Agni Purana
274
अध्याय 274 / 381

Adhyaya 275

25 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ25 श्लोक

अध्याय 274

श्लोक 1

द्वादशसङ्ग्रामाः अग्निर् उवाच कश्यपो वसुदेवो ऽभूद्देवकी चादितिर्वरा ।देवक्यां वसुदेवात्तु कृष्णो ऽभूत्तपसान्वितः

dvādaśasaṅgrāmāḥ agnir uvāca kaśyapo vasudevo 'bhūddevakī cāditirvarā / devakyāṃ vasudevāttu kṛṣṇo 'bhūttapasānvitaḥ

हिन्दी अर्थ

एवं मृत्युको जीतता है। छः मासतक प्रतिदिन एक तोलेभर पलाश-तैलका मधुके साथ सेवन करके दुग्धपान करनेवाला पाँचे सौ वर्षोकी आयु प्राप्त करता है। दुग्धके साथ काँगनीके पत्तोंके

English

Urvaiii (wife of Pururavas) gave birth to the kings Ayus, Drdhayus, Asvayus, Ghanayus, Phrtiman, Vasu, Divijata and Satayus.

अध्याय 274

श्लोक 2

धर्मसंरक्षणार्थाय ह्य् अधर्महरणाय च ।सुरादेः पालनार्थञ्च दैत्यादेर्मथनाय च

dharmasaṃrakṣaṇārthāya hy adharmaharaṇāya ca / surādeḥ pālanārthañca daityādermathanāya ca

हिन्दी अर्थ

रसका या त्रिफलाका प्रयोग करे। इससे मनुष्य एक हजार वर्षोकी आयु प्राप्त कर सकता है। इसी प्रकार मधुके साथ घृत और चार तोलेभर शतावरी-चूर्णका सेवन करनेसे भी सहस्रं वर्षाको आयु प्राप्त हो सकती है। घी अथवा दूधके साथ मेउड्की जड़का चूर्ण या पत्रस्वरस रोग एवं मृत्युका नाश करता है। नीमके पञ्चाङ्ग-चूर्णको खैरके क्वाथ (काढ़े)-को भावना देकर भृङ्गराजके

English

For a detailed account «ee Vi. P. IV. 6. 77-94.

अध्याय 274

श्लोक 3

रुक्मणी सत्यभामा च सत्या नग्नजिती प्रिया ।सत्यभामा हरेः सेव्या गान्धारी लक्ष्मणा तथा

rukmaṇī satyabhāmā ca satyā nagnajitī priyā / satyabhāmā hareḥ sevyā gāndhārī lakṣmaṇā tathā

हिन्दी अर्थ

रसके साथ एक तोलाभर सेवन करनेसे मनुष्य रोगको जीतकर अमर हो सकता है। रुदन्तिकाचूर्ण घृत और मधुके साथ सेवन करनेसे या केवल दुग्धाहारसे मनुष्य मृत्युको जीत लेता है। हरीतकीके

English

Sons are said to be only six in the Ptirdpas and MBh. — Ayu, DhimSn, Am&vasu, Drdhftyu, and Satfiyu. See MBh. Adi. 75.24-25.

अध्याय 274

श्लोक 4

मित्रविन्दा(१) च कालिन्दी देवी जाम्बवती तथा ।सुशीला च तथा माद्री कौशल्या विजया जया

mitravindā(1) ca kālindī devī jāmbavatī tathā / suśīlā ca tathā mādrī kauśalyā vijayā jayā

हिन्दी अर्थ

चूर्णको भृङ्गराजरसको भावना देकर एक तोलेकी मात्रामें घृत और मधुके साथ सेवन करनेवाला रोगमुक्त होकर तीन सौ वर्षोंकी आयु प्राप्त कर सकता है। गेठी, लोहचूर्ण, शतावरी समान भागसे भृङ्गराज-रस तथा घीके साथ एक तोला

English

Nahusa had seven sons — Yati, Yayati,Uttama,Udbhava, Paficaka, l§ary&ti and Meghapalaka.

