Atharva Veda
12
अध्याय 12 / 20

Kanda 12

काण्ड 12

304 श्लोकभाग 2/5 · श्लोक 2.1–2.55

पूर्ण अध्याय पाठ55 श्लोक

अध्याय 12

श्लोक 2.1

१-५५ भृगुः।अग्निः, मन्त्रोक्ताः, २१-३३ मृत्युः।त्रिष्टुप्, २, ५, १२-२०, ३४-३६, ३८-४१- ४३, ५१, ५४ अनुष्टुप् (१६ ककुम्मती पराबृहती, १८ निचृत् ४० पुरस्तात् ककुम्मती), ३ आस्तारपङ्क्तिः, ६ भुरिगार्षी पङ्क्तिः, ७, ४५ जगती, ८, ४८-४९ भुरिक्, ९ अनुष्टुब्गर्भा विपरीतपादलक्ष्मा पङ्क्तिः, ३७ पुरस्ताद्बृहती, ४२ त्रिपदा एकावसाना भुरिगार्ची गायत्री, ४४ एकावसाना द्विपदाऽर्ची बृहती, ४६ एकावसाना द्विपदा साम्नी त्रिष्टुप्, ४७ पञ्चपदा बार्हतवैराजगर्भा जगती, ५० उपरिष्टाद्विराड् बृहती ५२ पुरस्ताद्विराड् बृहती, ५५ बृहतीगर्भा।न॒डमा रो॑ह॒ न ते॒ अत्र॑ लो॒क इ॒दं सीसं॑ भाग॒धेयं॑ त॒ एहि॑ ।यो गोषु॒ यक्ष्मः॒ पुरु॑षेषु॒ यक्ष्म॒स्तेन॒ त्वं सा॒कम॑ध॒राङ् परे॑हि

1-55 bhṛguḥ| agniḥ, mantroktāḥ, 21-33 mṛtyuḥ| triṣṭup, 2, 5, 12-20, 34-36, 38-41- 43, 51, 54 anuṣṭup (16 kakummatī parābṛhatī, 18 nicṛt 40 purastāt kakummatī), 3 āstārapaṅktiḥ, 6 bhurigārṣī paṅktiḥ, 7, 45 jagatī, 8, 48-49 bhurik, 9 anuṣṭubgarbhā viparītapādalakṣmā paṅktiḥ, 37 purastādbṛhatī, 42 tripadā ekāvasānā bhurigārcī gāyatrī, 44 ekāvasānā dvipadā'rcī bṛhatī, 46 ekāvasānā dvipadā sāmnī triṣṭup, 47 pañcapadā bārhatavairājagarbhā jagatī, 50 upariṣṭādvirāḍ bṛhatī 52 purastādvirāḍ bṛhatī, 55 bṛhatīgarbhā| naḍamā roha na te atra loka idaṃ sīsaṃ bhāgadheyaṃ ta ehi | yo goṣu yakṣmaḥ puruṣeṣu yakṣmastena tvaṃ sākamadharāṅ parehi

हिन्दी अर्थ

१. जो मसि की याचना करते या. भासु के लिये विचरते रहते ह। २५६ ्रयववेद-माप्य कां १२ ॥ सु° १ , (वयांसि) कोए (सं पतन्ति) संपात करते है । (यस्याम्) जिस में (मात- हई (दयते) गति करती षै, तथा (वातस्य) वायु के (प्रवाम, उपवाम्, भनु) परे-हटती भौर समीप-श्राती है ।

English

Whose castles are the work of Gods, and men wage war upon her plain The Lord of Life make Prithivī, who beareth all things in her womb, pleasant to us on every

अध्याय 12

श्लोक 2.2

अ॒घ॒शं॒स॒दुः॒शं॒साभ्यां॑ क॒रेणा॑नुक॒रेण॑ च ।यक्ष्मं॑ च॒ सर्वं॒ तेने॒तो मृ॒त्युं च॒ निर॑जामसि

aghaśaṃsaduḥśaṃsābhyāṃ kareṇānukareṇa ca | yakṣmaṃ ca sarvaṃ teneto mṛtyuṃ ca nirajāmasi

हिन्दी अर्थ

बोध भौर प्रतिबोध मानो जीवनमेंदोचछषिर्हैः जो कि सन्मां ददति है। कां० १२। सुऽ १. भ्रथर्वेवेद-माष्य । । 3. (मा) मुक को, (निषेहि) भरपनी निषि जानकर, धारित तया परिपुष्ट कर । (कवे) है वेद-काव्य की कवि ! (संविदाना) सम्यक् ज्ञान वाली तु (दिवा) प्रतिदिन (मा) मुे (शियाम्) शोमा .में तथा (मत्याम्) सम्पत्ति मँ (षेहि) स्थापित कर । - १. बैदिकं मावनानुसार राज्यकर” भूमिमाता की.सेवां तंया प्रजा कौ समर- सति के लिये है, राज्यकमेचारियों के भोगविलास के लिये नेह । २. कविपद कै संनिधान से मन्त म -पारमेरवरी माता को वर्णेन प्रतीत हीत । भवा भूमिष्ठ कवियीं के कारण, गौणस्म मे धरुमि को कविं कहा है ।

English

Pisāchas all, and Rākshasas, these keep thou, Earth! afar from us. To whom the winged bipeds fly together, birds of each various kind, the swans, the eagles;

अध्याय 12

श्लोक 2.3

निरि॒तो मृ॒त्युं निरृ॑तिं॒ निररा॑तिमजामसि ।यो नो॒ द्वेष्टि॒ तम॑द्ध्यग्ने अक्रव्या॒द् यमु॑ द्वि॒ष्मस्तमु॑ ते॒ प्र सु॑वामसि

nirito mṛtyuṃ nirṛtiṃ nirarātimajāmasi | yo no dveṣṭi tamaddhyagne akravyād yamu dviṣmastamu te pra suvāmasi

हिन्दी अर्थ

पयन् ) दूसरी जातवेदस् को देखती हुई भी (इमम्) इस (नः गृहम्) में (धर्मम्) दुध की बटलोही को (इन्धाम् ) गमम करती रहे । पितृयान मागं. उनका है जोकि सन्तानोत्पत्ति द्वारा मातापिता बनना चाहते रहते है तथा गृहस्थिरयो के लिये निदिचत यज्ञ होते रहृते हँ । इस मागं में

English

May Earth, may Prithivī bestow her benison, with milk, on me. Whom Visvakarman with oblation followed, when she was set in mid-air’s billowy ocean

अध्याय 12

श्लोक 2.4

यद्य॒ग्निः क्र॒व्याद् यदि॑ वा व्या॒घ्र इ॒मं गो॒ष्ठं प्र॑वि॒वेशान्यो॑काः ।तं माषा॑ज्यं कृ॒त्वा प्र हि॑णोमि दू॒रं स ग॑च्छत्वप्सु॒षदोऽप्य॒ग्नीन्

yadyagniḥ kravyād yadi vā vyāghra imaṃ goṣṭhaṃ praviveśānyokāḥ | taṃ māṣājyaṃ kṛtvā pra hiṇomi dūraṃ sa gacchatvapsuṣado'pyagnīn

हिन्दी अर्थ

(मृदद्वम्) धो डालो, (नडे) नड मे (मृडद्वम्) घो डालो, (चं संकसुके , श्रभिराम तथा रक्षक सूयं में धो डालो, (उपबहंणे ). तथा -उपबहंण में ददं रौर कमर का दर्द॑.मिटता ई" (वनौषधि चन्द्रोदय “सीस दीषक मे) - नडे = सीसभस्म नड पर तम्यार की जाती है, भतः 'शीर्ष॑क्ति रोग मेँ नदं नडं तथा सीस के दाहक होने के कारण नडाग्नि को मी संकुसक भ्रग्नि कषा

English

That deed is easily set right through thee: we kindle thee again. Again have the Ādityas, Rudras, Vasus, the Brāhman, bringer of good things, O Agni,

अध्याय 12

श्लोक 2.5

यत् त्वा॑ क्रु॒द्धाः प्र॑च॒क्रुर्म॒न्युना॒ पुरु॑षे मृ॒ते।सु॒कल्प॑मग्ने॒ तत् त्व॒या पुन॒स्त्वोद् दी॑पयामसि

yat tvā kruddhāḥ pracakrurmanyunā puruṣe mṛte| sukalpamagne tat tvayā punastvod dīpayāmasi

