Garuda Purana
138
अध्याय 138 / 317

Book 1 - Adhyaya 139

78 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ78 श्लोक

अध्याय 138

श्लोक 1

इति श्रीगारुडे महापुराणे पूर्वखण्डे प्रथमांशाख्ये आचारकाण्डे सूर्यवंशवर्णनं नामाष्टत्रिंशदुत्तरशततमो ऽध्यायः श्रीगरुडमहापुराणम्- १३९ हरिरुवाच ।सूर्यस्य कथितो वंशः सोमवंशं शृणुष्व मे ।नारायणसुतो ब्रह्मा ब्रह्मणो ऽत्रेः समुद्भवः

iti śrīgāruḍe mahāpurāṇe pūrvakhaṇḍe prathamāṃśākhye ācārakāṇḍe sūryavaṃśavarṇanaṃ nāmāṣṭatriṃśaduttaraśatatamo 'dhyāyaḥ śrīgaruḍamahāpurāṇam- 139 hariruvāca / sūryasya kathito vaṃśaḥ somavaṃśaṃ śṛṇuṣva me / nārāyaṇasuto brahmā brahmaṇo 'treḥ samudbhavaḥ

हिन्दी अर्थ

“३० सहस्रशिरसे नमः” इस मन्त्रसे उनफलोंको प्राप्त करनेमें सफल रहता है। विष्णुभगवानूकी भुजाओंकी पूजा करके भक्तको (अध्याय १२७)

English

Manu had a daughter Ila of whom Budha (Mercury) begot three sons: Rajas, Rudra and Pururavas. Ila was trans* formed into a man named Sudytimna. Sudyumna begot tliree sous—Utkala, Vinata and Gaya.

अध्याय 138

श्लोक 2

अत्रेः सोमस्तस्य भार्या तारा सुरगुरोः प्रिया ।सोमात्तरा बुधं जज्ञे बुधपुत्रः पुरूरवाः

atreḥ somastasya bhāryā tārā suraguroḥ priyā / somāttarā budhaṃ jajñe budhaputraḥ purūravāḥ

हिन्दी अर्थ

व्रतपरिभाषा तथा व्रतमें पालन करनेयोग्य नियम और

English

Manu*s son Prsadhra became a Sudra due to cow- slaughter. His descendant Karua became a Ksatriya and a line of Ksatriya kings called Klrusas sprang from him.

अध्याय 138

श्लोक 3

बुधपुत्रादथोर्वश्यां षट् पुत्रास्तु श्रुतात्मकः ।विश्वावसुः शतायुश्च आयुर्धोमानमावसुः

budhaputrādathorvaśyāṃ ṣaṭ putrāstu śrutātmakaḥ / viśvāvasuḥ śatāyuśca āyurdhomānamāvasuḥ

हिन्दी अर्थ

ब्रह्माजीने कहा- है व्यास! जिन त्रतोंको चाहिए। स्त्री, शूद्र और पतितजनोंके साथ करनेसे नारायण संतुष्ट होकर सब कुछ प्रदान करते बातचीत करना उसके लिये वर्जित है। वह हैं, उन व्रतोंको मैं कहूँगा। शास्त्रके द्वारा वर्णित पवित्र बना रहे और प्रतिदिन हवन करे। नियम-पालन व्रत कहलाता है और वही तप है। सुकृत करनेवाले मनुष्यको चाहिए कि वह

English

Dis(a'$ son Niibhaga became a Vaisya. His son was Bhanaudana and Bhanandana's son was Vatsapriti,

अध्याय 138

श्लोक 4

अमावसोर्भोमनामा भीमपुत्रश्च काञ्चनः ।काञ्चनस्य सुहोत्रो ऽभूज्जह्रुश्चाभूत्सुहोत्रतः

amāvasorbhomanāmā bhīmaputraśca kāñcanaḥ / kāñcanasya suhotro 'bhūjjahruścābhūtsuhotrataḥ

हिन्दी अर्थ

व्रतीके कुछ सामान्य नियम इस प्रकार हैं- नियमोंका पालन करे। (व्रताचरणके पूर्व) क्षौर न

English

Two other sons were Parhsu and Khanitra. The latter became a king and his son was K$upa. Ksupa's son was Virhia and his son was Viviihia.

अध्याय 138

श्लोक 5

जह्नोः सुमन्तुरभवत्सुमन्तोरपजापकः ।बलाकाश्वस्तस्य पुत्रो बलाकाश्वात् कुशः स्मृतः

jahnoḥ sumanturabhavatsumantorapajāpakaḥ / balākāśvastasya putro balākāśvāt kuśaḥ smṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

व्रतीको नित्य तीनों संध्याओंमें स्नान करना कराना चाहे तो दुगुना व्रत करना चाहिए। चाहिए । उसे जितेन्द्रिय होकर भूमिपर शयन करना ब्रतीके लिये कांस्यपात्र, उड़द, मसूर, चना,

English

Tribindu begot of Alambusa a son named Viiala; his sou was Hemacandva; his son was Chandraka.

अध्याय 138

श्लोक 6

कुशाश्वः कुशनाभश्चामूर्तरयो वसुः कुशात् ।गाधिः कुशाश्वात्संजज्ञे विश्वामित्रस्तदात्मजः

kuśāśvaḥ kuśanābhaścāmūrtarayo vasuḥ kuśāt / gādhiḥ kuśāśvātsaṃjajñe viśvāmitrastadātmajaḥ

हिन्दी अर्थ

कोदो, दूसरेका अन्न, शाक और मधुका सेवन वर्जित है। पुष्प, अलंकार, नवीन वस्त्र, धूप-गन्धादि लेप, दन्तधावन और अञ्जनका प्रयोग त्याज्य है। पञ्चगव्य पान कर व्रतका आचरण करना चाहिए। एकसे

English

Saryati (Manu*s son) had a daughter Sukanya who married the sage Cyavana, and a sun Ananta who had a son named Revata. Revata had a son Raivata and a daugh* ter Revati.

अध्याय 138

श्लोक 7

कन्या सत्यवती दत्ता ऋचीकाय द्विजाय सा ।ऋचीकाज्जमदाग्निश्च रामस्तस्याभवत्सुतः

kanyā satyavatī dattā ṛcīkāya dvijāya sā / ṛcīkājjamadāgniśca rāmastasyābhavatsutaḥ

हिन्दी अर्थ

अधिक बार जलपान, ताम्बूल-भक्षण, दिनमें शयन तथा मैथुन करनेसे व्रतभंग हो जाता है।

English

Dhrsta (another sonof Manu) had a line of descen¬ dants who became Vaiivas.

