Garuda Purana
142
अध्याय 142 / 317

Book 1 - Adhyaya 143

51 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ51 श्लोक

अध्याय 142

श्लोक 1

इति श्रीगारुडे महापुराणे पूर्वखण्डे प्रथमांशाख्ये आचारकाण्डे दशावतारदृ नाम द्विचत्वारिंशदुत्तरशततमो ऽध्यायः श्रीगरुडमहापुराणम्- १४३ ब्रह्मोवाच ।रामायणमतो वक्ष्ये श्रुतं पापविनाशनम् ।विष्णुनाभ्यब्जतो ब्रह्मा मरीचिस्तत्सुतो ऽभवत्

iti śrīgāruḍe mahāpurāṇe pūrvakhaṇḍe prathamāṃśākhye ācārakāṇḍe daśāvatāradṛ nāma dvicatvāriṃśaduttaraśatatamo 'dhyāyaḥ śrīgaruḍamahāpurāṇam- 143 brahmovāca / rāmāyaṇamato vakṣye śrutaṃ pāpavināśanam / viṣṇunābhyabjato brahmā marīcistatsuto 'bhavat

हिन्दी अर्थ

तिल-चावल (कृसरान्न)-की खिचड़ीका भोग निवेदित करना चाहिए । आषाढ आदि चार महीनोंमें पायस निवेदन करके ब्राह्मणोंको पायसका ही भोजन निवेदित करना चाहिए । पञ्चगव्य, जलस्नान

English

Incarnating as a Boar he killed Hiranyaksa, extricated the Earth from his ciulches and saved the deities.

अध्याय 142

श्लोक 2

मरीचेः कश्यपस्तस्माद्रविस्तस्मान्मनुः स्मृतः ।मनोरिक्ष्वाकुरस्याभूद्वंशे राजा रघुः स्मृतः

marīceḥ kaśyapastasmādravistasmānmanuḥ smṛtaḥ / manorikṣvākurasyābhūdvaṃśe rājā raghuḥ smṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

और नैवेद्यसे पूजन करना चाहिए। इस प्रकार संवत्सरके अन्तमें विशेषरूपसे भगवानूकी पूजा

English

Incarnating as Nisirhba (manlion) he killed tltc demon Hiranyakaslpu and preserv'cd the Vcdic religion and its principles.

अध्याय 142

श्लोक 3

रघोरजस्ततो जातो राजा दशरथो बली ।तस्य पुत्रास्तु चत्वारो महाबलपराक्रमाः

raghorajastato jāto rājā daśaratho balī / tasya putrāstu catvāro mahābalaparākramāḥ

हिन्दी अर्थ

करके निम्नलिखित मन्त्रोंसे प्रार्थना करनी चाहिए--

English

Then Hari incarnated as the son of Jatnadagni, Parafurama by name and freed the Earth of Kalriyas thrice seven (twentyone) times.

अध्याय 142

श्लोक 4

कौसल्यायाम भूद्रामो भरतः कैकयीसुतः ।सुतौ लक्ष्मणशक्षुघ्नौ सुमित्रायां बभूवतुः

kausalyāyāma bhūdrāmo bharataḥ kaikayīsutaḥ / sutau lakṣmaṇaśakṣughnau sumitrāyāṃ babhūvatuḥ

हिन्दी अर्थ

पापस्य वृद्धिं समुपैतु पुण्यम्।

English

The Lord then killed Karttavlrya and gifted away land CO Kasyapa. After performing a sacrifice the powerful lord made a permanent stay on the mountain Mahendra.

अध्याय 142

श्लोक 5

रामो भक्तः पितुर्मातुर्विश्वामित्रादवाप्तवान् ।अस्त्रग्रामं ततो यक्षीं ताटकां प्रजघान ह

rāmo bhaktaḥ piturmāturviśvāmitrādavāptavān / astragrāmaṃ tato yakṣīṃ tāṭakāṃ prajaghāna ha

हिन्दी अर्थ

स ब्रह्मभूतः परतः परस्मात्।

English

To do a good turn to his step-mother and to pre¬ serve the truthfulness of his father he came to Dandaka forest passing through Snigavera and Citrakuta.

अध्याय 142

श्लोक 6

विशावमित्रस्य यज्ञे वै सुबाहुं न्यवधीद्बली ।जनकस्य क्रतुं गत्वा उपयेमे ऽथ जानकीम्

viśāvamitrasya yajñe vai subāhuṃ nyavadhīdbalī / janakasya kratuṃ gatvā upayeme 'tha jānakīm

हिन्दी अर्थ

मया कृतं पापहराप्रमेय ॥

English

He ruled over the kingdom, protected subjects, saved Avas, performed Aivamedha (horse sacrifice) and other sacrifices and preserved righteousness.

अध्याय 142

श्लोक 7

ऊर्मिलां लक्ष्मणो वीरो भरतो माण्डवीं सुताम् ।शत्रुघ्नो वै कीर्तिमतीं कुशध्वजसुते उभे

ūrmilāṃ lakṣmaṇo vīro bharato māṇḍavīṃ sutām / śatrughno vai kīrtimatīṃ kuśadhvajasute ubhe

हिन्दी अर्थ

तदक्षयममेयात्मन् कुरुष्व पुरुषोत्तम॥

English

I shall tell you about the greatness of Sita by nari ating the greatness of chastity. Once, in the city of Pratis|hana, there lived a brahmin named Kausika who suffered from leprosy.

अध्याय 142

श्लोक 8

पित्रादिभिरयोध्यायां गत्वा रामादयः स्थिताः ।युधाजितं मातुलञ्च शत्रुघ्नभरतौ गतौ

pitrādibhirayodhyāyāṃ gatvā rāmādayaḥ sthitāḥ / yudhājitaṃ mātulañca śatrughnabharatau gatau

हिन्दी अर्थ

हे अच्युत! आपको बार-बार प्रणाम है। हे देव! मेरे पापोंका विनाश हो और पुण्यकी वृद्धि हो। मेरे ऐश्वर्य और धनादि सहैव अक्षय रहें । मेरी सन्तान-परम्परा अक्षुण्ण हो। है अच्युत! जिस

English

In spite of his loathsome disease his wife worshipp¬ ed him like a god. Even when rebuked by him she never ceased to venerate him.

