Garuda Purana
238
अध्याय 238 / 317

Book 1 - Adhyaya 239

36 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ36 श्लोक

अध्याय 238

श्लोक 1

श्रीगरुडमहापुराणम्- २३९ ब्रह्मोवाच ।ब्रह्मगीतां प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वा मुच्यते भवान् ।अहंब्रह्मास्मि वाक्योत्थज्ञानान्मोक्षो भवेन्नणाम्

śrīgaruḍamahāpurāṇam- 239 brahmovāca / brahmagītāṃ pravakṣyāmi yajjñātvā mucyate bhavān / ahaṃbrahmāsmi vākyotthajñānānmokṣo bhavennaṇām

हिन्दी अर्थ

व्यापक होनेसे ब्रह्म कैसे जाता है, कौन जाता है और कहाँ जाता है? ऐसे प्रश्नोंके लिये कोई

English

Even an injury inflicted in accordance with Vedic injunctions is also Ahiihsi. The eternal virtue is the telling of truth, the telling of the pleasant. One shall not tell even truths which are unpleasant and untruths which may be pleasant.

अध्याय 238

श्लोक 1-2

इति श्रीगारुडे महापुराणे पूर्वखण्डे प्रथमांशाख्ये आचारकाण्डे ब्रह्मगीतासारवर्णनं नामैकोनचत्वारिंशदुत्तरद्विशततमो ऽध्यायः श्रीगरुडमहापुराणम्- २३९ श्रीभगवानुवाच ।सन्नपि ब्रह्म तस्मात्खं मरुत्खाच्च ततो ऽनलः

iti śrīgāruḍe mahāpurāṇe pūrvakhaṇḍe prathamāṃśākhye ācārakāṇḍe brahmagītāsāravarṇanaṃ nāmaikonacatvāriṃśaduttaradviśatatamo 'dhyāyaḥ śrīgaruḍamahāpurāṇam- 239 śrībhagavānuvāca / sannapi brahma tasmātkhaṃ marutkhācca tato 'nalaḥ

हिन्दी अर्थ

“मैं मायातीत चित्पुरुषको जानता हुँ और मैं अवसर ही नहीं है। अनन्त होनेके कारण उसका भी आत्मस्वरूप हूँ।' इस प्रकारका ज्ञान ही कोई देश नहीं है; अत: किसी भी रूपमें उसकी मुक्तिका मार्ग है। मोक्ष-लाभके लिये इससे अतिरिक्त गति नहीं हो सकती । परब्रह्म अद्वय है, अतः अन्य कोई भी उपाय नहीं है। श्रवण, मनन और ध्यान--ये सभी ज्ञानके साधन हैं। यज्ञ, दान, तपस्या, वेदाध्ययन और तीर्थसेवामात्रसे मुक्तिकी प्राप्ति नहीं होती है । मुक्ति किसी मतसे दान-

English

Even an injury inflicted in accordance with Vedic injunctions is also Ahiihsi. The eternal virtue is the telling of truth, the telling of the pleasant. One shall not tell even truths which are unpleasant and untruths which may be pleasant.

अध्याय 238

श्लोक 2

वाक्यज्ञानं भवेज्ज्ञानादहंब्रह्म पदार्थयोः ।पदद्वयार्थौ द्विविधौ वाच्यौ लक्ष्यौ स्मतौ बुधैः

vākyajñānaṃ bhavejjñānādahaṃbrahma padārthayoḥ / padadvayārthau dvividhau vācyau lakṣyau smatau budhaiḥ

हिन्दी अर्थ

उससे भिन्न कुछ भी नहीं है । वह ज्ञानस्वरूप है,

English

Abjuring sexual intercourse by actions, thoughts and speech in all states, at all times and everywhere is called Brahmacarya (celibacy).

अध्याय 238

श्लोक 2-2

अग्नेरापस्ततः पृथ्वी प्रपञ्चाकृतिसूतिका ।ततः सप्तदशं लिङ्गं पञ्चकर्मेन्द्रियाणि च

agnerāpastataḥ pṛthvī prapañcākṛtisūtikā / tataḥ saptadaśaṃ liṅgaṃ pañcakarmendriyāṇi ca

हिन्दी अर्थ

अतः उसमें जडता कैसे हो सकती है? वस्तुतः ब्रह्म आकाशके समान है, इसलिये उसकी गति,

English

Abjuring sexual intercourse by actions, thoughts and speech in all states, at all times and everywhere is called Brahmacarya (celibacy).