हिन्दी अर्थ

सके । वाजान् = वाजः भल्ननाम (निं २७) । , (येन्दते) बहरी. है । (भत्र). यदीं भर्थात् इस संगठन में ही (जहीत) २८२ । अथर्ववेदभ्माष्य १ कां०. १२ सु० २ छोड़ दो, त्याग दो (ये). जो किः (अधिकाः -असन्) -भकस्याणकारी कमं

English

Corpse-eating Agni we expel, the Agni who bewilders men, Him who is in our horses, in our heroes, cows, and goats, and sheep:

अध्याय 12

श्लोक 2.6

पुन॑स्त्वादि॒त्या रु॒द्रा वस॑वः॒ पुन॑र्ब्र॒ह्मा वसु॑नीतिरग्ने ।पुन॑स्त्वा॒ ब्रह्म॑ण॒स्पति॒राधा॑द् दीर्घायु॒त्वाय॑ श॒तशा॑रदाय

punastvādityā rudrā vasavaḥ punarbrahmā vasunītiragne | punastvā brahmaṇaspatirādhād dīrghāyutvāya śataśāradāya

हिन्दी अर्थ

कां 9. १२। सू २ ,. भरथर्वेवेद-माष्य 3 , २८५ भ्रायु्रो का दोषं करे । परन्तु इन दोनों विभागो को भ्रन्न का सेवन, हविः खूप मे, करना चाहिए । जीवन को यज्ञ समते हुए रसे भरत्न का सेवनं करते रहना चाहिए जिस से जीवन यन्न सफलता पुरक समाप्त हो । भ्रायुषा , करते हँ । इसलिये ऋग्वेद मेँ कहा हैकिः “यस्तं न वेद किमृचा करिष्यति . ने भी कहा है कि “ब्रह्य ईहवरो, वेदः, तत्त्वं, तपो बा" (उणाः ४। १४७) (पितरः) है पितरो ! (मर्त्येषु भमृतः) मरण घर्मा पदार्थो मं

English

assembly. Here I erect this rampart for the living: let none of these, none other, reach this limit.

अध्याय 12

श्लोक 2.7

यो अ॒ग्निः क्र॒व्यात् प्र॑वि॒वेश॑ नो गृ॒हमि॒मं पश्य॒न्नित॑रं जा॒तवे॑दसम्।तं ह॑रामि पितृय॒ज्ञाय॑ दू॒रं स घ॒र्ममि॑न्धां पर॒मे स॒धस्थे॑

yo agniḥ kravyāt praviveśa no gṛhamimaṃ paśyannitaraṃ jātavedasam| taṃ harāmi pitṛyajñāya dūraṃ sa gharmamindhāṃ parame sadhasthe

हिन्दी अर्थ

चाहिए । दक्षिण दिशा हास क्री; शक्ति के हास को, सूचितः करती । जसे जपे सूयं दक्षिण कीं भोर लता जीता है वैसे-वेसे उस की शक्ति का हास . मृतं हनि पर सभी को उसः की शवक्रिया ही प्रिय होती है । वेदवेत्ताभों भ्रपने-श्राप को भी -यही क्रिया प्रिय होती हैः+ : केःभमाव द्वारा -(पक्िणाति) उसे क्षीणं करती रहती है। ,

English

May they survive a hundred lengthened autumns, and may they bury Death beneath this mountain. Live your full lives and find age delightful, all of you striving, one behind the other.

अध्याय 12

श्लोक 2.8

क्र॒व्याद॑म॒ग्निं प्र हि॑णोमि दू॒रं य॒मरा॑ज्ञो गच्छतु रिप्रवा॒हः ।इ॒हायमित॑रो जा॒तवे॑दा दे॒वो दे॒वेभ्यो॑ ह॒व्यं व॑हतु प्रजा॒नन्

kravyādamagniṃ pra hiṇomi dūraṃ yamarājño gacchatu ripravāhaḥ | ihāyamitaro jātavedā devo devebhyo havyaṃ vahatu prajānan

हिन्दी अर्थ

.. भरनिराहितः; निर् +भाहिवः = हित भ्रग्नि कौ निकाल देना + भ्र + हमारे संमूख ही शवं का भक्षणं करं रही होती है । येह भवस्था , यकष्मरोग की ह यक्ष्म रोग श्नः-कमैःरौगी के मस को साता जाता है इस कषये कां° १२। सू०र२. भरथवेवेद-माष्य २०८७ भाई को यह -रोग हो जाय तो दायभाग में मिले उस के वुगने धनको भी ही पृथक्ः करने का यत्न करना चाहिए ।; मन्त्र में पिता की जायदाद के बटवारे मं ज्येष्ठ पुत्र को दो. भाग देने का, विधान किया है, मौर .भरन्यो को गया, तो उस का सवेस्व, उस के लिये न रहा । वनुते वन संभक्तौ ।

English

May Tvashtar, maker of fair things, be gracious, and lead your whole lives on to full existence.

अध्याय 12

श्लोक 2.9

क्र॒व्याद॑म॒ग्निमि॑षि॒तो ह॑रामि॒ जना॑न् दृं॒हन्तं॒ वज्रे॑ण मृ॒त्युम्।नि तं शा॑स्मि॒ गार्ह॑पत्येन वि॒द्वान् पि॑तृ॒णां लो॒केऽपि॑ भा॒गो अ॑स्तु

kravyādamagnimiṣito harāmi janān dṛṃhantaṃ vajreṇa mṛtyum| ni taṃ śāsmi gārhapatyena vidvān pitṛṇāṃ loke'pi bhāgo astu

हिन्दी अर्थ

वह (भयज्ञियः) यज्ञ करने योग्य नहीं रहता, (हतवर्चा; रवति) भौर कान्तिरदित; हौ जाता है, (एनेन ) इस हाराः (हविः) ल (न अत्तवे) नहीं खाया जात्रा-। वह. (कृष्याः, गोः, धनात्) कृषि कंनेःसे, गौ श्रौर धनं से नं यज्ञ करने मं दक्त होता, न -खा-पी सकता; कान्ति, रहित होः. जाता,. भ्रौर सम्पत्ति से भी वल्चित हो जाता है । = खुहैषये म बत्याति पयोः नीत्य ।

English

As the days follow days in close succession, as with the seasons duly come the seasons. As each successor fails not his foregoer, so constitute the lives of these, Ordainer! Gather your strength, my friends; the stream flows stony: acquit yourselves as men, and cross

अध्याय 12

श्लोक 2.10

क्र॒व्याद॑म॒ग्निं श॑शमा॒नमु॒क्थ्यं॑१ हि॑णोमि प॒थिभिः॑ पितृ॒याणैः॑ ।मा दे॑व॒यानैः॒ पुन॒रा गा॒ अत्रै॒वैधि॑ पि॒तृषु॑ जागृहि॒ त्वम्

kravyādamagniṃ śaśamānamukthyaṃ1 hiṇomi pathibhiḥ pitṛyāṇaiḥ | mā devayānaiḥ punarā gā atraivaidhi pitṛṣu jāgṛhi tvam

हिन्दी अर्थ

पृथिवी पर संपात करते है । इस प्रकार पृथिवी पक्षियों के लिये भी विराम मे मिले हए (विदिते) विहित हँ (सा) वहं (भुमिः पृथिवी) उत्पादिका ढकी हई, (भद्रया) मद्रबुद्धि के साथ (नः) हमे (भ्रियेः धामनि धामनि) भिय स्थानों मे (दातु) स्थापित करे॥ - न : इविकर त्था चमकीलो होता है .। परे-हटने भर समीप-भरने के अनुसार (भविः) श्रग्न की ज्वाला (वाति).€

English

side! May Earth the Goddess, she who bears her treasure stored up in many a place, gold, gems,

अध्याय 12

श्लोक 2.11

समि॑न्धते॒ संक॑सुकं स्व॒स्तये॑ शु॒द्धा भव॑न्तः॒ शुच॑यः पाव॒काः ।जहा॑ति रि॒प्रमत्येन॑ एति॒ समि॑द्धो अ॒ग्निः सु॒पुना॑ पुनाति

samindhate saṃkasukaṃ svastaye śuddhā bhavantaḥ śucayaḥ pāvakāḥ | jahāti ripramatyena eti samiddho agniḥ supunā punāti

हिन्दी अर्थ

अभिः सये भ्रापों पेषां विनं देवांश सं द॑दुः ॥५३॥ सर्य, जल तथा सब देवों ने (मेषाम्) मुके मेषा (संददुः) दी है । होने लगती, सूयं मौ चमकंने लगता, जल स्वच्छ हो जाता-इसं प्रकार सबं देवामिल.कर काय्षेत्र के लिये बुद्धि को भधिक विकसित कर देते है । भस्मि) संमुख भएका मै पराभावः.करता ह, (विस्वाषाट्) सब्र काम

English

and riches, Giver of opulence, grant great possessions to us bestowing them with love and favour.