अध्याय 274

श्लोक 5

१ चित्रविन्देति ख॥ , छ॥ च :प् १९ एवमादीनि देवीनां सहस्राणि तु षोडश ।प्रद्युम्नाद्याश् च रुक्मिण्यां भीमाद्याः सत्यभामया

1 citravindeti kha.. , cha.. ca :p 19 evamādīni devīnāṃ sahasrāṇi tu ṣoḍaśa / pradyumnādyāś ca rukmiṇyāṃ bhīmādyāḥ satyabhāmayā

हिन्दी अर्थ

मात्रामें सेवन करनेसे मनुष्य पाँच सौ वर्षकी आयु प्राप्त करता है। लौहभस्म तथा शतावरीको भृङ्गराजके रसमें भावना देकर मधु एवं घीके साथ लेनेसे तीन सौ वर्षकी आयु प्राप्त होती है।

English

Yadu had five sons — Nilafijika, Rzhu, Krostu, Satajit and Sahasrajit and Sahasrajit was the eldest among them.

अध्याय 274

श्लोक 6

जाम्बवत्याञ्च शाम्बाद्याः कृष्णस्यासंस् तथापरे ।शतं शतसहस्राणां पुत्राणां तस्य धीमतः

jāmbavatyāñca śāmbādyāḥ kṛṣṇasyāsaṃs tathāpare / śataṃ śatasahasrāṇāṃ putrāṇāṃ tasya dhīmataḥ

हिन्दी अर्थ

घीकुँवारके रसमें घोटकर दो-दो रत्तीकी गोली बनाये। इसका घृतसे सेवन करनेसे मनुष्य पाँच सौ वर्षकी आयु प्राप्त करता है। असगन्ध, त्रिफला, चीनी, तैल और घृतमें सेवन करनेवाला सौ वर्षतक जीता है। गदहपूर्नाका चूर्ण एक पल मधु, घृत और दुग्धके साथ भक्षण करनेवाला भी शतायु होता है। अशोककी छालका एक पल चूर्ण मधु और घृतके साथ खाकर दुग्धपान

English

atajit had three (sons) — Haihaya, Renuhaya and Haya. Dharmanetra (was the son) of Haihaya. Sariihana (was the son) of Dharmanetra.

अध्याय 274

श्लोक 7

अशीतिश् च सहस्राणि यादवाः कृष्णरक्षिताः ।प्रद्युम्नस्य तु वैदर्भ्यामनिरुद्धो रणप्रियः

aśītiś ca sahasrāṇi yādavāḥ kṛṣṇarakṣitāḥ / pradyumnasya tu vaidarbhyāmaniruddho raṇapriyaḥ

हिन्दी अर्थ

करनेसे रोगनाश होता है। निम्बके तैलकी मधुसहित नस्य लेनेसे मनुष्य सौ वर्ष जीता है और उसके केश सदा काले रहते हैं। बहेड़ेके चूर्णको एक तोला मात्रामें शहद, घी और दूधसे

English

Krtavirya, Krtagni, Karaviraka and Kftaujas were the four (sons) of Kanaka. Arjuna (K&rtaviry&rjuna) (was born) from Krtavirya.

अध्याय 274

श्लोक 8

अनिरुद्धस्य वज्राद्या यादवाः सुमहाबलाः ।तिस्रः कोट्यो यादवानां षष्टिर्लक्षाणि दानवाः

aniruddhasya vajrādyā yādavāḥ sumahābalāḥ / tisraḥ koṭyo yādavānāṃ ṣaṣṭirlakṣāṇi dānavāḥ

हिन्दी अर्थ

पीनेवाला शतायु होता है। मधुरादिगणकी ओषधियों और हरीतकीको गुड़ और घृतके साथ खाकर दूधके सहित अन्न भोजन करनेवालोंके केश सदा काले रहते हैं तथा वह रोगरहित होकर पाँच सौ वर्षोंका जीवन प्राप्त करता है। एक मासतक सफेद पेठेके एक पल चूर्णको मधु, घृत और दूधके साथ सेवन करते हुए दुग्धान्नका भोजन करनेवाला नीरोग रहकर एक सहस्र

English

I shall describes the race of Kros|:u in which (Lord) Hari Himself was born. Vrjinivan (was bom) from Kropi. Svaha was (born) from Vrjinivan.

