Vayu Purana
224
अध्याय 224 / 232

Adhyaya 224

12 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ12 श्लोक

अध्याय 224

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे वासवेश्वरतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नाम त्रयोविंशत्यधिकद्विशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय २२४ मार्कण्डेय उवाच: ततः क्रोशान्तरे पार्थ तीर्थं कोटीश्वरं परम् ।यत्र स्नानं च दानं च जपहोमार्चनादिकम् ।भक्त्या कृतं नरैस्तत्र सर्वं कोटिगुणं भवेत्

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe vāsaveśvaratīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāma trayoviṃśatyadhikadviśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 224 mārkaṇḍeya uvāca: tataḥ krośāntare pārtha tīrthaṃ koṭīśvaraṃ param / yatra snānaṃ ca dānaṃ ca japahomārcanādikam / bhaktyā kṛtaṃ naraistatra sarvaṃ koṭiguṇaṃ bhavet

हिन्दी अर्थ

कृतबन्तो यतो लोभं महृत्तेष्वखिलेष्वपि । तस्मादुणाधिका यूयें भविष्यन्ति (थ) सदा द्विजाः भी देवता इस शिला पर न रहेंगे तो मैं भी स्थित न रह सकगा। यही प्रतिज्ञा है, इसका प्रतिपालन करते जाइयेगा ।६७-७०। गयासुर के वचन सुनकर विष्णु प्रभृति देवताओं ने कहा, गयासुर ! तुमने जो कुछ कहा है; वह सव सम्पन्न होगा इसमें सन्देह नहीं है । इस पवित्र तीर्थ में आनेवाले मनुष्य गण हम लोगों की पूजा करके परम गति प्राप्त करेंगे । देवगणों के इस प्रकार वरदान देने पर देत्य परम हर्षित हौकर सिश्चलता को प्राप्त

English

Why have I been harassed by Suras and Hari by means of the club? May Devas be delighted for ever now that I have been tortured."

अध्याय 224

श्लोक 2

तत्र देवाः सगन्धर्वा ऋषयः सिद्धचारणाः ।जलधिं प्रतिगच्छन्ति नर्मदां वीक्षितुं किल

tatra devāḥ sagandharvā ṛṣayaḥ siddhacāraṇāḥ / jaladhiṃ pratigacchanti narmadāṃ vīkṣituṃ kila

हिन्दी अर्थ

हुआ । उक्त शिला पर उपर्युक्त देवगणों के अवस्थित हो जाने पर ब्रह्मा ने यज्ञकर्ता ब्राह्मणों को पचपन ग्राम प्रदान किये । पत्च॒कोशी गया पुरी को भी उन्हें उत्सगं कर दिया । गृहस्थी के सभी साधनों एवं सामग्रियों से समन्वित दिव्य गृहों का निर्माण कर उन्हें समपित किया इसके अतिरिक्त कामधेनु गो, कल्पव॒ुक्ष, पारिजात प्रभति देवतर क्षीरवाहिनी महानदी घृत पूर्ण छोटी बावलियाँ, मधुल्नाविणी मनोहर नदी, मधपूरित छोटी-छोटी

English

Gadadhara and others were pleased. They all simul¬ taneously spoke to Gayasura, "Speak out (choose) a boon. We are all very delighted". Gayasura then spoke to Devas:

अध्याय 224

श्लोक 3

मिलिताः कोटिशो राजन्रेवासागरसङ्गमे ।विनोदमतुलं दृष्ट्वा रेवार्णवसमागमे

militāḥ koṭiśo rājanrevāsāgarasaṅgame / vinodamatulaṃ dṛṣṭvā revārṇavasamāgame

हिन्दी अर्थ

गड़हियाँ, दिव्यगुण सम्पन्न घ॒तों से परिपूर्ण सरोवर, सुवर्णनिर्मित बावली, अनेक अन्नादिकों से बने हुए पंत, विविध प्रकार के भक्ष्य, भाज्य फलादि सामग्री भी उन्हें निर्माण करके समर्पित किया। दान करते समय अयोनिज ब्रह्मा जी ने ब्राह्मणों से कहा कि विप्रेन्द्रवुन्द!/ आप लोग अंब किसी दूसरे से याचना न करेंगे ।७१०७६। इस प्रकार ब्राह्मणों को दान देने के उपरान्त भगवान् भमदाधर को नमस्कार कर ब्रह्मा अपने लोक को चले गये । धर्मारण्य में घर्म ने एक यज्ञ का अनुष्ठान किया, उस यज्ञ में उन्हीं गयापुरीस्थ ब्रह्मणों ने लोभ वश धनादि की याचना की और अंगीकार किया । उनके इस निषिद्ध कम से अप्रसन्न होकर ब्रह्मा ने उन्हें

English

"As long as the earth lasts, as long as the mountains, the Moon, the Sun and the stars remain, may Visnu, Brahma and Mahesvara stand on the slab along with all other Devas. Let the holy centre be named after me.

