 12

कद्रूः कदाचित् सा प्राह पुत्राणां हितम् इच्छती आत्मनो भूतिम् इच्छन्ती विनतां खगमातरम्

kadrūḥ kadācit sā prāha putrāṇāṃ hitam icchatī ātmano bhūtim icchantī vinatāṃ khagamātaram

हिन्दी अर्थ

पौलस्त्य, अग्नि और ऋणमोचन नामक तीर्थोका माहात्म्य १७९

English

Once Kadru, wishing the good of her sons and wishing her own prosperity, said to Vinata, mother of the bird:

अध्याय 159

श्लोक 13

पुत्रः सूर्यं नमस्कर्तुं तव यात्य् अनिवारितः अहो लोकत्रये ऽप्य् अस्मिन् धन्यासि बत दास्य् अपि

putraḥ sūryaṃ namaskartuṃ tava yāty anivāritaḥ aho lokatraye 'py asmin dhanyāsi bata dāsy api

हिन्दी अर्थ

रहा था। अग्निके प्रिय भाई जातवेदा देवताओंके इस आश्वासनसे अग्निदेव प्रसन्न हुए। उन्हें हविष्यका वहन कर रहे थे। उसी समय दितिके इस लोक और परलोकमें व्यापक रहनेकी शक्ति बलवान् पुत्र मधुने प्रधान-प्रधान ऋषियों और प्राप्त हुई। वे सर्वत्र निर्भय हो गये। जातवेदा,

English

"Your son goes unhindered to bow to the Sun; ah, you are blessed in these three worlds even as a slave."

अध्याय 159

श्लोक 14

स्वदुःखं गूहमाना सा कद्रूं प्राह सुविस्मिता

svaduḥkhaṃ gūhamānā sā kadrūṃ prāha suvismitā

हिन्दी अर्थ

उनके मरनेपर देवताओंको हविष्य मिलना बंद हो गया। इधर अपने प्रिय भाई जातवेदाके मारे जानेसे अग्निको बड़ा क्रोध हुआ। वे गौतमी गङ्गाके जलमें समा गये। अग्निके जलमें प्रवेश

English

Hiding her own sorrow, she, very astonished, said to Kadru:

अध्याय 159

श्लोक 15

तव पुत्रास् तु किम् इति रविं द्रष्टुं न यान्ति च

tava putrās tu kim iti raviṃ draṣṭuṃ na yānti ca

हिन्दी अर्थ

करनेपर देवता और मनुष्य जीवनका त्याग करने लगे, क्योंकि अग्नि ही उनका जीवन है। अग्निदेव जहाँ जलमें प्रविष्ट हुए थे, उस स्थानपर सम्पूर्ण देवता, ऋषि और पितर आये और यह

English

"Why do your sons not go to see the Sun?"

अध्याय 159

श्लोक 16

पुत्रान् मदीयान् सुभगे नय नागालयं प्रति समुद्रस्य समीपे तु तद् आस्ते शीतलं सरः

putrān madīyān subhage naya nāgālayaṃ prati samudrasya samīpe tu tad āste śītalaṃ saraḥ

हिन्दी अर्थ

सोचकर कि बिना अग्निके हम जीवित नहीं रह सकते, उनकी स्तुति करने लगे। इतनेमें ही जलके भीतर उन्हें अग्निका दर्शन हुआ। उन्हें देखकर देवता बोले--' अग्ने! आप हविष्यके

English

"Take my sons, fortunate one, to the abode of the Nagas; near the ocean there is a cool lake."