अध्याय 238

श्लोक 3

वाक्यवाच्यश्च शबलो लक्ष्यः शुद्वः प्रकीर्तितः ।प्राणपिण्डात्मकोः यनचेतसामतुलं न यतु?

vākyavācyaśca śabalo lakṣyaḥ śudvaḥ prakīrtitaḥ / prāṇapiṇḍātmakoḥ yanacetasāmatulaṃ na yatu?

हिन्दी अर्थ

अगति और स्थिति आदिका विचार कैसे हो

English

Tapas or austerity U the concentration of mind and the sense organs. It is also the voluntary withering up of the body by holy rites-Kfcchra, Candrayana, etc.

अध्याय 238

श्लोक 3-2

वाक्पाणिपादं पायुश्चाप्युपस्थमथ धीन्द्रियम् ।श्रोत्रं त्वक्चक्षुषी जिह्वा घ्राणं स्यात्पञ्च वायवः

vākpāṇipādaṃ pāyuścāpyupasthamatha dhīndriyam / śrotraṃ tvakcakṣuṣī jihvā ghrāṇaṃ syātpañca vāyavaḥ

हिन्दी अर्थ

ध्यानसे तथा किसीके मतसे पूजादि कर्मोसे होती सकता है? जाग्रत्, स्वप्न, सुषुप्ति आदि अवस्था है। 'कर्म करो' और 'कर्मका त्याग करो'--ये मायाके द्वारा कल्पित हैं अर्थात् मिथ्या है । दोनों वचन वेदमें मिलते हैं । निष्कामभावसे यज्ञादि

English

Tapas or austerity U the concentration of mind and the sense organs. It is also the voluntary withering up of the body by holy rites-Kfcchra, Candrayana, etc.

अध्याय 238

श्लोक 4

तथा वेदैरवाग्रूपमहंशब्देन सेव्यते ।प्रत्यग्रूनं त्वद्वितीयमहंशब्देन मन्यते

tathā vedairavāgrūpamahaṃśabdena sevyate / pratyagrūnaṃ tvadvitīyamahaṃśabdena manyate

हिन्दी अर्थ

वस्तुमात्रका सार ब्रह्म ही है । तेजोरूप ब्रह्मको

English

O Pandava, the restraint and diversion of the sense organs that stray into evil objects, b called Pratyih&ra.

अध्याय 238

श्लोक 4-2

प्राणोपानः समानश्च व्यानस्तूदान एव च ।मनोन्तः करणं धीश्च स्यान्मनः संशयात्मकम्

prāṇopānaḥ samānaśca vyānastūdāna eva ca / manontaḥ karaṇaṃ dhīśca syānmanaḥ saṃśayātmakam

हिन्दी अर्थ

कर्म मुक्तिके लिये होते हैं, क्योंकि निष्कामभावसे एक अखण्ड परम पुण्यरूप समझना चाहिए । जैसे अनुष्ठित यज्ञादि अन्तःकरणकी शुद्धिके साधन हैं । अपनी आत्मा सबको प्रिय है, वैसे ही ब्रह्म सबको ज्ञान प्राप्त होनेपर एक ही जन्ममें मुक्ति प्राप्त हो प्रिय है क्योंकि आत्मा ही ब्रह्म है। है महामुने! वेदाहमेतं पुरुषं चिद्रूपं तमसः परम् । सोऽहमस्मीति मोक्षाय नान्यः पन्था विमुक्तये॥ (२३६। ६)

English

O Pandava, the restraint and diversion of the sense organs that stray into evil objects, b called Pratyih&ra.

अध्याय 238

श्लोक 5

अव्ययानन्दचैतन्यं परोक्षसहितं परम् ।प्राणपिण्डात्मको योथ स द्वितीयविभागकः

avyayānandacaitanyaṃ parokṣasahitaṃ param / prāṇapiṇḍātmako yotha sa dvitīyavibhāgakaḥ

हिन्दी अर्थ

सभी तत्त्वज्ञ ज्ञानको सर्वोच्च मानते हैं, इसलिये चित्तका आलम्बन बोधस्वरूप आत्मा ही है। यह आत्मविज्ञान है। यह पूर्ण है, शाश्वत है। जागते, सोते तथा सुषुप्तावस्थामें प्राप्त होनेवाला सुख पूर्ण

English

The state in which one b conscious *I am Brahman' b called Samadhi. Men get salvation through the knowledge generated by the Vedic statement *I am Brahman*.