अध्याय 12

श्लोक 2.12

दे॒वो अ॒ग्निः संक॑सुको दि॒वस्पृ॒ष्ठान्यारु॑हत्।मु॒च्यमा॑नो॒ निरेण॒सोऽमो॑ग॒स्मां अश॑स्त्याः

devo agniḥ saṃkasuko divaspṛṣṭhānyāruhat| mucyamāno nireṇaso'mogasmāṃ aśastyāḥ

हिन्दी अर्थ

शरद् ऋतुः म विजिगोषु राजा, विजययात्रां के" निमित्त; निज- शक्ति का भभिमानं करता है .1 ॥ ५ + (देवि) दिव्यगुणियों के निवास द्वारा दिव्यगुणवती है पृथिवी ! (व्यसपंः) विशेषतया सरकी है- (तदानीम्) तब (त्वा) तु .मं (सुभूतम्) चारो दिकशाभों के निवासियों को (श्रकल्पयथाः) तु ने सामथ्यंयूक्त निदिष्ट मागं से व्यापार होता रहा है, तब पृथिवी एेवयं वाली होती रही

English

Earth, bearing folk of many a varied language with divers rites as suits their dwelling-places, Pour, like a constant cow that never faileth, a thousand streams of treasure to enrich me!

अध्याय 12

श्लोक 2.13

अ॒स्मिन् व॒यं संक॑सुके अ॒ग्नौ रि॒प्राणि॑ मृज्महे ।अभू॑म य॒ज्ञियाः॑ शु॒द्धाः प्र ण॒ आयूं॑षि तारिषत्

asmin vayaṃ saṃkasuke agnau riprāṇi mṛjmahe | abhūma yajñiyāḥ śuddhāḥ pra ṇa āyūṃṣi tāriṣat

हिन्दी अर्थ

समान घटनाएं होती रहती है, इस मे प्रमाण है ““सुर्याचन््रमसौ धाता यथा- भरण्य, (ये संग्रामाः) जो ग्राम संगठन, (समितयः) तथा राजसभाए है (तेषु) उन में है पृथिवी ! (ते) तेरे सम्बन्ध मे (चाड वदेम) प्रशंसा वचन ग्राम । सभाः, समितयः लोकसभाए, तंथा राजसभाए 1. “समितयः” के कां १२। सुऽ भथवतेद-भाष्य २५९ ओषध्यो का संगम होता है, जसे कि राजाध्रों का समितिरमे, वह मेधावी “भिषक् कहा जाता दहै, जो किं रोग कीटाणुभ्रो भ्रौर रोगों का हनन भ्रौर विना करता ह । इस वर्णेन से प्रतीत होता हं किं समितयः का भ्रथं “राज- सभाए ह । जिस पृथिवी का शासन उत्तम हो, जिस से कि प्रत्येक पृथिवी

English

Thy snake, thy sharply stinging scorpion, lying concealed, be- wildered, chilled with cold of winter,

अध्याय 12

श्लोक 2.14

संक॑सुको॒ विक॑सुको निरृ॒थो यश्च॑ निस्व॒रः ।ते ते॒ यक्ष्मं॒ सवे॑दसो दू॒राद् दू॒रम॑नीनशन्

saṃkasuko vikasuko nirṛtho yaśca nisvaraḥ | te te yakṣmaṃ savedaso dūrād dūramanīnaśan

हिन्दी अर्थ

(यात्) जब से (श्रजायत) पेदा हुई है पृथिवी (तान् जनान्) उन जनों को (वि दुधुवे) विविध कालो में कम्पाती रही है, इव ) जंसे कि (भ्रदवः घोड़ा (रजः) धूली को कम्पाता है । (मन्द्रा) पृथिवी मस्दगति वाली है, भ्रोषधियों को (मुभिः) ग्रहण वयि हुई है । जय हतां है । “सत्यमेव. जयते", सत्य की ही विजय होती है । परक्षय, होता रहता है ताकि प्राणो मोक्ष के. लिये श्रग्रसर होति रहँ । पृथिवी पर शिक नदीं । रक्षिका होने के कारण ही प्राणियों के लिये पृथिवी वनस्पति-

English

The worm, O Prithivī, each thing that in the Rains revives and stirs, Creeping, forbear to creep on us! With all things gracious bless thou us.

अध्याय 12

श्लोक 2.15

यो नो॒ अश्वे॑षु वी॒रेषु॒ यो नो॒ गोष्व॑जा॒विषु॑ ।क्र॒व्यादं॒ निर्णु॑दामसि॒ यो अ॒ग्निर्ज॑न॒योप॑नः

yo no aśveṣu vīreṣu yo no goṣvajāviṣu | kravyādaṃ nirṇudāmasi yo agnirjanayopanaḥ

हिन्दी अर्थ

करना । भ्ररव जंसे शरीरलग्न धूली को, शरीर कम्पा कर, फाड़ फंकता है वैसे पृथिवी भ्रपने पर बसे भाततायिभ्रों को, भूचाल भ्रादि द्वारा फाड़ फंकती 'गगरषषोषरोरषयपिरषििकिरिकिकरकििन कावप गणयसि ममम करती रहती है । परन्तु उसं की गति हरे भ्रनुभूत बही होती, प्रतेः उसकी गति को मना भर्थात् मन्द कहा है। २६० भथववेद-माष्य का० १२। सु° १

English

Thy many ways on which the people travel, the road for car and wain to journey over, Thereon meet both the good and bad, that pathway may we attain without a foe or robber.

अध्याय 12

श्लोक 2.16

अन्ये॑भ्यस्त्वा॒ पुरु॑षेभ्यो॒ गोभ्यो॒ अश्वे॑भ्यस्त्वा ।निः क्र॒व्यादं॑ नुदामसि॒ यो अ॒ग्निर्जी॑वित॒योप॑नः

anyebhyastvā puruṣebhyo gobhyo aśvebhyastvā | niḥ kravyādaṃ nudāmasi yo agnirjīvitayopanaḥ

हिन्दी अर्थ

व्यक्तियों को (श्रव हन्मि) पि्ाड हैता हूं । (नी) +-हन् गतौ । मधुर बोलने, परन्तु छानवीन कर सदा सत्य बोलने से लोगो की दृष्टि में नीचा करता है । गुरुजन बच्चों को मघुरमाषी होने तथा सदा सत्य बोलने की शिक्षा दिया करर । वी) पृथिवी (मे) मु (अधि ब्रवीतु) भधिकार पूर्वकं सदपदेश किया करे, जंसेकि माता (पयसा सह) दुष पिलाने के साथ साथ शिशु को सदपदेश तो कीलालम् भरत्ननाम (निषं० २।७) । पृथिवी प्रर शान्ति, फुलवा- इया, भरशत भन्न, तथा जल हो .तो पृथिवी सुख टेती है। तथा बन्चों की, सदाचार-शिक्षा रिश्ुकाल से ही प्रारम्भ हो जानी चाहिए ।

English

With all things gracious bless thou us. Supporting both the foolish and the weighty she bears the death both of the good and evil.