अध्याय 159

श्लोक 17

सुपर्णस् त्व् अवहन् नागान् कद्रूं च विनता तथा ततः प्रोवाच मुदिता वैनतेयस्य मातरम्

suparṇas tv avahan nāgān kadrūṃ ca vinatā tathā tataḥ provāca muditā vainateyasya mātaram

हिन्दी अर्थ

द्वारा देवताओंको, कव्य (श्राद्ध)-से पितरोंको तथा अन्नको पचाने और बीजको गलाने आदिके द्वारा मनुष्योंको जीवित कोजिये।'

English

Suparna carried the Nagas, and Kadru and Vinata; then she, glad, said to the mother of Vainateya (Garuda):

अध्याय 159

श्लोक 18

सुराणां नेतु निलयं गरुडो मत्सुतान् इति पुनः प्राह सर्पमाता गरुडं विनयान्वितम्

surāṇāṃ netu nilayaṃ garuḍo matsutān iti punaḥ prāha sarpamātā garuḍaṃ vinayānvitam

हिन्दी अर्थ

इस कार्यमें समर्थ था, चला गया। आपलोगोंका काम करनेमें जातवेदाको जो गति हुई है, वह मेरी भी हो सकती है। अतः मुझे आपलोगोंके कार्य-साधनमें उत्साह नहीं है।' तब देवताओं

English

"Garuda is to take my sons to the abode of the gods"; again the mother of serpents said to the modest Garuda:

अध्याय 159

श्लोक 19

पुत्रा मे द्रष्टुम् इच्छन्ति हंसं त्रिजगतां गुरुम् नमस्कृत्वा ततः सूर्यम् एष्यन्ति निलयं मम हण्डे त्वं नय पुत्रान् मे सूर्यमण्डलम् अन्वहम्

putrā me draṣṭum icchanti haṃsaṃ trijagatāṃ gurum namaskṛtvā tataḥ sūryam eṣyanti nilayaṃ mama haṇḍe tvaṃ naya putrān me sūryamaṇḍalam anvaham

हिन्दी अर्थ

और ऋषियोंने सब प्रकारसे अग्निको प्रार्थना करते हुए कहा-- हव्यवाहन! हमलोग आपको आयु, कर्म करनेमें उत्साह और सर्वत्र व्यापक होनेकी शक्ति देते हैं। साथ ही प्रयाज और

English

"My sons wish to see the Swan, teacher of the three worlds; after bowing to the Sun they will come to my abode. You, take my sons daily to the Sun's disc."

अध्याय 159

श्लोक 20

सा वेपमाना विनता दीना कद्रूम् अभाषत

sā vepamānā vinatā dīnā kadrūm abhāṣata

हिन्दी अर्थ

अनुयाज भी देंगे। देवताओंके आप ही श्रेष्ठ मुख होंगे। पहली आहुतियाँ आपको ही मिलेंगी। आप जो द्रव्य हमें देंगे, वही हम भोजन करेंगे ।'

English

Trembling, the wretched Vinata said to Kadru:

अध्याय 159

श्लोक 21

नाहं क्षमा सर्पमातः पुत्रो मे नेष्यते सुतान् दृष्ट्वा दिनकरं देवं पुनर् एव प्रयान्तु ते

nāhaṃ kṣamā sarpamātaḥ putro me neṣyate sutān dṛṣṭvā dinakaraṃ devaṃ punar eva prayāntu te

हिन्दी अर्थ

और यज्ञगर्भ-इन नामोंसे उन्हींका बोध होने लगा। देवताओंने अग्निको जलसे निकाला और जातवेदा तथा अग्नि दोनोंके पदपर उनका अभिषेक किया। कार्य सिद्ध होनेपर देवता भी अपने-

English

"I am not able, mother of serpents; my son will not take them. Let your sons, after seeing the day-making god, go back."

अध्याय 159

श्लोक 22

विनता स्वसुतं प्राह विहगानाम् अधीश्वरम् नमस्कर्तुम् अथेच्छन्ति नागाः स्वामित्वम् आगताः

vinatā svasutaṃ prāha vihagānām adhīśvaram namaskartum athecchanti nāgāḥ svāmitvam āgatāḥ

हिन्दी अर्थ

अपने स्थानको चले गये। तभीसे वह स्थान ' बहितीर्थ' कहलाता है। वहाँ सात सौ उत्तम तीर्थोका निवास है। जो जितात्मा पुरुष उन तीर्थाँमें स्नान और दान करता है, उसे अश्वमेध-यज्ञका पूरा फल

English

Vinata said to her son, lord of birds: "The Nagas, having come to lordship, wish to bow down."

