अध्याय 209
श्लोक 1
नाहिनै नाथ! अवलंब मोहि आनकी ।करम-मन-बचन पन सत्य करुनानिधे, एक गति राम! भवदीय पदत्रानकी
nāhinai nātha! avalaṃba mohi ānakī | karama-mana-bacana pana satya karunānidhe, eka gati rāma! bhavadīya padatrānakī
अध्याय 209
नाहिनै नाथ! अवलंब मोहि आनकी ।करम-मन-बचन पन सत्य करुनानिधे, एक गति राम! भवदीय पदत्रानकी
nāhinai nātha! avalaṃba mohi ānakī | karama-mana-bacana pana satya karunānidhe, eka gati rāma! bhavadīya padatrānakī
अध्याय 209
कोह-मद-मोह-ममतायतन जानि मन, बात नहिं जाति कहि ग्यान-बिग्यानकी ।काम-संकल्प उर निरखि बहु बासनहिं, आस नहिं एकहू आँक निरबानकी
koha-mada-moha-mamatāyatana jāni mana, bāta nahiṃ jāti kahi gyāna-bigyānakī | kāma-saṃkalpa ura nirakhi bahu bāsanahiṃ, āsa nahiṃ ekahū ā~ka nirabānakī
अध्याय 209
बेद-बोधित करम धरम बिनु अगम अति, जदपि जिय लालसा अमरपुर जानकी ।सिद्ध-सुर-मनुज-दनुजादिसेवत कठिन, द्रवहिं हठजोग दिये भोग बलि प्रानकी
beda-bodhita karama dharama binu agama ati, jadapi jiya lālasā amarapura jānakī | siddha-sura-manuja-danujādisevata kaṭhina, dravahiṃ haṭhajoga diye bhoga bali prānakī
अध्याय 209
भगति दुरलभ परम, संभु-सुक-मुनि-मधुप, प्यास पदकंज-मकरंद-मधुपानकी ।पतित-पावन सुनत नाम बिश्रामकृत, भ्रमित पुनि समुझि चित ग्रंथि अभिमानकी
bhagati duralabha parama, saṃbhu-suka-muni-madhupa, pyāsa padakaṃja-makaraṃda-madhupānakī | patita-pāvana sunata nāma biśrāmakṛta, bhramita puni samujhi cita graṃthi abhimānakī
अध्याय 209
नरक-अधिकार मम घोर संसार-तम-कूपकहिं, भूप! मोहि सक्ति आपानकी ।दासतुलसी सोउ त्रास नहिं गनत मन, सुमिरि गुह गीध गज ग्याति हनुमानकी
naraka-adhikāra mama ghora saṃsāra-tama-kūpakahiṃ, bhūpa! mohi sakti āpānakī | dāsatulasī sou trāsa nahiṃ ganata mana, sumiri guha gīdha gaja gyāti hanumānakī
पाठ सेटिंग्स · Reading settings
भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
धर्म ग्रंथ निःशुल्क और विज्ञापन-रहित है। Dharma Granth is free and has no ads. इसे ऐसा बनाए रखने में सहयोग करेंHelp keep it that way → How it is funded
धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।
अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।
समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.