अध्याय 24
श्लोक 1
विभ्राज का ब्रह्मदत्त का पुत्र बनकर उत्पन्न होना, रानी सन्नति का ब्रह्मदत्त से रूठना, एक ब्राह्मण के कहे हुए श्लोकों से ब्रह्मदत्त, पाञ्चाल्य और कण्डरीक को अपने पूर्वजन्म का ज्ञान होना तथा ब्रह्मदत्त आदि का तप करके मुक्त हो जाना ब्रह्मदत्तस्य तनयः स विभ्राजस्त्वजायत ।योगात्मा तपसा युक्तो विष्वक्सेन इति श्रुतः
vibhrāja kā brahmadatta kā putra banakara utpanna honā, rānī sannati kā brahmadatta se rūṭhanā, eka brāhmaṇa ke kahe hue ślokoṃ se brahmadatta, pāñcālya aura kaṇḍarīka ko apane pūrvajanma kā jñāna honā tathā brahmadatta ādi kā tapa karake mukta ho jānā brahmadattasya tanayaḥ sa vibhrājastvajāyata | yogātmā tapasā yukto viṣvaksena iti śrutaḥ
हिन्दी अर्थ
[5 ध्याय: सनाणाण होना, रानी संनतिका ब्रह्मदत्तसे रूठना, दत्त, पाज्चाल्य और कण्डरीकको अपने ' आदिका तप करके मुक्त हो जाना मार्कण्डेयजीने कहा—जिसके मनमें योग-साधन- विषयक संकल्प हुआ था, वह तपस्वी राजा विश्राज ब्रहमदत्तका पुत्र होकर उत्पन्न हुआ और (उस जन्ममें ) वह विष्वक्सेन नामसे प्रसिद्ध हुआ