अध्याय 12

श्लोक 2.17

यस्मि॑न् दे॒वा अमृ॑जत॒ यस्मि॑न् मनु॒ष्याऽ उ॒त।तस्मि॑न् घृत॒स्तावो॑ मृ॒ष्ट्वा त्वम॑ग्ने॒ दिवं॑ रुह

yasmin devā amṛjata yasmin manuṣyā' uta| tasmin ghṛtastāvo mṛṣṭvā tvamagne divaṃ ruha

हिन्दी अर्थ

कां° १२। सू° १ भववेद-भाष्य २६१ मौर त्राण योम्य पदार्थं (गुहा) पृथिवी की गुफा मे छिपा हृभा (निदितम्) रखा हृभा है, वह (मातुमदम्यः) पृथिवी माता सेः उत्पन्न सभी प्राणियों के (मोगे) मोग के निमित्त (ब्राविः भ्रभवत्) भोविभरूत भरा है।.. पृथिवी जब सूर्ये से पृथक् हुई तब यह चमकतीं वायुरूपा थी! शनः- वर्षा होती रही । इस से समूद्रमयी पृथिवी होती गई । “ततः समुद्रो भरणेवः”

English

In friendly concord with the boar, Earth opens herself for the wild swine that roams the forest.

अध्याय 12

श्लोक 2.18

समि॑द्धो अग्न आहुत॒ स नो॒ माभ्यप॑क्रमीः ।अत्रै॒व दी॑दिहि॒ द्यवि॒ ज्योक् च॒ सूर्यं॑ दृ॒शे

samiddho agna āhuta sa no mābhyapakramīḥ | atraiva dīdihi dyavi jyok ca sūryaṃ dṛśe

हिन्दी अर्थ

की सब सन्तानो का, भोजन, पालन-पोषण तथां त्राण कौ वस्तु्रों परं त्वम॑स्यावधैनी जनानामदितिः केमुदुघां परथाना । बीज बोने भौर कृषि काटने कीं, स्थली है; (भ्रदितिः) भखण्डरूपा तु (कामदुधा) प्रजाजनों कौ कामनाभ्रों को - पूर्णं करती है, . (पप्रथाना) भौर तेरा यदा कीं वृष्टि से विस्तार होता है । (यत).जो (ते) तेरी (ऊनम्) मुखिया होता हृभा, जनयिता है = २६२ भ्रथरवंवेद-माष्य का० १२।सु०१

English

All sylvan beasts of thine that love the woodlands, man-eaters,. forest-haunting, lions, tigers, Hyena, wolf, Misfortune, evil spirit, drive from us, chase the demons to a distance.

अध्याय 12

श्लोक 2.19

सीसे॑ मृड्ढ्वं न॒डे मृ॑ड्ढ्वम॒ग्नौ संक॑सुके च॒ यत्।अथो॒ अव्यां॑ रा॒मायां॑ शी॒र्षक्तिमु॑प॒बर्ह॑णे

sīse mṛḍḍhvaṃ naḍe mṛḍḍhvamagnau saṃkasuke ca yat| atho avyāṃ rāmāyāṃ śīrṣaktimupabarhaṇe

हिन्दी अर्थ

की उपजाऊ शक्ति में न्यूनता भ्रा जाती है। तथा बजर भूमयो मे उपजाऊ दाविति नहीं होती । इस न्यूनता को खाद तथा भ्रन्य उपायौ द्वारा राजा लोग पूरित करते रहँ । जल कान होना भी कृषिकमं मे बाधक होता है । है । इस न्यूनता की पूति राज्याधिकारियों को करनी चाहिए । ऋतस्य उदकनौम (निषं० १।१२) । तथा ऋतस्य नियमों का । प्रजा के लिये (पृथिवि ) है पृथिवो! (प्रसूताः) हम तेरे उत्पन्न कियिपृत्रहैं। (नः) हमारी वोध कौ प्राप्त हृए, (तुभ्यम) तेरे लिये, (बलिहृतः) राज्य-कर देने वाले पृथिवी के रोगुः रहित होने.पर पृथिवी के पूत्रो की भ्रायु बढ़ जाती

English

Gandharvas and Apsarases, Kimīdins, and malignant sprites,

अध्याय 12

श्लोक 2.20

सीसे॒ मलं॑ सादयि॒त्वा शी॑र्ष॒क्तिमु॑प॒बर्ह॑णे ।अव्या॒मसि॑क्न्यां मृ॒ष्ट्वा शु॒द्धा भ॑वत य॒ज्ञियाः॑

sīse malaṃ sādayitvā śīrṣaktimupabarhaṇe | avyāmasiknyāṃ mṛṣṭvā śuddhā bhavata yajñiyāḥ

हिन्दी अर्थ

पर रख कर सीस को भस्म.बना कर, उस का प्रयोग यक्ष्मरोग के निवारण. के लिये कथित किया है, गौरो भौर पुरुषो के यक्ष्मरोग के लिये सीसभस्म,.का प्रयोग कहा है (मन्त १) । इस उरा निर्मित सीसभस्म, यक्ष्म का निवारण करः ःरोगी के मांस णाथं “माषाज्य'' का कथन हृभा है । भाषाज्य का भ्रथं है ““उदरद भ्रौर चुतः । चृत, सम्भवतः भ्रजा (बकरी) के दुका घृत । प्रजा

English

On whom the Wind comes rushing, Mātarisvan, rousing the dust and causing trees to tremble, and flame pursues the blast. hither and thither;

अध्याय 12

श्लोक 2.21

परं॑ मृत्यो॒ अनु॒ परे॑हि॒ पन्थां॒ यस्त॑ ए॒ष इत॑रो देव॒याना॑त्।चक्षु॑ष्मते शृण्व॒ते ते॑ ब्रवीमी॒हेमे वी॒रा ब॒हवो॑ भवन्तु

paraṃ mṛtyo anu parehi panthāṃ yasta eṣa itaro devayānāt| cakṣuṣmate śṛṇvate te bravīmīheme vīrā bahavo bhavantu

हिन्दी अर्थ

दारा भ्रजाचुत म भी विद्यमान होते है (‰) ।. माषाज्य का भक्षण तथा इस की भ्राहूतियां देनी चाहिए, साथ ही जलनिष्ठ अग्निर्यो को शुधि तथा. भरागुवद्धि का वर्णेन हृभ्रा है । : सौर रषमियु हारा सिरददं की चिकित्सा (१९, २०).1 ७-१००-वुषो तक जीवित रहने के लिये "परिषि" का कथन (२३) । ८- भ्रदमन्वती भर्थात् संसारंरूपी पथरीली नदी से तैर कर पार होना

English

Earth, upon whom are settled, joined together, the night and day, the dusky and the ruddy, Prithivī compassed by the rain about her,

अध्याय 12

श्लोक 2.22

इ॒मे जी॒वा वि मृ॒तैराव॑वृत्र॒न्नभू॑द् भ॒द्रा दे॒वहु॑तिर्नो अ॒द्य।प्राञ्चो॑ अगाम नृ॒तये॒ हसा॑य सु॒वीरा॑सो वि॒दथ॒मा व॑देम

ime jīvā vi mṛtairāvavṛtrannabhūd bhadrā devahutirno adya| prāñco agāma nṛtaye hasāya suvīrāso vidathamā vadema

हिन्दी अर्थ

यामो दवारा ऋषियों ने मृत्यु को खदेडा (२९) का वर्णेन । ११-जलचिकित्सा दवारा रसि भ्रौर दुष्कृत के निवारण का (४०, ४१); १३--यकष्मनिवारण के साधनों का वणेनः--(१) भविङृष्णा, (२) सीस- भस्म, (६) चान्दी भ्रथवा सुवर्णं था दोनों, (४) पिसे उरद, (५) भररण्यानी सेवन, (६) जीं इषीका का होम, (७) तिल, (८) पिञ्ज भर्थात् तिलो के पीडन द्वारा तैल निकाल कर बची खली । (६) समीप देनी चाहिए, ताकि यज्ञोत्त्य घूम रोगी के फेफड मेँ जा सके ।

English

Happily may she stablish us in each delightful dwelling place. Heaven, Earth, the realm of Middle Air have granted me this ample room,

अध्याय 12

श्लोक 2.23

इ॒मं जी॒वेभ्यः॑ परि॒धिं द॑धामि॒ मैषां॒ नु गा॒दप॑रो॒ अर्थ॑मे॒तम्।श॒तं जीव॑न्तः श॒रदः॑ पुरू॒चीस्ति॒रो मृ॒त्युं द॑धतां॒ पर्व॑तेन

imaṃ jīvebhyaḥ paridhiṃ dadhāmi maiṣāṃ nu gādaparo arthametam| śataṃ jīvantaḥ śaradaḥ purūcīstiro mṛtyuṃ dadhatāṃ parvatena

