Chandogya Upanishad
152
अध्याय 152 / 154

Adhyāya 152

प्रपाठक खण्ड 152

1 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ1 श्लोक

अध्याय 152

श्लोक 8.13.1

॥ श्यामाच्छबलं प्रपद्ये शबलाच्छ्यामं प्रपद्येऽश्व इव रोमाणि विधूय पापं चन्द्र इव राहोर्मुखात्प्रमुच्य धूत्वा शरीरमकृतं कृतात्मा ब्रह्मलोकमभिसंभवामीत्यभिसंभवामीति

|| śyāmācchabalaṃ prapadye śabalācchyāmaṃ prapadye'śva iva romāṇi vidhūya pāpaṃ candra iva rāhormukhātpramucya dhūtvā śarīramakṛtaṃ kṛtātmā brahmalokamabhisaṃbhavāmītyabhisaṃbhavāmīti

हिन्दी अर्थ

आकाश्नो वै नाम भरुतिषु “आश्नाश' इस नामे श्तियेमिं आला प्रसिद्ध है, क्थोक्षि वह प्रसिद्ध आत्मा; आका इवा" माकाशंके समान मशरीर बर अत्मन्नानकी परम्परा, नियम ओर एलक्ता कणन तद्धेतदूब्रह्मा प्रजापतय उवाच प्रजापतिमनवे मन कर्मातिरोषेणाभिसमात॒स्य टुम्बे शुचो देशो स्वाध्याय-

English

From the dark (the Brahman of the heart) I come to the nebulous (the world of Brahman), from the nebulous to the dark, shaking off all evil, as a horse shakes his hairs, and as the moon frees herself from the mouth of Râhu . Having shaken off the body, I obtain, self made and satisfied, the uncreated world of Brahman, yea, I obtain it.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/chhandogya.itx · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।