अध्याय 112
श्लोक 1
केसव! कारन कौन गुसाईं ।जेहि अपराध असाध जानि मोहिं तजेउ अग्यकी नाईं
kesava! kārana kauna gusāīṃ | jehi aparādha asādha jāni mohiṃ tajeu agyakī nāīṃ
अध्याय 112
केसव! कारन कौन गुसाईं ।जेहि अपराध असाध जानि मोहिं तजेउ अग्यकी नाईं
kesava! kārana kauna gusāīṃ | jehi aparādha asādha jāni mohiṃ tajeu agyakī nāīṃ
अध्याय 112
परम पुनीत संत कोमल-चित, तिनहिं तुमहिं बनि आई ।तौ कत बिप्र, ब्याध, गनिकहि तारेहु, कछु रही सगाई
parama punīta saṃta komala-cita, tinahiṃ tumahiṃ bani āī | tau kata bipra, byādha, ganikahi tārehu, kachu rahī sagāī
अध्याय 112
काल, करम, गति अगति जीवकी, सब हरि! हाथ तुम्हारे ।सोइ कछु करहु, हरहु ममता प्रभु! फिरउँ न तुमहिं बिसारे
kāla, karama, gati agati jīvakī, saba hari! hātha tumhāre | soi kachu karahu, harahu mamatā prabhu! phirau~ na tumahiṃ bisāre
अध्याय 112
जौ तुम तजहु, भजौं न आन प्रभु, यह प्रमान पन मोरे ।मन-बच-करम नरक-सुरपुर जहँ तहँ रघुबीर निहोरे
jau tuma tajahu, bhajauṃ na āna prabhu, yaha pramāna pana more | mana-baca-karama naraka-surapura jaha~ taha~ raghubīra nihore
अध्याय 112
जद्यपि नाथ उचित न होत अस, प्रभु सों करौं ढिठाई ।तुलसिदास सीदत निसिदिन देखत तुम्हारि निठुराई
jadyapi nātha ucita na hota asa, prabhu soṃ karauṃ ḍhiṭhāī | tulasidāsa sīdata nisidina dekhata tumhāri niṭhurāī
पाठ सेटिंग्स · Reading settings
भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
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समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
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पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.