अध्याय 274

श्लोक 9

मनुष्ये बाधका ये तु तन्नाशाय बभूव सः ।कर्तुं कर्मव्यवस्थानं मनुष्यो जायते हरिः

manuṣye bādhakā ye tu tannāśāya babhūva saḥ / kartuṃ karmavyavasthānaṃ manuṣyo jāyate hariḥ

हिन्दी अर्थ

वर्षकी आयुका उपभोग करता है। कमलगन्धका चूर्ण भाँगरेके रसकी भावना देकर मधु और घृतके साथ लिया जाय तो वह सौ वर्षोकी आयु प्रदान करता है। कडवी तुम्बीके एक तोलेभर

English

Ru$adgu (was) the son of Svaha and Gitcaratha (was) his son. Saiabindu (was born) from Citraratha. He was a great monarch and a staunch devotee of (Lord) Hari.

अध्याय 274

श्लोक 10

देवासुराणां सङ्ग्रामा दायार्थं द्वादशाभवन् ।प्रथमो नारसिंहस्तु द्वितीयो वामनो रणः

devāsurāṇāṃ saṅgrāmā dāyārthaṃ dvādaśābhavan / prathamo nārasiṃhastu dvitīyo vāmano raṇaḥ

हिन्दी अर्थ

तेलका नस्य दो सौ वर्षोंकी आयु प्रदान करता है। त्रिफला, पीपल और सोंठ-इनका प्रयोग तीन सौ वर्षोकी आयु प्रदान करता है। इनका शतावरीके साथ सेवन अत्यन्त बलप्रद और सहस्र वर्षोकी आयु प्रदान करनेवाला है। इनका चित्रकके साथ तथा सोंठके साथ विडंगका प्रयोग भी पूर्ववत् फलप्रद है। त्रिफला, पीपल और सोंठ-इनका लोह, भृङ्गराज, खरेटी, निम्ब-

English

Kunti (was born) from ELrath, the son of Vidarbha.

अध्याय 274

श्लोक 11

सङ्ग्रामस्त्वथ वाराहश् चतुर्थो ऽमृतमन्थनः ।तारकामयसङ्ग्रामः षष्ठो ह्य् आजीवको रणः

saṅgrāmastvatha vārāhaś caturtho 'mṛtamanthanaḥ / tārakāmayasaṅgrāmaḥ ṣaṣṭho hy ājīvako raṇaḥ

हिन्दी अर्थ

पुनर्नवाके साथ या इनके रसकी भावना देकर या

English

Vyoma (was) the son of Da0rha (Viduratlia). It is said that Jimuta was (born) from Vyoma. Vikala was the son of Jimuta. Bhimaratha (was) his son.

अध्याय 274

श्लोक 12

त्रैपुरश्चान्धकबधो नवमो वृत्रघातकः ।जितो हालाहलश्चाथ घोरः कोलाहलो रणः

traipuraścāndhakabadho navamo vṛtraghātakaḥ / jito hālāhalaścātha ghoraḥ kolāhalo raṇaḥ

हिन्दी अर्थ

इनके संयोगसे बटी या चूर्णका निर्माण करके उसका घृत, मधु, गुड़ और जलादि अनृपानोंके साथ सेवन करनेसे पूर्वोक्त फलको प्राप्ति होती है। 'ॐ हूं सः'-इस मन्त्रसे अभिमन्त्रित योगराज मृतसंजीवनीके समान होता है। उसके सेवनसे मनुष्य रोग और मृत्युपर विजय प्राप्त करता है। देवता, असुर और मुनियोंने इन कल्प-सागरोँका सेवन किया है

English

Navaratha (was born) from Bhimaratha. Dfdharatha was (born) then. Sakunti (was born) from Drdharatha. Karam- bhaka (was) from Sakunti.