अध्याय 142

श्लोक 9

गतयोर्नृपवर्यो ऽसौ राज्यं दातुं समुद्यतः ।स रामाय तत्पुत्राय कैकेय्या प्रार्थितस्तदा

gatayornṛpavaryo 'sau rājyaṃ dātuṃ samudyataḥ / sa rāmāya tatputrāya kaikeyyā prārthitastadā

हिन्दी अर्थ

प्रकार आप परात्पर ब्रह्म हैं, वैसे ही मेरे मनोऽभिलषित फलको अविनाशी बना दें। है अप्रमेय! सहैव मेरे द्वारा किये जानेवाले पापका विनाश करते रहें। हे अच्युत! है अनन्त! है गोविन्द! आप मुझपर प्रसन्न

English

Man<javya became furious on being kicked with the foot and said, ''He who tossed me with his foot shall die at sunrise."

अध्याय 142

श्लोक 10

चतुर्दशसमावासो वनेरामस्य वाञ्छितः ।रामः पितृहितार्थञ्च लक्ष्मणेन च सीतया

caturdaśasamāvāso vanerāmasya vāñchitaḥ / rāmaḥ pitṛhitārthañca lakṣmaṇena ca sītayā

हिन्दी अर्थ

हों। है अमेयात्मन्! है पुरुषोत्तम! जो मेरे लिये अभीष्ट है, आप उसको भी अक्षय बना दें। यह मास-नक्षत्रत्रत सात वर्षतक करना चाहिए। ऐसा करनेसे मनुष्यको आयु, लक्ष्मी तथा सद्गति

English

On hearing that, the wife ofKauiika said, ''The sun will never rise." Since the sun did not rise there was perpetual night.

अध्याय 142

श्लोक 11

राज्यञ्च तृणवत्त्यक्त्वा शृङ्गवेरपुरं गतः ।रथं त्यक्त्वा प्रयागञ्च चित्रकूटगिरिं गतः

rājyañca tṛṇavattyaktvā śṛṅgaverapuraṃ gataḥ / rathaṃ tyaktvā prayāgañca citrakūṭagiriṃ gataḥ

हिन्दी अर्थ

प्राप्त होती है। यदि स्वच्छ हृदयसे उपवाससहित एक वर्षपर्यन्त यथाक्रम एकादशी, अष्टमी, चतुर्दशी और सप्तमी तिथियोंमें विष्णु, दुर्गा, शिव और सूर्यकी पूजा हो तो प्राणीको उन देवोंके लोक तो

English

Many years went by like thb. The gods became afraid. They went to Brahma for help. Brahma told them.

अध्याय 142

श्लोक 12

रामस्य तु वियोगेन राजा स्वर्गं समाश्रितः ।संस्कृत्य भरतश्चागाद्राममाह बलान्वितः

rāmasya tu viyogena rājā svargaṃ samāśritaḥ / saṃskṛtya bharataścāgādrāmamāha balānvitaḥ

हिन्दी अर्थ

प्राप्त होते ही हैं, सभी निर्मल अभिलाषाएँ भी पूर्ण हो जाती हैं। व्रतकालमें एकभुक्त, नक्त अथवा

English

Making the sun rise she resuscitated Kauiika too. It is said that Sita was superior to even Anasuya in chastity.

अध्याय 142

श्लोक 13

अयोध्यान्तु समागत्य राज्यं कुरु महामते ।स नैच्छत्पादुके दत्त्वा राज्याय भरताय तु

ayodhyāntu samāgatya rājyaṃ kuru mahāmate / sa naicchatpāduke dattvā rājyāya bharatāya tu

हिन्दी अर्थ

काण्ड सूर्यवंशवर्णन २३७

English

Making the sun rise she resuscitated Kauiika too. It is said that Sita was superior to even Anasuya in chastity.

अध्याय 142

श्लोक 14

विसर्जितो ऽथ भरतो रामराज्यमपालयत् ।नन्दिग्रामे स्थितो भक्तो ह्ययोध्यां नाविशद्व्रती

visarjito 'tha bharato rāmarājyamapālayat / nandigrāme sthito bhakto hyayodhyāṃ nāviśadvratī

हिन्दी अर्थ

अयाचित एवं उपवास करते हुए शाकादिके द्वारा सप्तमीमें अर्थदाता सूर्यदेवकी पूजा विहित है। इन सभी तिथियोंमें सभी देवताओंकी पूजा करनेसे अष्टमी तिथिमें दुर्गा, नवमीमें मातृकाओ एवं तक्षककी भोग और मोक्ष दोनोंकी प्राप्ति हो जाती है। पूजाका विधान है। दशमीमें इन्द्र और कुबेर तथा प्रतिपदा तिथिमें कुबेर, अग्नि, नासत्य और दस्र एकादशीमें सप्तर्षियोंकी पूजा करनी चाहिए । द्वादशी

English

Making the sun rise she resuscitated Kauiika too. It is said that Sita was superior to even Anasuya in chastity.

अध्याय 142

श्लोक 15

रामो ऽपि चित्रकूटाच्च ह्यत्रेराश्रममाययौ ।नत्वा सुतीक्ष्णं चागस्त्यं दण्डकारण्यमागतः

rāmo 'pi citrakūṭācca hyatrerāśramamāyayau / natvā sutīkṣṇaṃ cāgastyaṃ daṇḍakāraṇyamāgataḥ

हिन्दी अर्थ

नामक देव पूज्य हैं । द्वितीया तिथिमें लक्ष्मी तथा तिथिमें हरि, त्रयोदशीमें कामदेव, चतुर्दशीमें महेश्वर यमराज, पञ्चमीमें श्रीसमन्वित पार्वती और नागगणोंकी शिव, पूर्णिमामें ब्रह्मा तथा अमावास्यामें पितरोंकी पूजा करनी चाहिए । षष्ठी तिथिमें कार्तिकेय तथा पूजा करनी चाहिए । (अध्याय १३७)

English

Making the sun rise she resuscitated Kauiika too. It is said that Sita was superior to even Anasuya in chastity.