अध्याय 159

श्लोक 23

भास्वन्तम् इत्य् उवाचेयं मां सर्पजननी हठात् तथेत्य् उक्त्वा स गरुडो माम् आरोहन्तु पन्नगाः

bhāsvantam ity uvāceyaṃ māṃ sarpajananī haṭhāt tathety uktvā sa garuḍo mām ārohantu pannagāḥ

हिन्दी अर्थ

प्राप्त होता है। वहीं देवतीर्थ, अग्नितीर्थ और जातवेदस्तीर्थ भी हैं। अग्निद्वारा स्थापित अनेक वर्णोके शिवलिङ्गका भी वहाँ दर्शन होता है। उसके दर्शनसे सब यज्ञोंका फल प्राप्त होता है।

English

"The mother of serpents said to me by force, 'to the Sun.'" Saying "So be it," Garuda said, "Let the serpents mount me."

अध्याय 159

श्लोक 24

तदारूढं सर्पसैन्यं गरुडं विहगाधिपम् शनैः शनैर् उपगमद् यत्र देवो दिवाकरः ते दह्यमानास् तीक्ष्णेन भानुतापेन विव्यथुः

tadārūḍhaṃ sarpasainyaṃ garuḍaṃ vihagādhipam śanaiḥ śanair upagamad yatra devo divākaraḥ te dahyamānās tīkṣṇena bhānutāpena vivyathuḥ

हिन्दी अर्थ

उसके बाद "ऋणमोचन' नामक तीर्थ है। जिसके महत्त्वको वेदवेत्ता पुरुष जानते हैं। नारद! मैं उसके स्वरूपको बतलाता हूँ, मन लगाकर सुनो। कक्षीवान्का ज्येष्ठ पुत्र पृथुश्रवा था। वह

English

Then, with the serpent host mounted, the lord of birds Garuda slowly went to where the god, the Day-maker, was; burning in the Sun's sharp heat they writhed.

अध्याय 159

श्लोक 25

निवर्तस्व महाप्राज्ञ पतंगाय नमो नमः अलं सूर्यस्य सदनं दग्धाः सूर्यस्य तेजसा यामस् त्वया वा गरुड विहाय त्वाम् अथापि वा

nivartasva mahāprājña pataṃgāya namo namaḥ alaṃ sūryasya sadanaṃ dagdhāḥ sūryasya tejasā yāmas tvayā vā garuḍa vihāya tvām athāpi vā

हिन्दी अर्थ

वैराग्यके कारण न तो विवाह करता था और न अग्निहोत्र ही। कक्षीवानूका कनिष्ठ पुत्र भी विवाहके योग्य हो गया था तो भी उसने परिवित्ति होनेके भयसे विवाह और अग्निहोत्र नहीं किये। तब

English

"Turn back, greatly wise one! Salutations to the Sun again and again! Enough of the Sun's abode; we are burnt by the Sun's heat; either you or we should go, leaving you."

अध्याय 159

श्लोक 26

एवं नागैर् उच्यमान आदित्यं दर्शयामि वः इत्य् उक्त्वा गगनं शीघ्रं जगामादित्यसंमुखः

evaṃ nāgair ucyamāna ādityaṃ darśayāmi vaḥ ity uktvā gaganaṃ śīghraṃ jagāmādityasaṃmukhaḥ

हिन्दी अर्थ

पितरोंने कक्षीवान्के दोनों पुत्रोंसे पृथक्-पृथक् कहा--' तुम देव-ऋण, ऋषि-ऋण और पितृ- ऋणसे मुक्त होनेके लिये विवाह करो।' ज्येष्ठ पुत्रने कहा, ' नहीं, कैसा ऋण और कौन उससे

English

Thus addressed by the Nagas, he said, "I shall show you the Sun," and quickly went into the sky, facing the Sun.

