अध्याय 256
श्लोक 1
कहे बिनु रह्यो न परत, कहे राम! रस न रहत ।तुमसे सुसाहिबकी ओट जन खोटो-खरो कालकी, करमकी कुसाँसति सहत
kahe binu rahyo na parata, kahe rāma! rasa na rahata | tumase susāhibakī oṭa jana khoṭo-kharo kālakī, karamakī kusā~sati sahata
अध्याय 256
कहे बिनु रह्यो न परत, कहे राम! रस न रहत ।तुमसे सुसाहिबकी ओट जन खोटो-खरो कालकी, करमकी कुसाँसति सहत
kahe binu rahyo na parata, kahe rāma! rasa na rahata | tumase susāhibakī oṭa jana khoṭo-kharo kālakī, karamakī kusā~sati sahata
अध्याय 256
करत बिचार सार पैयत न कहूँ कछु, सकल बड़ाई सब कहाँ तें लहत ।नाथकी महिमा सुनि, समुझि आपनी ओर, हेरि हारि कै हहरि हृदय दहत
karata bicāra sāra paiyata na kahū~ kachu, sakala baḍa़āī saba kahā~ teṃ lahata | nāthakī mahimā suni, samujhi āpanī ora, heri hāri kai hahari hṛdaya dahata
अध्याय 256
सखा न, सुसेवक न, सुतिय न, प्रभु आप, माय-बाप तुही साँचो तुलसी कहत ।मेरी तौ थोरी है, सुधरैगी बिगरियौ, बलि, राम! रावरी सों, रही रावरी चहत
sakhā na, susevaka na, sutiya na, prabhu āpa, māya-bāpa tuhī sā~co tulasī kahata | merī tau thorī hai, sudharaigī bigariyau, bali, rāma! rāvarī soṃ, rahī rāvarī cahata
पाठ सेटिंग्स · Reading settings
भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।
अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।
समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.