अध्याय 238

श्लोक 5-2

बुद्धिर्निश्चयरूपा तु एतत्सूक्ष्मस्वरूपकम् ।हिरण्यगर्भमात्मीयसूत्रं तत्कार्यालिङ्गकम्

buddhirniścayarūpā tu etatsūkṣmasvarūpakam / hiraṇyagarbhamātmīyasūtraṃ tatkāryāliṅgakam

हिन्दी अर्थ

सुखरूप ब्रह्मका ही एक क्षुद्र अंश समझना चाहिए। जैसे एक मृण्मय वस्तुका (ज्ञान होनेपर) समस्त मृण्मय पदार्थ जान लिया जाता है। सर्वत्र व्याप्त शाश्वत तत्त्व ज्ञानस्वरूप ब्रह्म यदि सदा सर्वत्र सभीके हृदयमें विद्यमान नहीं है तो विस्मृत अर्थका स्मरण नहीं होना चाहिए पर होता है। ऐसी स्थितिमें यह स्मरण किसको होता है, निश्चित ही चेतन तत्त्वको ही होता है। इसे ही

English

Buddhi is of the nature of determination; this is its subtle form. Hiranyagarbha is the thread-self (sutratman), known by its effects.

अध्याय 238

श्लोक 6

पारोक्ष्येप्रेक्षणो ह्यत्र भागो लक्ष्येत वाहमा ।तथा ब्रह्मपदेनैव प्राणपिण्डात्मकारणाम्

pārokṣyeprekṣaṇo hyatra bhāgo lakṣyeta vāhamā / tathā brahmapadenaiva prāṇapiṇḍātmakāraṇām

हिन्दी अर्थ

आत्मा, ब्रह्म, परमात्मा आदिके रूपमें स्वीकार किया गया है । चेतनतत्त्वकी सत्ता-अणु, अशरीरी अथवा परम व्यापक तत्त्व-किसी भी रूपमें स्वीकार किया जाय, पर स्वीकार करना ही है;

English

The state in which one b conscious *I am Brahman' b called Samadhi. Men get salvation through the knowledge generated by the Vedic statement *I am Brahman*.

अध्याय 238

श्लोक 6-2

पञ्चीकृतानि भूतानि ह्यपञ्चीकृतभूततः ।पञ्चीकृतेभ्यो भूतेभ्यो ब्रह्माण्डं समजायत

pañcīkṛtāni bhūtāni hyapañcīkṛtabhūtataḥ / pañcīkṛtebhyo bhūtebhyo brahmāṇḍaṃ samajāyata

हिन्दी अर्थ

अन्यथा प्राणीको सुख-दु:खका अनुभव नहीं हो सकेगा । चेतनतत्त्व प्राणिमात्रके हृदयमें साक्षीरूपसे सदा विद्यमान है, इसीलिये यह उसको प्रत्येक चेष्टाको जानता रहता है और इस जानकारीका फल यह है कि प्राणीके शुभाशुभ कर्मका फल यथासमय मिलता रहता है । यह ब्रह्मतत्त्व सत्य, ज्ञान एवं आनन्दरूप है तथा अनन्त है । सत्य ज्ञानसे पृथक् नहीं होता, अनन्ततासे पृथक् आनन्द नहीं है।

English

The gross elements arise from the un-quintupled subtle elements; from the quintupled elements the cosmic egg (Brahmanda) was born.

अध्याय 238

श्लोक 7

निष्ठा परोक्षता चेति परित्यागेन वक्ष्यते ।अद्वयानन्दचैतन्यं प्रत्यग्ब्रह्मपदेन तु

niṣṭhā parokṣatā ceti parityāgena vakṣyate / advayānandacaitanyaṃ pratyagbrahmapadena tu

हिन्दी अर्थ

वास्तवमें प्रत्येक जीव सत्य, आनन्द एवं ज्ञानस्वरूप ब्रह्म ही है। स्वयंको ब्रह्मरूपमें जानकर जीव अपने वास्तविक स्वरूप सर्वज्ञताको प्राप्त कर लेता है। जैसे एक हेममणि (पारस)-से अनन्त लौहराशि

English

The state in which one b conscious *I am Brahman' b called Samadhi. Men get salvation through the knowledge generated by the Vedic statement *I am Brahman*.

