Brahma Purana
226
अध्याय 226 / 246

Adhyaya 226

67 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ67 श्लोक

अध्याय 226

श्लोक 1

श्रुत्वैवं सा जगन्माता भर्तुर् वचनम् आदितः हृष्टा बभूव सुप्रीता विस्मिता च तदा द्विजाः

śrutvaivaṃ sā jaganmātā bhartur vacanam āditaḥ hṛṣṭā babhūva suprītā vismitā ca tadā dvijāḥ

हिन्दी अर्थ

उत्पन्न करते हैं। राजस, तामस और सात्विक भेदसे तीन प्रकारके अहंकारोंसे आकाश, वायु,

English

He said to the Moon again: "How will I see Mahe- 3vara? I am a boy with childish intelligence. I have neither skill nor power of penance."

अध्याय 226

श्लोक 2

ये तत्रासन् मुनिवरास् त्रिपुरारेः समीपतः तीर्थयात्राप्रसङ्गेन गतास् तस्मिन् गिरौ द्विजाः

ye tatrāsan munivarās tripurāreḥ samīpataḥ tīrthayātrāprasaṅgena gatās tasmin girau dvijāḥ

हिन्दी अर्थ

तथा कान, त्वचा, नेत्र, जिह्वा और नासिका-ये

English

O lord, after hearing in detail the death of both of them on account of Devas, I am overwhelmed by misery and anger. I am not eager to live.

अध्याय 226

श्लोक 3

ते ऽपि संपूज्य तं देवं शूलपाणिं प्रणम्य च पप्रच्छुः संशयं चैव लोकानां हितकाम्यया

te 'pi saṃpūjya taṃ devaṃ śūlapāṇiṃ praṇamya ca papracchuḥ saṃśayaṃ caiva lokānāṃ hitakāmyayā

हिन्दी अर्थ

लिङ्ग-ये पाँच कर्मेन्द्रियाँ हैं। मनके सहित इन सबका प्रादुर्भाव हुआ है। ये चौबीस तत्त्व सम्पूर्ण शरीरोंमें मौजूद रहते हैं। इनके स्वरूपको भलीभाति जानकर तत्वदर्शी ब्राह्मण कभी शोक नहीं करते।

English

Hence, grant me sufficient capacity to destroy Devas. In all the three worlds, you alone, O Moon-crested one, are worthy of being served by those who should not be killed.

अध्याय 226

श्लोक 4

त्रिलोचन नमस् ते ऽस्तु दक्षक्रतुविनाशन पृच्छामस् त्वां जगन्नाथ संशयं हृदि संस्थितम्

trilocana namas te 'stu dakṣakratuvināśana pṛcchāmas tvāṃ jagannātha saṃśayaṃ hṛdi saṃsthitam

हिन्दी अर्थ

नरश्रेष्ठ! यह त्रिलोकी उन्हीं तत्त्वोसे बनी है।

English

O sinless one, if you are capable of looking at my third eye you will be competent to assail your foes.

अध्याय 226

श्लोक 5

संसारे ऽस्मिन् महाघोरे भैरवे लोमहर्षणे भ्रमन्ति सुचिरं कालं पुरुषाश् चाल्पमेधसः

saṃsāre 'smin mahāghore bhairave lomaharṣaṇe bhramanti suciraṃ kālaṃ puruṣāś cālpamedhasaḥ

हिन्दी अर्थ

चारण, पिशाच, देवर्षि, निशाचर, दंश, कीट,

English

Then he desired to look at the third eye of the lord but could not. Then he said to Sankara: "I am not able'*.

अध्याय 226

श्लोक 6

येनोपायेन मुच्यन्ते जन्मसंसारबन्धनात् ब्रूहि तच् छ्रोतुम् इच्छामः परं कौतूहलं हि नः

yenopāyena mucyante janmasaṃsārabandhanāt brūhi tac chrotum icchāmaḥ paraṃ kautūhalaṃ hi naḥ

हिन्दी अर्थ

चतुर्युग होता है। एक हजार चतुर्युगको ब्रह्माका मशक, दुर्गन्धित कीड़े, चूहे, कुत्ते, चाण्डाल, एक दिन कहते हैं। इसीको कल्प समझो। दिनके हिरन, पुक्कस, हाथी, घोड़े, गदहे, व्याघ्र, भेड़िये ही बराबर ब्रह्माजीकी रात्रि भी होती है, जिसके तथा गौ आदि जितने भी मूर्तिमान् पदार्थ हैं, उन अन्तमें वे सोकर उठते हैं और इस विशाल सबमें इन्हीं तत्त्वोंका दर्शन होता है। पृथ्वी, जल

English

O boy, do some penance so that you will be able to look at my third eye. Then you will undoubtedly attain your desire.

अध्याय 226

श्लोक 7

कर्मपाशनिबद्धानां नराणां दुःखभागिनाम् नान्योपायं प्रपश्यामि वासुदेवात् परं द्विजाः

karmapāśanibaddhānāṃ narāṇāṃ duḥkhabhāginām nānyopāyaṃ prapaśyāmi vāsudevāt paraṃ dvijāḥ

हिन्दी अर्थ

विश्वको सृष्टि करते हैं। वे यद्यपि निराकार हैं तो और आकाशमें ही प्राणियोंका निवास है; अन्यत्र भी साकार जगतूकी रचना करते हैं । उनमें अणिमा, नहीं । यह सम्पूर्ण जगत् व्यक्त कहलाता है। प्रतिदिन लघिमा तथा प्राप्ति आदि शक्तियोंका स्वाभाविक इसका क्षरण (क्षय) होता है, इसलिये इसको क्षर निवास है वे अविनाशी ज्योतिर्मय परमेश्वर हैं। कहते हैं । इससे भिन्न तत्त्व अक्षर कहा गया है।

English

On hearing that aerial voice, Pippalada became angry. When the fire of pride and prestige burns within, advice regarding proper conduct is meaningless.

अध्याय 226

श्लोक 8

ये पूजयन्ति तं देवं शङ्खचक्रगदाधरम् वाङ्मनःकर्मभिः सम्यक् ते यान्ति परमां गतिम्

ye pūjayanti taṃ devaṃ śaṅkhacakragadādharam vāṅmanaḥkarmabhiḥ samyak te yānti paramāṃ gatim

हिन्दी अर्थ

क्षर-अक्षर तथा योग और साँख्यका वर्णन ४२७

English

O Krtya, do not seize living beings remaining within a range of a Yojana (12 km) at my behest. Go far away from that place and do your duty.

अध्याय 226

श्लोक 9

किं तेषां जीवितेनेह पशुवच् चेष्टितेन च येषां न प्रवणं चित्तं वासुदेवे जगन्मये

kiṃ teṣāṃ jīviteneha paśuvac ceṣṭitena ca yeṣāṃ na pravaṇaṃ cittaṃ vāsudeve jaganmaye

हिन्दी अर्थ

सम्पूर्ण भूतोंके आत्मा परमेश्वरको ही अक्षर कहते अज्ञानी पुरुष तमोगुण, सत्त्वगुण और रजोगुणसे हैं। इस प्रकार उस अव्यक्त अक्षरसे उत्पन्न यह युक्त होकर तदनुकूल योनियोंमें जन्म लेता है। व्यक्त नामवाला मोहात्मक जगत् सदा क्षयशील वह ज्ञान न होने, अज्ञानी पुरुषोंका सेवन करने होनेके कारण 'क्षर' नाम धारण करता है। क्षरतत्त्वोमें तथा उनके सम्मर्कमें रहनेसे ऐसा अभिमान करने

English

That Krtya which had the form of Varava stood at a distance of a Yojana to the East from the holy centre Pippala.

