Vinaya Patrika
130
अध्याय 130 / 279

पद १३०

5 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ5 श्लोक

अध्याय 130

श्लोक 1

राम राम, राम राम, राम राम, जपत ।मंगल-मुद उदित होत, कलि-मल-छल छपत

rāma rāma, rāma rāma, rāma rāma, japata | maṃgala-muda udita hota, kali-mala-chala chapata

अध्याय 130

श्लोक 2

कहु के लहे फल रसाल, बबुर बीज बपत ।हारहि जनि जनम जाय गाल गूल गपत

kahu ke lahe phala rasāla, babura bīja bapata | hārahi jani janama jāya gāla gūla gapata

अध्याय 130

श्लोक 3

काल, करम, गुन, सुभाउ सबके सीस तपत ।राम-नाम-महिमाकी चरचा चले चपत

kāla, karama, guna, subhāu sabake sīsa tapata | rāma-nāma-mahimākī caracā cale capata

अध्याय 130

श्लोक 4

साधन बिनु सिद्धि सकल बिकल लोग लपत ।कलिजुग बर बनिज बिपुल नाम-नगर खपत

sādhana binu siddhi sakala bikala loga lapata | kalijuga bara banija bipula nāma-nagara khapata

अध्याय 130

श्लोक 5

नाम सों प्रतीति-प्रीति हृदय सुथिर थपत ।पावन किये रावन-रिपु तुलसिहु-से अपत

nāma soṃ pratīti-prīti hṛdaya suthira thapata | pāvana kiye rāvana-ripu tulasihu-se apata

स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पाठ-भेद एवं संशोधनVariants & corrections

पाठ-भेद टिप्पणी (Alternative Reading / Variant Notes):

Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.