अध्याय 238

श्लोक 7-2

लोकप्रसिद्धं स्थूलाख्यं शरीरं चरणादिमत् ।पञ्चीकृतानि भूतानि तत्कार्यं तत्स्थमेव च

lokaprasiddhaṃ sthūlākhyaṃ śarīraṃ caraṇādimat / pañcīkṛtāni bhūtāni tatkāryaṃ tatsthameva ca

हिन्दी अर्थ

हेममय हो जाती है, उसी प्रकार ईश (ब्रह्म) -का ज्ञान होनेपर ज्ञानीके द्वारा सकल विश्व जान लिया जाता है, जैसे अन्धकारदोषके कारण रस्सी अपने प्रकार प्रत्यक्ष होनेपर भी द्रव्य दृष्टि-दोषके कारण सही नहीं दिखायी देता है, अपितु वह कुरूप प्रतीत होता है । उसी प्रकार आकाशकी सरूपताके कारण वह आत्मतत्त्व असत्य एवं पृथक् प्रतीत

English

The gross body, known to all the world, is the one with feet and other limbs; the quintupled elements, their effects, and what abides in them.

अध्याय 238

श्लोक 8

अद्वयानन्दचैतन्यं लक्षयित्वा स्थितस्य च ।ब्रह्माहमस्म्यहं ब्रह्म चाहंब्रह्मपदार्थयोः

advayānandacaitanyaṃ lakṣayitvā sthitasya ca / brahmāhamasmyahaṃ brahma cāhaṃbrahmapadārthayoḥ

हिन्दी अर्थ

होता है । जैसे रज्जुमें सर्पका और सीपमें रजतका आभास होता है और मृगमरीचिकामें जलका आभास होता है, उसी प्रकार विष्णुमें जगत्की प्रतीति होती है ।

English

The state in which one b conscious *I am Brahman' b called Samadhi. Men get salvation through the knowledge generated by the Vedic statement *I am Brahman*.

अध्याय 238

श्लोक 8-2

सर्वं शरीरजातं च प्राणिनां स्थूलमीरितम् ।त्रिधाह्रि परमात्मस्थं शरीरं प्रोच्यते बुधैः

sarvaṃ śarīrajātaṃ ca prāṇināṃ sthūlamīritam / tridhāhri paramātmasthaṃ śarīraṃ procyate budhaiḥ

हिन्दी अर्थ

जैसे कोई द्विज ग्रहाविष्ट होनेके कारण 'मैं शूद्र हूँ” ऐसा मानता है और ग्रह-बाधा नष्ट होनेके पश्चात् वही व्यक्ति पुन: ध्यान करता हुआ अपनेको ब्राह्मण मानता है, वैसे ही मायासे आच्छन्न जीव यह “मैं ही हूँ” ऐसा स्वीकार करता है। मायारूपी अज्ञानके समाप्त हो जानेपर पुनः वह अपने स्वरूपमें 'मैं ही ब्रह्म हूँ” ऐसा मान लेता है । जैसे ग्रहके नाश हो जानेपर उसको माननेवाला प्राणी

English

All the bodies of living beings are called gross. The wise declare the body, abiding in the Supreme Self, to be threefold.

अध्याय 238

श्लोक 9

अहंब्रह्मास्मिवाक्याच्च स्वनुभूतिफलार्थकम् ।ऐक्यज्ञानं तु हि भवेद्वेदान्ताद्दूरतो ध्रुवम्

ahaṃbrahmāsmivākyācca svanubhūtiphalārthakam / aikyajñānaṃ tu hi bhavedvedāntāddūrato dhruvam

हिन्दी अर्थ

उसे क्रूर ग्रहके रूपमें देखता है, वैसे ही अपने स्वरूपका दर्शन होनेपर मायाके अभावमें उसकी मायिक पदार्थोसे विरक्ति हो जाती है ।

English

The state in which one b conscious *I am Brahman' b called Samadhi. Men get salvation through the knowledge generated by the Vedic statement *I am Brahman*.

अध्याय 238

श्लोक 9-2

देहद्वयाभिगामी च त्वमथो जीव एकतः ।स्वभेदवाक्याद्ब्रह्मैव प्रविष्टं देहयोर्द्वयोः

dehadvayābhigāmī ca tvamatho jīva ekataḥ / svabhedavākyādbrahmaiva praviṣṭaṃ dehayordvayoḥ

हिन्दी अर्थ

जैसे संसार-चक्र अनादि है, वैसे ही उसके मूल भगवानूकी माया भी अनादि है । इस मायाके सत् और असत् दो रूप हैं। व्यवहार-कालमें वह सत् और परमार्थतः असत् है । मायाके कारण ही अज परमात्मा भी अपनी मायाके आवेशसे जगतूके रूपमें परिणत होता है । मायाकी इच्छासे ही पति- पत्नी आदिके रूपमें यह सम्पूर्ण जगत् कल्पित है। अट्टाईस तत्त्वोंका यह त्रिगुणात्मक जगत् और

English

You who pass into both bodies, and the individual self, are one; by the statement of non-difference, Brahman alone has entered the two bodies.

