Chandogya Upanishad
77
अध्याय 77 / 154

Adhyāya 77

प्रपाठक खण्ड 77

2 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय 77

श्लोक 5.4.1

॥ असौ वाव लोको गौतमाग्निस्तस्यादित्य एव समिद्रश्मयो धूमोऽहरर्चिश्चन्द्रमा अङ्गारा नक्षत्राणि विस्फुलिङ्गाः

|| asau vāva loko gautamāgnistasyāditya eva samidraśmayo dhūmo'hararciścandramā aṅgārā nakṣatrāṇi visphuliṅgāḥ

हिन्दी अर्थ

पृथक्पृथगर्हाण्यहंणानि पुरोदि- तथैते कारयाश्चकार कारित- ऋषियोँका राजाने पुरोहित ओर अश्वरपतिके प्रति मुनियोकी प्राथंना इस प्रकार कहे जनेपर--

English

'The altar (on which the sacrifice is supposed to be offered) is that world (heaven), O Gautama; its fuel is the sun itself, the smoke his rays, the light the day, the coals the moon, the sparks the stars.

अध्याय 77

श्लोक 5.4.2

तस्मिन्नेतस्मिन्नग्नौ देवाः श्रद्धां जुह्वति तस्या अहुतेः सोमो राजा संभवति

tasminnetasminnagnau devāḥ śraddhāṃ juhvati tasyā ahuteḥ somo rājā saṃbhavati

हिन्दी अर्थ

करि जपते उसी प्रयोजनको जानते है, उसीका भाप हमारे परति जने कोर पुरुष कदी जाता है उसे चादिये प्रयोननसे कोई पुरुष किसीके पास जाय उसे अपना वह प्रयोजन बतख देना चाहिये कि भेरे आने- राजाके प्रति मूनियोक्नी उपततत्ति इस प्रकार कटे नानेपर-

English

'On that altar the Devas (or prânas, represented by Agni, &c.) offer the sraddha libation (consisting of water). From that oblation rises Soma, the king (the moon).

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/chhandogya.itx · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।