अध्याय 138

श्लोक 8

विश्वामित्राद्देवरातमदुच्छन्दादयः सुताः ।आयुषो नहुषस्तस्मादनेना रजिरम्भकौ

viśvāmitrāddevarātamaducchandādayaḥ sutāḥ / āyuṣo nahuṣastasmādanenā rajirambhakau

हिन्दी अर्थ

देवपूजा, अग्निमें हवन, संतोष और चोरी न करना-ये दस सभी व्रतोंके सामान्य धर्म हैं।

English

Niibhaga (another son of Manu) had two s<>ns Nedi$ta and Ambarla. Ambarisa had a son VirQpa whose son was Prsadaa.

अध्याय 138

श्लोक 9

क्षत्त्रवृद्धः क्षत्त्रवृद्धात्सुहोत्रश्चाभवन्नृपः ।काश्यकाशौगृत्समदः सुहोत्रादभवंस्त्रयः

kṣattravṛddhaḥ kṣattravṛddhātsuhotraścābhavannṛpaḥ / kāśyakāśaugṛtsamadaḥ suhotrādabhavaṃstrayaḥ

हिन्दी अर्थ

देवपूजाग्निहवने संतोषोऽस्तेयमेव च। सर्वब्रतेष्वयं धर्मः सामान्यो दशधा स्मृतः॥

English

Ikiv.ku (anotherson of Manu) Iiad three sons Viku* k$i, Nimi and Daidka. Vikuk$i became known asSaacIa be¬ cause he ate a rabbit.

अध्याय 138

श्लोक 10

गृत्समदाच्छौन को ऽभूत्काश्याद्दीर्घतमास्तथा ।वैद्यो धन्वन्तरिस्तस्मात्केतुमांश्च तदात्मजः

gṛtsamadācchauna ko 'bhūtkāśyāddīrghatamāstathā / vaidyo dhanvantaristasmātketumāṃśca tadātmajaḥ

हिन्दी अर्थ

(चौबीस घण्टेमें केवल एक बार) नक्षत्रदर्शनके समय किया जानेवाला भोजन नक्तब्रत कहा जाता है और जो रात्रिमें भोजन किया जाता है, वह नक्तव्रत नहीं है। एक पल गोमूत्र, आधे अँगूठेके

English

He had three sons named Candrava, Kapil&sva and Haryasva. Nikuinbha was the son of Haryasva and his son Hitva.

अध्याय 138

श्लोक 11

भीमरथः केतुमतो दिवोदासस्तदात्मजः ।दिवोदासात्प्रतर्दनः शत्रुजित्सो ऽत्र विश्रुतः

bhīmarathaḥ ketumato divodāsastadātmajaḥ / divodāsātpratardanaḥ śatrujitso 'tra viśrutaḥ

हिन्दी अर्थ

यह पञ्चगव्यका परिमाण है । गायत्रीमन्त्रसे गोमूत्र, 'गन्धद्वारा०' इस मन्त्रसे गोमय, 'आप्यायस्व०'

English

He had three sons Mucukunda, Ambailsa and Puru- kutsa. He had fifty daughteis whom the sage Saubhaii married. Yuvanasva was Ambai Isa's son and his son was Harita.

अध्याय 138

श्लोक 12

ऋतध्वजस्तस्य पुत्रो ह्यलर्कश्च ऋतध्वजात् ।अलर्कात्सन्नतिर्जज्ञे सुनीतः सन्नतेः सुतः

ṛtadhvajastasya putro hyalarkaśca ṛtadhvajāt / alarkātsannatirjajñe sunītaḥ sannateḥ sutaḥ

हिन्दी अर्थ

अभिमन्त्रितकर पञ्चगव्यका निर्माण करना चाहिए। अग्न्याधान, प्रतिष्ठा, यज्ञ, दान, व्रत, वेदव्रत, वृषोत्सर्ग, चूडाकरण, उपनयन, विवाहादिक

English

Putukucsa begot of his wife Narmada the son Tias- dasyu. Anaiaya was his son and he begot Hutyiss'a.

अध्याय 138

श्लोक 13

सत्यकेतुः सुनीतस्य सत्यकेतोर्विभुः सुतः ।विभोस्तु सुविभुः पुत्रः सुविभोः सुकुमारकः

satyaketuḥ sunītasya satyaketorvibhuḥ sutaḥ / vibhostu suvibhuḥ putraḥ suvibhoḥ sukumārakaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रतिपदा, तृतीया, चतुर्थी तथा पञ्चमीमें किये जानेवाले विविध तिथिव्रत

English

Sahara begot of his first wife Sumati sixty thousand sons and of Kcfim the second wife the only son Asamafijasa.

अध्याय 138

श्लोक 14

सुकुमाराद्धृष्टकेतुर्वोतिहोत्रस्तदात्मजः ।वीतिहोत्रस्य भर्गो ऽभूद्भर्गभूमिस्तदात्मजः

sukumārāddhṛṣṭaketurvotihotrastadātmajaḥ / vītihotrasya bhargo 'bhūdbhargabhūmistadātmajaḥ

हिन्दी अर्थ

मलमासमें नहीं करना चाहिए।

English

Sud4s*s son became famous as Mitrasaha who begot of his wife Damayaiui the son KalmasapMa.

अध्याय 138

श्लोक 15

वैष्णवाः स्युर्महात्मान इत्येते काशयो नृपाः ।पञ्चपुत्रशतान्यासन्रजेः शक्रेण संहृताः

vaiṣṇavāḥ syurmahātmāna ityete kāśayo nṛpāḥ / pañcaputraśatānyāsanrajeḥ śakreṇa saṃhṛtāḥ

हिन्दी अर्थ

अमावास्यासे अमावास्यातक चान्द्रमास होता है। सूर्योदयसे लेकर दूसरे सूर्योदयतक एक दिन, इस प्रकार तीस दिनका सावनमास होता है। एक राशिसे दूसरे राशिपर सूर्यके संक्रमणकालको सौरमास कहते

English

Rama's sons weieKuiaand Lava. Bharata's sons were Tarksa and Puskara. Lakmana's sons were Citrahgada. and Candraketu.