अध्याय 226

श्लोक 10

पिनाकिन् भगनेत्रघ्न सर्वलोकनमस्कृत माहात्म्यं वासुदेवस्य श्रोतुम् इच्छाम शंकर

pinākin bhaganetraghna sarvalokanamaskṛta māhātmyaṃ vāsudevasya śrotum icchāma śaṃkara

हिन्दी अर्थ

सबसे पहले महत्तत्त्वकी सृष्टि हुई है। यही क्षरका लगता है कि “मैं बालक हूँ, यह हूँ, वह हूँ और निरूपण है । महाराज! तुम्हारे प्रश्‍नके अनुसार मैंने वह नहीं हूँ” इत्यादि। इस अभिमानके कारण वह क्षर-अक्षरका वर्णन किया। अक्षरतत्त्व पच्चीसवाँ प्राकृत गुणोंका ही अनुसरण करता है। तमोगुणके तत्त्व है। वह नित्य एवं निराकार है। उसको प्राप्त सेबनसे वह नाना प्रकारके तामसिक भावोंको प्राप्त

English

O Sambhu, protect us. The Krtya and the fire born of it assail us. O lord of all, O bestower of protection from fear to the frightened persons, be our refuge.

अध्याय 226

श्लोक 11

पितामहाद् अपि वरः शाश्वतः पुरुषो हरिः कृष्णो जाम्बूनदाभासो व्यभ्रे सूर्य इवोदितः

pitāmahād api varaḥ śāśvataḥ puruṣo hariḥ kṛṣṇo jāmbūnadābhāso vyabhre sūrya ivoditaḥ

हिन्दी अर्थ

कर लेनेपर इस संसारमें लौटना नहीं होता। जो होता है। रजोगुणके सेवनसे राजसिक और सत्त्वगुणके अव्यक्ततत्त्व इस व्यक्त जगत्को सृष्टि करता है, आश्रयसे वह सात्विक रूप ग्रहण करता है । काले, वह प्रत्येक शरीरमें साक्षीरूपसे निवास करता है। लाल और श्वेत--ये जो तीन प्रकारके रूप हैं, चौबीस तत्त्वोंका समुदाय तो व्यक्त है, किंतु उनका उन सबको प्राकृत ही जानो। तमोगुणी पुरुष नरकमें

English

O Siva, you alone are the refuge to the creatures that are attacked from all sides, that are distressed and that are extremely wearied.

अध्याय 226

श्लोक 12

दशबाहुर् महातेजा देवतारिनिषूदनः श्रीवत्साङ्को हृषीकेशः सर्वदैवतयूथपः

daśabāhur mahātejā devatāriniṣūdanaḥ śrīvatsāṅko hṛṣīkeśaḥ sarvadaivatayūthapaḥ

हिन्दी अर्थ

साक्षी पच्चीसवाँ तत्त्व परमात्मा निराकार होनेके पड़ते हैं, रजोगुणी मनुष्यलोकमें आते हैं और कारण अव्यक्त है। वही सम्पूर्ण देहधारियोंके सत्त्वगुणका आश्रय लेनेवाले जीव सुखके भागी हृदयमें निवास करता है। वह चेतनरूपसे सबको होकर देवलोकमें जाते हैं। केवल पापसे (पापको चेतना प्रदान करता है। वह स्वयं अमूर्त होते हुए प्रधानतासे) पशु-पक्षियोंको योनिमें जाना पड़ता

English

The Krtya coming from the fire of your eye has been requested by the sage and she is desirous of destroying the three worlds. You are our protector and none else.

अध्याय 226

श्लोक 13

ब्रह्मा तस्योदरभवस् तस्याहं च शिरोभवः शिरोरुहेभ्यो ज्योतींषि रोमभ्यश् च सुरासुराः

brahmā tasyodarabhavas tasyāhaṃ ca śirobhavaḥ śiroruhebhyo jyotīṃṣi romabhyaś ca surāsurāḥ

हिन्दी अर्थ

भी सर्वमूर्तिस्वरूप है । सृष्टि और प्रलयरूप धर्मसे है। पुण्य और पाप दोनोंका मेल होनेसे मनुष्यलोककी वह सृष्टिस्वरूप भी है और प्रलयस्वरूप भी । प्राप्ति होती है तथा केवल पुण्यसे (पुण्यकी प्रधानतासे) वही विश्वरूपमें सबको प्रत्यक्ष दृष्टिगोचर होता जीव देवताका स्वरूप प्राप्त करता है। अव्यक्त है। वह निर्गुण होते हुए भी गुणस्वरूप है। वह परमात्मामें जो स्थिति होती है, उसीको मनीषी

English

Again, they said to the lord of Devas: "O lord honoured and worshipped by gods, how shall we live here after abandoning heaven granted by you?*'

अध्याय 226

श्लोक 14

ऋषयो देहसंभूतास् तस्य लोकाश् च शाश्वताः पितामहगृहं साक्षात् सर्वदेवगृहं च सः

ṛṣayo dehasaṃbhūtās tasya lokāś ca śāśvatāḥ pitāmahagṛhaṃ sākṣāt sarvadevagṛhaṃ ca saḥ

हिन्दी अर्थ

परमात्मा करोड़ों सृष्टि और प्रलय करता रहता है, पुरुष मोक्ष कहते हैं। वे परमात्मा ही पच्चीसवाँ तथापि उसे अपने कर्तृत्वका अभिमान नहीं होता । तत्त्व हैं। ज्ञानसे ही उनकी प्राप्ति होती है। क्षर-अक्षर तथा योग और सांख्यका वर्णन

English

A person who has gone to heaven lives in the other world without any malady for as many years as there are days when the fascinating fame prevails in human world.

अध्याय 226

श्लोक 15

सो ऽस्याः पृथिव्याः कृत्स्नायाः स्रष्टा त्रिभुवनेश्वरः संहर्ता चैव भूतानां स्थावरस्य चरस्य च

so 'syāḥ pṛthivyāḥ kṛtsnāyāḥ sraṣṭā tribhuvaneśvaraḥ saṃhartā caiva bhūtānāṃ sthāvarasya carasya ca

हिन्दी अर्थ

जनकने कहा--मुनिश्रेष्ठ! क्षर और अक्षर आपको सब कुछ प्रत्यक्ष है। हमारे मनमें भी (प्रकृति और पुरुष) दोनोंका सम्बन्ध तो पत्नी मोक्षकी अभिलाषा है। हम भी उस पदको प्राप्त और पतिके सम्बन्धकी भाँति स्थिर जान पड़ता करना चाहते हैं, जो अनामय, अजेय, बुढापेसे है। जैसे पुरुषके बिना स्त्री तथा स्त्रीके बिना रहित, नित्य, इन्द्रियातीत एवं परम स्वतन्त्र है।

English

Only those who have no fame are considered dead here. Only those who are devoid of renown are (considered) blind. Those who are not habitually liberal in gifts are eunuchs. Only those who are not invariably virtuous are to be pitied.