अध्याय 142

श्लोक 16

तत्र शूर्पणखा नाम राक्षसी चात्तुमागता ।निकृत्य कर्णो नासे च रामेणाथापवारिता

tatra śūrpaṇakhā nāma rākṣasī cāttumāgatā / nikṛtya karṇo nāse ca rāmeṇāthāpavāritā

हिन्दी अर्थ

श्रीहरिने कहा- है रुद्र! अब मैं राजाओंके नामक पुत्रका जन्म हुआ। विभूतिसे करन्धम वंश और उनके चरितका वर्णन करता हूँ । सर्वप्रथम नामक पुत्र हुआ । करन्धमसे अविक्षित, अविक्षितसे सूर्यवंशका वर्णन सुनें । मरुत् और मरुतूसे नरिष्यन्तकी उत्पत्ति मानी जाती

English

Making the sun rise she resuscitated Kauiika too. It is said that Sita was superior to even Anasuya in chastity.

अध्याय 142

श्लोक 17

तत्प्रेरितः खरश्चागाद्दूषणस्त्रिशिरास्तथा ।चतुर्दशसहस्रेण रक्षसान्तु बलेन च

tatpreritaḥ kharaścāgāddūṣaṇastriśirāstathā / caturdaśasahasreṇa rakṣasāntu balena ca

हिन्दी अर्थ

भगवान् विष्णुके नाभिकमलसे ब्रह्मा उत्पन्न है । नरिष्यन्तसे तम, तमसे राजवर्धन, राजवर्धनसे हुए। ब्रह्याके अन्नुष्ठभागसे दक्षका जन्म हुआ सुधृति, सुधृतिसे नर, नरसे केवल तथा केवलसे दक्षसे उनकी पुत्री अदितिका प्रादुर्भाव हुआ, जो बन्धुमान् हुआ । देवमाता कहलाती हें । उन्हीं अदितिसे विवस्वान् बबन्थुमानूके वेगवान्, वेगवानूके बुध और

English

Making the sun rise she resuscitated Kauiika too. It is said that Sita was superior to even Anasuya in chastity.

अध्याय 142

श्लोक 18

रामो ऽपि प्रेषयामास बाणैर्यमपुरञ्च तान् ।राक्षस्या प्रेरितो ऽभ्यागाद्रावणो हरणाय हि

rāmo 'pi preṣayāmāsa bāṇairyamapurañca tān / rākṣasyā prerito 'bhyāgādrāvaṇo haraṇāya hi

हिन्दी अर्थ

(सूर्य), विवस्वान्से वैवस्वत मनु हुए और उन बुधके तृणबिन्दु नामक पुत्र हुआ। तृणबिन्दुने मनुसे इक्ष्वाकु, शर्याति, नृग, धृष्ट, पृषश्न, नरिष्यन्त, अलम्बुषा नामकी अप्सरासे इलविला नामकी नभग, दिष्ट तथा शशक (करुष) नामक नौ कन्या तथा विशाल नामक पुत्र उत्पन्न किया। पुत्रोंकी उत्पत्ति हुई। है रुद्र! मनुकी इला नामकी विशालके हेमचन्द्र नामक पुत्र हुआ। हेमचन्द्रसे

English

Making the sun rise she resuscitated Kauiika too. It is said that Sita was superior to even Anasuya in chastity.

अध्याय 142

श्लोक 19

मृगरूपं स मारीचं कृत्वाग्रे ऽथ त्रिदण्डधृक् ।सीतया प्रेरितो रामो मारीचं निजघान ह

mṛgarūpaṃ sa mārīcaṃ kṛtvāgre 'tha tridaṇḍadhṛk / sītayā prerito rāmo mārīcaṃ nijaghāna ha

हिन्दी अर्थ

कन्या थी और सुद्युम्न नामक पुत्र था। इलाके चन्द्रक, चन्द्रकसे धूम्राश्व, धूम्राश्वसे सृञ्जय, सृञ्जयसे बुधसे राजा पुरूरवा उत्पन्न हुए। सुद्युम्नसे उत्कल, सहदेवकी उत्पत्ति हुई। सहदेवके कुशाश्च नामक विनत तथा गय नामक तीन पुत्रोंका जन्म हुआ।पुत्र हुआ। कृशाश्वसे सोमदत्त और सोमदत्तसे

English

Making the sun rise she resuscitated Kauiika too. It is said that Sita was superior to even Anasuya in chastity.

अध्याय 142

श्लोक 20

म्रियमाणः स च प्राह हा सीते ! लक्ष्मणोति च ।सीतोक्तो लक्ष्मणो ऽथागाद्रामश्चानुददर्श तम्

mriyamāṇaḥ sa ca prāha hā sīte ! lakṣmaṇoti ca / sītokto lakṣmaṇo 'thāgādrāmaścānudadarśa tam

हिन्दी अर्थ

गोवध करनेके कारण मनुका पुत्र पृषध्र शूद्र जनमेजय हुआ जनमेजयसे सुमन्ति नामक पुत्रकी हो गया था। करुष (शशक)-से क्षत्रिय लोगोंकी उत्पत्ति हुई। इन सभी (राजाओं)-को वैशालक उत्पत्ति हुई, जो कारुष नामसे विख्यात हुए। मनुके कहा गया है। पुत्र दिष्टसे जो नाभाग नामका पुत्र हुआ वह वैश्य वैवस्वत मनुके पुत्र शर्यातिके सुकन्या नामकी

English

Making the sun rise she resuscitated Kauiika too. It is said that Sita was superior to even Anasuya in chastity.

