Mahanarayana Upanishad
8
अध्याय 8 / 79

Anuvāka 8

1 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ1 श्लोक

अध्याय 8

श्लोक 1

यश्छन्दसामृषभो विश्वरूपश्छन्दोभ्यश्चन्दाँस्याविवेश ।सताँशिक्यः प्रोवाचोपनिषदिन्द्रो ज्येष्ठ इन्द्रियाय ऋषिभ्यो नमो देवेभ्यः स्वधा पितृभ्यो भूर्भुवस्सुवश्छन्द ओम्

yaśchandasāmṛṣabho viśvarūpaśchandobhyaścandā~syāviveśa | satā~śikyaḥ provācopaniṣadindro jyeṣṭha indriyāya ṛṣibhyo namo devebhyaḥ svadhā pitṛbhyo bhūrbhuvassuvaśchanda om

हिन्दी अर्थ

जो छन्दों में श्रेष्ठ (वृषभ) है, विश्वरूप है, जो छन्दों से छन्दों में प्रविष्ट हुआ; इन्द्र ने ज्येष्ठ होकर इन्द्रिय-बल के लिए ऋषियों को यह उपनिषद् कही। देवताओं को नमस्कार, पितरों को स्वधा। भूर्भुवः सुवः छन्द। ॐ।

English

He who is the bull of the meters, of all forms, who entered the meters from the meters; the Upanishad spoken by Indra, the eldest, for strength to the seers. Homage to the gods; svadha to the fathers. Bhur Bhuvah Svah, the meter. Om.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/mahanarayana.itx · प्राप्त 30/9/2026

धर्म ग्रंथ निःशुल्क और विज्ञापन-रहित है। Dharma Granth is free and has no ads. इसे ऐसा बनाए रखने में सहयोग करेंHelp keep it that way → How it is funded

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पाठ-भेद एवं संशोधनVariants & corrections

पाठ-भेद टिप्पणी (Alternative Reading / Variant Notes):

Collated with Andhra recension (64 anuvākas) and standard 80-anuvāka recension.