अध्याय 226

श्लोक 16

स हि देवदेवः साक्षाद् देवनाथः परंतपः सर्वज्ञः सर्वसंस्रष्टा सर्वगः सर्वतोमुखः

sa hi devadevaḥ sākṣād devanāthaḥ paraṃtapaḥ sarvajñaḥ sarvasaṃsraṣṭā sarvagaḥ sarvatomukhaḥ

हिन्दी अर्थ

पुरुष संतान नहीं उत्पन्न कर सकते, उसी प्रकार वसिष्टजी बोले-राजन्! तुम्हारा कहना ठीक प्रकृति और पुरुष भी सदा एक-दूसरेसे संयुक्त है, तुमने वेद और शास्त्रोंका दृष्टान्त देकर अपना होकर ही सृष्टि करते हैं। ऐसी दशामें पुरुषका प्रश्‍न उपस्थित किया है। तथापि अभी ग्रन्थका मोक्ष असम्भव जान पड़ता है । यदि मोक्षके निकट यथार्थ तत्त्व तुम्हारे समझमें नहीं आया है। जो

English

On hearing the lord of Devas the sage became calm. After bowing down to the lord he spoke with palms joined in reverence.

अध्याय 226

श्लोक 17

न तस्मात् परमं भूतं त्रिषु लोकेषु किंचन सनातनो महाभागो गोविन्द इति विश्रुतः

na tasmāt paramaṃ bhūtaṃ triṣu lokeṣu kiṃcana sanātano mahābhāgo govinda iti viśrutaḥ

हिन्दी अर्थ

पहुँचनेवाला (उसके स्वरूपका स्पष्ट बोध वेद और शास्त्रोंके ग्रन्थोंको रट लेता है किंतु करानेवाला) कोई दृष्टान्त हो तो बताइये; क्योंकि उसके तत्त्वको नहीं समझता, उसका वह रटना

English

In the presence of the thousand-eyed lord (Indra) and others he spoke these words of fine sentiment and good syllables. Devas too agreed to the words uttered by the son of Dadhlci.

अध्याय 226

श्लोक 18

स सर्वान् पार्थिवान् संख्ये घातयिष्यति मानदः सुरकार्यार्थम् उत्पन्नो मानुष्यं वपुर् आस्थितः

sa sarvān pārthivān saṃkhye ghātayiṣyati mānadaḥ surakāryārtham utpanno mānuṣyaṃ vapur āsthitaḥ

हिन्दी अर्थ

४२८ » संक्षिप्त ब्रहापुराण

English

After appreciating the intellect, humility, learning, heroism, strength, truthfulness, filial devotion, and purity of emotions, Sankara said to Pippalada.

अध्याय 226

श्लोक 19

नहि देवगणाः शक्तास् त्रिविक्रमविनाकृताः भुवने देवकार्याणि कर्तुं नायकवर्जितः

nahi devagaṇāḥ śaktās trivikramavinākṛtāḥ bhuvane devakāryāṇi kartuṃ nāyakavarjitaḥ

हिन्दी अर्थ

व्यर्थ है। जो याद किये हुए ग्रन्थका अर्थ नहीं परमात्माको बुद्धि आदिसे परे सांख्ययोगस्वरूप जानता, वह तो केवल उसका बोझ ढोता है । बताया गया है । वह सत्त्वादि गुणोंसे रहित, अव्यक्त, उसके तत्त्वका यथार्थ बोध होनेसे ही वह उसके ईश्वर (नियामक), निर्गुण, नित्य तथा प्रकृति और अर्थको ग्रहण कर सकता है । जिसकी बुद्धि स्थूल उसके गुणोंका अधिष्ठाता पच्चीसवाँ तत्त्व है। यह

English

Dear boy, whatever cherished desire you have and whatever is pleasing to Devas you will attain. Speak out what is conducive to your welfare. Do not hesitate to speak out your mind.

अध्याय 226

श्लोक 20

नायकः सर्वभूतानां सर्वभूतनमस्कृतः एतस्य देवनाथस्य कार्यस्य च परस्य च

nāyakaḥ sarvabhūtānāṃ sarvabhūtanamaskṛtaḥ etasya devanāthasya kāryasya ca parasya ca

हिन्दी अर्थ

और मन्द है, अतएव जो ग्रन्थके तत्त्वको ठीक- सांख्य और योगमें कुशल एवं परम तत्त्वकी खोज ठीक जाननेके लिये उत्सुक नहीं है, वह उस करनेवाले विद्वानोंका कथन है । इस प्रकार परस्पर ग्रन्थके विषयका निर्णय कैसे कर सकता है। जो सम्बन्ध रखनेवाले क्षर-अक्षर (प्रकृति-पुरुष) - मनुष्य ग्रन्थके तत्त्वको जाने बिना ही लोभ अथवा का स्वरूप बताया गया। सदा एक रूपमें रहनेवाला

English

The leader of all beings, bowed to by all beings, of this lord of gods and of the higher work,

अध्याय 226

श्लोक 21

ब्रह्मभूतस्य सततं ब्रह्मर्षिशरणस्य च ब्रह्मा वसति नाभिस्थः शरीरे ऽहं च संस्थितः

brahmabhūtasya satataṃ brahmarṣiśaraṇasya ca brahmā vasati nābhisthaḥ śarīre 'haṃ ca saṃsthitaḥ

हिन्दी अर्थ

दम्भवश उसपर विवाद करता है, वह पापी नरकमें परमात्मा अक्षर है और नाना रूपोंमें प्रतीत होनेवाला पड़ता है। इसलिये महाराज! सांख्य और योगके प्राकृत जगत् क्षर कहलाता है। सारांश यह कि

English

who is always the embodiment of Brahman and the refuge of Brahman-sages: Brahma lives in his navel, and I am established in his body.

अध्याय 226

श्लोक 22

सर्वाः सुखं संस्थिताश् च शरीरे तस्य देवताः स देवः पुण्डरीकाक्षः श्रीगर्भः श्रीसहोषितः

sarvāḥ sukhaṃ saṃsthitāś ca śarīre tasya devatāḥ sa devaḥ puṇḍarīkākṣaḥ śrīgarbhaḥ śrīsahoṣitaḥ

हिन्दी अर्थ

ज्ञाता महात्मा पुरुषोंके मतमें मोक्षका जैसा स्वरूप देखा जाता है, उसे मैं यथार्थरूपसे बतलाता हूँ; सुनो। योगी जिस तत्त्वका साक्षात्कार करते हैं, सांख्यके विद्वान् भी उसीका ज्ञान प्राप्त करते हैं।

English

All the deities dwell comfortably in his body; that god is lotus-eyed, with Shri in his womb, dwelling with Shri,

अध्याय 226

श्लोक 23

शार्ङ्गचक्रायुधः खड्गी सर्वनागरिपुध्वजः उत्तमेन सुशीलेन शौचेन च दमेन च

śārṅgacakrāyudhaḥ khaḍgī sarvanāgaripudhvajaḥ uttamena suśīlena śaucena ca damena ca

हिन्दी अर्थ

जो सांख्य और योगको एक समझता है, वही बुद्धिमान् है। जैसे बीजसे बीजकी उत्पत्ति होती है, उसी प्रकार द्रव्यसे द्रव्य, इन्द्रियसे इन्द्रिय और

English

bearing the Sharnga bow, discus and sword, banner of all the city-foes (?), with excellent good character, purity and self-control,