अध्याय 142

श्लोक 21

उवाच राक्षसी माया नूनं सीता हृतेति सः ।रावणो ऽन्तरमासाद्य ह्यङ्केनादाय जानकीम्

uvāca rākṣasī māyā nūnaṃ sītā hṛteti saḥ / rāvaṇo 'ntaramāsādya hyaṅkenādāya jānakīm

हिन्दी अर्थ

हो गया था। उससे एक भलन्दन नामक पुत्र हुआ। पुत्री हुई, जो च्यवन ऋषिकी भार्या बनी । शर्यातिके भलन्दनसे वत्सप्रीति नामक पुत्रकी उत्पत्ति हुई। अनन्त नामक पुत्र भी था। उससे रेवत नामका पुत्र वत्सप्रीतिसे पांशु और खनित्र-दो पुत्रोंका जन्म हुआ। रेवतके भी रैवत नामक पुत्र हुआ। उससे हुआ। खनित्रसे भूप, भूपसे क्षुप, क्षुपसे विंश और रेवती नामकी कन्या हुई।

English

Making the sun rise she resuscitated Kauiika too. It is said that Sita was superior to even Anasuya in chastity.

अध्याय 142

श्लोक 22

जटायुषं विनिर्भिद्य ययौ लङ्कां ततो बली ।अशोकवृक्षच्छायायां रक्षितां तामधारयत्

jaṭāyuṣaṃ vinirbhidya yayau laṅkāṃ tato balī / aśokavṛkṣacchāyāyāṃ rakṣitāṃ tāmadhārayat

हिन्दी अर्थ

विंशसे विविंशकने जन्म लिया। वैवस्वत मनुके पुत्र धृष्टके धाई हुआ, जो

English

Making the sun rise she resuscitated Kauiika too. It is said that Sita was superior to even Anasuya in chastity.

अध्याय 142

श्लोक 23

आगत्य रामः सून्याञ्च पर्णशालां ददर्श ह ।शोकं कृत्वाथ जानक्या मार्गणं कृतवान्प्रभुः

āgatya rāmaḥ sūnyāñca parṇaśālāṃ dadarśa ha / śokaṃ kṛtvātha jānakyā mārgaṇaṃ kṛtavānprabhuḥ

हिन्दी अर्थ

विविंशकसे खनिनेत्र और खनिनेत्रसे विभूति वैष्णव हो गया था। उन्हीं मनुके पुत्र नभगके

English

Making the sun rise she resuscitated Kauiika too. It is said that Sita was superior to even Anasuya in chastity.

अध्याय 142

श्लोक 24

जटायुषञ्च संस्कृत्य तदुक्तो दक्षिणां दिशम् ।गत्वा सख्यं ततश्चक्रे सुग्रीवेण च राघवः

jaṭāyuṣañca saṃskṛtya tadukto dakṣiṇāṃ diśam / gatvā sakhyaṃ tataścakre sugrīveṇa ca rāghavaḥ

हिन्दी अर्थ

नेदिष्ठ नामक एक पुत्रकी उत्पत्ति हुई। हजार पुत्र हुए। उनकी दूसरी पत्नी केशिनीसे अम्बरीष हुआ। अम्बरीषके विरूप, विरूपके पृषदश्व असमंजस नामक एक पुत्र हुआ। उस असमंजससे और उसके रथीनर हुआ, जो वासुदेवका भक्त था। अंशुमान् तथा अंशुमानूसे दिलीप नामक एक

English

Making the sun rise she resuscitated Kauiika too. It is said that Sita was superior to even Anasuya in chastity.

अध्याय 142

श्लोक 25

सप्त तालान्विनिर्भिद्य शरेणानतपर्वणा ।वालिनञ्च विनिर्भिद्य किष्किन्धायां हरीश्वरम्

sapta tālānvinirbhidya śareṇānataparvaṇā / vālinañca vinirbhidya kiṣkindhāyāṃ harīśvaram

हिन्दी अर्थ

मनृपुत्र इक्ष्वाकुके विकुक्षि, निमि और विद्वान् पुत्रने जन्म लिया। दिलीपसे भगीरथ हुए, तीन पुत्र हुए। विकुक्षि यज्ञीय शशक (खरगोश)- जिनके द्वारा पृथिवीपर गङ्गा लायी गयी हैं। का भक्षण करनेके कारण शशाद नामसे विख्यात भगीरथका पुत्र श्रुत था। श्रुतसे नाभाग हुआ। हुआ। शशादसे पुरञ्जय और ककुत्स्थ नामक दो नाभागसे अम्बरीष, अम्बरीषसे सिन्धुद्वीप, सिन्धुद्वीपसे

English

Making the sun rise she resuscitated Kauiika too. It is said that Sita was superior to even Anasuya in chastity.

अध्याय 142

श्लोक 26

सुग्रीवं कृतवान्राम ऋश्यमूके स्वयं स्थितः ।सुग्रीवः प्रेषयामास वानरान्पर्वतोपमान्

sugrīvaṃ kṛtavānrāma ṛśyamūke svayaṃ sthitaḥ / sugrīvaḥ preṣayāmāsa vānarānparvatopamān

हिन्दी अर्थ

पुत्र हुए। इसी ककुत्स्थसे अनेनस् (वेण) तथा अयुतायु हुआ । अयुतायुका पुत्र ऋतुपर्ण था, ऋतुपर्णसे अनेनससे पृथु उत्पन्न हुआ। पृथुके विश्वरात नामक सर्वकाम और सर्वकामसे सुदास, सुदाससे सौदास पुत्र हुआ। विश्वरातसे आर्द्रकी उत्पत्ति हुई। आर्द्रसे हुआ। जिसका नाम मित्रसह भी माना जाता है। युवनाश्व, युवनाश्वके श्रीवत्स, श्रीवत्सके बृहदश्व, कल्माषपाद उसीका पुत्र है, जो दमयन्तीके गर्भसे

English

Making the sun rise she resuscitated Kauiika too. It is said that Sita was superior to even Anasuya in chastity.