अध्याय 224

श्लोक 4

स्नात्वा शिवं च संस्थाप्य पूजयित्वा महेश्वरम् ।कोटीश्वराभिधानं तु स्वस्वभक्त्या विधानतः

snātvā śivaṃ ca saṃsthāpya pūjayitvā maheśvaram / koṭīśvarābhidhānaṃ tu svasvabhaktyā vidhānataḥ

हिन्दी अर्थ

+ अय॑ इलोकः ख पुस्तके ते ।

English

The holy centre of Gaya shall extend to five krosas and Gayasiras to one krosa. Amidst them may all the holy centres grant welfare unto all men.

अध्याय 224

श्लोक 5

कोटीतीर्थे परां सिद्धिं सम्प्राप्ताः सर्वतोषणात् ।तेन तत्पुण्यमतुलं सर्वतीर्थेषु चोत्तमम्

koṭītīrthe parāṃ siddhiṃ samprāptāḥ sarvatoṣaṇāt / tena tatpuṇyamatulaṃ sarvatīrtheṣu cottamam

हिन्दी अर्थ

युष्माक स्पाह्वारिवहा नदी पाषाणपवता । नद्यादयों वारिवहा मृन्मयाश्र तथा गृहाः (८० कामधेनुः कल्पवक्षों मल्‍लोकमुपतिष्ठताम्। एवं शप्ता ब्रह्मणा ते प्रार्थयन्तोबुवन्नजम् ॥८ १ तच्छ त्वा ब्राह्मणान्त्रह्मा प्रोवाचेदं दयान्वितः। तीर्थोषजीविका यूयमाचस्द्राक भविष्यथ ॥८रे लोकाः पुण्या गयायां ये श्राद्धिनो ब्ह्मलोकगा:ः । युष्मान्ये पुजयिष्यन्ति तरह पृजितः सदा हे आक्रान्तं देत्यजठरं धर्मण विरजादिणा नाभिकूपसमोपे तु देवी या विरजा स्थिता (८५

English

By taking ablution etc. and performing Tarpana one should offer balls of rice. Then it is more fruitful. That man becomes a great soul and. uplifts a thousand members of his family.

अध्याय 224

श्लोक 6

तत्र तीर्थे तु यत्किंचिच्छुभं वा यदि वाशुभम् ।क्रियते नृपशार्दूल सर्वं कोटिगुणं भवेत्

tatra tīrthe tu yatkiṃcicchubhaṃ vā yadi vāśubham / kriyate nṛpaśārdūla sarvaṃ koṭiguṇaṃ bhavet

हिन्दी अर्थ

इति श्रीमहापुराणे वायुप्रोक्ते गयामाहात्म्यं नाम षडधिकशततंमोण्यायः

English

All of you, slay (here) for ever in manifest and un- manifest forms. May Gadadhara himself be the destroyer of all sins.

अध्याय 224

श्लोक 7

तत्र तीर्थे तु मार्गस्था ये केचिदृषिसत्तमाः ।सिद्धामृतपदं यान्ति पितृलोकं तथोत्तमम्

tatra tīrthe tu mārgasthā ye kecidṛṣisattamāḥ / siddhāmṛtapadaṃ yānti pitṛlokaṃ tathottamam

हिन्दी अर्थ

शाप दिया कि तुम लोबों ने मेरे निखिल दिव्य सम्पत्ति के दान देने पर भी यतः लोभ नहीं छोड़ा अतः सर्वेदा अधिक ऋणग्रस्त बने रहोमे वे नदियाँ, मधु एवं क्षीरादि पदार्थों की वहन करनेवाली थों, अब केवल जल बाहिनी रहेगी, पर्वत पाषाणमय हो जायेंगे वे दिव्य सामग्रियों वाले सुन्दर गृह अब मृत्तिकामय हो जायेंगे ७७-८०। कामधेनू् एवं कल्पवक्षादि हमारे लोक में चले जायेंगे । अजन्मा ब्रह्मा जी से इस प्रकार अभिशप्त होने पर ब्राह्मणों ने निवेदन किया, देव ! आप ने कृपा पूर्वक जो वस्तुएँ हम लोगों को समर्पित की थीं, वे तुम्हारे ज्ञाप के कारण नाश को प्राप्त हो गईं। भगवन् ! हम लोगों की जो विका किस प्रकार चलेगी इसके लिये तो कृपा करें । ब्राह्मणों के इस आर्त्त निवेदन पर भगवान् ब्रह्मा को दया आ गई। वे बोले, अच्छा, अब से जब तक चन्द्रमा, सूथं एवं ताराओं का अस्तित्व रहेगा तब तक तुम लोग तीथों द्वारा जीविका निर्वाह