अध्याय 138

श्लोक 16

प्रतिक्षत्त्रः क्षत्त्रवृद्धात्संजयश्च त दात्मजः ।विजयः संजयस्यापि विजयस्य कृतः सुतः

pratikṣattraḥ kṣattravṛddhātsaṃjayaśca ta dātmajaḥ / vijayaḥ saṃjayasyāpi vijayasya kṛtaḥ sutaḥ

हिन्दी अर्थ

हैं। नक्षत्र सत्ताईस होते हैं। उनके अनुरोधसे जो मास होता है, उसे नाक्षत्रमास कहते हैं। विवाहकार्यमें सौरमास, यज्ञादिमें सावनमास ग्रहण किया जाता है।

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 17

कृताद्वृषधनश्चाभूत्सहदेवस्तदात्मजः ।सहदेवाददीनो ऽभूज्जयत्सेनो ऽप्यदीनतः

kṛtādvṛṣadhanaścābhūtsahadevastadātmajaḥ / sahadevādadīno 'bhūjjayatseno 'pyadīnataḥ

हिन्दी अर्थ

द्वितीयाके साथ तृतीया, चतुर्थीके साथ पञ्चमी, षष्टीके साथ सप्तमी, अष्टमीके साथ नवमी, एकादशीके साथ द्वादशी, चतुर्दशीके साथ पूर्णिमा तथा प्रतिपदाके साथ अमावास्याका युग्म हो तो ऐसी युग्म-तिथि

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 18

जयत्सेनात्संकृतिश्च क्षत्त्रधर्मा च संकृतेः ।यतिर्ययातिः संयातिरयातिर्विकृतिः क्रमात्

jayatsenātsaṃkṛtiśca kṣattradharmā ca saṃkṛteḥ / yatiryayātiḥ saṃyātirayātirvikṛtiḥ kramāt

हिन्दी अर्थ

महाफलदायक होती है। इसके विपरीत यदि युग्म- तिथियाँ हों तो वह महाघोर काल है । वह पूर्वजन्मके किये हुए पुण्यको भी नष्ट कर देता है।

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 19

नहुषस्य सुताः ख्याता ययातेर्नृपतेस्तथा ।यदुं च तुर्वसुं चैव देवयानी व्यजायत

nahuṣasya sutāḥ khyātā yayāternṛpatestathā / yaduṃ ca turvasuṃ caiva devayānī vyajāyata

हिन्दी अर्थ

यदि व्रत प्रारम्भ करनेके पश्चात् व्रतकालमें ही स्त्रियोंमें रजोदर्शन हो जाता है तो उससे उनका व्रत नष्ट नहीं होता है। ऐसी स्थितिमें उन्हें चाहिए कि वे दान-पूजा आदि कार्य किसी अन्यसे सम्पन्न करायें

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 20

द्रुह्युं चानुं च पूरुञ्च शर्मिष्ठा वार्षपार्वणी ।सहस्रजीत्क्रोष्टुमना रघुश्चैव यदोः सुताः

druhyuṃ cānuṃ ca pūruñca śarmiṣṭhā vārṣapārvaṇī / sahasrajītkroṣṭumanā raghuścaiva yadoḥ sutāḥ

हिन्दी अर्थ

और स्नान, उपवासादि कायिक कार्य स्वयं करें।

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 21

सहस्रजितः शतजित्तस्माद्वै हयहैहयौ ।अनरण्यो हयात्पुत्रो धर्मो हैहयतो ऽभवत्

sahasrajitaḥ śatajittasmādvai hayahaihayau / anaraṇyo hayātputro dharmo haihayato 'bhavat

हिन्दी अर्थ

यदि क्रोध, प्रमाद अथवा लोभवश किसीका ब्रत भंग हो जाता है तो उसको तीन दिनतक उपवास करके शिरोमुण्डन करा देना चाहिए। शरीरके असमर्थ हो जानेपर व्रतीको अपने पुत्रादिसे

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 22

धर्मस्य धर्मनेत्रो ऽबूत्कुन्तिर्वै धर्मनेत्रतः ।कुन्तेर्बभूत साहञ्जिर्महिष्मांश्च तदात्मजः

dharmasya dharmanetro 'būtkuntirvai dharmanetrataḥ / kunterbabhūta sāhañjirmahiṣmāṃśca tadātmajaḥ

हिन्दी अर्थ

व्रत कराना चाहिए। यदि व्रतकालमें व्रती मूच्छित हो जाता है तो उसे जल आदि पिला देना चाहिए।

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 23

भद्रश्रेण्यस्तस्य पुत्त्रो भद्रश्रेणयस्य दुर्दमः ।धनको दुर्दमाच्चैव कृतवीर्यश्च जानकिः

bhadraśreṇyastasya puttro bhadraśreṇayasya durdamaḥ / dhanako durdamāccaiva kṛtavīryaśca jānakiḥ

हिन्दी अर्थ

माङ्गलिक कृत्य और राज्याभिषेक आदि कर्म इससे व्रतभंग नहीं होता। (अध्याय १२८)

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 24

कृताग्निः कृतकर्मा च कृतौजाः सुमहाबलः ।कृतवीर्यादर्जुनो ऽभूदर्जुनाच्छूरसेनकः

kṛtāgniḥ kṛtakarmā ca kṛtaujāḥ sumahābalaḥ / kṛtavīryādarjuno 'bhūdarjunācchūrasenakaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रतिपदा, तृतीया, चतुर्थी तथा पञ्चमीमें किये जानेवाले

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 25

जयध्वजो मधुः शूरो वृषणः पञ्च सव्रताः ।जयध्वजात्तालजङ्घो भरतस्तालजङ्गतः

jayadhvajo madhuḥ śūro vṛṣaṇaḥ pañca savratāḥ / jayadhvajāttālajaṅgho bharatastālajaṅgataḥ

हिन्दी अर्थ

ब्रह्माजीने कहा--हे व्यास! अब मैं करनेसे व्रती वैश्वानर-पद प्राप्त करता है । प्रतिपदा प्रतिपदादि तिथियोंके व्रतोंकी विधियोंका वर्णन तिथिमें एकभक्तब्रत करके दिनमें एक बार भोजन करूँगा। आप उनका श्रवण करें। प्रतिपदा तिथिके करना चाहिए। व्रतकी समाप्तिपर कपिला गौका एक विशेष व्रतका नाम शिखित्रत है। इस व्रतको दान करे। चैत्रमांसके प्रारम्भमें विधिपूर्वक सुन्दर

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 26

वृषणस्य मधुः पुत्त्रो मधोर्वृष्ण्यादिवंशकः ।क्रोष्टोर्विजज्ञिवान्पुत्त्र आहिस्तस्य महात्मनः

vṛṣaṇasya madhuḥ puttro madhorvṛṣṇyādivaṃśakaḥ / kroṣṭorvijajñivānputtra āhistasya mahātmanaḥ

हिन्दी अर्थ

गन्ध, पुष्प, माला आदिसे ब्रह्माकी पूजा और हवन करनेसे सभी अभीष्ट फलोंकी प्राप्ति होती है। कार्तिकमासमें शुक्लपक्षकी अष्टमी तिथिको व्रती पुष्प और उनसे बनी हुई मालाका दान