अध्याय 142

श्लोक 27

सीताया मार्गणं कर्तुं पूर्वाद्याशासु सोत्सवान् ।प्रतीचीमुत्तरां प्राचीं दिशं गत्वा समागताः

sītāyā mārgaṇaṃ kartuṃ pūrvādyāśāsu sotsavān / pratīcīmuttarāṃ prācīṃ diśaṃ gatvā samāgatāḥ

हिन्दी अर्थ

बृहदश्वके कुवलाश्व और कुवलाश्चके दृढाश्व हुआ, उत्पन्न हुआ था। कल्माषपादके अश्वक, अश्वकके जिसको प्रसिद्धि धुन्धुमारके नामसे हुई थी। मूलक, मूलकके दशरथ हुआ। दशरथके

English

Making the sun rise she resuscitated Kauiika too. It is said that Sita was superior to even Anasuya in chastity.

अध्याय 142

श्लोक 28

दक्षिणान्तु दिशं ये च मार्गयन्तो ऽथ जानकीम् ।वनानि पर्वतान्द्वीपान्नदीनां पुलिनानि च

dakṣiṇāntu diśaṃ ye ca mārgayanto 'tha jānakīm / vanāni parvatāndvīpānnadīnāṃ pulināni ca

हिन्दी अर्थ

दृढाश्वके चन्द्राश्च, कपिलाश्व और हर्यश्च नामक ऐलविल, ऐलविलके विश्वसह, विश्वसहके खट्वाङ्ग, तीन पुत्र थे। हर्यश्चके निकुम्भ, निकुम्भके हिताश्च, खट्वाङ्गके दीर्घबाहु, दीर्घबाहुक अज तथा अजके हिताश्वके पूजाश्वच और उसके युवनाश्व हुआ। दशरथ हुए। इनके महापराक्रमी चार पुत्र हुए, जो युवनाश्वके मान्धाता हुए। मान्धाता एवं उनकी राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न नामसे प्रसिद्ध हैं।

English

Making the sun rise she resuscitated Kauiika too. It is said that Sita was superior to even Anasuya in chastity.

अध्याय 142

श्लोक 29

जानकीन्ते ह्यपश्यन्तो मरणे कृतनिश्चयाः ।सम्पातिवचनाज्ज्ञात्वा हनूमान्कपिकुञ्जरः

jānakīnte hyapaśyanto maraṇe kṛtaniścayāḥ / sampātivacanājjñātvā hanūmānkapikuñjaraḥ

हिन्दी अर्थ

पत्नी बिन्दुमतीसे मुचुकुन्द, अम्बरीष तथा पुरुकुत्स। रामसे कुश और लव, भरतसे तार्क्ष तथा नामक तीन पुत्रोंका जन्म हुआ। उनकी पचास पुष्कर, लक्ष्मणसे चित्राङ्गद एवं चन्द्रकेतु और कन्याएँ भी थीं। जिनका विवाह सौभरि मुनिके शत्रुघ्नसे सुबाहु तथा शूरसेन नामक पुत्र हुए। साथ हुआ था। कुशके अतिथि, अतिथिके निषध नामक पुत्र

English

Making the sun rise she resuscitated Kauiika too. It is said that Sita was superior to even Anasuya in chastity.

अध्याय 142

श्लोक 30

शतयोजनविस्तीर्णं पुप्लुवे मकरालयम् ।अपश्यज्जानकीं तत्र ह्यशोकवनिकास्थिताम्

śatayojanavistīrṇaṃ pupluve makarālayam / apaśyajjānakīṃ tatra hyaśokavanikāsthitām

हिन्दी अर्थ

अम्बरीषके युवनाश्व तथा युवनाश्वके हरित हुआ। निषधके नल तथा नलके नभस नामका पुत्र हुआ। पुरुकुत्सके नर्मदा नामक पत्नीसे त्रसदस्यु माना गया है। नभसके पुण्डरीक और पुण्डरीकसे नामक पुत्रकी उत्पत्ति हुई। उससे अनरण्य, अनरण्यसे क्षेमधन्वा नामक पुत्रने जन्म लिया। उसका पुत्र हर्यश्व, हर्यथसे वसुमना हुआ । उसीका पुत्र त्रिधन्वा देवानीक था, उससे अहीनक, अहीनकसे रुरु तथा

English

Making the sun rise she resuscitated Kauiika too. It is said that Sita was superior to even Anasuya in chastity.

अध्याय 142

श्लोक 31

भर्त्सितां राक्षसीभिश्च रावणेन च रक्षसा ।भव भार्येति वदता चिन्तयन्तीञ्च राघवम्

bhartsitāṃ rākṣasībhiśca rāvaṇena ca rakṣasā / bhava bhāryeti vadatā cintayantīñca rāghavam

हिन्दी अर्थ

था। उसके त्रय्यारुण नामक पुत्र हुआ । त्रय्यारुणके ररुसे पारियात्र नामक पुत्रका जन्म हुआ । पारियात्रसे सत्यरत हुआ, जो त्रिशंकु नामसे प्रसिद्ध है।दलकी उत्पत्ति हुई और दलसे छल, छलसे उक्थ, हरिश्चन्द्र इसीसे उत्पन्न हुए थे। हरिश्चन्द्रके उक्थसे वज़नाभ और वत्रनाभसे गण, गणसे उषिताश्व, रोहिताश्व और रोहिताश्वके हारीत हुआ। हारीतके उषिताश्वसे विश्वसहकी उत्पत्ति हुई। हिरण्यनाभ

English

Making the sun rise she resuscitated Kauiika too. It is said that Sita was superior to even Anasuya in chastity.

