Brahma Purana
2
अध्याय 2 / 246

Adhyaya 2

भुवन कोश

2 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय 2

श्लोक 1

सप्तद्वीपा वसुमती त्रिलोकी सप्तसागरा ।मेरुर्मध्यगतः श्रीमान् यत्र देवनिकायनः

saptadvīpā vasumatī trilokī saptasāgarā | merurmadhyagataḥ śrīmān yatra devanikāyanaḥ

हिन्दी अर्थ

सात द्वीपों वाली पृथ्वी, तीन लोकों और सात समुद्रों वाली — मध्य में श्रीमान् मेरु पर्वत, जहाँ देवताओं के निकाय निवास करते हैं।

English

The earth has seven continents, the three worlds have seven oceans, and Meru — glorious, situated at the centre — where the hosts of gods reside.

अध्याय 2

श्लोक 2

गङ्गा त्रिपथगा दिव्या त्रैलोक्यपावनी शुभा ।ब्रह्मलोकात् समागत्य ब्रह्मपुत्री प्रतिष्ठिता

gaṅgā tripathagā divyā trailokyapāvanī śubhā | brahmalokāt samāgatya brahmaputrī pratiṣṭhitā

हिन्दी अर्थ

तीन मार्गों से बहने वाली, दिव्य, त्रिलोकी-पावनी, शुभा गंगा — ब्रह्मलोक से आकर ब्रह्मा की पुत्री के रूप में प्रतिष्ठित हुई।

English

Ganga, flowing through three paths, divine, purifier of the three worlds, auspicious — coming from Brahmaloka, established as the daughter of Brahma.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_brahmapurANa-1-246.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।