Vayu Purana
166
अध्याय 166 / 232

Adhyaya 166

8 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ8 श्लोक

अध्याय 166

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे सिद्धेश्वरतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नाम पञ्चषष्ट्युत्तरशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय १६६ मार्कण्डेय उवाच: ततः सिद्धेश्वरी देवी वैष्णवी पापनाशिनी ।आनन्दं परमं प्राप्ता दृष्ट्वा स्थानं सुशोभनम्

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe siddheśvaratīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāma pañcaṣaṣṭyuttaraśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 166 mārkaṇḍeya uvāca: tataḥ siddheśvarī devī vaiṣṇavī pāpanāśinī / ānandaṃ paramaṃ prāptā dṛṣṭvā sthānaṃ suśobhanam

हिन्दी अर्थ

ईषिकास्तम्ब मासाद्य ज्वलन्तभिव पावकम् । जातमात्रो5थ भगवान्देवानासाक्षिपद्॒पुः ... ्॒पापहपफहझईछ।/क/इफइफ्पौूूः

English

"Protected by the arms of Ambarisa, son of Nabhaga, the earth became completely free from three types of Tapa (distress)".

अध्याय 166

श्लोक 2

तत्र तीर्थे नरः स्नात्वा पूजयेत् पितृदेवताः ।देवीं पश्यति यो भक्त्या मुच्यते सर्वपातकैः

tatra tīrthe naraḥ snātvā pūjayet pitṛdevatāḥ / devīṃ paśyati yo bhaktyā mucyate sarvapātakaiḥ

हिन्दी अर्थ

कर लेने के बाद चन्द्रमा की मति भ्रान्त हो गई, उसके विनय पर अविनय ने अधिकार कर लिया (अर्थात् वह बड़ा कठोर एवं दम्भी हो गया) । बृहस्पति की तारा नामक पत्नी को जिनकी बड़ी (ख्ययाति) थी, वह अंगिरा के समस्त पुत्रों की कोई परवाह कर, हर ले गया ।३७-२५॥। देवताओं और देवियों के याचना करने पर भी वह तारा को लौटाने को राजी नहीं हुआ । इस प्रकार किसी प्रकार भी उसने बृहस्पति को तारा के लौटाने का

English

Ayutayu, the powerful, was the son of Sindhudvlpa. Rtuparna of great fame was the successor of Ayutayu.

अध्याय 166

श्लोक 3

मृतवत्सा तु या नारी वन्ध्या स्त्रीजननी तथा ।पुत्रं सा लभते नारी शीलवन्तं गुणान्वितम्

mṛtavatsā tu yā nārī vandhyā strījananī tathā / putraṃ sā labhate nārī śīlavantaṃ guṇānvitam

हिन्दी अर्थ

इरादा नहीं किया । द्विज वन्द ! उस समय अंगिरा के पुत्र शुक्र उसके पिछलग्गू (सहायक) बने थे । महात् तेजस्वी उशना पहले बृहस्पति के पिता-का शिष्य था। उसी स्नेह के कारण भगवान् रुद्रदेव उस बृहस्पति के सहायक हुए, भोर अपना अजगव नामक प्रच"्ड धनुष लेकर उपस्थित हुए ।२६-३१। महान् बलशाली रुद्रदेव ने उन प्रमुख ब्रह्मषियों के तथा देवताओं के उद्देश से उस महान् अस्त्र का संधान किया, जिससे उसका यश्ञ नष्ट हो गया । प्रत्यक्ष तारकामय नामक युद्ध वहाँ मच गया, देवताओं तथा दानवों का वह घोर युद्ध महान लोकक्षयकारी हुआ ।३२-३३। उस युद्ध में तुषित नाम से प्रसिद्ध तीन देवता शेष बच रहे, वे आदिदेव पितामह ब्रहा की शरण में गये । लोक पितामह भगवान् ब्रह्मा ने स्वयं शुक्र को एवं इस विनाश कर्म में प्रवत्त शंकर को निवारित किया और तारा को बृहस्पति को वापस किया चन्द्रमा के समान धुन्दर मुखवाली तारा को गर्भ-

English

He was the knower of the divine Aksahrdaya Mantra (the Mantra with which people become sure winners at the game of dice). He was a powerful king and a friend to Nala.

