Kalki Purana
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अध्याय 1 / 3

Kali Yuga — The Age of Darkness

कलियुगवर्णन

2 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय 1

श्लोक 1

कलौ दशसहस्राणि हरिरेव कलौ युगे ।पूज्यते च नमस्यश्च केशवो नान्यदैवतम्

kalau daśasahasrāṇi harireva kalau yuge | pūjyate ca namasyaśca keśavo nānyadaivatam

हिन्दी अर्थ

कलियुग में दस हजार वर्षों तक केवल हरि (केशव) ही पूजनीय और नमस्करणीय हैं — किसी अन्य देवता की नहीं।

English

In Kali Yuga, for ten thousand years, Hari alone is worthy of worship and salutation — Keshava, and no other deity.

अध्याय 1

श्लोक 2

धर्मस्य ह्रासः कलौ काले सत्यस्य च परिक्षयः ।शनैः शनैर्जगत्सर्वमधर्मे संप्रतिष्ठते

dharmasya hrāsaḥ kalau kāle satyasya ca parikṣayaḥ | śanaiḥ śanairjagatsarvamadharme saṃpratiṣṭhate

हिन्दी अर्थ

कलियुग में धर्म का ह्रास और सत्य का क्षय होता है। धीरे-धीरे सारा जगत अधर्म में स्थापित हो जाता है।

English

In the Kali Age, dharma declines and truth diminishes. Gradually, gradually, the whole world becomes established in adharma.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_purana/ · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।