अध्याय 120
श्लोक 1
हे हरि! कस न हरहु भ्रम भारी ।जद्यपि मृषा सत्य भासै जबलगि नहिं कृपा तुम्हारी
he hari! kasa na harahu bhrama bhārī | jadyapi mṛṣā satya bhāsai jabalagi nahiṃ kṛpā tumhārī
अध्याय 120
हे हरि! कस न हरहु भ्रम भारी ।जद्यपि मृषा सत्य भासै जबलगि नहिं कृपा तुम्हारी
he hari! kasa na harahu bhrama bhārī | jadyapi mṛṣā satya bhāsai jabalagi nahiṃ kṛpā tumhārī
अध्याय 120
अर्थ अबिद्यमान जानिय संसृति नहिं जाइ गोसाईं ।बिन बाँधे निज हठ सठ परबस परय्यो कीरकी नाईं
artha abidyamāna jāniya saṃsṛti nahiṃ jāi gosāīṃ | bina bā~dhe nija haṭha saṭha parabasa parayyo kīrakī nāīṃ
अध्याय 120
सपने ब्याधि बिबिध बाधा जनु मृत्यु उपस्थित आई ।बैद अनेक उपाय करै जागे बिनु पीर न जाई
sapane byādhi bibidha bādhā janu mṛtyu upasthita āī | baida aneka upāya karai jāge binu pīra na jāī
अध्याय 120
श्रुति-गुरु-साधु-स्मृति-संमत यह दृश्य असत दुखकारी ।तेहि बिनु तजे, भजे बिनु रघुपति, बिपति सकै को टारी
śruti-guru-sādhu-smṛti-saṃmata yaha dṛśya asata dukhakārī | tehi binu taje, bhaje binu raghupati, bipati sakai ko ṭārī
अध्याय 120
बहु उपाय संसार-तरन कहँ, बिमल गिरा श्रुति गावै ।तुलसिदास मैं-मोर गये बिनु जिउ सुख कबहुँ न पावै
bahu upāya saṃsāra-tarana kaha~, bimala girā śruti gāvai | tulasidāsa maiṃ-mora gaye binu jiu sukha kabahu~ na pāvai
पाठ सेटिंग्स · Reading settings
भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।
अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।
समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.