अध्याय 274

श्लोक 13

हिरण्यकशिपोश्चोरो विदार्य च नखैः पुरा ।नारसिंहो देवपालः प्रह्नादं कृतवान् नृपम्

hiraṇyakaśipoścoro vidārya ca nakhaiḥ purā / nārasiṃho devapālaḥ prahnādaṃ kṛtavān nṛpam

हिन्दी अर्थ

गजायुर्वेदका वर्णन पालकाप्यने अङ्गराज (लोमपाद)-से किया था

English

Bhajamana, Vfsni, Andhaka and Devavrdha were the four (sons) of Satvata. Their races were renowned.

अध्याय 274

श्लोक 14

देवासुरे वामनश् च छलित्वा बलिमूर्जितम् ।महेन्द्राय ददौ राज्यं काश्यपो ऽदितिसम्भवः

devāsure vāmanaś ca chalitvā balimūrjitam / mahendrāya dadau rājyaṃ kāśyapo 'ditisambhavaḥ

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार आदि आग्रेय महापुराणमें 'मृत्युञ्जय-कल्प-कथन' नामक दो सौ छियासीवाँ अध्याय पूरा हुआ पालकाप्यने कहा--लोमपाद ! मैं तुम्हारे सम्मुख हाथियोंके लक्षण और चिकित्साका वर्णन करता हूँ। लम्बी सूँड्वाले, दीर्घ श्वास लेनेवाले, आघातको सहन करनेमें समर्थ, बीस या अठारह नखोंवाले

English

Babhru (had) four sons. (Those were) kings and devotees of (Lord) Vasudeva (Hari). (They were Kuhura, Bhajamana, Sini and Kambalabarhi;.

अध्याय 274

श्लोक 15

वराहस्तु हिरण्याक्षं हत्वा देवानपालयत् ।उज्जहार भुवं देवदेवैर् अभिष्टुतः

varāhastu hiraṇyākṣaṃ hatvā devānapālayat / ujjahāra bhuvaṃ devadevair abhiṣṭutaḥ

हिन्दी अर्थ

एवं शीतकालमें मदकी धारा बहानेवाले हाथी प्रशस्त माने गये हैं। जिनका दाहिना दाँत उठा हो, गर्जना मेघके समान गम्भीर हो, जिनके कान विशाल हों तथा जो त्वचापर सूक्ष्म-बिन्दुओंसे

English

Dhr?nu (was the son) of Kuhura. Dhrti (was) the son of Dhrsnu. Kapotaroma was from Dhrti. Tittiri (was) his son.

अध्याय 274

श्लोक 16

मन्थानं मन्दरं कृत्वा नेत्रं कृत्वा तु वासुकिम् ।सुरासुरैश् च मथितं(१) देवेभ्यश्चामृतं ददौ

manthānaṃ mandaraṃ kṛtvā netraṃ kṛtvā tu vāsukim / surāsuraiś ca mathitaṃ(1) devebhyaścāmṛtaṃ dadau

हिन्दी अर्थ

चित्रित हों, ऐसे हाथियोंका संग्रह करना चाहिए; किंतु जो हस्वाकार और लक्षणहीन हों, ऐसे हाथियोंका संग्रह कदापि नहीं करना चाहिए। पार्श्वगर्मिणी हस्तिनी और मूढ़ उन्मत्त हाथियोंको भी न रखे। बर्ण, सत्त्व, बल, रूप, कान्ति, शारीरिक संगठन एवं वेग-इस प्रकारके सात गुणोंसे युक्त गजराज सम्मुख युद्धमें शत्रुओंपर विजय प्राप्त करता है। गजराज ही शिबिर और

English

Nara (was) the son of Tittiri. Candanadundubhi (was) his (son). Punarvasu (was) his son. Ahuka (was) the son of Ahuki (wife of Punarvasu).