अध्याय 226

श्लोक 24

पराक्रमेण वीर्येण वपुषा दर्शनेन च आरोहणप्रमाणेन वीर्येणार्जवसंपदा

parākrameṇa vīryeṇa vapuṣā darśanena ca ārohaṇapramāṇena vīryeṇārjavasaṃpadā

हिन्दी अर्थ

एकत्व ही अक्षर है और नानात्वको ही क्षर कहते हैं । जब जीवात्मा पच्चीसवें तत्त्व परमात्मामें स्थित हो जाता है, उस समय उसकी सम्यक् स्थिति बतायी जाती है। एकत्व और नानात्व दोनों रूपोंमें

English

with valour, strength, body, appearance, height, vigour and wealth of uprightness,

अध्याय 226

श्लोक 25

आनृशंस्येन रूपेण बलेन च समन्वितः अस्त्रैः समुदितः सर्वैर् दिव्यैर् अद्भुतदर्शनैः

ānṛśaṃsyena rūpeṇa balena ca samanvitaḥ astraiḥ samuditaḥ sarvair divyair adbhutadarśanaiḥ

हिन्दी अर्थ

उस परमात्माका ही दर्शन होता है। तत्त्ववेत्ता पुरुष एकत्व और नानात्व दोनोंके पार्थक्यको भलीभाँति जानता है। मनीषी पुरुष तत्त्वोंकी संख्या पच्चीस

English

endowed with mercy, beauty and strength, risen with all divine, wondrous-looking weapons,

अध्याय 226

श्लोक 26

योगमायासहस्राक्षो विरूपाक्षो महामनाः वाचा मित्रजनश्लाघी ज्ञातिबन्धुजनप्रियः

yogamāyāsahasrākṣo virūpākṣo mahāmanāḥ vācā mitrajanaślāghī jñātibandhujanapriyaḥ

हिन्दी अर्थ

देहसे देहकी प्राप्ति होती है। परंतु परमात्मा तो बतलाते हैं; परंतु उनमें पच्चीसवाँ तत्त्व परमात्मा इन्द्रिय, बीज, द्रव्य और देहसे रहित तथा निर्गुण है, जो तत्त्वोंसे विलक्षण है।

English

thousand-eyed by yoga-maya, many-eyed, great-minded, praising friends in speech, dear to kin and relatives,

अध्याय 226

श्लोक 27

क्षमावांश् चानहंवादी स देवो ब्रह्मदायकः भयहर्ता भयार्तानां मित्रानन्दविवर्धनः

kṣamāvāṃś cānahaṃvādī sa devo brahmadāyakaḥ bhayahartā bhayārtānāṃ mitrānandavivardhanaḥ

हिन्दी अर्थ

है; अतः उसमें गुण कैसे हो सकते हैं। जैसे

English

patient and free of boasting, that god is the giver of Brahman, remover of fear of the fearful, increaser of friends' joy,

अध्याय 226

श्लोक 28

शरण्यः सर्वभूतानां दीनानां पालने रतः श्रुतवान् अथ संपन्नः सर्वभूतनमस्कृतः

śaraṇyaḥ sarvabhūtānāṃ dīnānāṃ pālane rataḥ śrutavān atha saṃpannaḥ sarvabhūtanamaskṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

राजन्! योगीका प्रधान कर्तव्य है ध्यान; ध्यान

English

refuge of all beings, devoted to protecting the wretched, learned, and prosperous, bowed to by all beings,

अध्याय 226

श्लोक 29

समाश्रितानाम् उपकृच् छत्रूणां भयकृत् तथा नीतिज्ञो नीतिसंपन्नो ब्रह्मवादी जितेन्द्रियः

samāśritānām upakṛc chatrūṇāṃ bhayakṛt tathā nītijño nītisaṃpanno brahmavādī jitendriyaḥ

हिन्दी अर्थ

आकाश आदि गुण सत्त्वादि गुणोंसे उत्पन्न होते ही योगियोंका सबसे बडा बल है। योगविद्याके और उन्हींमें लीन हो जाते हैं, उसी प्रकार सत्त्वादि ज्ञाता विद्वान् पुरुष मनकी एकाग्रता और प्राणायाम-- गुण भी प्रकृतिसे उत्पन्न होकर उसीमें लीन होते ये ध्यानके दो भेद बतलाते हें । योगीको सब

English

helper of those who have taken refuge, cause of fear to enemies, knowing policy, endowed with policy, speaker of Brahman, sense-conquered.

अध्याय 226

श्लोक 30

भवार्थम् एव देवानां बुद्ध्या परमया युतः प्राजापत्ये शुभे मार्गे मानवे धर्मसंस्कृते

bhavārtham eva devānāṃ buddhyā paramayā yutaḥ prājāpatye śubhe mārge mānave dharmasaṃskṛte

हिन्दी अर्थ

हैं । आत्मा तो जन्म-मृत्युसे रहित, अनन्त, सबका द्रष्टा एवं अद्वितीय है । वह सत्त्वादि गुणोंमें केवल आत्माभिमान करनेके कारण ही गुणस्वरूप कहलाता है। गुण तो गुणवान्में ही रहते हैं, निर्गुण आत्मामें

English

For the sake of the gods' existence, joined with supreme intelligence, in the auspicious Prajapati path, in human dharma refined,

अध्याय 226

श्लोक 31

समुत्पत्स्यति गोविन्दो मनोर् वंशे महात्मनः अंशो नाम मनोः पुत्रो ह्य् अन्तर्धामा ततः परम्

samutpatsyati govindo manor vaṃśe mahātmanaḥ aṃśo nāma manoḥ putro hy antardhāmā tataḥ param

हिन्दी अर्थ

गुण कैसे रह सकते हैं। अतः गुणोंके स्वरूपको जाननेवाले विद्वान् पुरुष ऐसा मानते हैं कि जब जीवात्मा इन प्राकृत गुणोंमें अपनेपनका अभिमान करता है, उस समय वह गुणवान्-सा ही होकर

English

Govinda will be born in the line of the great-souled Manu: Manu's son is Amsha, then Antardhaman;

अध्याय 226

श्लोक 32

अन्तर्धाम्नो हविर्धामा प्रजापतिर् अनिन्दितः प्राचीनबर्हिर् भविता हविर्धाम्नः सुतो द्विजाः

antardhāmno havirdhāmā prajāpatir aninditaḥ prācīnabarhir bhavitā havirdhāmnaḥ suto dvijāḥ

हिन्दी अर्थ

भिन्न-भिन्न गुणोंको देखता है। किंतु जब उस अभिमानको छोड़ देता है, उस समय देहादिमें आत्मबुद्धिका परित्याग करके अपने विशुद्ध परमात्मस्वरूपका साक्षात्कार करता है। उस

English

of Antardhaman, Havirdhaman, the blameless Prajapati; Havirdhaman's son, Brahmins, will be Prachinabarhis.

अध्याय 226

श्लोक 33

तस्य प्रचेतःप्रमुखा भविष्यन्ति दशात्मजाः प्राचेतसस् तथा दक्षो भवितेह प्रजापतिः

tasya pracetaḥpramukhā bhaviṣyanti daśātmajāḥ prācetasas tathā dakṣo bhaviteha prajāpatiḥ

हिन्दी अर्थ

प्रकारको आसक्तियोंका त्याग करके मिताहारी और जितेन्द्रिय होना चाहिए। वह रात्रिके पहले और पिछले भागमें मनको परमात्मामें लगाकर अन्तःकरणमें उनका ध्यान करे। मिथिलेश्वर ! सम्पूर्ण

English

He will have ten sons headed by Prachetas, and Daksha son of Prachetas will be the Prajapati here.