अध्याय 238

श्लोक 10

ज्ञानादज्ञानकार्यस्य निवृत्त्या मुक्तिरैक्यतः

jñānādajñānakāryasya nivṛttyā muktiraikyataḥ

हिन्दी अर्थ

चौरासी लाख योनियोंके नर और नारियोंकी आकृति मायाके द्वारा ही रचित है । त्रिगुणात्मक अट्टाईस तत्त्वोंके रूपमें मायाके द्वारा ही खण्डशः विश्वकी सृष्टि होती है । वस्तुतः नाम, रूप और

English

The state in which one b conscious *I am Brahman' b called Samadhi. Men get salvation through the knowledge generated by the Vedic statement *I am Brahman*.

अध्याय 238

श्लोक 10-2

जलार्क्ववद्वदरवज्जीवः प्राणादिधारणः ।जाग्रत्स्वप्नसुषुप्तीनां साक्षी जीवः स च स्मृतः

jalārkvavadvadaravajjīvaḥ prāṇādidhāraṇaḥ / jāgratsvapnasuṣuptīnāṃ sākṣī jīvaḥ sa ca smṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

सत्यस्वरूपमें नहीं दिखायी देती, वैसे ही व्यामोहसे क्रिया आदि जगतूकी सत्ता मध्यमें ही है आदि ग्रस्त जीवको आत्माका दर्शन नहीं होता। जिस और अन्तमें नहीं। इसलिये व्यवहार-कालमें सत्य काण्ड गीतासार ४३९

English

Like the sun reflected in water, the jiva sustains the vital breath and the rest; the jiva is known as the witness of waking, dream and deep sleep.

अध्याय 238

श्लोक 11

जाग्रत्स्वप्नसुषुप्त्याख्यैर्व्यातिरिक्तश्च निर्गुणः ।निर्गातावयवोसंगो नित्यशुद्धस्वभावकः

jāgratsvapnasuṣuptyākhyairvyātiriktaśca nirguṇaḥ / nirgātāvayavosaṃgo nityaśuddhasvabhāvakaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रतीत होनेपर भी परमार्थतः यह मिथ्या है । जिस होता है। किंतु विचार करनेपर वह अस्तित्वहीन प्रकार स्वप्नावस्थामें रथ आदिकी सत्ता प्रतीत है । यह ब्रह्मके समान निरन्तर विद्यमान रहती है, होती है, किंतु वहाँ उनका अस्तित्व रहता नहीं है। ऐसा नहीं है। यह तो मात्र कल्पना है । इस प्रकार

English

The state in which one b conscious *I am Brahman' b called Samadhi. Men get salvation through the knowledge generated by the Vedic statement *I am Brahman*.

अध्याय 238

श्लोक 12

परमात्मैव यज्जाग्रत्स्वप्नाद्यैर्यस्त्रिधा मतः ।अन्तः करणराशेश्चैवान्तः करणःस्थितः

paramātmaiva yajjāgratsvapnādyairyastridhā mataḥ / antaḥ karaṇarāśeścaivāntaḥ karaṇaḥsthitaḥ

हिन्दी अर्थ

उसी प्रकार जाग्रत्-अवस्थामेँ भी वे समृद्धियाँ उस प्राणीके पास नहीं रहतीं। परमार्थत: जैसे जाग्रत्- अवस्था और स्वप्न-अवस्थाके पदार्थोका भावाभाव प्रतीत होता है, वैसे ही मायिक पदार्थ भी व्यवहार और परमार्थमें सत्-असत् हैं । स्वप्न तथा जागृतिकी स्थितिमें ऐसा ही इस परम ब्रह्मका अस्तित्व है, किंतु सुषुप्तावस्थामें 'प्राणीका चित्त निश्चल होता है। सभी ज्ञानेन्द्रियों एवं कर्मेन्द्रियोंके साथ मन

English

The state in which one b conscious *I am Brahman' b called Samadhi. Men get salvation through the knowledge generated by the Vedic statement *I am Brahman*.

अध्याय 238

श्लोक 13

जाग्रत्स्वप्नसुषुप्तीश्च पश्यतो विकृतिः सदा ।फलक्रियाकारकयोर्जाग्रदादीन्वदाम्यहम्

jāgratsvapnasuṣuptīśca paśyato vikṛtiḥ sadā / phalakriyākārakayorjāgradādīnvadāmyaham

हिन्दी अर्थ

उस आत्माके साथ एकाकारकी स्थितिमें रहता है। अत: उस समय सत्-असतूका कुछ भी ज्ञान प्राणीको नहीं होता। इसी निश्चेष्टताको अचल और अद्वैत पद कहते हैं। ऐसा ही उस ब्रह्मका

English

The state in which one b conscious *I am Brahman' b called Samadhi. Men get salvation through the knowledge generated by the Vedic statement *I am Brahman*.