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 27

आहेरुशङ्कुः संजज्ञेतस्य चित्ररथः सतः ।शशबिन्दुश्चित्ररथात्पत्न्यो लक्षञ्च तस्य ह

āheruśaṅkuḥ saṃjajñetasya citrarathaḥ sataḥ / śaśabinduścitrarathātpatnyo lakṣañca tasya ha

हिन्दी अर्थ

करे। यह क्रम वर्षपर्यन्त चलना चाहिए। ऐसा करनेसे रूपकी इच्छा करनेवाले ब्रतीको रूप- सौन्दर्यकी प्राप्ति होती है। श्रावणमासके कृष्णपक्षकी तृतीया तिथिमें

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 28

दशलक्षञ्च पुत्राणां पृथुकीर्त्यादयो वराः ।पृथुकीर्तिः पृथुजयः पृथुदानः पृथुश्रवाः

daśalakṣañca putrāṇāṃ pṛthukīrtyādayo varāḥ / pṛthukīrtiḥ pṛthujayaḥ pṛthudānaḥ pṛthuśravāḥ

हिन्दी अर्थ

लक्ष्मीके साथ भगवान् श्रीधरविष्णुको सुसज्जित शय्यापर स्थापित कर उनकी पूजा करे और 'फलकी भेंट चढ़ाये। इसके बाद उस शय्यादिका दान ब्राह्मणको करके व्रती ' श्रीधराय

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 29

पृथुश्रवसो ऽभूत्तम उशनास्तमसो ऽभवत् ।तत्पुत्रः शितगुर्नाम श्रीरुक्मकवचस्ततः

pṛthuśravaso 'bhūttama uśanāstamaso 'bhavat / tatputraḥ śitagurnāma śrīrukmakavacastataḥ

हिन्दी अर्थ

नमः, श्रियै नमः” यह प्रार्थना करे। इसी तृतीया तिथिको उमा-शिव और अग्निकी पूजा करनी चाहिए। व्रती इन सभीको हविष्यान्न, नैवेद्य और दमनक (श्वेत कमल)-का निवेदन करे।

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 30

रुक्मश्च पृथुरुक्मश्च ज्यामघः पालितो हरिः ।श्रीरुक्मकवचस्यैते विदर्भो ज्यामघात्तथा

rukmaśca pṛthurukmaśca jyāmaghaḥ pālito hariḥ / śrīrukmakavacasyaite vidarbho jyāmaghāttathā

हिन्दी अर्थ

फाल्गुनादिमें तृतीयाका व्रत करनेवाले मनुष्यको नमक नहीं खाना चाहिए। व्रतके समाप्त होनेपर सपल्लीक ब्राह्मणकी पूजा करके अन्न, शय्या, पात्रादि उपस्करोंसे युक्त घरका दान “भवानी

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 31

भार्यायाञ्चैव शैब्यायां विदर्भात्क्रथकौशिकौ ।रोमपादो रोमपादाद्बभ्रुर्बभ्रोर्धृतिस्तथा

bhāryāyāñcaiva śaibyāyāṃ vidarbhātkrathakauśikau / romapādo romapādādbabhrurbabhrordhṛtistathā

हिन्दी अर्थ

प्रीयताम्' ' भवानी प्रसन्न हों' ऐसा कहकर करना चाहिए। ऐसा करनेसे व्रतीको अन्त समयमें भवानीका लोक प्राप्त होता है और इस लोकमें श्रेष्ठ सुख तथा सौभाग्यकी प्राप्ति होती है।

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 32

कौशिकस्य ऋचिः पुत्रः ततश्चैद्यो नृपः किल ।कुन्तिः किलास्य पुत्रो ऽभूत्कुन्तेर्वृष्णिः सुतः स्मृतः

kauśikasya ṛciḥ putraḥ tataścaidyo nṛpaḥ kila / kuntiḥ kilāsya putro 'bhūtkuntervṛṣṇiḥ sutaḥ smṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

मार्गशीर्षमासकी तृतीया तिथिमें गौरी तथा चतुर्थी आदि तिथियोंमें क्रमश:--काली, उमा, भद्रा, दुर्गा, कान्ति, सरस्वती, मंगला, वैष्णवी, लक्ष्मी, शिवा तथा नारायणीदेवीकी पूजा करनी

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 33

वृष्णेश्च निवृतिः पुत्रो दशार्हे निवृतेस्तथा ।दशार्हस्य सुतो व्योमा जीमूतश्च तदात्मजः

vṛṣṇeśca nivṛtiḥ putro daśārhe nivṛtestathā / daśārhasya suto vyomā jīmūtaśca tadātmajaḥ

हिन्दी अर्थ

चाहिए। इनकी पूजा करनेसे व्रती प्रियजनोंसे होनेवाले वियोगादि कष्टोंसे मुक्त हो जाता है। माघमासके शुक्लपक्षमें चतुर्थी तिथिको निराहार रहकर व्रत करते हुए व्रती ब्राह्मणको तिलका

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 34

जीमूताद्विकृतिर्जज्ञे ततो भीमरथो ऽभवत् ।ततो मधुरथो जज्ञे शकुनिस्तस्य चात्मजः

jīmūtādvikṛtirjajñe tato bhīmaratho 'bhavat / tato madhuratho jajñe śakunistasya cātmajaḥ

हिन्दी अर्थ

दानकर स्वयं तिल एवं जलका आहार करे। इस

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 35

करम्भिः शकुनेः पुत्रस्तस्य वै देववान्स्मृतः ।देवक्षत्त्रो देवनतो देवक्षत्त्रान्मधुः स्मृतः

karambhiḥ śakuneḥ putrastasya vai devavānsmṛtaḥ / devakṣattro devanato devakṣattrānmadhuḥ smṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

संक्षि गरुडपुराण

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 36

कुरुवंशो मधोः पुत्रो ह्यनुश्च कुरुवंशतः ।पुरुहोत्रो ह्यनोः पुत्रो ह्यंशुश्च पुरुहोत्रतः

kuruvaṃśo madhoḥ putro hyanuśca kuruvaṃśataḥ / puruhotro hyanoḥ putro hyaṃśuśca puruhotrataḥ

हिन्दी अर्थ

प्रकार प्रतिमास व्रत करते हुए दो वर्ष बीतनेपर इस व्रतको समाप्त कर देना चाहिए। ऐसा करनेसे जीवनमें किसी प्रकारका विघ्न आदि प्राप्त नहीं होता। चतुर्थी तिथिमें गणोंके अधिनायक

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 37

सत्त्वश्रुतः सुतश्चांशोस्ततो वै सात्त्वतो नृपः ।भजिनो भजमानश्च सात्वतादन्धकः सुतः

sattvaśrutaḥ sutaścāṃśostato vai sāttvato nṛpaḥ / bhajino bhajamānaśca sātvatādandhakaḥ sutaḥ