हिन्दी अर्थ

ग्नि, जोकि चव्र का मांस खाती है, भौर यक्ष्म जीवित रोगी के मांस २६६ अथ्ववेद-भाष्य रक० १२ । सु०र ४२ त्रिपदा एकावसाना भुरिगार्ची गायत्री; ४४ एकावसाना द्विपवा भाच हे अग्नि! (नडम्) नड पर (भ्रा रोह) तु भ्रारोहण कर, (भरव) इस नड पर (ते). तेरा (लोकः न) घर नहीं, (इदं सीसम्) यहु सिक्का (ते) तेरा (भागवेयम्) माग है, (एहि) तु भ्रा । (यः) ह (गोषु यक्ष्मः) चाहिए । नड (२ ०९0) दलदलौ भूमि में पेदा होता है । सीस शीघ्र पिल जावा है.इसलिये तीतब्र ज्वाला न चाहिए, नड की भल्पकालिक भौर नमं

English

Agni, Sun, Waters, all the Gods have joined to give me mental power. I am victorious, I am called the lord superior on earth,

अध्याय 12

श्लोक 2.24

आ रो॑ह॒तायु॑र्ज॒रसं॑ वृणा॒ना अ॑नुपू॒र्वं यत॑माना॒ यति॒ स्थ।तान् व॒स्त्वष्टा॑ सु॒जनि॑मा स॒जोषाः॒ सर्व॒मायु॑र्नयतु॒ जीव॑नाय

ā rohatāyurjarasaṃ vṛṇānā anupūrvaṃ yatamānā yati stha| tān vastvaṣṭā sujanimā sajoṣāḥ sarvamāyurnayatu jīvanāya

हिन्दी अर्थ

नड पर भ्रग्नि देर तकं जलती न रहनी चाहिए, इसे “न ते -अथ लोकः” द्वारा सूचित किया है । मानो यकष्मकाभी निवारण हो जायगा । इ डरा सीममस्म की अद्भूत राक्ति कोः है! निरजामसि = निर् ‡-भरज (गतिक्षेपणयोः) । कां० १२।सु०२ प्रयर्ववेद-भाष्य २६७

English

Triumphant, all-o’erpowering the conqueror on every side There, when the Gods, O Goddess, named thee, spreading thy wide expanse as thou wast

अध्याय 12

श्लोक 2.25

यथाहा॑न्यनुपूर्वं भव॑न्ति॒ यथ॒र्तव॑ ऋ॒तुभि॒र्यन्ति॑ सा॒कम्।यथा॒ न पूर्व॒मप॑रो॒ जहा॑त्ये॒वा धा॑त॒रायूं॑षि कल्पयै॒षाम्

yathāhānyanupūrvaṃ bhavanti yathartava ṛtubhiryanti sākam| yathā na pūrvamaparo jahātyevā dhātarāyūṃṣi kalpayaiṣām

हिन्दी अर्थ

मौर बाहर से काला हो वह उत्तम होता है । सीसा क्षयरोग, वातविकार, के रोगो में लाभदायक होता है । यह जीवन-रवित्तव्ंक, जठराग्नि को परदीप्त करने वाला, बलवद्धं क होता है । इसे मन्दाग्नि मे पकाए" । सोंठ के ददं भ्रौर कमर का ददं मिटता है" । र की प्रदांसा से, (च भ्रनुकरेण करेण) (च) तथा तदनुरूप कर्मो के करने मृत्यु को, (निरजामसि) हम निगेत करते है, निकाल फकते ह । ।

English

broadening eastward, Then into thee passed many a charm and glory: thou madest for thyself the world’s four

अध्याय 12

श्लोक 2.26

अश्म॑न्वती रीयते॒ सं र॑भध्वं वी॒रय॑ध्वं॒ प्र त॑रता सखायः ।अत्रा॑ जहीत॒ ये अस॑न् दु॒रेवा॑ अनमी॒वानुत्त॑रेमा॒भि वाजा॑न्

aśmanvatī rīyate saṃ rabhadhvaṃ vīrayadhvaṃ pra taratā sakhāyaḥ | atrā jahīta ye asan durevā anamīvānuttaremābhi vājān

हिन्दी अर्थ

(इतः) इस शरौर से (मृत्युम्). अपमृत्यु को (निर्) हम निकाल भदान भावनाः को (निर् भ्रजामसि) निगंत करते तथा निकाल फैकते २९०. भग्रवेवेद-गाष्य कां० १२।सु०२. तरे भरति (भर सुवामसि) हम भेज देते है, पररित करे है ।

English

regions. In hamlets and in woodland, and in all assemblages on earth,

अध्याय 12

श्लोक 2.27

उत् ति॑ष्ठता॒ प्र त॑रता सखा॒योऽश्म॑न्वती न॒दी स्य॑न्दत इ॒यम्।अत्रा॑ जहीत॒ ये अस॒न्नशि॑वाः शि॒वान्त्स्यो॒नानुत्त॑रेमा॒भि वाजा॑न्

ut tiṣṭhatā pra taratā sakhāyo'śmanvatī nadī syandata iyam| atrā jahīta ye asannaśivāḥ śivāntsyonānuttaremābhi vājān

हिन्दी अर्थ

रोग को दुर करने मे ही सामान्य व्यक्ति का धनं लग जाता है, तो वह दान देने का सामर्थ्यं ही नहीं रखता । भौर धृतयुक्त या उवं भौर प्रजाघुत युक्त करके (दुरं प्रहिणोमि) दूर जर्लो में स्थित भ्रगिियो को मीषरप्तहो। ७१।६ के भनुसार भष. . भाज्य श्रौर शुक्रि (सोती) की - भ्राहूतियो काः. , ई । वेदो भें रोग के कीदागुभों को परि्ाष कहा है, अर्थात् प्रथित (मुस) कीः याचना करने बाले । भरच=याचने (भ्वादि) . .

English

In gatherings, meeting of the folk, we will speak glorious things of thee. As the horse scattereth the dust, the people who dwelt upon the land, at birth, she scattered,

अध्याय 12

श्लोक 2.28

वै॒श्व॒दे॒वीं वर्च॑स॒ आ र॑भध्वं शु॒द्धा भव॑न्तः॒ शुच॑यः पाव॒काः ।अ॒ति॒क्राम॑न्तो दुरि॒ता प॒दानि॑ श॒तं हिमाः॒ सर्व॑वीरा मदेम

vaiśvadevīṃ varcasa ā rabhadhvaṃ śuddhā bhavantaḥ śucayaḥ pāvakāḥ | atikrāmanto duritā padāni śataṃ himāḥ sarvavīrā madema

हिन्दी अर्थ

कां० १२। सुर र श्रयवेवेद-माष्य . २६६ ग्रथवेवेद में व्याघ्र पद गौणा्थंक मी है । यथा .(१२।२।४३) । तथा चेवाने (पुरषे मूते) पुरुष कें मर जाने पर, (मन्युना) रोष के कारण कर देते है, समाप्त कर देते है" (्रगने) है म्नि! (तत्) वह (त्वया)

English

Leader and head of all the world, delightful, the trees’ protectress and the plants’ upholder. Whate’er I say I speak with honey-sweetness, whatever I behold for that they love me.