अध्याय 274

श्लोक 17

तारकामयसङ्ग्रामे तदा देवाश् च पालिताः ।निवार्येन्द्रं गुरून् देवान् दानवान्सोमवंशकृतम्

tārakāmayasaṅgrāme tadā devāś ca pālitāḥ / nivāryendraṃ gurūn devān dānavānsomavaṃśakṛtam

हिन्दी अर्थ

सेनाकी परम शोभा हैं। राजाओंको विजय

English

Sonalva and Svetavana (were) the two sons of that mighty monarch. Sami, Satrujit and others were the five sons of Sonasva.

अध्याय 274

श्लोक 18

विश्वामित्रवशिष्ठात्रिकवयश् च रणे सुरान् ।अपालयन्ते निर्वार्य रागद्वेषादिदानवान्

viśvāmitravaśiṣṭhātrikavayaś ca raṇe surān / apālayante nirvārya rāgadveṣādidānavān

हिन्दी अर्थ

हाथियोंके अधीन है हाथियोंके सभी प्रकारके ज्चरोंमें अनुवासन देना चाहिए। घृत और तैलके अभ्यङ्गके साथ स्नान वात-रोगको नष्ट करनेवाला है । राजाओंको हाथियोंके स्कन्धरोगोंमें पूर्ववत् अनुवासन देना

English

Kr§na thus got rid of the false accusation on him that he had killed Satrajit. One who reads (this account) would go to the heaven. Satyabhama (the daughter of Satyajit) became the wife of Kr?pa.

अध्याय 274

श्लोक 19

पृथ्वीरथे ब्रह्मयन्तुरीशस्य शरणो हरिः ।ददाह त्रिपुरं देवपालको दैत्यमर्दनः

pṛthvīrathe brahmayanturīśasya śaraṇo hariḥ / dadāha tripuraṃ devapālako daityamardanaḥ

हिन्दी अर्थ

चाहिए। द्विजश्रेष्ठ! पाण्डुरोगमें गोमूत्र, हरिद्रा और घृत दे। बद्धकोष्ठ (कब्जियत) -में तैलसे पूरे शरीरका मर्दन करके खान कराना या क्षरण कराना प्रशस्त है। हाथीको पञ्चलवण (कालानमक,

English

Yugandhara (was) the son of Dhuni. Svahya was (born from him). He was invincible in battle. IRsabha and Ketraka (were) his (sons). Svaphalkaka (was born) from ]$abha.

अध्याय 274

श्लोक 20

गौरीं जिहीर्षुणा रुद्रमन्धकेनार्दितं हरिः ।अनुरक्तश् च रेवत्यां चक्रेचान्धासुरार्दनम्

gaurīṃ jihīrṣuṇā rudramandhakenārditaṃ hariḥ / anuraktaś ca revatyāṃ cakrecāndhāsurārdanam

हिन्दी अर्थ

सेंधानमक, संचर नोन, समुद्रलवण और काचलवण) युक्त वारुणी मदिराका पान करावे। मूर्च्छा-रोगमें हाथीको वायविडंग, त्रिफला, त्रिकटु और सैन्धव लवणके ग्रास बनाकर खिलाये तथा मधुयुक्त जल पिलाये। शिरश्शूलमें अभ्यङ्ग और नस्य प्रशस्त है। हाथियोंके पैरके रोगोंमें तैलयुक्त पोटलीसे मर्दनरूप चिकित्सा करे। तदनन्तर कल्क और कषायसे उनका शोधन करना

English

Akrura (was) the son of l§vaphalka. Sudhaiivaka (was born) from Akrura. Vasudeva and others (were bom) from Sura. Prtha (Kunti) was the wife of Pandu.

अध्याय 274

श्लोक 21

अपां फेनमयो भूत्वा देवासुररणे हरन्(२) ।वृत्रं देवहरं विष्णुर्देवधर्मानपालयत्

apāṃ phenamayo bhūtvā devāsuraraṇe haran(2) / vṛtraṃ devaharaṃ viṣṇurdevadharmānapālayat

हिन्दी अर्थ

' ॐ हूं सः '--ऐसा पाठ ही प्रतियोंमें उपलब्ध है । परंतु मृत्युञ्जय मन्त्र '३ जूं सः' ऐसा है।

English

Having become foam of water in the battle of gods and demons, he carried off Vritra the god-seizer; Vishnu protected the gods' dharma.