अध्याय 142

श्लोक 32

अङ्गुलीयं कपिर्दत्त्वा सीतां कौशल्यमब्रवीत् ।रामस्य तस्य दूतो ऽहं शोकं मा कुरु मैथिलि

aṅgulīyaṃ kapirdattvā sītāṃ kauśalyamabravīt / rāmasya tasya dūto 'haṃ śokaṃ mā kuru maithili

हिन्दी अर्थ

चंचु, -चंचुके विजय, विजयके रुरुक, रुरुकके उसीका पुत्र था। उसका पुत्र पुष्पक माना गया है। 'वृक, वृकके राजा बाहु और बाहुके पुत्र राजा पुष्पकसे ध्रुवसन्धि, ध्रुवसन्धिसे सुदर्शन, सुदर्शनसे सगर माने जाते हैं। अग्निवर्ण, अग्निवर्णसे पद्मवर्ण हुआ। पद्मवर्णसे है शिव! सगरसे सुमति नामक पत्नीके साठ शीघ्र और शीघ्रसे मरु हुए। मरुसे सुश्रुत और

English

Making the sun rise she resuscitated Kauiika too. It is said that Sita was superior to even Anasuya in chastity.

अध्याय 142

श्लोक 33

स्वाभिज्ञानञ्च मे देहि येन रामः स्मरिष्यति ।तच्छ्रुत्वा प्रददौ सीता वेणीरत्नं हनूमते

svābhijñānañca me dehi yena rāmaḥ smariṣyati / tacchrutvā pradadau sītā veṇīratnaṃ hanūmate

हिन्दी अर्थ

उससे उदावसु नामका पुत्र उत्पन्न हुआ। उदावसुसे नन्दिवर्धन, नन्दिवर्धनसे सुकेतु, सुकेतुसे देवरातको उत्पत्ति हुई देवरातका पुत्र बृहदुक्थ था। बृहदुक्थके महावीर्य, महावीर्यके सुधृति, सुधृतिके धृष्टकेतु,

English

Making the sun rise she resuscitated Kauiika too. It is said that Sita was superior to even Anasuya in chastity.

अध्याय 142

श्लोक 34

यथा रामो नयेच्छीघ्रं तथा वाच्यं त्वया कपे ।तथेत्युक्त्वा तु हनुमान्वनं दिव्यं बभञ्ज ह

yathā rāmo nayecchīghraṃ tathā vācyaṃ tvayā kape / tathetyuktvā tu hanumānvanaṃ divyaṃ babhañja ha

हिन्दी अर्थ

धृष्टकेतुके हर्यश्व, हर्यश्चके मरु, मरुके प्रतीन्धक हुआ । प्रतीन्धकसे कृतिरथ और कृतिरथके देवमीढ नामक पुत्र हुआ। देवमीढसे विबुध, विबुधसे महाधृति, महाधृतिसे कीर्तिरात तथा कोीर्तिरातसे

English

Making the sun rise she resuscitated Kauiika too. It is said that Sita was superior to even Anasuya in chastity.

अध्याय 142

श्लोक 35

हत्वाक्षं राक्षसांश्चान्यान्बन्धनं स्वयमागतः ।सर्वैरिन्द्रजितो बाणैर्दृष्ट्वा रावणमब्रवीत्

hatvākṣaṃ rākṣasāṃścānyānbandhanaṃ svayamāgataḥ / sarvairindrajito bāṇairdṛṣṭvā rāvaṇamabravīt

हिन्दी अर्थ

महारोमा नामक पुत्र हुआ।

English

Making the sun rise she resuscitated Kauiika too. It is said that Sita was superior to even Anasuya in chastity.

अध्याय 142

श्लोक 36

रामदूतो ऽस्मि हनुमान्देहि रामाय मैथिलीम् ।एतच्छ्रुत्वा प्रकुपितो दीपयामास पुच्छकम्

rāmadūto 'smi hanumāndehi rāmāya maithilīm / etacchrutvā prakupito dīpayāmāsa pucchakam

हिन्दी अर्थ

महारोमाके स्वर्णरोमा हुए । स्वर्णरोमाके हस्वरोमा नामका पुत्र था। हृस्वरोमाके सीरध्वज हुआ। उसके सीता नामको एक पुत्री हुई। सीरध्वजके कुशध्वज नामका एक भाई भी था। सीताके

English

Making the sun rise she resuscitated Kauiika too. It is said that Sita was superior to even Anasuya in chastity.

अध्याय 142

श्लोक 37

कपिर्ज्वलितलाङ्गूलो लङ्कां देहेऽ महाबलः ।दग्ध्वा लङ्कां समायातो रामपार्श्वं स वानरः

kapirjvalitalāṅgūlo laṅkāṃ dehe' mahābalaḥ / dagdhvā laṅkāṃ samāyāto rāmapārśvaṃ sa vānaraḥ

हिन्दी अर्थ

अतिरिक्त सीरध्वजके भानुमान् नामका एक पुत्र भी हुआ। उस भानुमानूसे शतद्युम्न, शतद्युम्नसे शुचि नामक पुत्रकौ उत्पत्ति हुई। शुचिके ऊर्ज नामक पुत्र था। उस ऊर्जसे सनद्वाज उत्पन्न हुआ।

English

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अध्याय 142

श्लोक 38

जग्ध्वा फलं मधुवने दृष्टा सीतत्यवेदयत् ।वेणीरत्नञ्च रामाय रामो लङ्कापुर्री ययौ

jagdhvā phalaṃ madhuvane dṛṣṭā sītatyavedayat / veṇīratnañca rāmāya rāmo laṅkāpurrī yayau

हिन्दी अर्थ

सनद्वाजसे कुलिने जन्म लिया उस कुलिसे अनञ्जन नामक पुत्र हुआ। अनञ्जनसे कुलजितूकी उत्पत्ति हुई। उसके भी आधिनेमिक नामका पुत्र था। उसका पुत्र श्रुतायु हुआ और उस श्रुतायुसे सुपार्श्व