अध्याय 226

श्लोक 34

दाक्षायण्यस् तथादित्यो मनुर् आदित्यतस् ततः मनोश् च वंशज इला सुद्युम्नश् च भविष्यति

dākṣāyaṇyas tathādityo manur ādityatas tataḥ manoś ca vaṃśaja ilā sudyumnaś ca bhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

इन्द्रियोंको मनके द्वारा स्थिर करके मनको भी बुद्धिमें स्थापित कर दे और पत्थरकी भाति अविचल हो जाय, तभी उसे योगयुक्त कहते हैं। जिस समय उसे सुनने, सूँघने, स्वाद लेने, देखने और स्पर्श

English

Daksha's daughter Aditi; from Aditya, Manu; from Manu's line, Ila and Sudyumna will be.

अध्याय 226

श्लोक 35

बुधात् पुरूरवाश् चापि तस्माद् आयुर् भविष्यति नहुषो भविता तस्माद् ययातिस् तस्य चात्मजः

budhāt purūravāś cāpi tasmād āyur bhaviṣyati nahuṣo bhavitā tasmād yayātis tasya cātmajaḥ

हिन्दी अर्थ

करनेका भी भान नहीं रहता, जब मनमें किसी प्रकारका संकल्प नहीं उठता तथा वह काठको भाति स्थिर होकर किसी भी वस्तुका अभिमान या सुध-बुध नहीं रखता, उस समय मनीषी पुरुष

English

From Budha, Pururavas; from him Ayu will be; Nahusha will be from him, and Yayati his son;

अध्याय 226

श्लोक 36

यदुस् तस्मान् महासत्त्वः क्रोष्टा तस्माद् भविष्यति क्रोष्टुश् चैव महान् पुत्रो वृजिनीवान् भविष्यति

yadus tasmān mahāsattvaḥ kroṣṭā tasmād bhaviṣyati kroṣṭuś caiva mahān putro vṛjinīvān bhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

क्षर-अक्षर तथा योग और सांख्यका वर्णन »

English

from him Yadu, of great being; from him Kroshtu; Kroshtu's great son will be Vrijinivan.

अध्याय 226

श्लोक 37

वृजिनीवतश् च भविता उषङ्गुर् अपराजितः उषङ्गोर् भविता पुत्रः शूरश् चित्ररथस् तथा

vṛjinīvataś ca bhavitā uṣaṅgur aparājitaḥ uṣaṅgor bhavitā putraḥ śūraś citrarathas tathā

हिन्दी अर्थ

उसे अपने स्वरूपको प्राप्त 'योगयुक्त' कहते हैँ। ध्याननिष्ठ योगीको अपने हृदयमें धूमरहित अग्नि, किरणमालाओंसे मण्डित सूर्य तथा विद्युत॒के प्रकाशको भाँति तेजस्वी आत्माका साक्षात्कार होता है । धैर्यवान्,

English

From Vrijinivan will be Ushangu, unconquered; Ushangu's son will be Shura, and Chitraratha.

अध्याय 226

श्लोक 38

तस्य त्व् अवरजः पुत्रः शूरो नाम भविष्यति तेषां विख्यातवीर्याणां चारित्रगुणशालिनाम्

tasya tv avarajaḥ putraḥ śūro nāma bhaviṣyati teṣāṃ vikhyātavīryāṇāṃ cāritraguṇaśālinām

हिन्दी अर्थ

अजन्मा एवं अमृतस्वरूप ब्रह्मका दर्शन कर पाते हैं। वह ब्रह्म अणुसे भी अणु और महानूसे भी महान् कहा गया है । सर्वत्र सम्पूर्ण भूतोंमें स्थित होते हुए भी वह किसीको दिखायी नहीं देता।

English

His younger son will be named Shura; in the line of those of renowned valour, endowed with conduct and virtue,

अध्याय 226

श्लोक 39

यज्विनां च विशुद्धानां वंशे ब्राह्मणसत्तमाः स शूरः क्षत्रियश्रेष्ठो महावीर्यो महायशाः

yajvināṃ ca viśuddhānāṃ vaṃśe brāhmaṇasattamāḥ sa śūraḥ kṣatriyaśreṣṭho mahāvīryo mahāyaśāḥ

हिन्दी अर्थ

वेदोंके पारगामी तत्त्वज्ञ विद्वानोंने उसे तमसे दूर- अज्ञानान्धकारसे परे बताया है। वह निर्मल एवं लिङ्गरहित है। यही योगियोंका योग है। इसके सिवा योगका और क्या लक्षण हो सकता है। इस

English

sacrificers and pure, best of Brahmins, that Shura, best of Kshatriyas, of great valour and great fame,

अध्याय 226

श्लोक 40

स्ववंशविस्तारकरं जनयिष्यति मानदम् वसुदेवम् इति ख्यातं पुत्रम् आनकदुन्दुभिम्

svavaṃśavistārakaraṃ janayiṣyati mānadam vasudevam iti khyātaṃ putram ānakadundubhim

हिन्दी अर्थ

प्रकार साधना करनेवाला योगी सबके द्रष्टा अजर- अमर परमात्माका दर्शन करता है। यहाँतक मैंने तुम्हें योग-दर्शनका यथार्थस्वरूप बतलाया ।

English

will beget a son increasing the extent of his own line, giver of honour, famed as Vasudeva, also Anakadundubhi.

अध्याय 226

श्लोक 41

तस्य पुत्रश् चतुर्बाहुर् वासुदेवो भविष्यति दाता ब्राह्मणसत्कर्ता ब्रह्मभूतो द्विजप्रियः

tasya putraś caturbāhur vāsudevo bhaviṣyati dātā brāhmaṇasatkartā brahmabhūto dvijapriyaḥ

हिन्दी अर्थ

अब सांख्यका वर्णन करता हूँ, यह विचार- प्रधान दर्शन है। राजन्! प्रकृतिवादी विद्वान् मूल प्रकृतिको अव्यक्त कहते हैं। उससे दूसरा तत्त्व प्रकट हुआ, जो ' महत्तत्त्व' कहलाता है। महत्तत्त्वसे

English

His son will be four-armed Vasudeva, giver, honourer of Brahmins, become Brahman, dear to Brahmins.