अध्याय 274

श्लोक 22

शाल्वादीन् दानवान् जित्वा हरिः परशुरामकः ।अपालयत् सुरादींश् च दुष्टक्षत्रं निहत्य च

śālvādīn dānavān jitvā hariḥ paraśurāmakaḥ / apālayat surādīṃś ca duṣṭakṣatraṃ nihatya ca

हिन्दी अर्थ

चाहिए। जिस हाथीको कम्पन होता हो, उसको पीपल और मिर्च मिलाकर मोर, तीतर और बटेरके मांसके साथ भोजन करावे अतिसाररोगके शमनके लिये गजराजको नेत्रबाला, बेलका सूखा गूदा, लोध, धायके फूल और मिश्रीकी पिंडी बनाकर खिलावे। करग्रह (सूँडके रोग)-में लवणयुक्त घृतका नस्य देना चाहिए। उत्कर्णक- रोगमें पीपल, सोंठ, कालाजीरा और नागरमोथासे

English

Having conquered Shalva and other demons, Hari as Parashurama protected the gods and others, killing wicked Kshatriyas.

अध्याय 274

श्लोक 23

हालाहलं विषं दैत्यं निराकृत्य महेश्वरात् ।भयं निर्णाशयामास देवानां मधुसूदनः

hālāhalaṃ viṣaṃ daityaṃ nirākṛtya maheśvarāt / bhayaṃ nirṇāśayāmāsa devānāṃ madhusūdanaḥ

हिन्दी अर्थ

साधित यवागू एवं वाराहीकंदका रस दे। दशमूल, कुलथी, अम्लवेत और काकमाचीसे सिद्ध किया हुआ तैल मिर्चके साथ प्रयोग करनेसे गलग्रह- रोगका नाश होता है। मूत्रकृच्छु-रोगमें अष्टलवणयुक्त

English

Having removed from Maheshvara the Halahala poison, the demon, Madhusudana destroyed the gods' fear.

अध्याय 274

श्लोक 24

देवासुरे रणे यश् च दैत्यः कोलाहलो जितः ।पालिताश् च सुराः सर्वे विष्णुना धर्मपालनात्

devāsure raṇe yaś ca daityaḥ kolāhalo jitaḥ / pālitāś ca surāḥ sarve viṣṇunā dharmapālanāt

हिन्दी अर्थ

सुरा एवं घृतका पान करावे अथवा खीरेके बीजोंका क्राथ दे। हाथीको चर्मदोषमें नीम या अड्सेका क्वाथ पिलावे। कृमियुक्त कोष्ठकी शुद्धिके लिये गोमूत्र और वायविडंग प्रशस्त हैं। सोंठ, पीपल, मुनक्का और शर्करासे श्रत जलका पान क्षतदोषका क्षय करनेवाला है तथा मांस-रस भी लाभदायक है। अरुचिरोगमें सोंठ, मिर्च एवं पिप्पलीयुक्त मूँग-भात प्रशंसित है। निशोथ,

English

In the battle of gods and demons the demon Kolahala was conquered; all the gods were protected by Vishnu through maintaining dharma.

अध्याय 274

श्लोक 25

राजानो राजपुत्राश् च मुनयो देवता हरिः ।यदुक्तं यच्च नैवोक्तमवतारा हरेरिमे

rājāno rājaputrāś ca munayo devatā hariḥ / yaduktaṃ yacca naivoktamavatārā harerime

हिन्दी अर्थ

गजपीपल-इनसे सिद्ध किया हुआ स्रेह गुल्मरोगका अपहरण करता है। इसी प्रकार

English

Kings, princes, sages, deities — Hari; what has been told and what not told are these avatars of Hari.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

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6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

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