Varaha Purana
1
अध्याय 1 / 3

Varaha Avatara — The Rescue of Earth

वाराहावतार

2 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय 1

श्लोक 1

वाराहं रूपमास्थाय महाविष्णुः प्रजापतिः ।रसातलतलं गत्वा उद्धृतां धरणीं ददौ

vārāhaṃ rūpamāsthāya mahāviṣṇuḥ prajāpatiḥ | rasātalaṃ talaṃ gatvā uddhrītāṃ dharaṇīṃ dadau

हिन्दी अर्थ

महाविष्णु ने वाराह रूप धारण किया और रसातल की गहराई में जाकर धरती को उठाकर वापस लाए।

English

Taking the form of a boar, the great Vishnu, lord of all creation, descended to the bottom of the netherworld, lifted the Earth, and restored her.

अध्याय 1

श्लोक 12

हिरण्याक्षो महाबाहुः पृथिवीं निह्नुते बली ।तमहत्वा महाविष्णुः पृथिवीमुज्जहार ह

hiraṇyākṣo mahābāhuḥ pṛthivīṃ nihnute balī | tamāhatvā mahāviṣṇuḥ pṛthivīmujjahāra ha

हिन्दी अर्थ

महाबाहु, बलशाली हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को दबा दिया। उसे मारकर महाविष्णु ने पृथ्वी को ऊपर उठाया।

English

The mighty-armed Hiranyaksha, powerful, seizes and submerges the Earth. Slaying him, the great Vishnu lifts the Earth up.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/ · प्राप्त 3/6/2026

धर्म ग्रंथ निःशुल्क और विज्ञापन-रहित है। Dharma Granth is free and has no ads. इसे ऐसा बनाए रखने में सहयोग करेंHelp keep it that way → How it is funded

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।