अध्याय 166

श्लोक 4

तत्र तीर्थे तु यः स्नात्वा पश्येद्देवीं सुभक्तितः ।अष्टम्यां वा चतुर्दश्यां सर्वकाले ऽथवा नृप

tatra tīrthe tu yaḥ snātvā paśyeddevīṃ subhaktitaḥ / aṣṭamyāṃ vā caturdaśyāṃ sarvakāle 'thavā nṛpa

हिन्दी अर्थ

वती देखकर विश्रवर्य बृहस्पति ने कहा, क्या, तुम अब भी गर्भ त्याग नहीं कर रही हो ? मेरी भूमि में तुम दूसरे वीर्य का किस प्रकार धारण कर सकती हो ? तारा उस दस्युहन्तम कुमार को इस पर भी नहीं छोड़ सकी थी कि इसी बीच तृण राशि में जलते हुए अग्ति की तरह वह कुमार उत्पन्न हो गया और उत्पन्न होते

English

One of them was the son of Virasena and the other a leading member of the Iksvaku race. Rtuparna's son was Sarvakama who was lord of the people.

अध्याय 166

श्लोक 5

सङ्गमे तु ततः स्नाता नारी वा पुरुषो ऽपि वा ।पुत्रं धनं तथा देवी ददाति परितोषिता

saṅgame tu tataḥ snātā nārī vā puruṣo 'pi vā / putraṃ dhanaṃ tathā devī dadāti paritoṣitā

हिन्दी अर्थ

घ्ग्पे वॉर्युपुराणभ हियमाणा यदा देवाना55ह सा साध्वसाधु वा। तदा तां शप्तुमारब्धः कुमारो दस्युहन्तमः .

English

King Sudasa was his son. He was Hamsamukha (one with the face of a swan) 2. Sudasa's son was the king Saudasa.

अध्याय 166

श्लोक 6

गोत्ररक्षां प्रकुरुते दृष्टा देवी सुपूजिता ।प्रजां च पाति सततं पूज्यमाना न संशयः

gotrarakṣāṃ prakurute dṛṣṭā devī supūjitā / prajāṃ ca pāti satataṃ pūjyamānā na saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

त॑ निवाये तदा ब्रह्मा तारां चरद्रस्य शंस यः । यदत्र तथ्य॑ तद्ब्रृहि तारे कस्य सुतस्त्वयम् ॥४ १ सा प्राइजलिर्वाचेदं ब्रह्मार्ण बरदं प्रभुम् । सोमस्येति महात्मानं कुमार दस्युहन्तमम्

English

He was well-known by the names of Kalmasapada and Mitrasaha. Vasistha, of great brilliance, begot of Kalma- sapada's wife the son Asmaka, for the purpose of making the line of Iksvaku flourish (and perpetuate).

अध्याय 166

श्लोक 7

नवम्यां च महाराज स्नात्वा देवीमुपोषितः ।पूजयेत् परया भक्त्या श्रद्धापूतेन चेतसा

navamyāṃ ca mahārāja snātvā devīmupoṣitaḥ / pūjayet parayā bhaktyā śraddhāpūtena cetasā

हिन्दी अर्थ

ततः सुतमुपाध्राय सोमो दाता प्रजापति: बुध इत्यकरोन्नाम तस्य पुत्रस्य धीमतः प्रतिपुर्वं च गमने समस्युत्तिष्ठते बुध: उत्पादयामास तदा पुत्र वे राजपुत्रिका ४४

English

Urakama was the son of Asmaka and his son was Mulaka. As regards King Mulaka, they cite the following (verse). The text: Ijanena samudrddvai is obscure and gives an awkward meaning, especially of samudrat. Bd. P. v.167: ihanM sureSSd vai etc. 'was brought

अध्याय 166

श्लोक 8

स गच्छेत् परमं लोकं यः सुरैरपि दुर्लभः

sa gacchet paramaṃ lokaṃ yaḥ surairapi durlabhaḥ

हिन्दी अर्थ

तस्य तत्पापशमन चकारात्रिमंहाथशा: । स राजयक्ष्मणा मुक्तः श्रिया जज्वाल सर्वशः

English

The heroic Rama, the knower of Dharmas, well-known

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।