अध्याय 313
श्लोक 1
गोपगोपीभिःसहितेन यशोदानन्दयोः गोवर्धनपर्वते आगत्वा श्रीकृष्णबलभद्राभ्यां समागमम् ।यशोदा नन्दगोपश्च कृष्णदर्शनलालसौ ।गोवर्धनगतं श्रुत्वा वासुदेवं सहाग्रजम्
gopagopībhiḥsahitena yaśodānandayoḥ govardhanaparvate āgatvā śrīkṛṣṇabalabhadrābhyāṃ samāgamam | yaśodā nandagopaśca kṛṣṇadarśanalālasau | govardhanagataṃ śrutvā vāsudevaṃ sahāgrajam
श्लोक 1–3 का हिन्दी अर्थ
वैशम्पायनजी कहते हैं—महाराज जनमेजय ! यशोदा और नन्दगोपके मनमें श्रीकृष्णको देखनेके लिये बड़ी लालसा थी। जब उन्होंने सुना कि श्रीकृष्ण अपने बड़े भाईके साथ गोवर्धन पर्वतपर आये हैं, तब वे दोनों सहसा बड़े प्रसन्न हुए और मक्खन, दही, खीर, खिचड़ी, जंगली फूल तथा मोरपंखके बाजूबंद लेकर सब ओरसे एकत्र हुए दूसरे गोपों और गोपियोंके साथ गोवर्धन पर्वतपर गये