Mahanarayana Upanishad
36
अध्याय 36 / 79

Anuvāka 36

2 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय 36

श्लोक 1

उत्तमे शिखरे देवि जाते भूम्यां पर्वतमूर्धनि ।ब्राह्मणेभ्योऽभ्यनुज्ञाता गच्छ देवि यथासुखम्

uttame śikhare devi jāte bhūmyāṃ parvatamūrdhani | brāhmaṇebhyo'bhyanujñātā gaccha devi yathāsukham

हिन्दी अर्थ

हे देवी! जो तुम सर्वोच्च शिखर पर, भूमि पर, पर्वत के शीर्ष पर उत्पन्न हुई हो, ब्राह्मणों से अनुमति पाकर सुखपूर्वक जाओ, हे देवी!

English

O goddess, on the highest peak, born on the earth at the mountain's head, permitted by the Brahmins, go, goddess, as you wish.

अध्याय 36

श्लोक 2

स्तुतो मया वरदा वेदमाता प्रचोदयन्ती पवने द्विजाता ।आयुः पृथिव्यां द्रविणं ब्रह्मवर्चसं मह्यं दत्वा प्रजातुं ब्रह्मलोकम्

stuto mayā varadā vedamātā pracodayantī pavane dvijātā | āyuḥ pṛthivyāṃ draviṇaṃ brahmavarcasaṃ mahyaṃ datvā prajātuṃ brahmalokam

हिन्दी अर्थ

मेरे द्वारा स्तुत, वर देने वाली, वेदों की माता, वायु में द्विजों को प्रेरित करने वाली देवी, मुझे पृथ्वी पर आयु, धन और ब्रह्म-तेज देकर ब्रह्मलोक को जाएँ।

English

Praised by me, the boon-giving mother of the Veda, urging the twice-born in the wind, having given me life on earth, wealth, and Brahmanical splendor, go to Brahma's world.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/mahanarayana.itx · प्राप्त 30/9/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पाठ-भेद एवं संशोधनVariants & corrections

पाठ-भेद टिप्पणी (Alternative Reading / Variant Notes):

Collated with Andhra recension (64 anuvākas) and standard 80-anuvāka recension.