अध्याय 116
श्लोक 1
माधव! असि तुम्हारि यह माया ।करि उपाय पचि मरिय, तरिय नहिं, जब लगि करहु न दाया
mādhava! asi tumhāri yaha māyā | kari upāya paci mariya, tariya nahiṃ, jaba lagi karahu na dāyā
अध्याय 116
माधव! असि तुम्हारि यह माया ।करि उपाय पचि मरिय, तरिय नहिं, जब लगि करहु न दाया
mādhava! asi tumhāri yaha māyā | kari upāya paci mariya, tariya nahiṃ, jaba lagi karahu na dāyā
अध्याय 116
सुनिय, गुनिय, समुझिय, समुझाइय, दसा हृदय नहिं आवै ।जेहि अनुभव बिनु मोहजनित भव दारुन बिपति सतावै
suniya, guniya, samujhiya, samujhāiya, dasā hṛdaya nahiṃ āvai | jehi anubhava binu mohajanita bhava dāruna bipati satāvai
अध्याय 116
ब्रह्म-पियूष मधुर सीतल जो पै मन सो रस पावै ।तौ कत मृगजल-रूप बिषय कारन निसि-बासर धावै
brahma-piyūṣa madhura sītala jo pai mana so rasa pāvai | tau kata mṛgajala-rūpa biṣaya kārana nisi-bāsara dhāvai
अध्याय 116
जेहिके भवन बिमल चिंतामनि, सो कत काँच बटोरै ।सपने परबस परै, जागि देखत केहि जाइ निहोरै
jehike bhavana bimala ciṃtāmani, so kata kā~ca baṭorai | sapane parabasa parai, jāgi dekhata kehi jāi nihorai
अध्याय 116
ग्यान-भगति साधन अनेक, सब सत्य, झूँठ कछु नाहीं ।तुलसिदास हरि-कृपा मिटै भ्रम, यह भरोस मनमाहीं
gyāna-bhagati sādhana aneka, saba satya, jhū~ṭha kachu nāhīṃ | tulasidāsa hari-kṛpā miṭai bhrama, yaha bharosa manamāhīṃ
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स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
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भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
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समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.