Garuda Purana
27
अध्याय 27 / 317

Book 1 - Adhyaya 27

1 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ1 श्लोक

अध्याय 27

श्लोक 1

इति श्रीगारुडे महापुराणे पूर्वखण्डे आचारकाण्डे करन्यासादिनिरूपणं नाम षड्विंशो ऽध्यायः श्रीगरुडमहापुराणम्- २७ सूत उवाच ।ॐ कणिचिकीणिकक्राणी चर्वाणी भूतहारिणि फणिविषिणि विरथनाराययणि उमे दहदह हस्ते चण्डे रौद्रे माहेश्वरि महामुखि ज्वालामुखि शङ्कुकर्णि शुकमुण्डे शत्रुं हनहन सर्वनाशिनि स्वेदय सर्वाङ्गशोणितं तन्निरीक्षासि मनसा देवि संमोहयसंमोहय रुद्रस्य हृदये जाता रुद्रस्य त्दृदये स्थिता ।रुद्रो रौद्रेण रूपेण त्वं देवि रक्षरक्ष मां ह्रूं मां ह्रूं फफफ ठठः स्कन्दमेखलाबालग्रहशत्रुविषहारी ॐ शाले माले हरहर विषोङ्काररहिविषवेगे हां हां शवरि हुं शवरि आकौलवेगेशे सर्वे विञ्चमेघमाले सर्वनागादिविषहरणम्

iti śrīgāruḍe mahāpurāṇe pūrvakhaṇḍe ācārakāṇḍe karanyāsādinirūpaṇaṃ nāma ṣaḍviṃśo 'dhyāyaḥ śrīgaruḍamahāpurāṇam- 27 sūta uvāca / oṃ kaṇicikīṇikakrāṇī carvāṇī bhūtahāriṇi phaṇiviṣiṇi virathanārāyayaṇi ume dahadaha haste caṇḍe raudre māheśvari mahāmukhi jvālāmukhi śaṅkukarṇi śukamuṇḍe śatruṃ hanahana sarvanāśini svedaya sarvāṅgaśoṇitaṃ tannirīkṣāsi manasā devi saṃmohayasaṃmohaya rudrasya hṛdaye jātā rudrasya tdṛdaye sthitā / rudro raudreṇa rūpeṇa tvaṃ devi rakṣarakṣa māṃ hrūṃ māṃ hrūṃ phaphapha ṭhaṭhaḥ skandamekhalābālagrahaśatruviṣahārī oṃ śāle māle harahara viṣoṅkārarahiviṣavege hāṃ hāṃ śavari huṃ śavari ākaulavegeśe sarve viñcameghamāle sarvanāgādiviṣaharaṇam

हिन्दी अर्थ

त्रियुगं तु सहस्त्रेण गायत्री हन्ति दुष्कृतम्॥ करता है।

English

O! the skeletal form of Kdla and Vtkila! O Carvtpt / (the chewing); (destroying creatures); Phawi

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_garuDapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।