अध्याय 159

श्लोक 27

दग्धभोगा निपेतुस् ते द्वीपं तं वीरणं प्रति बहवः शतसाहस्राः पीडिता दग्धविग्रहाः

dagdhabhogā nipetus te dvīpaṃ taṃ vīraṇaṃ prati bahavaḥ śatasāhasrāḥ pīḍitā dagdhavigrahāḥ

हिन्दी अर्थ

मुक्त होता है।' छोटे पुत्रने उत्तर दिया, “बडे भाईके अविवाहित रहते मेरा विवाह करना उचित नहीं है। अन्यथा परिवित्ति होनेका भय है।' तब

English

With their bodies burnt, they fell on that island Viranna in great numbers, hundreds of thousands, tormented, their bodies scorched.

अध्याय 159

श्लोक 28

पुत्राणाम् आर्तसंनादं पतितानां महीतले आश्वासितुं समायाता तान् सा कद्रूः सुविह्वला

putrāṇām ārtasaṃnādaṃ patitānāṃ mahītale āśvāsituṃ samāyātā tān sā kadrūḥ suvihvalā

हिन्दी अर्थ

बड़े भाईकी अविवाहित अवस्थामें विवाह कर लेनेवाला छोटा भाई परिवित्ति कहलाता है । इसे शास्त्रोंमें दोष

English

Hearing the distressed cry of her sons fallen on the ground, Kadru, greatly agitated, came to console them.

अध्याय 159

श्लोक 29

उवाच विनतां कद्रूस् तव पुत्रो ऽतिदुष्कृतम् कृतवान् अतिदुर्मेधा येषां शान्तिर् न विद्यते

uvāca vinatāṃ kadrūs tava putro 'tiduṣkṛtam kṛtavān atidurmedhā yeṣāṃ śāntir na vidyate

हिन्दी अर्थ

पितरोंने उन दोनोंसे कहा--' तुमलोग गौतमी गङ्गामें स्नान करनेसे बड़े भाईपर कोई ऋण नहीं रहता जाकर स्नान करो । गौतमीका स्नान सब मनोरथोंको और छोटा भाई परिवित्ति नहीं होता ।'

English

Kadru said to Vinata: "Your son did a very wicked deed, very dull-witted, for whom there is no peace.

अध्याय 159

श्लोक 30

नान्यथा कर्तुम् आयाति स्वामिवाक्यं फणीश्वरः स काश्यपो बृहत्तेजा यद्य् अत्र स्याद् अनामयम्

nānyathā kartum āyāti svāmivākyaṃ phaṇīśvaraḥ sa kāśyapo bṛhattejā yady atra syād anāmayam

हिन्दी अर्थ

सिद्ध करनेवाला है । गौतमी गङ्गा तीनों लोकोंको पितरोंके आदेशसे कक्षीवान्का ज्येष्ठ पुत्र पवित्र करनेवाली हें । उनके जलमें श्रद्धापूर्वक पृथुश्रवा गौतमीमें स्नान और तर्पण करके तीनों स्नान और तर्पण करो। गौतमीका दर्शन, वन्दन क्रणोंसे मुक्त हो गया। तबसे वह तीर्थ त्रणमोचन ' और ध्यान करनेसे वे समस्त कामनाएँ पूर्ण करती कहलाता है। वहाँ स्नान और दान करनेसे

English

The lord of serpents cannot do otherwise than his master's word; if the great-brilliant Kashyapa were here, there might be a cure.

अध्याय 159

श्लोक 31

भवेच् चैवं कथं शान्तिः पुत्राणां मम भामिनि कद्र्वास् तद् वचनं श्रुत्वा विनता ह्य् अतिभीतवत्

bhavec caivaṃ kathaṃ śāntiḥ putrāṇāṃ mama bhāmini kadrvās tad vacanaṃ śrutvā vinatā hy atibhītavat

हिन्दी अर्थ

हैं। वहाँ स्नान करनेके लिये कोई देश, काल ऋणवान् मनुष्य श्रौत-स्मार्त तथा अन्य ऋणोंसे और जाति आदिका नियम नहीं है। गौतमीमें भी मुक्त होकर सुखी होता है।

