Ravana Samhita
2
अध्याय 2 / 19

Shiva Upasana — The Science of Shiva Worship

शिवोपासना

2 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय 2

श्लोक 1

जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम् ।डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं चकार चंडताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्

jaṭāṭavīgalajjalapravāhapāvitasthale gale'valambyalambitāṃ bhujaṅgatuṅgamālikām | ḍamaḍḍamaḍḍamaḍḍamannInādavaḍḍamarvayaṃ cakāra caṇḍatāṇḍavaṃ tanotu naḥ śivaḥ śivam

हिन्दी अर्थ

जटा-वन से गिरते जल-प्रवाह से पवित्र कंठ में, विशाल सर्प-माला धारण किए — डमड् डमड् डमड् डमड् की ध्वनि से — प्रचण्ड ताण्डव करते हुए — वह शिव हमें शुभ प्रदान करें।

English

In the throat — purified by the flow of water cascading from the forest of matted locks — wearing the great serpent-garland: with the sound of the damaru — ḍamaḍ ḍamaḍ ḍamaḍ ḍam — performing the fierce Tandava dance — may that Shiva bestow auspiciousness upon us.

अध्याय 2

श्लोक 22

त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्

tryambakaṃ yajāmahe sugandhiṃ puṣṭivardhanam | urvārukamiva bandhanānmṛtyormukṣīya mā'mṛtāt

हिन्दी अर्थ

हम त्र्यम्बक (तीन नेत्रों वाले), सुगन्धित, पुष्टिवर्धक की उपासना करते हैं। जैसे ककड़ी अपनी लता से कटती है — वैसे हमें मृत्यु से मुक्त करें, अमृत से नहीं।

English

We worship the three-eyed one, the sweet-fragrant, the nourisher of all. Like a cucumber from its vine — may he liberate us from death, not from immortality.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/ · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।