अध्याय 19
श्लोक 1
सा परानुरक्तिरीश्वरे
sā parānuraktirīśvare
हिन्दी अर्थ
वह — ईश्वर में परम अनुरक्ति — [भक्ति है।]
English
That — supreme attachment to the Lord — is [bhakti].
भक्तिरहस्य
अध्याय 19
सा परानुरक्तिरीश्वरे
sā parānuraktirīśvare
हिन्दी अर्थ
वह — ईश्वर में परम अनुरक्ति — [भक्ति है।]
English
That — supreme attachment to the Lord — is [bhakti].
अध्याय 19
भक्तिर्भगवतो सेवा भक्तिः प्रेमस्वरूपिणी ।भक्तिरानन्दरूपा च भक्तिर्मुक्तिप्रदायिनी
bhaktirbhagavato sevā bhaktiḥ premasvarūpiṇī | bhaktirānandarūpā ca bhaktirmuktipradāyinī
हिन्दी अर्थ
भक्ति भगवान की सेवा है; भक्ति प्रेमस्वरूपिणी है; भक्ति आनन्दरूपा है; और भक्ति मुक्तिप्रदायिनी है।
English
Bhakti is service to the Lord; bhakti is of the nature of love; bhakti is of the nature of bliss; and bhakti is the bestower of liberation.
अध्याय 19
नायमात्मा बलहीनेन लभ्यो न च प्रमादात् न तपसा विना ।उपायैरेतैर्यतते यस्तु विद्वान् तस्यैष आत्मा विशते ब्रह्मधाम
nāyamātmā balahīnena labhyo na ca pramādāt na tapasā vinā | upāyairetairyatate yastu vidvān tasyaiṣa ātmā viśate brahmadhāma
हिन्दी अर्थ
यह आत्मा बलहीन को नहीं मिलती, न प्रमाद से, न तप के बिना। जो विद्वान इन उपायों से प्रयत्न करता है — उसकी आत्मा ब्रह्मधाम में प्रवेश करती है।
English
This Self is not attained by the weak, nor through negligence, nor without austerity. The wise one who strives through these means — for that one the Self enters the abode of Brahman.
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स्रोत: https://sanskritdocuments.org/ · प्राप्त 3/6/2026
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