English

Otherwise, how can there be peace for my sons, fair one?" Hearing Kadru's words, Vinata, greatly afraid,

अध्याय 159

श्लोक 32

पुत्रम् आह महात्मानं गरुडं विहगाधिपम्

putram āha mahātmānaṃ garuḍaṃ vihagādhipam

हिन्दी अर्थ

सुपर्णा-संगम, पुरूरवस्तीर्थ, पञ्चतीर्थ, शमीतीर्थ, सोम आदि तीर्थ तथा वद्धा-संगम-तीर्थकी महिमा

English

said to her great-souled son Garuda, the lord of birds:

अध्याय 159

श्लोक 33

नेदं युक्ततरं पुत्र भूषणं विनयेन हि वर्तितुं युक्तम् इत्य् उक्तं वैपरीत्यं न युज्यते

nedaṃ yuktataraṃ putra bhūṣaṇaṃ vinayena hi vartituṃ yuktam ity uktaṃ vaiparītyaṃ na yujyate

हिन्दी अर्थ

ब्रह्माजी कहते हैं--इसके बाद सुपर्णा-संगम जाकर राजाका संदेश सुना दिया । सरस्वतीने स्वीकार तथा काद्रवा-संगम नामक तीर्थ हैं, जहाँ भगवान् कर लिया तथा अपनी प्रतिज्ञाके अनुसार वह महेश्वर गङ्गाके तटपर स्थित हैं। वहीं अग्निकुण्ड, पुरूरवाके पास आयी। राजाने सरस्वती नदीके रुद्रकुण्ड, विष्णुकुण्ड, सूर्यकुण्ड, सोमकुण्ड, ब्रह्मकुण्ड, तटपर उसके साथ अनेक वर्षोतक विहार किया

English

"This is not the better ornament, son; it is said that it is fitting to behave with modesty, and the opposite is not fitting.

अध्याय 159

श्लोक 34

नामित्रेष्व् अपि कर्तव्यं सद्भिर् जिह्मं कदाचन श्रोत्रिये चान्त्यजे वापि समं चन्द्रः प्रकाशते

nāmitreṣv api kartavyaṃ sadbhir jihmaṃ kadācana śrotriye cāntyaje vāpi samaṃ candraḥ prakāśate

हिन्दी अर्थ

कुमारकुण्ड तथा वरुणकुण्ड भी हैं। उस स्थानपर यह देख मैंने सरस्वतीको शाप दे दिया। मेरे अप्सरा नामको नदी गौतमी गङ्गामें मिली है। शापके कारण वह मृत्युलोकमें कहीं लुप्त हो गयी उस तीर्थके स्मरणमात्रसे मनुष्य कृतकृत्य हो जाता है और कहीं दिखायी देती है। जहाँ सरस्वती हे। वह सब पापोंका निवारण करनेवाला है। नदी गङ्गामें मिली है, वहाँ पहुँचकर राजा पुरूरवाने

English

Even toward enemies the good should never do crooked things; the moon shines equally on a Vedic scholar and an outcaste.

अध्याय 159

श्लोक 35

कुर्वन्त्य् अनिष्टं कपटैस् त एव मम पुत्रक प्रसह्य कर्तुं ये साक्षाद् अशक्ताः पुरुषाधमाः

kurvanty aniṣṭaṃ kapaṭais ta eva mama putraka prasahya kartuṃ ye sākṣād aśaktāḥ puruṣādhamāḥ

हिन्दी अर्थ

उससे आगे पुरूरवस् नामक तीर्थ है। उसके तपस्या की और महादेवजीकी आराधना करके दर्शनको तो बात ही क्या, स्मरणमात्रसे ही पापोंका गङ्गाजीके प्रसादसे सम्पूर्ण अभीष्ट प्राप्त कर लिया। नाश हो जाता है। एक समय राजा पुरूरवा तबसे उस स्थानका नाम पुरूरवस्तीर्थ, सरस्वती- ब्रह्माजीकी सभामें गये। वहाँ देवनदी सरस्वती । संगम और ब्रह्मतीर्थ पड गया वहाँ सिद्धेश्वर

English

Those men, my son, do harm by tricks who are unable to do it directly by force; they are the lowest of men."