अध्याय 238

श्लोक 14

इन्द्रियैरथ विज्ञानं जाग्रत्स्थानमुदीरितम् ।जाग्रत्संस्कारसंभूतप्रत्ययो विषयार्थिनः

indriyairatha vijñānaṃ jāgratsthānamudīritam / jāgratsaṃskārasaṃbhūtapratyayo viṣayārthinaḥ

हिन्दी अर्थ

मायाका अस्तित्व अविचारके कारण ही सिद्ध उस असत् मायाका आत्मसम्बन्धके कारण सत्यत्व सिद्ध होता है। जो सत्य होता है उसीका अस्तित्व माना जाता है और अस्तित्वके कारण ही पदार्थकी सत्यता स्वीकार की जाती है।

English

The state in which one b conscious *I am Brahman' b called Samadhi. Men get salvation through the knowledge generated by the Vedic statement *I am Brahman*.

अध्याय 238

श्लोक 15

स्वप्नं सुषुप्तिः करणोपसंघाते धियः (प) स्थित (ति) ।ब्रह्मणः कारणावस्थायां स्थितिः कालकात्मना

svapnaṃ suṣuptiḥ karaṇopasaṃghāte dhiyaḥ (pa) sthita (ti) / brahmaṇaḥ kāraṇāvasthāyāṃ sthitiḥ kālakātmanā

हिन्दी अर्थ

है। मैं अपनेमें पूर्ण हूँ। आत्माके द्वारा अनुभूत

English

The state in which one b conscious *I am Brahman' b called Samadhi. Men get salvation through the knowledge generated by the Vedic statement *I am Brahman*.

अध्याय 238

श्लोक 16

क्रमतोक्रमतो जीवो जाग्रदादि स पश्यति ।समाध्यारंभकाले तु पूर्वमेवावधारयेत्

kramatokramato jīvo jāgradādi sa paśyati / samādhyāraṃbhakāle tu pūrvamevāvadhārayet

हिन्दी अर्थ

गुणसे सम्बन्धित भावोंसे मैं नित्य परे रहता हूँ। मेरी उत्पत्ति आशुद्धतासे नहीं हुई है। मैं शुद्ध हूँ। मैं तो अमृतस्वरूप हूँ । मैं ही ब्रह्म हूँ। मैं प्राणियोंके हृदयमें प्रज्वलित वह ज्योति हूँ, जो दीपकके समान उनके अज्ञानरूपी अन्धकारको विनष्ट करती रहती है। यह आत्मज्ञानकी स्थिति है।

English

The state in which one b conscious *I am Brahman' b called Samadhi. Men get salvation through the knowledge generated by the Vedic statement *I am Brahman*.

अध्याय 238

श्लोक 17

मुमुक्षावथ संजाते अन्तः करणकेवले ।विलापयेत्क्षेत्रजातं तत्क्षेत्रं परिशेषयेत्

mumukṣāvatha saṃjāte antaḥ karaṇakevale / vilāpayetkṣetrajātaṃ tatkṣetraṃ pariśeṣayet

हिन्दी अर्थ

श्रीभगवान्ने कहा--हे नारद! अब मैं आत्मा प्रकाशित होता है। श्रोत्र आदि इन्द्रियोंको गीताका सारतत्त्व कहूँगा, जिसे मैंने पूर्वमें अर्जुनको किसी प्रकारका ज्ञान नहीं है। वे स्वयंको भी नहीं

English

The state in which one b conscious *I am Brahman' b called Samadhi. Men get salvation through the knowledge generated by the Vedic statement *I am Brahman*.

