अध्याय 158
श्लोक 1
कैसे देउँ नाथहिं खोरि ।काम-लोलुप भ्रमत मन हरि भगति परिहरि तोरि
kaise deu~ nāthahiṃ khori | kāma-lolupa bhramata mana hari bhagati parihari tori
अध्याय 158
कैसे देउँ नाथहिं खोरि ।काम-लोलुप भ्रमत मन हरि भगति परिहरि तोरि
kaise deu~ nāthahiṃ khori | kāma-lolupa bhramata mana hari bhagati parihari tori
अध्याय 158
बहुत प्रीति पुजाइबे पर, पूजिबे पर थोरि ।देत सिख सिखयो न मानत, मूढ़ता असि मोरि
bahuta prīti pujāibe para, pūjibe para thori | deta sikha sikhayo na mānata, mūḍha़tā asi mori
अध्याय 158
किये सहित सनेह जे अघ हृदय राखे चोरि ।संग-बस किये सुभ सुनाये सकल लोक निहोरि
kiye sahita saneha je agha hṛdaya rākhe cori | saṃga-basa kiye subha sunāye sakala loka nihori
अध्याय 158
करौं जो कछु धरौं सचि-पचि सुकृत-सिला बटोरि ।पैठि उर बरबस दयानिधि दंभ लेत अँजोरि
karauṃ jo kachu dharauṃ saci-paci sukṛta-silā baṭori | paiṭhi ura barabasa dayānidhi daṃbha leta a~jori
अध्याय 158
लोभ मर्नहिं नचाव कपि ज्यों, गरे आसा-डोरि ।बात कहौं बनाइ बुध ज्यों, बर बिराग निचोरि
lobha marnahiṃ nacāva kapi jyoṃ, gare āsā-ḍori | bāta kahauṃ banāi budha jyoṃ, bara birāga nicori
अध्याय 158
एतेहुँ पर तुम्हरो कहावत, लाज अँचई घोरि ।निलजता पर रीझि रघुबर, देहु तुलसिहिं छोरि
etehu~ para tumharo kahāvata, lāja a~caī ghori | nilajatā para rījhi raghubara, dehu tulasihiṃ chori
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भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.