Ravana Samhita
9
अध्याय 9 / 19

Sangita Shastra — Music as the Science of Consciousness

सङ्गीतशास्त्र

2 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय 9

श्लोक 1

नादब्रह्म परं तत्त्वं नादात् सर्वं प्रवर्तते ।नादे लीनं मनो यस्य स मुक्तो नात्र संशयः

nādabrahma paraṃ tattvaṃ nādāt sarvaṃ pravartate | nāde līnaṃ mano yasya sa mukto nātra saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

नाद-ब्रह्म परम तत्त्व है; नाद से सब उत्पन्न होता है। जिसका मन नाद में लीन हो — वह मुक्त है; संशय नहीं।

English

Nada-Brahman is the supreme reality; from sound all things proceed. One whose mind is dissolved in sound — that one is liberated; there is no doubt.

अध्याय 9

श्लोक 28

वीणावादनतत्त्वज्ञः श्रुतिजातिविशारदः ।तालज्ञश्चाप्रयासेन मोक्षमार्गं नियच्छति

vīṇāvādanatattvajñaḥ śrutijātiviśāradaḥ | tālajñaścāprayāsena mokṣamārgaṃ niyacchati

हिन्दी अर्थ

जो वीणा-वादन का तत्त्वज्ञ, श्रुति-जाति में पारंगत, तालज्ञ है — वह अनायास मोक्ष-मार्ग प्राप्त करता है।

English

One who knows the truth of veena-playing, accomplished in shruti and jati, knowing tala — attains the path of liberation effortlessly.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/ · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।