हिन्दी अर्थ

गणपतिदेवको यथाविधि पूजा करनी चाहिए- पूजामें '३ गः स्वाहा’ यह प्रणवसे युक्त मूल मन्त्र है। पूजामें अङ्गन्यास इस प्रकारसे करना चाहिए- ३ ग्लौं ग्लां हृदयाय नमः (दाहिने हाथकी

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 38

महाभोजो वृष्णि दिव्यावन्यो देवावृधो ऽभवत् ।निमिवृष्णी भजमानादयुताजित्तथैव च

mahābhojo vṛṣṇi divyāvanyo devāvṛdho 'bhavat / nimivṛṣṇī bhajamānādayutājittathaiva ca

हिन्दी अर्थ

पाँचों अँगुलियोंसे हृदयका स्पर्श) ॐ गां गीं गू शिरसे स्वाहा (सिरका स्पर्श) । ॐ हूं हीं हीं शिखायै वषट् (शिखाका स्पर्श) । ॐ गूं कवचाय वर्मणे हुम् (दाहिने हाथकी अँगुलियोंसे बायें

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 39

शतजिच्च सहस्राजिद्बभ्रुर्देवो बृहस्पतिः ।महाभोजात्तु भोजो ऽभूत्तद्वृष्णेश्च सुमित्रकः

śatajicca sahasrājidbabhrurdevo bṛhaspatiḥ / mahābhojāttu bhojo 'bhūttadvṛṣṇeśca sumitrakaḥ

हिन्दी अर्थ

कंधेका और बायें हाथकी अँगुलियोंसे दाहिने कंधेका साथ ही स्पर्श) । ३ गौं नेत्रत्रयाय वौषट् (दाहिने हाथकी अँगुलियोंके अग्रभागसे दोनों नेत्रो और ललाटके मध्यभागका स्पर्श) । ३» गों अस्त्राय

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 40

स्वधाजित्संज्ञकस्तस्मादनमित्राशिनी तथा ।अनमित्रस्य निघ्नो ऽभून्निघ्नाच्छत्राजितो ऽभवत्

svadhājitsaṃjñakastasmādanamitrāśinī tathā / anamitrasya nighno 'bhūnnighnācchatrājito 'bhavat

हिन्दी अर्थ

फट् (यह वाक्य पढ़कर दाहिने हाथको सिरके ऊपरसे बायीं ओरसे पीछेकी ओर ले जाकर दाहिनी ओरसे आगेकी ओर ले आये और तर्जनी तथा मध्यमा अँगुलियोंसे बायें हाथकी हथेलीपर

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 41

प्रसेनश्चापरः ख्यातो ह्यनमित्राच्छिबिस्तथा ।शिबेस्तु सत्यकः पुत्रः सत्यकात्सात्यकिस्तथा

prasenaścāparaḥ khyāto hyanamitrācchibistathā / śibestu satyakaḥ putraḥ satyakātsātyakistathā

हिन्दी अर्थ

आवाहनादिमें निम्राङ्कित मन्त्रोंका प्रयोग करना

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 42

सात्यकेः सञ्जयः पुत्रः कुलिश्चैव तदात्मजः ।कुलेर्युगन्धरः पुत्रस्ते शैबेयाः प्रकीर्तिताः

sātyakeḥ sañjayaḥ putraḥ kuliścaiva tadātmajaḥ / kuleryugandharaḥ putraste śaibeyāḥ prakīrtitāḥ

हिन्दी अर्थ

आगच्छोल्काय गन्धोल्कः पुष्पोल्को धूपकोल्ककः । दीपोल्काय महोल्काय बलिश्चाथ विस ( मा ) ्जनम्॥

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 43

अनमित्रान्वये वृष्णिः श्वफल्कश्चित्रकः सुतः ।श्वफल्काच्चैवगान्दिन्यामक्रूरो वैष्णवो ऽभवत्

anamitrānvaye vṛṣṇiḥ śvaphalkaścitrakaḥ sutaḥ / śvaphalkāccaivagāndinyāmakrūro vaiṣṇavo 'bhavat

हिन्दी अर्थ

हे गन्धोल्क, है पुष्पोल्क, है धूपकोल्क अर्थात् हे गन्ध, पुष्प तथा धूपमें तेज:स्वरूप विद्यमान रहनेवाले देव! आप इस रचित पूजामण्डलमें स्थित दीपकमें तेज प्रदान करनेके लिये, महातेज

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 44

उपमद्गुरथाक्रूराद्देवद्योतस्ततः सुतः ।देववानुपदेवश्च ह्यक्रूरस्य सुतौ स्मृतौ

upamadgurathākrūrāddevadyotastataḥ sutaḥ / devavānupadevaśca hyakrūrasya sutau smṛtau

हिन्दी अर्थ

देनेके लिये, बलि और विसर्जनतक विद्यमान रहनेके लिये यहाँ उपस्थित हों।

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 45

पृथुर्विपृथुश्चित्रस्य त्वन्धकस्य शुचिः स्मृतः ।कुकुरो भजमानस्य तथा कम्बलबर्हिषः

pṛthurvipṛthuścitrasya tvandhakasya śuciḥ smṛtaḥ / kukuro bhajamānasya tathā kambalabarhiṣaḥ

हिन्दी अर्थ

आवाहनके पश्चात् गायत्रीमन्त्रसे अंगुष्ठादिका न्यास करना चाहिए। वह गायत्रीमन्त्र इस प्रकार है--

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 46

धृष्टस्तु कुकुराज्जज्ञे तस्मात्कापोतरोमकः ।तदात्मजो विलोमा च विलोम्नस्तुम्बुरुः सुतः

dhṛṣṭastu kukurājjajñe tasmātkāpotaromakaḥ / tadātmajo vilomā ca vilomnastumburuḥ sutaḥ

हिन्दी अर्थ

३ महाकर्णाय विदाहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 47

तस्माच्चदुन्दुभिर्जज्ञे पुनर्वसुरतः स्मृतः ।तस्याहुकश्चाहुकी च कन्या चैवाहुकस्य तु

tasmāccadundubhirjajñe punarvasurataḥ smṛtaḥ / tasyāhukaścāhukī ca kanyā caivāhukasya tu

हिन्दी अर्थ

करन्यासके पश्चात् इसी मन्त्रसे उनका ध्यान करके व्रतीको तिलादिसे उनको पूजा करके आहुति देनी चाहिए। गणपतिके साथ रहनेवाले गणोंको पूजा भी करनी चाहिए। व्रतीको ३