English

May those on whose behalf the Sraddha has been perlormed and Pindas offered, go to lirahmaloka. May the sins due to p.rahmana slaughter etc. of those who report to this holy centre perish,

अध्याय 224

श्लोक 8

उत्तरे नर्मदातीरे दक्षिणे चाश्रिताश्च ये ।देवलोकं गतास् तत्र इति मे निश्चिता मतिः

uttare narmadātīre dakṣiṇe cāśritāśca ye / devalokaṃ gatās tatra iti me niścitā matiḥ

हिन्दी अर्थ

करोगे । जो पुण्यकर्मी लोग इस गयापुरी में आकर श्राद्ध कर्म सम्पन्न करंगे वे ब्रह्मलोकगामी होंगे । जो तुम लोगों की पूजा अर्चा करेंगे, वे मानों हमारी ही पूजा अर्चा करेगे, तुम्हारी पूजा से हम सवंदा सन्तुष्ट होंगे । इस गयापुरी में पवित्र विरज नामक गिरि से देत्य का उदर भाग आकान्त है, इसके नाभि कूप के समीप विरजानामक देवी का निवास है, उस पवित्र स्थान पर पिण्डदानादि करके मनुष्य अपने इंक्कीस कुलों का उद्धार

English

May all the holy centres in heaven, firm?vinent and the earth such as Naimisa, Puskara, Ganga, Pravaga, Avimuktaka and others come here regularly, O Suras, and yield welfare unto all men.

अध्याय 224

श्लोक 9

बिल्वार्कपुष्पैर् धत्तूरकुशकाशप्रसूनकैः ।ऋतूद्भवैस्तथान्यैश्च पूजयित्वा महेश्वरम्

bilvārkapuṣpair dhattūrakuśakāśaprasūnakaiḥ / ṛtūdbhavaistathānyaiśca pūjayitvā maheśvaram

हिन्दी अर्थ

करता है, महेन्द्र नामक गिरि ने देत्य के दोनों चरणों को सुनिश्वल किया है, उस पवित्र स्थान पर पिण्डदानादि क्रनेवाला मनुष्य अपने सात कुलों का उद्धार करता है श्री वायु महापुराण का गयामाहात्म्य नामक एक सो छठवाँ अध्याय समाप्त ॥!०३॥

English

O hosts of Devas, of what avail is much talk. Unless one of you Devas stand (on this slab), I too will not be steady. This is the condition. Let it be strictly observed."

अध्याय 224

श्लोक 10

नानोपचारैर् विधिवन् मन्त्रपूर्वं युधिष्ठिर ।धूपदीपार्धनैवेद्यैस्तोषयित्वा च धूर्जटिम्

nānopacārair vidhivan mantrapūrvaṃ yudhiṣṭhira / dhūpadīpārdhanaivedyaistoṣayitvā ca dhūrjaṭim

हिन्दी अर्थ

१०८५४ वायुपुराणम्

English

On hearing the words of Gayasura, Visnu and other Suras spoke, "All that you have requested for shall undoubt¬ edly be granted.

अध्याय 224

श्लोक 11

शिवलोकमवाप्नोति यावदिन्द्राश्चतुर्दश ।पौषकृष्णाष्टमीयोगे विशेषः पूजने स्मृतः

śivalokamavāpnoti yāvadindrāścaturdaśa / pauṣakṛṣṇāṣṭamīyoge viśeṣaḥ pūjane smṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

कर्थ शिला समुत्पज्ना यथा55क्रान्‍्तो गयासुरः। कि रूपं कि च माहात्म्यं तस्था कि वद नास व ३१ आतीद्धर्मों महातेजा: सर्वविज्ञानपारगः । विश्वरूपा च तत्पत्नी भतृ ब्रतपरायणा ३२

English

After worshipping our feet (all the devotees) will attain the great goal." When the boons were granted to him by Devas, the Daitya became delighted and remained steady. When Devas stood steady, the urborn deity (Brahma) gave unto Brahmanas fifty-five villages and the

अध्याय 224

श्लोक 12

नित्यं च नृपतिश्रेष्ठ चतुर्दश्यष्टमीषु च ।शिवमभ्यर्च्य विप्रांश्च भोजयेद् भक्तितो वरान्

nityaṃ ca nṛpatiśreṣṭha caturdaśyaṣṭamīṣu ca / śivamabhyarcya viprāṃśca bhojayed bhaktito varān

हिन्दी अर्थ

तस्यां धर्मात्समुत्पन्ना कन्या धर्मत्रता सती । रूपयोवनसंपन्ना लक्ष्मीरिष शुणाधिका

English

After giving away all these things and bowing to Adigadadhara Brahma went to Brahmaloka. The Brahmanas of Gaya officiated as priests of Dharma in his sacrifice at Dharmaranya and later begged him (for D'aksina). Out of covetousness they took monetary and other gifts at the sacrifice of Dharma. Brahma came there and cursed the Brahmanas. 1

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।