अध्याय 12

श्लोक 2.29

उ॒दी॒चीनैः॑ प॒थिभि॑र्वायु॒मद्भि॑रति॒क्राम॒न्तोऽव॑रान् प॑रेभिः ।त्रिः स॒प्त कृत्व॒ ऋष॑यः॒ परे॑ता मृ॒त्युं प्रत्यौ॑हन् पद॒योप॑नेन

udīcīnaiḥ pathibhirvāyumadbhiratikrāmanto'varān parebhiḥ | triḥ sapta kṛtva ṛṣayaḥ paretā mṛtyuṃ pratyauhan padayopanena

हिन्दी अर्थ

धामिक हृत्य कयि जा कर गृहवासियों की रक्षा हो सके । परन्तु इन कर्मो मी यदि गृहवासी की मृत्यु हो जाती है तो भश्वद्धानु गृहवासी ऋ ढ होकर श्तश्यारदाय) दीयं भाय के लिये १०० वर्ष तुक जीवित रहते क्रे लिश । २७० भ्र्ववेद-माष्य कां० १२। सु° यदि प्रथमर्न्याधान, विधि के प्रतिकूल हरा है, जिस का परिणाम ताकि गृहवास्तियो की १०० वर्षो.की दीर्घायु हो सके ।

English

Dazzling, impetuous am I: others who fiercely stir I slay. Mild, gracious, sweetly odorous, milky, with nectar in her breast,

अध्याय 12

श्लोक 2.30

मृ॒त्योः प॒दं यो॒पय॑न्त॒ एत॒ द्राघी॑य॒ आयुः॑ प्रत॒रं दधा॑नाः ।आसी॑ना मृ॒त्युं नु॑दता स॒धस्थेऽथ॑ जी॒वासो॑ वि॒दथ॒मा व॑देम

mṛtyoḥ padaṃ yopayanta eta drāghīya āyuḥ prataraṃ dadhānāḥ | āsīnā mṛtyuṃ nudatā sadhasthe'tha jīvāso vidathamā vadema

हिन्दी अर्थ

का राज्य होता है-। सक्ति के क्षीण होते रहनेः के कारण इस -मागं के के पथिकं की १०० वर्षो से पिले ही मृत्यु हो जाने की सम्भावना रहती . इम्चान पर भधिकार जमाती है । सधस्थ का भ्रथं है “साथ-साथ बैठने करव्यादेमुषनि ्र हिणोमि दूरं यमरांहे गच्छ्तु रिप्रवाहः । शृहायमिक्ठरो जातवेदा देवो देवेभ्यो ह्यं व॑हतु भजानन् । ८॥ .

English

A useful vessel, hid, when, for enjoyment, she was made mani- fest to those with mothers. Thou art the vessel that containeth people, Aditi, granter of the wish, far-spreading.

अध्याय 12

श्लोक 2.31

इ॒मा नारी॑रविध॒वाः सु॒पत्नी॒राञ्ज॑नेन स॒र्पिषा॒ सं स्पृ॑शन्ताम्।अ॒न॒श्रवो॑ अनमी॒वाः सु॒रत्ना॒ आ रो॑हन्तु॒ जन॑यो॒ योनि॒मग्रे॑

imā nārīravidhavāḥ supatnīrāñjanena sarpiṣā saṃ spṛśantām| anaśravo anamīvāḥ suratnā ā rohantu janayo yonimagre

हिन्दी अर्थ

मज देवा ह (रिप्रवाहः) रिभ.. भति पापं का बहन करने वासी क्रव्याद् कां० १२1 सु०२ भरथववेद-माष्य २७१ (इह) यहां हमारे घर मे (श्रयम् इतरः जं तवेदाः) यह उस से भित यमराज्ञः=यमराजा की प्रजा दहै, गृहस्थजन । गृहस्थ पितृयाण मागे है जहां कि मूत्युएं होती रहती हैँ भौर पुनर्जन्म होते रहते है । भरत गृहस्थ मानो यमराजां के भ्रधीनदहै, उसकी प्रजाहै । गृहस्थमेखिकी

English

Prajāpati, the first-born Son of Order, supplieth thee with what- soe’er thou lackest. Let thy breasts, frec from sickness and Consumption, be.

अध्याय 12

श्लोक 2.32

व्याक॑रोमि ह॒विषा॒हमे॒तौ तौ ब्रह्म॑णा॒ व्य॑१हं क॑ल्पयामि ।स्व॒धां पि॒तृभ्यो॑ अ॒जरां॑ कृ॒णोमि॑ दी॒र्घेणायु॑षा॒ समि॒मान्त्सृ॑जामि

vyākaromi haviṣāhametau tau brahmaṇā vya1haṃ kalpayāmi | svadhāṃ pitṛbhyo ajarāṃ kṛṇomi dīrgheṇāyuṣā samimāntsṛjāmi

हिन्दी अर्थ

नितं शंसि गापत्येन विद्धान् पितृणां छोकेऽपिं मागो अ॑स्तु ।॥॥ . कषासित करता हं, (अपि-अपि च) तथा (पितृणाम् लोके) माता पिता दहन्तम् = मृत्यु शेन पर शरीर पत्थर समान निदचल हो जाता करवपाद॑मुभनि शंशषमानमुक्थ्यंडईं॑अ हिणोमि पथिभिः पितृयाणैः । मा देव्याः पुनराना अगत्रैवेषिं पितुं जागहि त्वम् ॥१०॥ हिणोमि) नै दूर करता हू! (पितृयाणैः पथिभिः) मातापिता जिन मार्गो प्र्

English

Prithivī, produced for our advantage. Through long-extended life wakeful and watching still may we be thy tributary servants.

अध्याय 12

श्लोक 2.33

यो नो॑ अ॒ग्निः पि॑तरो हृ॒त्स्व॑१न्तरा॑वि॒वेशा॒मृतो॒ मर्त्ये॑षु ।मय्य॒हं तं परि॑ गृह्णामि दे॒वं मा सो अ॒स्मान् द्वि॑क्षत॒ मा व॒यं तम्

yo no agniḥ pitaro hṛtsva1ntarāviveśāmṛto martyeṣu | mayyahaṃ taṃ pari gṛhṇāmi devaṃ mā so asmān dvikṣata mā vayaṃ tam

हिन्दी अर्थ

२७२ क भरयर्वेवेद-भाष्य . कां० १२। सू०२ भ्रागाः) न्रा, (प्रत्र एव) इस पितृमागे मं.ही (एषि) तु बनौ रह, बार, भ्राक्रमण करती है । - पुनः=देवयानमागियो की मृत्यु एक बार होती है, वार बार नही, क्योंकि वे चिरकाल के लिये मुक्त हो जाते ह । शक्च- छृडाती है (एनः भ्रत्येति) पापी रोगकीटाणु का श्रतिक्रमण करती, तथा

English

O Earth, my Mother, set thou me happily in a place secure. Of one accord with Heaven, O Sage, set me in glory and in wealth.

अध्याय 12

श्लोक 2.34

अ॒पा॒वृत्य॒ गार्ह॑पत्यात् क्र॒व्यादा॒ प्रेत॑ दक्षि॒णा।प्रि॒यं पि॒तृभ्य॑ आ॒त्मने॑ ब्र॒ह्मभ्यः॑ कृणुता प्रि॒यम्

apāvṛtya gārhapatyāt kravyādā preta dakṣiṇā| priyaṃ pitṛbhya ātmane brahmabhyaḥ kṛṇutā priyam

हिन्दी अर्थ

उत्पन्न हुए मलादि दूर जाते है । मृत्यु बड़ा चिक्षा गुरु" है, लिसे देख कर केई बार जीवन मेंसुधार होता है, भौर व्यक्तिरेस कर्मोकेकरनेसे उपरत हो जाता है जो कि यक्ष्म के उत्पादक हौ, भ्रौर शुंदधाचरणं वाला हो शां १२। सु०२ भ्रथर्ववेद-माष्य , २७३ देवो अभिः संकसुको दिवसपृषठन्यारत् ।

English

A funeral hymn, and deprecation of Agni the Consumer of corpses This is no place to hold thee; mount the Nāda: this lead is thine appointed share. Come hither.

अध्याय 12

श्लोक 2.35

द्वि॒भा॒ग॒ध॒नमा॒दाय॒ प्र क्षि॑णा॒त्यव॑र्त्या ।अ॒ग्निः पु॒त्रस्य॑ ज्ये॒ष्ठस्य॒ यः क्र॒व्यादनि॑राहितः

dvibhāgadhanamādāya pra kṣiṇātyavartyā | agniḥ putrasya jyeṣṭhasya yaḥ kravyādanirāhitaḥ

हिन्दी अर्थ

(देवः). देवंरूपी (संकयुकः अग्निः) संकसुकं भग्न, (दिवः पृष्टानि) भ्ररणा प्रद है, इस लिये इसे देव कहा है, साय ही शव को भस्मी भूत कर के, एव के.षरमें ही रहने पर जो घर कौ भ्रशुद्धि होती है उसे दूर कर देती पृथिवी पर जितनी भो भ्रग्नियां हँ उन का मूल स्नोत द्ूलोक.ही है । संकसुक भ्रगि का भी मूल स्नोत चुलोक ही है । इस लिये “इस.का वर्णन” दमद्छान मेँ नहीं दीखती, मानो वह निज कमं का सम्पादन कर निज खोत

English

Together with Consumption in the cattle, Consumption in our men, go henee, go southward. With this we chase and banish all consumptive malady and