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 48

देवकश्चोग्रसेनश्च देवकाद्देवकी त्वभूत् ।वृकदेवोपदेवाच सहदेवा सुरक्षिता

devakaścograsenaśca devakāddevakī tvabhūt / vṛkadevopadevāca sahadevā surakṣitā

हिन्दी अर्थ

कूष्माण्डकाय नमः' इस प्रकार कहकर उनकी पूजा करनी चाहिए। उसके बाद स्वाहान्त शब्दका प्रयोग कर इन्हीं मन्त्रोंसे आहुति दे। इसी प्रकार अमोघोल्क, एकदन्त, त्रिपुरान्तकरूप, श्यामदन्त,

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 49

श्रीदेवी शान्तिदेवी च वसुदेव उवाह ताः ।देववानुपदेवश्च सहदेवासुतौ स्मृतौ

śrīdevī śāntidevī ca vasudeva uvāha tāḥ / devavānupadevaśca sahadevāsutau smṛtau

हिन्दी अर्थ

विकरालास्य, आहवेष और पद्मदंष्टरा गणोंको भी “नमः” और अन्तमें “स्वाहा' शब्दसे यथापेक्षित नमन और आहुति प्रदान करनी चाहिए। उसके बाद व्रती गणदेवके लिये मुद्रा-प्रदर्शन, नृत्य,

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 50

उग्रसेनस्य कंसो ऽभूत्सुनामा च वटादयः ।विदूरथो भजमानाच्छूरश्चाभूद्विदूरथात्

ugrasenasya kaṃso 'bhūtsunāmā ca vaṭādayaḥ / vidūratho bhajamānācchūraścābhūdvidūrathāt

हिन्दी अर्थ

हस्तताल तथा हास्यभाव प्रदर्शित करे। ऐसा करनेसे उसे सौभाग्यादि फलोंकी प्राप्ति होती है।

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 51

विदूरथसुतस्याथ सूरस्यापि शमी सुतः ।प्रतिक्षत्त्रश्च शमिनः स्वयम्भोजस्तदात्मजः

vidūrathasutasyātha sūrasyāpi śamī sutaḥ / pratikṣattraśca śaminaḥ svayambhojastadātmajaḥ

हिन्दी अर्थ

मार्गशीर्षमासके शुक्लपक्षको चतुर्थी तिथिमें गणको पूजा करनी चाहिए । वर्षपर्यन्त ऐसा करनेसे विद्या, लक्ष्मी, कीर्ति, आयु और संतानकी प्राप्ति होती है। सोमवार, चतुर्थी तिथिको उपवास रखकर व्रतीको

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 52

हृदिकश्च स्वयम्भोजात्कृतवर्मा तदात्मजः ।देवः शतधनुश्चैव शूराद्वै देवमीढुषः

hṛdikaśca svayambhojātkṛtavarmā tadātmajaḥ / devaḥ śatadhanuścaiva śūrādvai devamīḍhuṣaḥ

हिन्दी अर्थ

विधि-विधानसे गणपतिदेवकी पूजा कर उनका जप, हवन और स्मरण करना चाहिए। इस व्रतको करनेसे उसे विद्या, स्वर्ग तथा मोक्ष प्राप्त होता है।

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 53

दश पुत्रा मारिषायां वसुदेवादयो ऽभवन् ।पृथा च श्रुतदेवी च श्रुतकीर्तिः श्रुतश्रवाः

daśa putrā māriṣāyāṃ vasudevādayo 'bhavan / pṛthā ca śrutadevī ca śrutakīrtiḥ śrutaśravāḥ

हिन्दी अर्थ

शुक्लपक्षकी चतुर्थीको खांडके लड्डू और मोदकसे विध्नेश्वरकी पूजा करनेपर व्रतीकी समस्त कामनाओंकी सिद्धि तथा सौभाग्यको प्राप्ति होती है। यदि दमनक (श्वेतकमल)-से इनकी पूजा

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 54

राजाधिदेवो शूराच्च पृथां कुन्तेः सुतामदात् ।सा दत्ता कुन्तिना पाण्डोस्तस्यां धर्मानिलेन्द्रकैः

rājādhidevo śūrācca pṛthāṃ kunteḥ sutāmadāt / sā dattā kuntinā pāṇḍostasyāṃ dharmānilendrakaiḥ

हिन्दी अर्थ

होती है तो साधकको पुत्रादिकका फल प्राप्त होता है, इसीलिये इस चतुर्थीका नाम दमना है।

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 55

युधिष्ठिरो भीमपार्थो नकुलः सहदेवकः ।माद्रयां नासत्यदस्त्राभ्यां कुन्त्यां कर्णः पुराभवत्

yudhiṣṭhiro bhīmapārtho nakulaḥ sahadevakaḥ / mādrayāṃ nāsatyadastrābhyāṃ kuntyāṃ karṇaḥ purābhavat

हिन्दी अर्थ

“३० गणपतये नमः ' इस मन्त्रसे गणपतिकी पूजा करनी चाहिए। जिस किसी भी मासमें इन गणपतिदेवकी पूजा करने तथा होम, जप और

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 56

श्रुतदेव्यां दन्तवक्रो जज्ञे वै युद्धदुर्मदः ।सन्तर्दनादयः पञ्च श्रुतकीर्त्याञ्च कैकयात्

śrutadevyāṃ dantavakro jajñe vai yuddhadurmadaḥ / santardanādayaḥ pañca śrutakīrtyāñca kaikayāt

हिन्दी अर्थ

प्रतिपदा, तृतीया, चतुर्थी तथा पञ्चमीमें किये जानेवाले विविध तिथिव्रत

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 57

राजाधिदेव्यां जज्ञाते विन्दश्चैवानुविन्दकः ।श्रुतश्रवा दमघोषात्प्रजज्ञे शिशुपालकम्

rājādhidevyāṃ jajñāte vindaścaivānuvindakaḥ / śrutaśravā damaghoṣātprajajñe śiśupālakam

हिन्दी अर्थ

स्मरण करनेसे व्रतीकी सभी इच्छाएँ पूर्ण हो जाती हैं तथा समस्त विध्नोंका विनाश हो जाता है। मनुष्यको विभिन्न नामोंका उच्चारण करके भी भगवान् आद्यदेव विनायककी पूजा करनी चाहिए।

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 58

पौरवी रोहीणा भार्या मदिरानकदुन्दुभेः ।देवकीप्रमुखा भद्रा रोहिण्यां बलभद्रकः

pauravī rohīṇā bhāryā madirānakadundubheḥ / devakīpramukhā bhadrā rohiṇyāṃ balabhadrakaḥ

हिन्दी अर्थ

ऐसा करनेसे उसको भी सद्गतिकी प्राप्ति होती है। जबतक वह इस लोकमें रहता है, तबतक समस्त सुखोंका उपभोग करता है और अन्त समयमें उसे स्वर्ग और मोक्षकी भी प्राप्ति होती