अध्याय 238

श्लोक 18

पञ्चीकृतेभ्यो भूतेभ्यो भाण्डादि व्यतिरिक्तकम् ।यथा मृदो घटो भिन्नो नास्ति तत्कार्यतस्तथा

pañcīkṛtebhyo bhūtebhyo bhāṇḍādi vyatiriktakam / yathā mṛdo ghaṭo bhinno nāsti tatkāryatastathā

हिन्दी अर्थ

जान सकती हैं, परंतु सर्वज्ञ, सर्वदर्शी, क्षेत्रज्ञ अष्टाङ्गयोगयुक्त और वेदान्तपारङ्गत मनुष्योंके आत्मा ही इन्द्रियोंका दर्शन करता है। जब आत्मा लिये आत्म-कल्याण सम्भव है। आत्म-कल्याण उज्वल प्रदीपके समान हृदयपटलपर प्रकाशित ही परम कल्याण है, उस आत्मज्ञानसे उत्कृष्ट और होता है, तब पुरुषोंका पापकर्म नष्ट हो जाता है

English

The state in which one b conscious *I am Brahman' b called Samadhi. Men get salvation through the knowledge generated by the Vedic statement *I am Brahman*.

अध्याय 238

श्लोक 19

पञ्चीकृतानि भूतानि अपञ्चीकृतभूततः ।शंसंति व्यतिरेकेण शिष्टाः सूक्ष्मशरीरकम्

pañcīkṛtāni bhūtāni apañcīkṛtabhūtataḥ / śaṃsaṃti vyatirekeṇa śiṣṭāḥ sūkṣmaśarīrakam

हिन्दी अर्थ

कुछ भी लाभ नहीं है। आत्मा देहरहित, रूप आदिसे हीन, इन्द्रियोंसे अतीत है। मैं आत्मा हूँ, संसारादि सम्बन्धके कारण मुझे किसी प्रकारका दुःख नहीं है। धूमरहित प्रज्वलित अग्निशिखा

English

The state in which one b conscious *I am Brahman' b called Samadhi. Men get salvation through the knowledge generated by the Vedic statement *I am Brahman*.

अध्याय 238

श्लोक 20

अपञ्चीकृतभूतेभ्यो न लिङ्गं व्यतिरिक्तकम् ।पृथ्व्याधारं विना नास्ति विना नास्ति च तेन सा

apañcīkṛtabhūtebhyo na liṅgaṃ vyatiriktakam / pṛthvyādhāraṃ vinā nāsti vinā nāsti ca tena sā

हिन्दी अर्थ

जैसे प्रकाश प्राप्त करती है, वैसे ही आत्मा स्वयं प्रदीप्त रहता है। जैसे आकाशमें विद्युत्-अग्निका और ज्ञान उत्पन्न हो जाता है। जैसे दर्पणमें दृष्टि डालनेपर अपने द्वारा अपनेको

English

The state in which one b conscious *I am Brahman' b called Samadhi. Men get salvation through the knowledge generated by the Vedic statement *I am Brahman*.

अध्याय 238

श्लोक 21

तेजश्च वायुना नास्ति वायुः खेन विना न हि ।यद्ब्रह्मणा च खं नास्ति शुद्ध ब्रह्म विना च खम्

tejaśca vāyunā nāsti vāyuḥ khena vinā na hi / yadbrahmaṇā ca khaṃ nāsti śuddha brahma vinā ca kham

हिन्दी अर्थ

देख सकते हैं, वैसे ही आत्मामें दृष्टि करनेपर इन्द्रियोंको, इन्द्रियोंके विषयोंको तथा पञ्चमहाभूतोंका दर्शन किया जा सकता है। मन, बुद्धि, अहंकार और अव्यक्त पुरुष-इन सभीके ज्ञानके द्वारा

English

The state in which one b conscious *I am Brahman' b called Samadhi. Men get salvation through the knowledge generated by the Vedic statement *I am Brahman*.

अध्याय 238

श्लोक 22

शुद्धभावस्तदा जाग्रत्स्वप्नादीनामसंभवः ।जीवत्ववर्जितः प्राप्तात्मचैतन्यानुरूपतः

śuddhabhāvastadā jāgratsvapnādīnāmasaṃbhavaḥ / jīvatvavarjitaḥ prāptātmacaitanyānurūpataḥ

हिन्दी अर्थ

प्रकाश होता है, वैसे ही हृदयमें आत्माके द्वारा संसार-बन्धनसे मुक्त हो जाना चाहिए। सभी इन्द्रियोंका मनमें अभिनिवेश कर उस मनको अहंकारमें युक्त, तीनों गुणोंके आश्रय तथा आकाश आदि स्थापित करना चाहिए। उस अहंकारको बुद्धिमें, पञ्चभूतात्मक और आत्मासे अधिष्ठित इस शरीरको बुद्धिको प्रकृतिमें, प्रकृतिको पुरुषमें एवं पुरुषको जो ज्ञानी व्यक्ति जान लेता है, वही श्रेष्ठ है और वही परब्रह्ममें विलीन करना चाहिए। इस प्रकार करनेसे क्रान्तदर्शी है। सौ अश्वमेध या हजारों वाजपेय यज्ञ

English

The state in which one b conscious *I am Brahman' b called Samadhi. Men get salvation through the knowledge generated by the Vedic statement *I am Brahman*.