अध्याय 226

श्लोक 42

राज्ञो बद्धान् स सर्वान् वै मोक्षयिष्यति यादवः जरासंधं तु राजानं निर्जित्य गिरिगह्वरे

rājño baddhān sa sarvān vai mokṣayiṣyati yādavaḥ jarāsaṃdhaṃ tu rājānaṃ nirjitya girigahvare

हिन्दी अर्थ

अहंकार नामक तीसरे तत्त्वको उत्पत्ति सुनी गयी है। सांख्य-दर्शनके ज्ञाता विद्वान् अहंकारसे सूक्ष्म भूतोंका-पञ्च-तन्मात्राओंका प्रादुर्भाव बतलाते हैं । इन आठोंको प्रकृति कहते हैं; इनसे सोलह तत्त्वोंकी

English

That Yadava will free all the bound kings, and, having conquered King Jarasandha in a mountain cave,

अध्याय 226

श्लोक 43

सर्वपार्थिवरत्नाढ्यो भविष्यति स वीर्यवान् पृथिव्याम् अप्रतिहतो वीर्येणापि भविष्यति

sarvapārthivaratnāḍhyo bhaviṣyati sa vīryavān pṛthivyām apratihato vīryeṇāpi bhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

उत्पत्ति होती है, जो ' विकृति' कहलाते हैं। पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ, पाँच कर्मेन्द्रियाँ, ग्यारहवाँ मन तथा पाँच स्थूलभूत-ये ही सोलह विकार हैं। ये प्रकृति और विकृति मिलकर चौबीस तत्त्व होते

English

he will be rich in all the jewels of kings; he, valiant, will be unobstructed on earth also by valour,

अध्याय 226

श्लोक 44

विक्रमेण च संपन्नः सर्वपार्थिवपार्थिवः शूरः संहननो भूतो द्वारकायां वसन् प्रभुः

vikrameṇa ca saṃpannaḥ sarvapārthivapārthivaḥ śūraḥ saṃhanano bhūto dvārakāyāṃ vasan prabhuḥ

हिन्दी अर्थ

हें । सांख्यदर्शनमें तत्त्वोंकी इतनी ही संख्या मानी गयी है। सांख्यमार्गपर स्थित और सांख्यविधिके ज्ञाता मनीषी पुरुष ऐसा ही कहते हैं। जो तत्त्व जिससे उत्पन्न होता है, उसका उसीमें लय भी

English

endowed with prowess, king of all kings, the hero, the lord, living at Dvaraka as a compact body,

अध्याय 226

श्लोक 45

पालयिष्यति गां देवीं विनिर्जित्य दुराशयान् तं भवन्तः समासाद्य ब्राह्मणैर् अर्हणैर् वरैः

pālayiṣyati gāṃ devīṃ vinirjitya durāśayān taṃ bhavantaḥ samāsādya brāhmaṇair arhaṇair varaiḥ

हिन्दी अर्थ

सूक्ष्म भूत आदिके क्रमसे सृष्टि होती है; किंतु उसका संहार विलोमक्रमसे होता है । अर्थात् पृथ्वीका जलमें, जलका तेजमें और तेजका वायुमें लय होता है; इसी प्रकार सभी तत्त्व अपने-अपने

English

will protect the goddess Earth, having conquered the evil-minded. Approaching him, you, with Brahmins and excellent honours,

अध्याय 226

श्लोक 46

अर्चयन्तु यथान्यायं ब्रह्माणम् इव शाश्वतम् यो हि मां द्रष्टुम् इच्छेत ब्रह्माणं च पितामहम्

arcayantu yathānyāyaṃ brahmāṇam iva śāśvatam yo hi māṃ draṣṭum iccheta brahmāṇaṃ ca pitāmaham

हिन्दी अर्थ

कारणमें लीन होते हैं। जैसे समुद्रसे उठी हुई लहरें फिर उसीमें शान्त हो जाती हैं, उसी प्रकार सम्पूर्ण तत्त्व अनुलोमक्रमसे उत्पन्न होकर विलोमक्रमसे लीन होते हैं। नृपश्रेष्ठ! इस प्रकार

English

should worship him duly like eternal Brahma. Whoever wishes to see me and Brahma the Grandfather

अध्याय 226

श्लोक 47

द्रष्टव्यस् तेन भगवान् वासुदेवः प्रतापवान् दृष्टे तस्मिन्न् अहं दृष्टो न मे ऽत्रास्ति विचारणा

draṣṭavyas tena bhagavān vāsudevaḥ pratāpavān dṛṣṭe tasminn ahaṃ dṛṣṭo na me 'trāsti vicāraṇā

हिन्दी अर्थ

प्रकृतिसे ही जगत्को उत्पत्ति और उसीमें उसका लय होता है। प्रलयकालमें तो वह एक रूपमें रहती है और सृष्टिके समय नाना रूप धारण करती है । ज्ञान-निपुण पुरुषोंको इसी प्रकार प्रकृतिके

English

should see the revered, mighty Vasudeva. When he is seen, I am seen; there is no deliberation here.

अध्याय 226

श्लोक 48

पितामहो वासुदेव इति वित्त तपोधनाः स यस्य पुण्डरीकाक्षः प्रीतियुक्तो भविष्यति

pitāmaho vāsudeva iti vitta tapodhanāḥ sa yasya puṇḍarīkākṣaḥ prītiyukto bhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

एकत्व और नानात्वका ज्ञान प्राप्त करना चाहिए।

English

Know, rich in austerity, that Vasudeva is the Grandfather. He with whom the lotus-eyed one is pleased —

अध्याय 226

श्लोक 49

तस्य देवगणः प्रीतो ब्रह्मपूर्वो भविष्यति यस् तु तं मानवो लोके संश्रयिष्यति केशवम्

tasya devagaṇaḥ prīto brahmapūrvo bhaviṣyati yas tu taṃ mānavo loke saṃśrayiṣyati keśavam

हिन्दी अर्थ

प्रकृतिका अधिष्ठाता जो अव्यक्त आत्मा है, उसके विषयमें भी यही बात है । वह भी प्रकृतिसे सम्बन्ध रखनेपर एकत्व और नानात्वको प्रा होता है। प्रलयकालमें तो वह भी एक ही रूपमें

English

for him the host of gods, with Brahma first, will be pleased. A man in the world who takes refuge in Keshava,

अध्याय 226

श्लोक 50

तस्य कीर्तिर् यशश् चैव स्वर्गश् चैव भविष्यति धर्माणां देशिकः साक्षाद् भविष्यति स धर्मवान्

tasya kīrtir yaśaś caiva svargaś caiva bhaviṣyati dharmāṇāṃ deśikaḥ sākṣād bhaviṣyati sa dharmavān

हिन्दी अर्थ

रहता है, किंतु सृष्टिके समय प्रकृतिको प्रेरित करनेके कारण उसको ही अनेकतासे वह स्वयं भी अनेक-सा प्रतीत होता है। परमात्मा ही प्रकृतिको प्रसवके लिये उन्मुख करके उसे अनेक रूपोंमें

English

for him there will be fame, renown and heaven; he will be a teacher of dharmas directly, and righteous.

अध्याय 226

श्लोक 51

धर्मविद्भिः स देवेशो नमस्कार्यः सदाच्युतः धर्म एव सदा हि स्याद् अस्मिन्न् अभ्यर्चिते विभौ

dharmavidbhiḥ sa deveśo namaskāryaḥ sadācyutaḥ dharma eva sadā hi syād asminn abhyarcite vibhau

हिन्दी अर्थ

परिणत करता है। प्रकृति और उसके विकारोंको क्षेत्र कहते हैं । चौबीस तत्त्वोंसे भिन्न जो पच्चीसवाँ तत्त्व महान् आत्मा है, वही उस क्षेत्रमें अधिष्ठातारूपसे निवास करता है। वह क्षेत्रको जानता है, इसलिये

English

That lord of gods, Achyuta, is always to be bowed to by the knowers of dharma; dharma will always be, when that all-pervading one is worshipped.

