अध्याय 114
श्लोक 1
माधव! मो समान जग माहीं ।सब बिधि हीन, मलीन, दीन अति, लीन-बिषय कोउ नाहीं
mādhava! mo samāna jaga māhīṃ | saba bidhi hīna, malīna, dīna ati, līna-biṣaya kou nāhīṃ
अध्याय 114
माधव! मो समान जग माहीं ।सब बिधि हीन, मलीन, दीन अति, लीन-बिषय कोउ नाहीं
mādhava! mo samāna jaga māhīṃ | saba bidhi hīna, malīna, dīna ati, līna-biṣaya kou nāhīṃ
अध्याय 114
तुम सम हेतुरहित कृपालु आरत-हित ईस न त्यागी ।मैं दुख-सोक-बिकल कृपालु! केहि कारन दया न लागी
tuma sama heturahita kṛpālu ārata-hita īsa na tyāgī | maiṃ dukha-soka-bikala kṛpālu! kehi kārana dayā na lāgī
अध्याय 114
नाहिन कछु औगुन तुम्हार, अपराध मोर मैं माना ।ग्यान-भवन तनु दियेहु नाथ, सोउ पाय न मैं प्रभु जाना
nāhina kachu auguna tumhāra, aparādha mora maiṃ mānā | gyāna-bhavana tanu diyehu nātha, sou pāya na maiṃ prabhu jānā
अध्याय 114
बेनु करील, श्रीखंड बसंतहि दूषन मृषा लगावै ।सार-रहित हत-भाग्य सुरभि, पल्लव सो कहु किमि पावै
benu karīla, śrīkhaṃḍa basaṃtahi dūṣana mṛṣā lagāvai | sāra-rahita hata-bhāgya surabhi, pallava so kahu kimi pāvai
अध्याय 114
सब प्रकार मैं कठिन, मृदुल हरि, दृढ़ बिचार जिय मोरे ।तुलसिदास प्रभु मोह-संखला, छुटिहि तुम्हारे छोरे
saba prakāra maiṃ kaṭhina, mṛdula hari, dṛḍha़ bicāra jiya more | tulasidāsa prabhu moha-saṃkhalā, chuṭihi tumhāre chore
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भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
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समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
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पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.