Yoga Vasishtha
1
अध्याय 1 / 6

Vairagya Prakarana — The Arising of Dispassion

वैराग्यप्रकरण

2 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय 1

श्लोक 1

जगज्जालं मनोजालं मनः संसारकारणम् ।तन्मनः शोधयाम्यद्य बोधेन परमात्मनः

jagajjālaṃ manojālaṃ manaḥ saṃsārakāraṇam | tanmanaḥ śodhayāmyadya bodhena paramātmanaḥ

हिन्दी अर्थ

जगत् का जाल मन का जाल है — मन ही संसार का कारण है। उस मन को मैं आज परमात्मा के बोध से शुद्ध करता हूँ।

English

The web of the world is the web of the mind — the mind is the cause of samsara. That mind I purify today through the knowledge of the supreme Self.

अध्याय 1

श्लोक 2

चिद्भित्तौ चित्रमिव ब्रह्मात्मनोर्भेदः स्फुरत्यदः ।भेदाभेदावुभौ नास्तः सत्तास्फूर्तिः पुनः पुनः

cidbhittau citramiva brahmātmanorbhedaḥ sphuratyādaḥ | bhedābhedāvubhau nāstaḥ sattāsphūrtiḥ punaḥ punaḥ

हिन्दी अर्थ

जैसे दीवार पर चित्र बना होता है, वैसे ही चेतना की भित्ति पर ब्रह्म और आत्मा का भेद प्रकट होता है। परंतु न तो भेद सत्य है, न अभेद — केवल सत्-चित् बार-बार स्फुरित होती रहती है।

English

Like a picture on a wall of consciousness, the apparent difference between Brahman and the individual Self shines forth. But neither difference nor non-difference truly exists — only pure Being-Consciousness shines again and again.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_yoga/yogavAsiShTha01.itx · प्राप्त 4/10/2026

धर्म ग्रंथ निःशुल्क और विज्ञापन-रहित है। Dharma Granth is free and has no ads. इसे ऐसा बनाए रखने में सहयोग करेंHelp keep it that way → How it is funded

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।