अध्याय 159

श्लोक 36

विनता च ततः प्राह कद्रूं तां सर्पमातरम्

vinatā ca tataḥ prāha kadrūṃ tāṃ sarpamātaram

हिन्दी अर्थ

ब्रह्माजीके पास बैठी हँस रही थीं। उस रूपवती नामसे प्रसिद्ध महादेवजी रहते हैं। वह तीर्थ समस्त देवीको देखकर राजाने उर्वशीसे पूछा-- 'ब्रह्माजीके कामनाओंको देनेवाला है। पास यह रूपवती साध्वी स्त्री कौन है ? यह तो। उसके सिवा सावित्री, गायत्री, श्रद्धा, मेधा सबसे सुन्दरी युवती है और अपने सौन्दर्यके और सरस्वती--ये पाँच पुण्य तीर्थ हैं। वहाँ स्नान

English

Then Vinata said to that Kadru, mother of serpents:

अध्याय 159

श्लोक 37

किं कृत्वा शान्तिर् अभ्येति पुत्राणां ते करोमि तत् जरया तु गृहीतास् ते वद शान्तिं करोमि तत्

kiṃ kṛtvā śāntir abhyeti putrāṇāṃ te karomi tat jarayā tu gṛhītās te vada śāntiṃ karomi tat

हिन्दी अर्थ

प्रकाशसे इस सभाको उद्दीप्त कर रही है।' उर्वशीने और जलपान करनेसे मनुष्य सब पापोंसे मुक्त हो कहा-- ये कल्याणमयी ब्रह्मकुमारी देवनदी सरस्वती जाता है। ये पाँचों मेरी कन्याएँ हैं, जो नदीरूपमें हैं । ये प्रतिदिन आती-जाती रहती हैं।' यह सुनकर परिणत हो गयी हैं। जहाँ वे भगवती गङ्गासे राजाको बडा विस्मय हुआ। उन्होंने उर्वशीसे मिली हैं, वहीं पाँच तीर्थ हैं। वे पाँच नदियाँ और

English

"By what is peace attained for your sons? I shall do it. They have been seized by old age; say how peace can be made."

अध्याय 159

श्लोक 38

कद्रूर् अप्य् आह विनतां रसातलगतं पयः तेनाभिषेचितानां मे पुत्राणां शान्तिर् एष्यति

kadrūr apy āha vinatāṃ rasātalagataṃ payaḥ tenābhiṣecitānāṃ me putrāṇāṃ śāntir eṣyati

हिन्दी अर्थ

कहा--' इसको मेरे पास बुला लाओ।' उर्वशीने सरस्वती पवित्र तीर्थ हैं। मनुष्य उनमें स्नान, दान

English

Kadru then said to Vinata: "The water in Rasatala; by being sprinkled with it, my sons will find peace."

अध्याय 159

श्लोक 39

कद्र्वास् तद् वचनं श्रुत्वा रसातलगतं पयः क्षणेनैव समानीय नागांस् तान् अभ्यषेचयत् ततः प्रोवाच गरुडो मघवानं शतक्रतुम्

kadrvās tad vacanaṃ śrutvā rasātalagataṃ payaḥ kṣaṇenaiva samānīya nāgāṃs tān abhyaṣecayat tataḥ provāca garuḍo maghavānaṃ śatakratum

हिन्दी अर्थ

सुपर्णा-संगम, पुरूरवस्तीर्थ, पञ्चतीर्थ, शमीतीर्थ, सोम आदि तीर्थांकी महिमा

English

Hearing Kadru's words, in a moment he brought the water from Rasatala and sprinkled those Nagas. Then Garuda said to Maghavan Shatakratu:

अध्याय 159

श्लोक 40

मेघाश् चाप्य् अत्र वर्षन्तु त्रैलोक्यस्योपकारिणः

meghāś cāpy atra varṣantu trailokyasyopakāriṇaḥ

हिन्दी अर्थ

आदि जो कुछ भी करता है, वह सब अभिलषित वस्तुओंको देनेवाला तथा नैष्कर्म्यसे भी बढ़कर मोक्षका साधक माना गया है।

English

"And let the clouds rain here, benefactors of the three worlds."

