Padma Purana
2
अध्याय 2 / 8

Uttara Khanda — The Path of Bhakti

उत्तरखण्ड — भक्तिमार्ग

2 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय 2

श्लोक 1

भक्तिर्भगवतो लाभः सुखं सेवा जनार्दने ।निर्वेदः स्यादनित्येषु विद्या चात्मनि दर्शनम्

bhaktirbhagavato lābhaḥ sukhaṃ sevā janārdane | nirvedaḥ syādanityeṣu vidyā cātmani darśanam

हिन्दी अर्थ

भगवान की प्राप्ति ही भक्ति है; सुख जनार्दन की सेवा में है; अनित्य वस्तुओं में वैराग्य और आत्मा का दर्शन ही विद्या है।

English

Devotion is the gain of the Lord; happiness is service to Janardana; detachment is in the impermanent; knowledge is the vision of the Self.

अध्याय 2

श्लोक 2

नामसंकीर्तनं विष्णोः सर्वपापप्रणाशनम् ।प्रणामः सर्वदुःखघ्नः स्तुतिः कामार्थदायिनी

nāmasaṃkīrtanaṃ viṣṇoḥ sarvapāpapraṇāśanam | praṇāmaḥ sarvaduḥkhghnaḥ stutiḥ kāmārthadāyinī

हिन्दी अर्थ

विष्णु का नामसंकीर्तन सभी पापों को नष्ट करता है; प्रणाम सभी दुखों को; और स्तुति सभी काम और अर्थ की प्राप्ति देती है।

English

The singing of Vishnu's names destroys all sins; bowing destroys all sorrow; praise fulfils desires for meaning and purpose.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/ · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।