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 59

सारणाद्याः शठश्चैव रेवत्यां बलभद्रतः ।निशठश्चोल्मुको जातो देवक्यां षट् च जज्ञिरे

sāraṇādyāḥ śaṭhaścaiva revatyāṃ balabhadrataḥ / niśaṭhaścolmuko jāto devakyāṃ ṣaṭ ca jajñire

हिन्दी अर्थ

है। विनायकके निम्नलिखित ये बारह नाम हैं- गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बकः ।

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 60

कीर्तिमांश्च सुषेणश्च ह्युदार्यो भद्रसेनकः ।ऋजुदासो भद्रदेवः कंस एवावधीच्च तान्

kīrtimāṃśca suṣeṇaśca hyudāryo bhadrasenakaḥ / ṛjudāso bhadradevaḥ kaṃsa evāvadhīcca tān

हिन्दी अर्थ

गणपूज्य, वक्रतुण्ड, एकदंष्ट, त्रियम्बक (त्र्यम्बक), नीलग्रीव, लम्बोदर, विकट, विघ्नराज,

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 61

संकर्षणः सप्तमो ऽभूदष्टमः कृष्ण एव च ।षोडशस्त्रीसहस्राणि भार्याणाञ्चाभवन्हरेः

saṃkarṣaṇaḥ saptamo 'bhūdaṣṭamaḥ kṛṣṇa eva ca / ṣoḍaśastrīsahasrāṇi bhāryāṇāñcābhavanhareḥ

हिन्दी अर्थ

इन बारह नामोंसे गणदेवको पूजा करनी चाहिए। पृथक्-पृथक् इन नामोंसे जो बुद्धिमान् प्राणी इनको पूजा करता है, उसकी सम्पूर्ण कामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं।

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 62

रुक्मिणी सत्यभामा च लक्ष्मणा चारुहासिनी ।श्रेष्ठा जाम्बवती चाष्टौ जज्ञिरे ताः सुतान्बहून्

rukmiṇī satyabhāmā ca lakṣmaṇā cāruhāsinī / śreṣṭhā jāmbavatī cāṣṭau jajñire tāḥ sutānbahūn

हिन्दी अर्थ

श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिकमासके शुक्लपक्षको पञ्चमी तिथिमें वासुकि, तक्षक, कालीय, मणिभद्रक, ऐरावत, धृतराष्ट्र, कर्कोटक तथा धनञ्जय--इन आठ नागोंकी घृतादिसे स्नान

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 63

प्रद्युम्नश्चारुदेष्णश्च प्रधानाः साम्ब एव च ।प्रद्युम्नादनिरुद्धो ऽभूत्ककुद्मिन्यां महाबलः

pradyumnaścārudeṣṇaśca pradhānāḥ sāmba eva ca / pradyumnādaniruddho 'bhūtkakudminyāṃ mahābalaḥ

हिन्दी अर्थ

कराकर पूजा करनी चाहिए। ये नाग अपने भक्तको आयु-आरोग्य और स्वर्ग प्रदान करते हैं। अनन्त, वासुकि, शंख, पद्म, कम्बल, कर्कोटक, धृतराष्ट्र, शंखक, कालीय, तक्षक और पिंगल--

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 64

अनिरुद्धात्सुभद्रायां वज्रो नाम नृपो ऽभवत् ।प्रतिबाहुर्वज्रसुतश्चारुस्तस्य सुतो ऽभवत्

aniruddhātsubhadrāyāṃ vajro nāma nṛpo 'bhavat / pratibāhurvajrasutaścārustasya suto 'bhavat

हिन्दी अर्थ

इन नागोंको पूजा प्रत्येक मासमें करनी चाहिए। भाद्रपदमासके शुक्लपक्षमें आठों नागोंकी पूजा करनेसे साधकको मृत्युके पश्चात् स्वर्ग और मोक्षकी प्राप्ति होती है।

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 65

वह्निस्तु तुर्वसोर्वंशे वह्नेर्भर्गो ऽभवत्सुतः ।भर्गाद्भानुरभूत्पुत्रो भानोः पुत्रः करन्धमः

vahnistu turvasorvaṃśe vahnerbhargo 'bhavatsutaḥ / bhargādbhānurabhūtputro bhānoḥ putraḥ karandhamaḥ

हिन्दी अर्थ

श्रावणमासके शुक्लपक्षमेँ पञ्चमीको द्वारके सभी विषदोष दूर हो जाते हैं । नाग अभय वरदान दोनों ओर इन नागोंका चित्र बनाकर पूजन करना देनेवाले होते हैं और यह पञ्चमी सर्पदंष्टी प्राणीको चाहिए। इसी दिन अनन्त आदि महानागोंकी पूजा मुक्ति देनेवाली होती हैं इसलिये दंष्टोद्धार पञ्चमी

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 66

करन्धमस्य मरुतो द्रुह्योर्वंशं निबोध मे ।द्रह्योस्तु तनयः सेतुरारद्धश्च तदात्मजः

karandhamasya maruto druhyorvaṃśaṃ nibodha me / drahyostu tanayaḥ seturāraddhaśca tadātmajaḥ

हिन्दी अर्थ

करके नैवेद्यमें दूध तथा घी देना चाहिए, इससे कहलाती है। (अध्याय १२९) षष्ठी तथा सप्तमीके विविध व्रत ब्रह्माजीने कहा--भाद्रपदमासमें भगवान् सप्तमीको सूर्यदेवकी पूजा कर यदि ब्राह्मणोंको

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 67

आरद्धस्यैव गान्ध रो घर्मो गान्धारतो ऽभवत् ।घृतस्तु घर्मपुत्रो ऽभूद्दुर्गमश्च घृस्य तु

āraddhasyaiva gāndha ro gharmo gāndhārato 'bhavat / ghṛtastu gharmaputro 'bhūddurgamaśca ghṛsya tu

हिन्दी अर्थ

कार्तिकेयकी पूजा करनी चाहिए । इसमें स्नानादि जो कृत्य किये जाते हैं, वे सभी अक्षय फल प्रदान करनेवाले हो जाते हैं।

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 68

प्रचेता दुर्गमस्यैव अनोर्वंशं शृणुष्व मे ।अनोः सभानरः पुत्रस्तस्मा कालञ्जयो ऽभवत्

pracetā durgamasyaiva anorvaṃśaṃ śṛṇuṣva me / anoḥ sabhānaraḥ putrastasmā kālañjayo 'bhavat

