Padma Purana
4
अध्याय 4 / 8

Svarga Khanda — Heaven, Virtue, and What Actually Lasts

स्वर्गखण्ड — स्वर्ग, धर्म और स्थायित्व

2 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय 4

श्लोक 1

ते तं भुक्त्वा स्वर्गलोकं विशालं क्षीणे पुण्ये मर्त्यलोकं विशन्ति ।एवं त्रयीधर्ममनुप्रपन्ना गतागतं कामकामा लभन्ते

te taṃ bhuktvā svargalokaṃ viśālaṃ kṣīṇe puṇye martyalokaṃ viśanti | evaṃ trayīdharmAmanuprapannā gatāgataṃ kāmakāmā labhante

हिन्दी अर्थ

उस विशाल स्वर्गलोक को भोगकर, जब पुण्य क्षीण होता है, वे मृत्युलोक में लौट आते हैं। इस प्रकार जो कामनाओं के लिए त्रयी-धर्म का पालन करते हैं — वे केवल आना-जाना प्राप्त करते हैं।

English

Having enjoyed that vast heaven, when the merit is exhausted they re-enter the mortal world. Thus those who follow the three-Veda dharma for the sake of desire — attain only the going and coming back.

अध्याय 4

श्लोक 18

धर्मस्य तत्त्वं निहितं गुहायां महाजनो येन गतः स पन्थाः ।तर्कोऽप्रतिष्ठः श्रुतयो विभिन्नाः नैको मुनिर्यस्य वचः प्रमाणम्

dharmasya tattvaṃ nihitaṃ guhāyāṃ mahājano yena gataḥ sa panthāḥ | tarko'pratiṣṭhaḥ śrutayo vibhinnāḥ naiko munirYasya vacaḥ pramāṇam

हिन्दी अर्थ

धर्म का तत्त्व गुहा में निहित है। महाजन जिस मार्ग से गये — वही पन्थ है। तर्क अप्रतिष्ठित है; श्रुतियाँ विभिन्न हैं; कोई एक मुनि प्रमाण नहीं है।

English

The essence of dharma is hidden in a cave. The path is that which the great ones have walked. Logic has no firm ground; the scriptures differ; no single sage is the sole authority.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/ · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।