अध्याय 12

श्लोक 2.36

यत् कृ॒षते॒ यद् व॑नु॒ते यच्च॑ व॒स्नेन॑ वि॒न्दते॑ ।सर्वं॒ मर्त्य॑स्य॒ तन्नास्ति॑ क्र॒व्याच्चेदनि॑राहितः

yat kṛṣate yad vanute yacca vasnena vindate | sarvaṃ martyasya tannāsti kravyāccedanirāhitaḥ

हिन्दी अर्थ

करता है (अथव ० १९।२७।३, १६।३२।४) + । श्जसिन् वयं संकंडुके अग्नो रिपभाणि सृज्महे 1 १. यकषयोग्ं हो कर यञ्ञियाग्नि भ यद्मरोगनालक' भरोषधि्ों की रातिं दे कर (मन्न ११ दीर्घायु को प्राप्त करना । २७४ भयवेद-माष्य कां० १२ 1 सु०.२ संकसको विक॑सुको निकैथः यञ्च॑ निस्व॒रः । भी वणित कियादहै, भौर भिन्न-भिघ्ल खूप्मेंमी।

English

Death, With sinner andamalicious man, with helper and with minister,

अध्याय 12

श्लोक 2.37

अ॒य॒ज्ञि॒यो ह॒तव॑र्चा भवति॒ नैने॑न ह॒विरत्त॑वे ।छि॒नत्ति॑ कृ॒ष्या गोर्धना॒द् यं क्र॒व्याद॑नु॒वर्त॑ते

ayajñiyo hatavarcā bhavati nainena havirattave | chinatti kṛṣyā gordhanād yaṃ kravyādanuvartate

हिन्दी अर्थ

हाय, भ्र गुलियो, लोम; नख भादि किसी भी शरीराङ्ग के विकार में यकम कां० १२।सु०२ भथरवेवेद-भाष्य २७५ (नः) हमारी (गोषु श्रजाविषु) गौभो-वकरियो-भेडो भ है, तथा (यः भग्निः) भग्नि सदृश यक्ष्मरोग॒ (जनयोपनः) जनों क व्याकुल कर देता है उस को (निः नुदामसि) हम निकाल फंकते है, (यः) जो तु किं (जीवित्तथो- पनः जीवितो को व्याकुल कर देता है।

English

Death and Misfortune we expel, Malignity we drive away. O Agni, thou who eatest not the corpse, eat him who hateth us: him whom we hate we send to

अध्याय 12

श्लोक 2.38

मुहु॒र्गृध्यैः॒ प्र व॑द॒त्यार्तिं मर्त्यो॒ नीत्य॑ ।क्र॒व्याद् यान॒ग्निर॑न्ति॒काद॑नुवि॒द्वान् वि॒ताव॑ति

muhurgṛdhyaiḥ pra vadatyārtiṃ martyo nītya | kravyād yānagnirantikādanuvidvān vitāvati

हिन्दी अर्थ

यिन् देषा असंजतु यरिमन् मनुष्या उतः (घृतस्तारवः) घृताहृतियौं दवारा परमेश्वर का स्तबन. करे वाले है रोगिन् ! हृ्रा (त्वम्) तु (दिवम्) . मोद भौर कान्तिः के रिखर पर (दह) २७६. , भ्रथ॑र्ववेद-माष्यः कां १२। सू०२ केरता है । दिव् =मोद, कान्ति. (धातुपाठ) 1

English

thee. If the corpse-eating Agni, or a tiger leaving his lair, hath entered this our homestead,

अध्याय 12

श्लोक 2.39

ग्राह्या॑ गृ॒हाः सं सृ॑ज्यन्ते स्त्रि॒या यन्म्रि॒यते॒ पतिः॑ ।ब्र॒ह्मैव वि॒द्वाने॒ष्यो॒३ यः क्र॒व्यादं॑ निरा॒दध॑त्

grāhyā gṛhāḥ saṃ sṛjyante striyā yanmriyate patiḥ | brahmaiva vidvāneṣyo3 yaḥ kravyādaṃ nirādadhat

हिन्दी अर्थ

मतं कर ! (वि) प्रतिदिन (भत्र) इस पृथिवी पर (एव) ही (दीदिहि) रदेनी चाहिए,--एेसा विधान है । सीसे शृद्द्वं नदे धृदटवभम्नो पकंसुके च यत् । . (यत् शीर्षवितिम्) जो शिरोवेदना है उस को (सीसे) सीसमस्ममें

English

With beans prepared in butter I expel him: far let him go to fires that lie in waters. When, angered that a man hath died, we in our wrath have banished thee,

अध्याय 12

श्लोक 2.40

यद् रि॒प्रं शम॑लं चकृ॒म यच्च॑ दुष्कृ॒तम्।आपो॑ मा॒ तस्मा॑च्छुम्भन्त्व॒ग्नेः संक॑सुकाच्च॒ यत्

yad ripraṃ śamalaṃ cakṛma yacca duṣkṛtam| āpo mā tasmācchumbhantvagneḥ saṃkasukācca yat

हिन्दी अर्थ

सीसभस्म द्वारा शिरोवेदना दूरे होती है। यथा “सोठके चूर्णं कां० १२। सु०२ : भथवेवेद-माष्य - २७७ प्रतत होता है। यह शव कामभो दहन करतोदहै तथा नड भौर सीख का वर्णन हूभाहै, जिसद्वाया किवृक्ष हरे होतेरहैः भ्रौर लतारूपी हरी मालाए धारण करते है । “श्रव्यां रामायाम्” “काली भेड् के दु मे" हसा अर्थं भी सम्भव है । परीक्षणों दारा यहे देखना चाहिए कि इस दूष

English

Again hath Brāhmanaspati disposed thee for long life lasting through a hundred autumns. 188

अध्याय 12

श्लोक 2.41

ता अ॑ध॒रादुदी॑ची॒राव॑वृत्रन् प्रजान॒तीः प॒थिभि॑र्देव॒यानैः॑ ।पर्व॑तस्य वृष॒भस्याधि॑ पृ॒ष्ठे नवा॑श्चरन्ति स॒रितः॑ पुरा॒णीः

tā adharādudīcīrāvavṛtran prajānatīḥ pathibhirdevayānaiḥ | parvatasya vṛṣabhasyādhi pṛṣṭhe navāścaranti saritaḥ purāṇīḥ

हिन्दी अर्थ

उपबहैणे--उपबहण का श्रथ प्रायः. सिरहाना भर्थात् तकिया होता है । इस का सामान्य भरभिप्राय यह हो सकता है.कि शिरोवेदना में तक्िये परसिररखकरसो जाभ्रोतो सोने से श्राराम मिल जायेगा । परन्तु इस देखे (श्रथवं ० ९।८।१,१०) । सिर के रोगो की निवृत्ति “उदित होते हृए होता है । यथा “सं ते शीष्णेः कपालानि हदयस्य च यो विधुः । उद्यान्ना- “कदयपस्य वीवहुण विरवञ्चं विवृहामि ते (भ्रथवं ० २।३३।७) 1 “कच्वप' भें “विवृहामि", “ववण, तथा “उपवहुणे में एक ही “वृह धातु का भरयोग हँ, जिस का श्रथ है-हिसा (चुरादि, स्वादिगण) । इस प्रकार

English

I sweep afar, for sacrifice to Fathers, corpse-eating Agni who hath come among us, Although he saw this other, Jātavedas: in loftiest space let him inflame the caldron.

अध्याय 12

श्लोक 2.42

अग्ने॑ अक्रव्या॒न्निः क्र॒व्यादं॑ नु॒दा दे॑व॒यज॑नं वह

agne akravyānniḥ kravyādaṃ nudā devayajanaṃ vaha

हिन्दी अर्थ

“उपवहेण का भ्रथं है हिसा करने वाली आदित्य की रदिम'; हिसा = १. रामा == कृष्णा, काली ! यथा ““भ्रधोरामः सावित्रः” इति पशुसमाम्नाये २७० भरधरवेवेद-माष्य कां १२।सू०२ रोगकी हिसा भर्थात् विनांश। इस प्रकार “रवि, भौर “कदयप” (मलम्) यक्षमरूपी मल को (सीसे) सीसमस्म मे (सादयित्वा)

English

I drive corpse-eating Agni to a distance: sin-laden let him go to Yamas vassals.