हिन्दी अर्थ

व्रती (षष्ठी तिथिको उपवासकर) सप्तमी तिथिको ब्राह्मणभोजन कराकर ' 3३७ खखोल्काय नमः' इस मन्त्रसे सूर्यदेवकी पूजा करे और अष्टमी तिथिको मरिचका भोजनकर पारणा करे। इससे

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 69

कालञ्जयात्सृञ्जयो ऽभूत्सृञ्जयात्तु पुरुञ्जयः ।जनमेजयस्तु तत्पुत्रो महाशालस्तदात्मजः

kālañjayātsṛñjayo 'bhūtsṛñjayāttu puruñjayaḥ / janamejayastu tatputro mahāśālastadātmajaḥ

हिन्दी अर्थ

व्रती अन्तमें स्वर्ग प्राप्त करता है । मरिच-प्राशनके कारण इस व्रतका नाम मरिचसप्तमी है। इस व्रतको करनेसे प्रियजनोंसे मिलन होता हे, उनसे वियोग नहीं होता । सप्तमी तिथिको संयमपूर्वक

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 70

महामना महाशालदुशीनर इह स्मृतः ।अशीनराच्छिबिर्जज्ञे वृषदर्भः शिवेः सुतः

mahāmanā mahāśāladuśīnara iha smṛtaḥ / aśīnarācchibirjajñe vṛṣadarbhaḥ śiveḥ sutaḥ

हिन्दी अर्थ

स्नानादि करके सूर्यकी पूजा करे। 'मार्तण्डः प्रीयताम्'-- ' सूर्यदेव मुझपर प्रसन्न हों” यह कहते हुए ब्राह्मणोंके लिये फलोंका दान करे और खजूर, नारियल, बिजौरा नीबू आदि फलोंको प्रदान करे।

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 71

महामनोजात्तितिक्षोः पुत्रो ऽभूच्च रुषद्रथः ।हेमो रुषद्रथाज्जज्ञे सुतपा हेमतो ऽभवत्

mahāmanojāttitikṣoḥ putro 'bhūcca ruṣadrathaḥ / hemo ruṣadrathājjajñe sutapā hemato 'bhavat

हिन्दी अर्थ

यह प्रार्थना करे कि है देव! मेरे सभी अभीष्ट चारों ओरसे सफल हों। फलदान एवं प्राशनके कारण इस सप्तमीका नाम “फलसप्तमीव्रत' है।

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 72

बलिः सुतपसो जज्ञे ह्यङ्गवङ्गकलिङ्गकाः ।अन्धः पैण्ड्रश्च बालेया ह्यनपानस्तथाङ्गतः

baliḥ sutapaso jajñe hyaṅgavaṅgakaliṅgakāḥ / andhaḥ paiṇḍraśca bāleyā hyanapānastathāṅgataḥ

हिन्दी अर्थ

दक्षिणासहित पायसका भोजन कराया जाय, तदनन्तर व्रती स्वयं पयका पानकर व्रत समाप्त करे तो पुण्य-लाभ होता है। ओदन, भक्ष्य, चोष्य और लेह्य पदार्थ इस ब्रतमें ग्राह्म नहीं है। धन-पुत्रकी

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 73

अनपानाद्दिविरथस्ततो धर्मरथो ऽभवत् ।रोमपादो धर्मरथाच्चतुरङ्गस्तदात्मजः

anapānāddivirathastato dharmaratho 'bhavat / romapādo dharmarathāccaturaṅgastadātmajaḥ

हिन्दी अर्थ

कामना करनेवाला ओदनका परित्याग कर इस व्रतको करे। इसी वैशिष्ट्यके कारण इसे अनौदक सप्तमी कहा गया है।

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 74

पृथुलाक्षस्तस्य पुत्रश्चम्पो ऽभूत्पृथुलाक्षतः ।चम्पपुत्रश्च हर्यङ्गस्तस्य भद्ररथः सुतः

pṛthulākṣastasya putraścampo 'bhūtpṛthulākṣataḥ / campaputraśca haryaṅgastasya bhadrarathaḥ sutaḥ

हिन्दी अर्थ

विजयकी कामना करनेवालेको वायुमात्र पान कर विजयसप्तमीव्रत करना चाहिए । जो कामेच्छुक हैं, वे मात्र अर्कका प्राशनकर इस ब्रतको करें। इस प्रकार व्रतकर वे कामपर विजय प्राप्त कर

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 75

बृहत्कर्मा सुतस्तस्य बृहद्भानुस्ततो ऽभवत् ।बुहन्मना बृहाद्भानोस्तस्य पुत्रो जयद्रथः

bṛhatkarmā sutastasya bṛhadbhānustato 'bhavat / buhanmanā bṛhādbhānostasya putro jayadrathaḥ

हिन्दी अर्थ

इस सप्तमीव्रतमें गेहूँ, उड़द, यव, साठी धान, तिल, कांस्यपात्र, पाषाणपात्र, पिसी हुई वस्तु, मधु, मैथुन, मद्य, मांस, तैल-मर्दन और अञ्जन त्याज्य है। जो मनुष्य इनका परित्याग कर व्रत करता है, उसकी

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 76

जयज्रथस्य विजयो विजयस्य धृतिः सुतः ।धृतेर्धृव्रतः पुत्रः सत्यधर्मा धृतव्रतात्

jayajrathasya vijayo vijayasya dhṛtiḥ sutaḥ / dhṛterdhṛvrataḥ putraḥ satyadharmā dhṛtavratāt

हिन्दी अर्थ

सभी अभिलाषाएँ पूर्ण हो जाती हैं। इसीलिये इसे विजयसप्तमी कहा गया है। (अध्याय १३०)

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 77

तस्य पुत्रस्त्वधिरथः कर्णस्तस्य सुतो ऽभवत्

tasya putrastvadhirathaḥ karṇastasya suto 'bhavat

हिन्दी अर्थ

ब्रह्माजीने कहा- है ब्रह्मन्! भाद्रपदमासमें चाहिए। फल, धान्य आदि सभी प्रयोज्य वस्तुओंसे शुक्लपक्षकौ अष्टमी तिथिको दूर्वाष्टमीत्रत होता 'शम्भवे नमः, शिवाय नमः' कहकर शिवका

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

अध्याय 138

श्लोक 78

वृर्षसेनस्तु कर्णस्य पुरुवंश्याञ्छणुष्व मे

vṛrṣasenastu karṇasya puruvaṃśyāñchaṇuṣva me

हिन्दी अर्थ

२-त्वं दूर्वेऽमृतजन्मासि वन्दिता च सुरासुंरैः। सौभाग्यं संततिं कृत्वा सर्वकार्यकरी भव॥

English

§atrughna's sons were Subahu and Surasena. Kuia's son was Atithi and his son was Nisadha.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_garuDapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।