English

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अध्याय 142

श्लोक 39

ससुग्रीवः स हनुमान्सांगदश्च सलक्ष्मणः ।विभीषणो ऽपि सम्प्राप्तः शरणं राघवं प्रति

sasugrīvaḥ sa hanumānsāṃgadaśca salakṣmaṇaḥ / vibhīṣaṇo 'pi samprāptaḥ śaraṇaṃ rāghavaṃ prati

हिन्दी अर्थ

नामक पुत्रने जन्म ग्रहण किया। सुपार्श्वसे सृञ्जय, सृञ्जयसे क्षेमारि, क्षेमारिंसे अनेना और उस अनेनाका पुत्र रामरथ माना गया है।

English

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अध्याय 142

श्लोक 40

लङ्कैश्वर्येष्वभ्यषिञ्चद्रामस्तं रावणानुजम् ।रामो नलेन सेतुञ्च कृत्वाब्धौ चोत्ततार तम्

laṅkaiśvaryeṣvabhyaṣiñcadrāmastaṃ rāvaṇānujam / rāmo nalena setuñca kṛtvābdhau cottatāra tam

हिन्दी अर्थ

रामरथका पुत्र सत्यरथ, सत्यरथका पुत्र उपगुरु, उपगुरुका उपगुप्त तथा उपगुप्तका पुत्र स्वागत था । स्वागतसे स्ववरकी उत्पत्ति हुई। सुवर्चा उसीका पुत्र था। सुवर्चासे सुपार्श्व और सुपार्थसे सुश्रुत,

English

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अध्याय 142

श्लोक 41

सुवेलावस्थितश्चैव पुरीं लङ्कां ददर्शह ।अथ ते वानरा वीरा नीलाङ्गदनलादयः

suvelāvasthitaścaiva purīṃ laṅkāṃ dadarśaha / atha te vānarā vīrā nīlāṅgadanalādayaḥ

हिन्दी अर्थ

सुश्रुतसे जयकी उत्पत्ति हुई। जयसे विजय, विजयसे ऋत, ऋतसे सुनय, सुनयसे वीतहव्य, वीतहव्यसे धृतिकी उत्पत्ति मानी गयी है। धृतिके बहुलाश्व और बहुलाश्वके कृति नामक पुत्र था। उस कृतिके

English

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अध्याय 142

श्लोक 42

धूम्रधूम्राक्षवीरेन्द्रा जाम्बवत्प्रमुखास्तदा ।मैन्दद्विविदमुख्यास्ते पुरीं लङ्कां बभञ्जिरे

dhūmradhūmrākṣavīrendrā jāmbavatpramukhāstadā / maindadvividamukhyāste purīṃ laṅkāṃ babhañjire

हिन्दी अर्थ

जनक हुए। जनकके दो वंश कहे गये हैं, जिन्होंने योगमार्गका अनुसरण किया था। (अध्याय १३८)

English

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अध्याय 142

श्लोक 43

राक्षसांश्च महाकायान्कालाञ्जनचयोपमान् ।रामः सलक्ष्मणो हत्वा सकपिः सर्वराक्षसान्

rākṣasāṃśca mahākāyānkālāñjanacayopamān / rāmaḥ salakṣmaṇo hatvā sakapiḥ sarvarākṣasān

हिन्दी अर्थ

श्रीहरिने कहा- है रुद्र! सूर्यके वंशका वर्णन अमूर्तरय और वसु नामक चार पुत्र तो मैंने कर दिया। अब मुझसे चन्द्रवंशका वर्णन हुए। कुशाश्वसे गाधिका जन्म हुआ। विश्वामित्र आप सुनें। उसीके पुत्र थे। गाधिकी सत्यवती नामकी एक

English

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अध्याय 142

श्लोक 44

विद्युज्जिह्वञ्च धूम्राक्षं देवान्तकनरान्त कौ ।महोदरमहापार्श्वावतिकायं महाबलम्

vidyujjihvañca dhūmrākṣaṃ devāntakanarānta kau / mahodaramahāpārśvāvatikāyaṃ mahābalam

हिन्दी अर्थ

नारायण (विष्णु) -से ब्रह्मा प्रादुर्भूत हुए । ब्रह्मासे कन्या थी । उसको उन्होंने ब्राह्मण ऋचीकको सौंप अत्रिकी उत्पत्ति हुई। अत्रिसे सोम हुए। उनकी दिया। ऋचीकके जमदग्नि नामक पुत्र हुआ। पत्नी तारा थी, जो पहले बृहस्पतिकी भी प्रियतमा जमदग्निके परशुराम हुए। विश्वामित्रसे देवरात थी। ताराने चन्द्र (सोम)-से बुधको उत्पन्न किया। तथा मधुच्छन्दा आदि अनेक पुत्रोंका जन्म हुआ।

English

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अध्याय 142

श्लोक 45

कुम्भं निकुम्भं मत्तञ्च मकराक्षं ह्यकम्पनम् ।प्रहस्तं वीरमुन्मत्तं कुम्भकर्णं महाबलम्

kumbhaṃ nikumbhaṃ mattañca makarākṣaṃ hyakampanam / prahastaṃ vīramunmattaṃ kumbhakarṇaṃ mahābalam

हिन्दी अर्थ

उसी बुधका पुत्र पुरूरवा हुआ। बुधपुत्र पुरूरवासे बुधके पुत्र आयुसे नहुषकी उत्पत्ति हुई । नहुषके उर्वशीके छः पुत्र हुए, जिनके नाम श्रुतात्मक, अनेना, राजि, रम्भक तथा क्षत्रवृद्ध नामक चार पुत्र विश्वावसु, शतायु, आयु, धीमान् और अमावसु थे। हुए। क्षत्रवृद्धका सुहोत्र नामक पुत्र राजा हुआ।

English

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अध्याय 142

श्लोक 46

रावणिं लक्ष्मणो ऽच्छिन्त ह्यस्त्राद्यै राघवो बली ।निकृत्य बाहुचक्राणि रावणन्तु न्यपातयन्

rāvaṇiṃ lakṣmaṇo 'cchinta hyastrādyai rāghavo balī / nikṛtya bāhucakrāṇi rāvaṇantu nyapātayan

