Chandogya Upanishad
79
अध्याय 79 / 154

Adhyāya 79

प्रपाठक खण्ड 79

2 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय 79

श्लोक 5.6.1

॥ पृथिवी वाव गौतमाग्निस्तस्याः संवत्सर एव समिदाकाशो धूमो रात्रिरर्चिर्दिशोऽङ्गारा अवान्तरदिशो विस्फुलिङ्गाः

|| pṛthivī vāva gautamāgnistasyāḥ saṃvatsara eva samidākāśo dhūmo rātrirarcirdiśo'ṅgārā avāntaradiśo visphuliṅgāḥ

हिन्दी अर्थ

भवत्यस्य ब्रह्मवर्चसं करे य एतमेवमात्मानं वेदवानर- मुपास्ते मूर्धा सेष आत्मन इति होवाच मूधा ते (तुम अन्न भक्षण करते हो जौर मियका दर्थ॑न करते हो । नो इस वैश्वानर आत्माकी इस प्रकार उपासना करता है बह अन्न भक्षण करता है, प्रियका दशन करता है गौर उसके कुमे ब्र्मतेन होता है । यह

English

'The altar is the earth, O Gautama; its fuel is the year itself, the smoke the ether, the light the night, the coals the quarters, the sparks the intermediate quarters.

अध्याय 79

श्लोक 5.6.2

तस्मिन्नेतस्मिन्नग्नौ देवा वर्षं जुह्वति तस्या आहुतेरन्नँ संभवति

tasminnetasminnagnau devā varṣaṃ juhvati tasyā āhuterannam̐ saṃbhavati

हिन्दी अर्थ

अत्स्यन्नं दीप्राप्निः सन्प- तुम दीप्तानि होकर अन्न भक्षण इयसि च पुत्रपौत्रादि प्रिय- करते हो। तथा धुत्र-पौत्रादिरूप प्रिय इष्टका दशन करते हो । जोर अस्वपति ओर सत्ययज्ञका संवाद सुपास्से तस्मात्तव बहु विदवरूपं कुर टर्यते फिर उसने पुपके पुत्र सव्ययज्ञसे कहा-- प्राचीनयोग्य ! तुम किस आस्माकी उपाघना करते हो ® वह बोा--!हे पूज्य राजन्‌ भ आदिव्यकी ही उपासना करता हँ रानाने कहा-

English

'On that altar the Devas (prânas) offer rain. From that oblation rises food (corn, &c.) Next: V, 7 Sacred Texts | Hinduism

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/chhandogya.itx · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।