Brahma Purana
4
अध्याय 4 / 246

Adhyaya 4

तीर्थ माहात्म्य

2 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय 4

श्लोक 1

तीर्थं मनःशुद्धिकरं पापघ्नं पुण्यवर्धनम् ।यत्र स्नात्वा नरो याति ब्रह्मलोकं सनातनम्

tīrthaṃ manaḥśuddhikaraṃ pāpaghnaṃ puṇyavardhanam | yatra snātvā naro yāti brahmalokaṃ sanātanam

हिन्दी अर्थ

तीर्थ मन को शुद्ध करता है, पाप नष्ट करता है, पुण्य बढ़ाता है। जहाँ स्नान करके मनुष्य सनातन ब्रह्मलोक को जाता है।

English

A tirtha purifies the mind, destroys sin, increases merit. Having bathed there, a person attains the eternal Brahmaloka.

अध्याय 4

श्लोक 2

तीर्थे तीर्थे जलं पीत्वा स्नात्वा तीर्थेषु मानवः ।विष्णुलोकं परं याति निर्वाणपदमाप्नुयात्

tīrthe tīrthe jalaṃ pītvā snātvā tīrtheṣu mānavaḥ | viṣṇulokaṃ paraṃ yāti nirvāṇapadamāpnuyāt

हिन्दी अर्थ

तीर्थ-तीर्थ में जल पीकर और स्नान करके मनुष्य परम विष्णुलोक को प्राप्त होता है, निर्वाण पद की प्राप्ति करता है।

English

Having drunk and bathed in tirtha after tirtha, a human attains the supreme Vishnuloka, reaches the state of nirvana.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_brahmapurANa-1-246.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।