हिन्दी अर्थ

अमावसुके भीम, भीमके काञ्चन, काञ्चनसे सुहोत्रके काश्य, काश और गृत्समद नामक तीन सुहोत्र और सुहोत्रके जहु हुए। जहुसे सुमन्तु, पुत्र हुए। गृत्समदसे शौनक तथा काश्यसे दीर्घतमा सुमन्तुसे उपजापक हुआ। उसका पुत्र बलाकाश्व हुआ। दीर्घतमासे वैद्य धन्वन्तरिका जन्म हुआ।

English

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अध्याय 142

श्लोक 47

सीतां शुद्धां गृहीत्वाथ विमाने पुष्पके स्थितः ।सवानरः समायातो ह्ययोध्यां प्रवरां पुरीम्

sītāṃ śuddhāṃ gṛhītvātha vimāne puṣpake sthitaḥ / savānaraḥ samāyāto hyayodhyāṃ pravarāṃ purīm

हिन्दी अर्थ

था। बलाकाश्वसे कुश, कुशसे कुशाश्च, कुशनाभ, केतुमान् उन्हींका पुत्र था। केतुमान्से भीमरथ,

English

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अध्याय 142

श्लोक 48

तत्र राज्यं चकाराथ पुत्त्रवत्पालयन्प्रजाः ।दशाश्वमेधानाहृत्य गयाशिरसि पातनम्

tatra rājyaṃ cakārātha puttravatpālayanprajāḥ / daśāśvamedhānāhṛtya gayāśirasi pātanam

हिन्दी अर्थ

भीमरथसे दिवोदास, दिवोदाससे प्रतर्दन हुआ, जो पुत्र बड़े ही सुव्रती थे। जयध्वजसे तालजंघ, शत्रुजित् नामसे विख्यात हुआ । तालजंघसे भरत हुआ। कृतवीर्य वृषणका पुत्र मधु ऋतध्वज उसी शत्रुजितूका पुत्र था। ऋतध्वजसे था। मधुसे वृष्णि हुआ, जिससे वृष्णिवंशियोंकी अलर्क, अलर्कसे सन्नति, सन्नतिसे सुनीत, सुनीतसे उत्पत्ति हुई ।

English

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अध्याय 142

श्लोक 49

पिण्डानां विधिवत्कृत्वा दत्त्वा दानानि राघवः ।पुत्रौ कुशलवौ दृष्ट्वा तौ च राज्ये ऽभ्यषेचयत्

piṇḍānāṃ vidhivatkṛtvā dattvā dānāni rāghavaḥ / putrau kuśalavau dṛṣṭvā tau ca rājye 'bhyaṣecayat

हिन्दी अर्थ

सत्यकेतु, सत्यकेतुसे विभु नामक पुत्र हुआ । विभुसे। क्रोष्टुके विजज्ञिवान् हुआ । उस विजज्ञिवान्का सुविभु, सुविभुसे सुकुमार, सुकुमारसे धृष्टकेतुकी पुत्र आहि था। आहिसे उशंकु हुआ । उसका पुत्र उत्पत्ति हुई। उस ध्वृष्टकेतुका पुत्र वीतिहोत्र था। चित्ररथ था। चित्ररथसे शशबिन्दु हुआ, जिसके वीतिहोत्रके भर्ग और भर्गके भूमिक नामका पुत्र एक लाख पत्नियाँ तथा पृथुकीर्ति, पृथुजय, पृथुदान,

English

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अध्याय 142

श्लोक 50

एकादशसहस्राणि रामो राज्यमकारयत् ।शत्रुघ्नो लवणं जघ्ने शैलूषं भतस्ततः

ekādaśasahasrāṇi rāmo rājyamakārayat / śatrughno lavaṇaṃ jaghne śailūṣaṃ bhatastataḥ

हिन्दी अर्थ

हुआ। ये सभी विष्णुधर्मपरायण राजा थे। पृथुश्रवा आदि श्रेष्ठ दस लाख पुत्र थे। पृथुश्रवासे नहुषपुत्र राजि या रजिके पाँच सौ पुत्र थे, तम, तमसे उशना हुआ। उसका पुत्र शितगु था। जिनका संहार इन्द्रने किया था। नहुषके पुत्र तत्पश्चात् उसके श्रीरुक्मकवच हुआ। श्रीरुक्मकवचसे क्षत्रवृद्धसे प्रतिक्षत्त्र हुए। उसका पुत्र संजय था। रुक्म, पृथुरुक्म, ज्यामघ, पालित और हरि--ये

English

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अध्याय 142

श्लोक 51

अगस्त्यादीन्मुनीन्नत्वा श्रुत्वोत्पत्तिञ्च रक्षसाम् ।स्वर्गं गतो जनैः सार्धमयोध्यास्थैः कृतार्थकः

agastyādīnmunīnnatvā śrutvotpattiñca rakṣasām / svargaṃ gato janaiḥ sārdhamayodhyāsthaiḥ kṛtārthakaḥ

हिन्दी अर्थ

संजयके भी विजय हुआ। विजयका पुत्र कृत था। चार पुत्र हुए। ज्यामघसे विदर्भका जन्म हुआ। कृतके वृषधन, वृषधनसे सहदेव, सहदेवसे अदीन। विदर्भकी शैब्या नामकी एक पत्नी थी, उससे और अदीनके जयत्सेन हुआ। जयत्सेनसे संकृति विदर्भने क्रथ, कौशिक तथा रोमपाद नामक तीन और संकृतिसे क्षत्त्रधर्माकी उत्पत्ति हुई। पुत्रोंको जन्म दिया। रोमपादसे बभ्रु और बश्रुसे

English

Making the sun rise she resuscitated Kauiika too. It is said that Sita was superior to even Anasuya in chastity.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_garuDapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

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6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
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