अध्याय 226

श्लोक 52

स हि देवो महातेजाः प्रजाहितचिकीर्षया धर्मार्थं पुरुषव्याघ्र ऋषिकोटीः ससर्ज च

sa hi devo mahātejāḥ prajāhitacikīrṣayā dharmārthaṃ puruṣavyāghra ṛṣikoṭīḥ sasarja ca

हिन्दी अर्थ

क्षेत्रज्ञ कहलाता है । क्षेत्रज्ञ प्रकतिजनित पुर (शरीर) - में शयन करता है, इसलिये उसे पुरुष कहते हैं । वास्तवमें क्षेत्र अन्य वस्तु है और क्षेत्रज्ञ अन्य। क्षेत्र अव्यक्त (प्रकृति) है और क्षेत्रज्ञ उसका

English

That god of great brilliance, desiring the welfare of creatures, for dharma, tiger among men, created ten million sages;

अध्याय 226

श्लोक 53

ताः सृष्टास् तेन विधिना पर्वते गन्धमादने सनत्कुमारप्रमुखास् तिष्ठन्ति तपसान्विताः

tāḥ sṛṣṭās tena vidhinā parvate gandhamādane sanatkumārapramukhās tiṣṭhanti tapasānvitāḥ

हिन्दी अर्थ

ज्ञाता पच्चीसवाँ तत्त्व परमात्मा है। जब पुरुष अपनेको प्रकृतिसे भिन्न जान लेता है, उस समय वह अद्वितीय परमात्मरूपसे स्थित होता है। इस

English

created by him by that procedure, they stay on Mount Gandhamadana, led by Sanatkumara, joined with austerity.

अध्याय 226

श्लोक 54

तस्मात् स वाग्मी धर्मज्ञो नमस्यो द्विजपुंगवाः वन्दितो हि स वन्देत मानितो मानयीत च

tasmāt sa vāgmī dharmajño namasyo dvijapuṃgavāḥ vandito hi sa vandeta mānito mānayīta ca

हिन्दी अर्थ

होता है। प्रकृति परमात्माके संनिधानसे अनुलोम- प्रकार मैंने तुम्हें सम्यग् दर्शन (सांख्य)-का यथार्थ क्रमके अनुसार तत्त्वोंकी रचना करती है अर्थात् वर्णन किया। जो इसे इस प्रकार जानते हैं, वे प्रकृतिसे महत्तत्त्व, महत्तत्वसे अहंकार तथा अहंकारसे समस्वरूप ब्रह्मको प्राप्त होते हैं।

English

Therefore that eloquent knower of dharma is to be bowed to, best of Brahmins; honoured, he honours; honoured, he returns honour.

अध्याय 226

श्लोक 55

दृष्टः पश्येद् अहरहः संश्रितः प्रतिसंश्रयेत् अर्चितश् चार्चयेन् नित्यं स देवो द्विजसत्तमाः

dṛṣṭaḥ paśyed aharahaḥ saṃśritaḥ pratisaṃśrayet arcitaś cārcayen nityaṃ sa devo dvijasattamāḥ

हिन्दी अर्थ

४३० संक्षिप्त ब्रहापुराण

English

Seen, he sees daily; resorted to, he gives refuge; worshipped, he always worships: that god, best of Brahmins.

अध्याय 226

श्लोक 56

एवं तस्यानवद्यस्य विष्णोर् वै परमं तपः आदिदेवस्य महतः सज्जनाचरितं सदा

evaṃ tasyānavadyasya viṣṇor vai paramaṃ tapaḥ ādidevasya mahataḥ sajjanācaritaṃ sadā

हिन्दी अर्थ

महाराज ! इस प्रकार मैंने तुमसे शुद्ध, सनातन हिरण्यगर्भ ब्रह्माजीसे महर्षि वसिष्ठको प्राप्त हुआ, आदि ब्रह्मके यथार्थ तत्त्वका वर्णन किया है । तुम वसिष्ठजीसे देवर्षि नारदको मिला और देवर्षि मात्सर्यका त्याग करके अपनी बुद्धिसे इस तत्त्वको नारदसे मुझको प्राप्त हुआ । वही यह सनातन ज्ञान ग्रहण करो। असत्यवादी, शठ, नपुंसक, कुटिल मैंने तुम सब लोगोंको बताया है; यह परम पद

English

Thus the supreme austerity of that blameless Vishnu, the great primal god, is always the conduct of good persons.

अध्याय 226

श्लोक 57

भुवने ऽभ्यर्चितो नित्यं देवैर् अपि सनातनः अभयेनानुरूपेण प्रपद्य तम् अनुव्रताः

bhuvane 'bhyarcito nityaṃ devair api sanātanaḥ abhayenānurūpeṇa prapadya tam anuvratāḥ

हिन्दी अर्थ

बुद्धिवाले, अपनेको पण्डित माननेवाले तथा दूसराँको है, इसका श्रवण करके अब तुम्हें शोक नहीं कष्ट पहुँचानेवाले मनुष्यको इसका उपदेश नहीं करना चाहिए। जिसने क्षर और अक्षरके भेदको देना चाहिए। शिष्यको बोध करानेके लिये ही जान लिया, उसे किसी प्रकारका भय नहीं है। इस तत्त्वका उपदेश करना उचित है। जो श्रद्धालु, जो उन्हें ठीक-ठीक नहीं जानता, उसीको भय

English

Worshipped constantly in the world even by the gods, eternal; with fitting fearlessness, taking refuge in him, devoted followers —

अध्याय 226

श्लोक 58

कर्मणा मनसा वाचा स नमस्यो द्विजैः सदा यत्नवद्भिर् उपस्थाय द्रष्टव्यो देवकीसुतः

karmaṇā manasā vācā sa namasyo dvijaiḥ sadā yatnavadbhir upasthāya draṣṭavyo devakīsutaḥ

हिन्दी अर्थ

गुणवान्, परायी निन्दासे दूर रहनेवाले, विशुद्ध है। मूर्ख मनुष्य इस तत्त्वको न जाननेके कारण योगी, विद्वान्, वेदोक्त कर्म करनेवाले, क्षमाशील बारंबार उपद्रवग्रस्त हो मरता और मरनेके बाद तथा सबके हितैषी हों, वे ही इस ज्ञानके अधिकारी पुनः हजारों बार जन्म-मृत्युके कष्ट भोगता है। हैं। जितेन्द्रिय तथा संयमी पुरुषको इसका उपदेश वह देव, मनुष्य और पशु-पक्षी आदिकी योनियोंमें

English

by deed, mind and speech he is always to be bowed to by the twice-born; approaching with effort, the son of Devaki should be seen.

अध्याय 226

श्लोक 59

एष वै विहितो मार्गो मया वै मुनिसत्तमाः तं दृष्ट्वा सर्वदेवेशं दृष्टाः स्युः सुरसत्तमाः

eṣa vai vihito mārgo mayā vai munisattamāḥ taṃ dṛṣṭvā sarvadeveśaṃ dṛṣṭāḥ syuḥ surasattamāḥ

हिन्दी अर्थ

अवश्य देना चाहिए। महाराज कराल ! तुमने मुझसे भटकता रहता है। अज्ञानरूपी समुद्र अव्यक्त, आज परब्रह्मका ज्ञान प्राप्त किया है। अब तुम्हारे अगाध और भयंकर है। इसमें प्रतिदिन कितने ही मनमें तनिक भी भय नहीं होना चाहिए। नरेन्द्र ! प्राणी डूबते चले जा रहे हैं। तुमलोग यह उपदेश तुमने मुझसे जैसा प्रश्न किया था, उसके अनुसार सुनकर इस अगाध भवसागरसे पार हो गये हो।

English

This is the path ordained by me, best of sages; having seen him, lord of all gods, the best of gods are seen.