अध्याय 159

श्लोक 41

तथा ववर्ष पर्जन्यो नागानाम् अभवच् छिवम् रसातलभवं गाङ्गं नागसंजीवनं पयः

tathā vavarṣa parjanyo nāgānām abhavac chivam rasātalabhavaṃ gāṅgaṃ nāgasaṃjīvanaṃ payaḥ

हिन्दी अर्थ

शमीतीर्थके नामसे जिसकी प्रसिद्धि है, वह भी सब पापोंकी शान्ति करनेवाला है। नारद! उस तीर्थकी कथा सुनाता हूँ, सावधान होकर सुनो। पूर्वकालमें प्रियत्रत नामसे प्रसिद्ध क्षत्रिय

English

Parjanya thus rained, and welfare came to the Nagas; the Ganga water born in Rasatala is the reviver of Nagas,

अध्याय 159

श्लोक 42

जराशोकविनाशार्थम् आनीतं गरुडेन यत् यत्राभिषेचिता नागास् तन् नागालयम् उच्यते

jarāśokavināśārtham ānītaṃ garuḍena yat yatrābhiṣecitā nāgās tan nāgālayam ucyate

हिन्दी अर्थ

राजा हो गये हैं। उन्होंने गोदावरीके दक्षिण- तटपर अश्वमेध-यज्ञको दीक्षा ली। उस यज्ञके पुरोहित हुए वसिष्ठजी। एक दिन उस यञज्ञमें हिरण्यक नामका दानव आया। महर्षि वसिष्ठने

English

which Garuda brought to destroy old age and grief; where the Nagas were sprinkled, that is called Nagalaya.

अध्याय 159

श्लोक 43

गरुडेन यतो वारि आनीतं तद् रसातलात् तद् गाङ्गं वारि सर्वेषां सर्वपापप्रणाशनम्

garuḍena yato vāri ānītaṃ tad rasātalāt tad gāṅgaṃ vāri sarveṣāṃ sarvapāpapraṇāśanam

हिन्दी अर्थ

अपने ब्रह्मदण्डसे सब हैत्योंको मार भगाया। तदनन्तर पुनः यज्ञ आरम्भ हुआ। हैत्य अपनी सेनाके साथ भाग खड़ा हुआ। वहाँ निम्नाङ्कित तीर्थोने अश्वमेध-यज्ञके फल दिये-शमीतीर्थ,

English

Because Garuda brought that water from Rasatala, that Ganga water destroys all sins of all.

अध्याय 159

श्लोक 44

जराया वारणं यस्मान् नागानाम् अभवच् छिवम् रसातलभवं गाङ्गं नागसंजीवनं यतः

jarāyā vāraṇaṃ yasmān nāgānām abhavac chivam rasātalabhavaṃ gāṅgaṃ nāgasaṃjīvanaṃ yataḥ

हिन्दी अर्थ

विष्णुतीर्थ, अर्कतीर्थ, शिवतीर्थ, सोमतीर्थं और वसिष्ठतीर्थ। यज्ञ समाप्त होनेपर देवताओं और ऋषियोंने वसिष्ठ और प्रिय्रतसे कहा-इन तीर्थोने अश्वमेध-यज्ञका फल दिया है; अतः इनमें स्नान-

English

Because it warded off old age and brought welfare to the Nagas, because the Ganga water born in Rasatala revives the Nagas,

अध्याय 159

श्लोक 45

जराशोकविनाशार्थं गङ्गाया दक्षिणे तटे साक्षाद् अमृतसंवाहा वञ्जरा साभवन् नदी

jarāśokavināśārthaṃ gaṅgāyā dakṣiṇe taṭe sākṣād amṛtasaṃvāhā vañjarā sābhavan nadī

हिन्दी अर्थ

दान करनेसे मनुष्य अश्वमेध-यज्ञका पुण्य-फल प्राप्त करेगा-इसमें तनिक भी मिथ्या नहीं है।

English

for destroying old age and grief, on the south bank of the Ganga, the river Vanjara came into being, directly bearing nectar.