अध्याय 238

श्लोक 23

नित्यं शुद्धं बुद्धमुक्तं सत्यं ब्रह्माद्वितीयकम् ।तत्त्वंपदान्तौ शिष्टौ च तत्कारो ब्रह्मवाचकः

nityaṃ śuddhaṃ buddhamuktaṃ satyaṃ brahmādvitīyakam / tattvaṃpadāntau śiṣṭau ca tatkāro brahmavācakaḥ

हिन्दी अर्थ

ही “मैं ब्रह्म हूँ” इस प्रकारकी ज्ञान-ज्योतिका प्रकाश इस ज्ञानयज्ञके सोलहवें अंशके फलको भी प्रदान होता है। इससे वह पुरुष मुक्त हो जाता है। नौ द्वारोंसे नहीं कर सकते। (अध्याय २३७)

English

The state in which one b conscious *I am Brahman' b called Samadhi. Men get salvation through the knowledge generated by the Vedic statement *I am Brahman*.

अध्याय 238

श्लोक 24

उकारश्च अकारश्च मकारोयमृगद्वयः ।ब्रह्माहमस्म्यहं ब्रह्मज्ञानमज्ञानवर्धनम्

ukāraśca akāraśca makāroyamṛgadvayaḥ / brahmāhamasmyahaṃ brahmajñānamajñānavardhanam

हिन्दी अर्थ

श्रीभगवानूने पुनः कहा- है अर्जुन! यम, सदा और सभी अवस्थामें कर्म, मन और नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, ध्यान, धारणा वाणीके द्वारा मैथुनका परित्याग करना चाहिए। तथा समाधि-यह अछङ्गयोग मुक्तिके लिये कहा गया इसीको ब्रह्मचर्य कहा जाता है । आपत्तिकालमें भी है। शरीर, मन और वाणीको सदा सभी प्राणियोंकी इच्छापूर्वक द्रव्यका ग्रहण न करना ही अपरिग्रह हिंसासे निवृत्त रखना चाहिए; क्योंकि अहिंसा ही है । प्रयत्नपूर्वक परिग्रहका परित्याग करना चाहिए।

English

The state in which one b conscious *I am Brahman' b called Samadhi. Men get salvation through the knowledge generated by the Vedic statement *I am Brahman*.

अध्याय 238

श्लोक 25

अयमात्मा परं ज्योतिश्चिन्नामानन्दरूपकः ।सत्यं ज्ञानमनतं हि त्वमसीति श्रुतीरितम्

ayamātmā paraṃ jyotiścinnāmānandarūpakaḥ / satyaṃ jñānamanataṃ hi tvamasīti śrutīritam

हिन्दी अर्थ

परम धर्म है और उसीसे परम सुख मिलता है-- कर्मणा मनसा वाचा सर्वभूतेषु सर्वदा॥ हिंसाविरामको धर्मो ह्यहिंसा परमं सुखम्।

English

The state in which one b conscious *I am Brahman' b called Samadhi. Men get salvation through the knowledge generated by the Vedic statement *I am Brahman*.

अध्याय 238

श्लोक 26

अहं ब्रह्मास्मि निर्लेपमहं ब्रह्मास्मि सर्वगम् ।योसावादित्यपुरुषसोसावहमनादिमत् ।गीतासारोर्ऽजुनायोक्तो येन ब्रह्मणि वै लयः

ahaṃ brahmāsmi nirlepamahaṃ brahmāsmi sarvagam / yosāvādityapuruṣasosāvahamanādimat / gītāsāror'junāyokto yena brahmaṇi vai layaḥ

हिन्दी अर्थ

सदा सत्य और प्रिय वचन बोलना चाहिए। कभी भी अप्रिय सत्य नहीं बोलना चाहिए, प्रिय- मिथ्या वचन भी नहीं बोलना चाहिए, यही सनातनधर्म है-- सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयान्न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्। प्रियं च नानृतं ब्रूयादेष धर्मः सनातनः॥

English

The state in which one b conscious *I am Brahman' b called Samadhi. Men get salvation through the knowledge generated by the Vedic statement *I am Brahman*.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_garuDapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

धर्म ग्रंथ निःशुल्क और विज्ञापन-रहित है। Dharma Granth is free and has no ads. इसे ऐसा बनाए रखने में सहयोग करेंHelp keep it that way → How it is funded

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।