अध्याय 200
श्लोक 1
ताँवे सो पीठि मनहुँ तन पायो ।नीच, मीच जानत न सीस पर, ईस निपट बिसरायो
tā~ve so pīṭhi manahu~ tana pāyo | nīca, mīca jānata na sīsa para, īsa nipaṭa bisarāyo
अध्याय 200
ताँवे सो पीठि मनहुँ तन पायो ।नीच, मीच जानत न सीस पर, ईस निपट बिसरायो
tā~ve so pīṭhi manahu~ tana pāyo | nīca, mīca jānata na sīsa para, īsa nipaṭa bisarāyo
अध्याय 200
अवनि-रवनि, धन-धाम, सुहृद-सुत, को न इन्हहिं अपनायो? ।काके भये, गये सँग काके, सब सनेह छल-छायो
avani-ravani, dhana-dhāma, suhṛda-suta, ko na inhahiṃ apanāyo? | kāke bhaye, gaye sa~ga kāke, saba saneha chala-chāyo
अध्याय 200
जिन्ह भूपनि जग-जीति, बाँधि जम, अपनी बाँह बसायो ।तेऊ काल कलेऊ कीन्हे, तू गिनती कब आयो
jinha bhūpani jaga-jīti, bā~dhi jama, apanī bā~ha basāyo | teū kāla kaleū kīnhe, tū ginatī kaba āyo
अध्याय 200
देखु बिचारि, सार का साँचो, कहा निगम निजु गायो ।भजहिं न अजहुँ समुझि तुलसी तेहि, जेहि महेस मन लायो
dekhu bicāri, sāra kā sā~co, kahā nigama niju gāyo | bhajahiṃ na ajahu~ samujhi tulasī tehi, jehi mahesa mana lāyo
पाठ सेटिंग्स · Reading settings
भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
धर्म ग्रंथ निःशुल्क और विज्ञापन-रहित है। Dharma Granth is free and has no ads. इसे ऐसा बनाए रखने में सहयोग करेंHelp keep it that way → How it is funded
धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।
अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।
समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.