अध्याय 159

श्लोक 46

जरादारिद्र्यसंतापहारिणी क्लेशवारिणी रसातलभवा गङ्गा मर्त्यलोकभवा तु या

jarādāridryasaṃtāpahāriṇī kleśavāriṇī rasātalabhavā gaṅgā martyalokabhavā tu yā

हिन्दी अर्थ

मुने! गौतमीमें एक स्थानपर अनेक नद- नदियाँ मिली हैं । उन सबके नामपर पृथक्-पृथक् तीर्थ हैं। उन तीर्थाके नाम ये हैं-सोमतीर्थ, गन्धर्वतीर्थ, देवतीर्थ, पूर्णातीर्थ, शालतीर्थ, श्रीपर्णा-

English

It removes old age, poverty and torment, and keeps off affliction; the Ganga born in Rasatala and that born in the human world —

अध्याय 159

श्लोक 47

तयोश् च संगमो यः स्यात् किं पुनस् तत्र वर्ण्यते यस्यानुस्मरणाद् एव नाशं यान्त्य् अघसंचयाः

tayoś ca saṃgamo yaḥ syāt kiṃ punas tatra varṇyate yasyānusmaraṇād eva nāśaṃ yānty aghasaṃcayāḥ

हिन्दी अर्थ

कर्णिका-संगम, वैणवी-संगम, कृशरा-संगम, वासवी- संगम, शिवशर्मा, शिखी, कुसुम्भिका, उपारथ्या, शान्तिजा, देवजा, अज, वृद्ध, सुर और भद्र आदि। ये तथा और भी बहुत-से नद-नदीगण

English

their confluence, what more can be described of it, by mere remembrance of which heaps of sins go to destruction?

अध्याय 159

श्लोक 48

तत्र च स्नानदानानां फलं को वक्तुम् ईश्वरः सपादं तत्र तीर्थानां लक्षम् आहुर् मनीषिणः

tatra ca snānadānānāṃ phalaṃ ko vaktum īśvaraḥ sapādaṃ tatra tīrthānāṃ lakṣam āhur manīṣiṇaḥ

हिन्दी अर्थ

नदरूपमें। किसीका रूप सरोवरके आकारमें था और किसीका स्रोतके आकारमें। वे ही सब तीर्थ पृथक्-पृथक् विख्यात हुए। उन सबमें किया हुआ स्नान, जप, होम, पितृ-तर्पण आदि कर्म

English

Who can tell the fruit of bathing and giving there? The wise say there are one hundred and twenty-five thousand holy places there.

अध्याय 159

श्लोक 49

सर्वसंपत्तिदातॄणां सर्वपापौघहारिणाम् वञ्जरासंगमसमं तीर्थं क्वापि न विद्यते यदनुस्मरणेनापि विपद्यन्ते विपत्तयः

sarvasaṃpattidātṝṇāṃ sarvapāpaughahāriṇām vañjarāsaṃgamasamaṃ tīrthaṃ kvāpi na vidyate yadanusmaraṇenāpi vipadyante vipattayaḥ

हिन्दी अर्थ

समस्त कामनाओंकी पूर्ति करनेवाला और मुक्तिदायक माना गया है। जो इनके नामोंका पाठ अथवा स्मरण करता हे, वह सब पापोंसे मुक्त हो भगवान् विष्णुके धाममें जाता है

English

Of holy places that give all prosperity and remove all floods of sin, none anywhere equals the Vanjara confluence, by mere remembrance of which calamities perish.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_brahmapurANa-1-246.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।