अध्याय 226

श्लोक 60

महावराहं तं देवं सर्वलोकपितामहम् अहं चैव नमस्यामि नित्यम् एव जगत्पतिम्

mahāvarāhaṃ taṃ devaṃ sarvalokapitāmaham ahaṃ caiva namasyāmi nityam eva jagatpatim

हिन्दी अर्थ

ही मेंने तुम्हें यह उपदेश किया है; कोई दूसरी अब तुममें रजोगुण और तमोगुणका भाव नहीं रह बात नहीं कही है। यह महान् ज्ञान मोक्षवेत्ता गया तुम्हारी शुद्ध सत्तवमें स्थिति हो गयी है। पुरुषोंका परम आश्रय है। यह मुझे साक्षात् ब्रह्माजीसे मुनिवरो! इस प्रकार मैंने सारसे भी सारभूत प्राप्त हुआ है। परमतत्त्वका वर्णन किया। यह परम मोक्षरूप है।

English

That god, the great Varaha, grandfather of all the worlds, I too always bow to, the lord of the world.

अध्याय 226

श्लोक 61

तत्र च त्रितयं दृष्टं भविष्यति न संशयः समस्ता हि वयं देवास् तस्य देहे वसामहे

tatra ca tritayaṃ dṛṣṭaṃ bhaviṣyati na saṃśayaḥ samastā hi vayaṃ devās tasya dehe vasāmahe

हिन्दी अर्थ

व्यासजी कहते हैं--मुनिवरो ! पूर्वकालमें महर्षि इसे जान लेनेपर मनुष्य फिर इस संसारमें लौटकर वसिष्ठने जिस प्रकार पच्चीसवें तत्त्वरूप परब्रह्मके नहीं आता। जो नास्तिक हो, जिसके हृदयमें गुरु स्वरूपका वर्णन किया था, उसी प्रकार मैंने तुम्हें और भगवानके प्रति भक्ति न हो, जिसकी बुद्धि बताया है। यही वह ब्रह्म है, जिसे जान लेनेपर खोटी और हृदय श्रद्धासे विमुख हो, ऐसे मनुष्यको

English

And there the three will be seen, no doubt: all of us gods live in his body.

अध्याय 226

श्लोक 62

तस्यैव चाग्रजो भ्राता सिताद्रिनिचयप्रभः हली बल इति ख्यातो भविष्यति धराधरः

tasyaiva cāgrajo bhrātā sitādrinicayaprabhaḥ halī bala iti khyāto bhaviṣyati dharādharaḥ

हिन्दी अर्थ

मनुष्य फिर इस संसारमें नहीं आता। यह ज्ञान कभी इसका उपदेश नहीं करना चाहिए।

English

His elder brother, shining like a heap of white mountain, will be known as Bala with the plough, the earth-bearer.

अध्याय 226

श्लोक 63

त्रिशिरास् तस्य देवस्य दृष्टो ऽनन्त इति प्रभोः सुपर्णो यस्य वीर्येण कश्यपस्यात्मजो बली

triśirās tasya devasya dṛṣṭo 'nanta iti prabhoḥ suparṇo yasya vīryeṇa kaśyapasyātmajo balī

हिन्दी अर्थ

श्रीब्रहापुराणकी महिमा तथा ग्रन्थका उपसंहार

English

Three-headed, that god is seen as Ananta, the lord, by whose valour Suparna, the mighty son of Kashyapa,

अध्याय 226

श्लोक 64

अन्तं नैवाशकद् द्रष्टुं देवस्य परमात्मनः स च शेषो विचरते परया वै मुदा युतः

antaṃ naivāśakad draṣṭuṃ devasya paramātmanaḥ sa ca śeṣo vicarate parayā vai mudā yutaḥ

हिन्दी अर्थ

लोमहर्षणजी कहते हैं--द्विजवरो ! इस प्रकार वेदव्यासजी मौन हो गये। वे श्रेष्ठ मुनि भी सम्पूर्ण पूर्वकालमें महर्षि व्यासने सारभूत निर्दोष वचनोंद्वारा मनोवाञ्छित फलोंको देनेवाले तथा वेदोंके तुल्य मधुरवाणीमें मुनियोंको यह पुराण सुनाया था। माननीय इस आदि ब्रह्मपुराणको सुनकर बहुत इसमें अनेक शास्त्रोंके शुद्ध एवं निर्मल सिद्धान्तोंका प्रसन्न और विस्मित हुए। उन्होंने मुनिवर

English

could not see the end of the god, the Supreme Self; and that Shesha roams with supreme joy,

अध्याय 226

श्लोक 65

अन्तर्वसति भोगेन परिरभ्य वसुंधराम् य एष विष्णुः सो ऽनन्तो भगवान् वसुधाधरः

antarvasati bhogena parirabhya vasuṃdharām ya eṣa viṣṇuḥ so 'nanto bhagavān vasudhādharaḥ

हिन्दी अर्थ

समावेश है । यह सहज शुद्ध है और अच्छे शब्दोंके श्रीकृष्णद्वैपायन व्यासकी बारंबार प्रशंसा को। प्रयोगसे सुशोभित होता है । इसमें यथास्थान पूर्वपक्ष मुनि बोले--मुनिश्रेष्ठ! आपने हमें वेदोंके और सिद्धान्तका प्रतिपादन किया गया है । इस तुल्य प्रामाणिक तथा सम्पूर्ण अभीष्ट फलोंको पुराणको न्यायानुकूल रीतिसे सुनाकर परम बुद्धिमान् देनेवाला सर्वपापहारी श्रेष्ठ पुराण सुनाया है। यह

English

living within, embracing the earth with his coils. This Vishnu is Ananta, the revered earth-bearer.

अध्याय 226

श्लोक 66

यो रामः स हृषीकेशो ऽच्युतः सर्वधराधरः ताव् उभौ पुरुषव्याघ्रौ दिव्यौ दिव्यपराक्रमौ

yo rāmaḥ sa hṛṣīkeśo 'cyutaḥ sarvadharādharaḥ tāv ubhau puruṣavyāghrau divyau divyaparākramau

हिन्दी अर्थ

श्रीब्रह्मपुराणकी महिमा तथा ग्रन्थका उपसंहार

English

Who is Rama is Hrishikesha Achyuta, supporter of all the earth; those two tigers among men, divine, of divine valour,

अध्याय 226

श्लोक 67

द्रष्टव्यौ माननीयौ च चक्रलाङ्गलधारिणौ एष वो ऽनुग्रहः प्रोक्तो मया पुण्यस् तपोधनाः तद् भवन्तो यदुश्रेष्ठं पूजयेयुः प्रयत्नतः

draṣṭavyau mānanīyau ca cakralāṅgaladhāriṇau eṣa vo 'nugrahaḥ prokto mayā puṇyas tapodhanāḥ tad bhavanto yaduśreṣṭhaṃ pūjayeyuḥ prayatnataḥ

हिन्दी अर्थ

कितने हर्षकी बात है। हमने भी इस विचित्र पुराण सुनना चाहिए। इसको सुननेसे ब्राह्मण

English

to be seen and honoured, bearing discus and plough. This favour has been told by me to you, rich in austerity, holy; therefore you should worship the best of the Yadus with effort."

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_brahmapurANa-1-246.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।