अध्याय 12

श्लोक 2.43

इ॒मं क्र॒व्यादा वि॑वेशा॒यं क्र॒व्याद॒मन्व॑गात्।व्या॒ग्रौ कृ॒त्वा ना॑ना॒नं तं ह॑रामि शिवाप॒रम्

imaṃ kravyādā viveśāyaṃ kravyādamanvagāt| vyāgrau kṛtvā nānānaṃ taṃ harāmi śivāparam

हिन्दी अर्थ

स्थापित करके भ्रथवा विश्ीणे करके, (चीष वतम्) ˆ शिरोवेदना को (उप- श्या के लिये देषो (मन्त्र १९) । पर् (परेहि) तु परे चली जा, (यः ते एषः) जो यह तेरा मागं ‹देवयानात् इतरः) देवो के मागे से भिन्न है 1 मानो (ते चक्षुष्मते शुण्वते) तुक देखते हृए तथा सुतेते हृए के प्रति (्रवीमि) मै कहता हृं । (इह) इस देवों के जीवन कै दो मागे ह--पितृयाण तथा देवयान । देवयान सत्यमय कर भृत्ुकीमार से बच जाते है -। “सत्यं वै देवाः, भनृतं

English

Here let this other, Jātavedas, carry oblation to the Deities, fore- knowing. I quickly sweep away corpse-eating Agni, Death, with his bolt potdepriving men of motion.

अध्याय 12

श्लोक 2.44

अ॒न्त॒र्धिर्दे॒वानां॑ परि॒धिर्म॑नु॒ष्याऽणाम॒ग्निर्गार्ह॑पत्य उ॒भया॑नन्त॒रा श्रि॒तः

antardhirdevānāṃ paridhirmanuṣyā'ṇāmagnirgārhapatya ubhayānantarā śritaḥ

हिन्दी अर्थ

ईमे जीवा वि पूतेराहत्रशमुदू मद्रा देवहतिनों शच । . गर्भनाद्ः, सुरापानम् पुन केऽनतोचम्' काण १२१ सु०र२ भथवेवेद-माष्य । २७६९ (इमे जीवाः) ये जीवितः मनुष्य, (मृतैः) मूर्तो से (वि) वियुक्त

English

From household fire, well-knowing, I divide him: so in the world of Fathers be his portion. Corpse-eating Agni, toil-worn, meet for praises, I send away bypaths used by the Fathers.

अध्याय 12

श्लोक 2.45

जी॒वाना॒मायुः॒ प्र ति॑र॒ त्वम॑ग्ने पितॄ॒णां लो॒कमपि॑ गच्छन्तु॒ ये मृ॒ताः ।सु॒गा॒र्ह॒प॒त्यो वि॒तप॒न्नरा॑तिमुषामु॑षां॒ श्रेय॑सीं धेह्य॒स्मै

jīvānāmāyuḥ pra tira tvamagne pitṝṇāṃ lokamapi gacchantu ye mṛtāḥ | sugārhapatyo vitapannarātimuṣāmuṣāṃ śreyasīṃ dhehyasmai

हिन्दी अर्थ

हमारी (देवहूतिः) परमेदवर देवर के भरति पुकार या प्राना (मद्रा) कल्याण- हेम बह है, (नृतये हसाय) नाचने भौर हंसी-खुशी के लिये । (सुवीरासः) देम) हम परस्पर ज्ञानचर्चा करं । - कल्याणे सुखे च । . विदथम् = विदथानि - वेदनानि ( ज्ञानानि.); यथा (जीवेभ्यः) जीवित मनुष्यों के लिये (इमं परिधिम्) . इस मर्यादा.को

English

Stay there; keep watch among the Fathers: come not again to us by ways whereon Gods travel.

अध्याय 12

श्लोक 2.46

सर्वा॑नग्ने॒ सह॑मानः स॒पत्ना॒नैषा॒मूर्जं॑ र॒यिम॒स्मासु॑ धेहि

sarvānagne sahamānaḥ sapatnānaiṣāmūrjaṃ rayimasmāsu dhehi

हिन्दी अर्थ

कर्मो से व्याप्त (शतं शरदः) सौ वषो तक (जीवन्तः)- जीवित रहते हृए (मत्युम्) मृत्यु कों (तिरः दधताम्) तिरोहित करो, रोके रखो (पवंतेन) नेसे कि पव॑त द्वारा पर्व॑त पारवती शत्र को रोका जाता है । वेद द्वारा जीव॑न के लिये जो मर्यादाएं उपदिष्टं. हुई है, उने भें २८० भथववेद-माष्य . कां० १२1 सु०२ उपदेश्च को, परिधि शूप मर्यादा रूप किया जाता है, तज गौ, भ्रव, पुरुष तथा भ्न्य पश्चु भी भपनी-भपनी पूणं भाय तक जीवित रहते है, क्योंकि वेदों

English

They being cleansed and bright, the purifiers, kindle Sankasuka for our well-being. Impurity leaveth us and sin departeth: lighted by the good cleanser Agni cleanseth.

अध्याय 12

श्लोक 2.47

इ॒ममिन्द्रं॒ वह्निं॒ पप्रि॑म॒न्वार॑भध्वं॒ स वो॒ निर्व॑क्षद् दुरि॒ताद॑व॒द्यात्।तेनाप॑ हत॒ शरु॑मा॒पत॑न्तं॒ तेन॑ रु॒द्रस्य॒ परि॑ पाता॒स्ताम्

imamindraṃ vahniṃ paprimanvārabhadhvaṃ sa vo nirvakṣad duritādavadyāt| tenāpa hata śarumāpatantaṃ tena rudrasya pari pātāstām

हिन्दी अर्थ

(यति स्थ) जितने तुम हो, (भ्रनुपुवंम्) एक -पीछे दुसरा,-ईइस रकार (यतमानाः) प्रयत्न करते हृए,-(जरसम् वृणानाः) भौर जरावंस्था .. चढ़ो ! (सुजनिमा) उत्तम मनुष्य-जीवन देना वाला, तथा (सजोषाः) तुम को, (जीवनाय) जीवित रहने के लिये, (स्वम् भ्रायुः) पूणं भयु तक (यथा) जसे (भ्रहानि) दिन भ्रौर रात (भूतपूर्वम्) एक के पीछे दूसरा, (भवन्ति) होते रहते है, (यथा) जसे (ऋतवः). ऋतुए (ऋतुभिः साकम्) भन्य ऋतुरभ्रो के साथ, एकं के पीछे दूसरी (यन्ति) चलती है,

English

Agni the God, the Breaker-up, hath mounted to the heights of heaven. Released from all transgression, he hath from the curse delivered us.

अध्याय 12

श्लोक 2.48

अ॒न॒ड्वाहं॑ प्ल॒वम॒न्वार॑भध्वं॒ स वो॒ निर्व॑क्षद् दुरि॒ताद॑व॒द्यात्।आ रो॑हत सवि॒तुर्नाव॑मे॒तां ष॒ड्भिरु॒र्वीभि॒रम॑तिं तरेम

anaḍvāhaṃ plavamanvārabhadhvaṃ sa vo nirvakṣad duritādavadyāt| ā rohata saviturnāvametāṃ ṣaḍbhirurvībhiramatiṃ tarema

हिन्दी अर्थ

(यथा) जसे (पूर्वम्) पुवं के दित कोयापू्वंकी ऋतु को (भरपरः) भगला दिन या भ्रगली ऋतु (न जहाति) नहीं छोडती, (एवा) -इसी प्रकारः (घातः) . है विधाता ! (एषाम्) इन प्रजाजनों की (भ्रागरूषि) भायुरभरों को (कल्पय) तू संयोजित कर, या साम््यंयुक्त कर.। . भरहामि = “्रहद्च कृष्णमहरज्जं नं च'' (ऋऽ ६।९।१) मे अहः को कां०-१२.।घु०२ भथवेवेद-भाष्य २८९१. (भ्रदमन्वती) पथरोली नदी (रीयते) बह रहीरहै, (सखायः) हे

English

On Agni here, the Breaker-up, we wipe impurities away. Cleansed, fit for sacrifice have we become: may he prolong our lives.

अध्याय 12

श्लोक 2.49

अ॒हो॒रा॒त्रे अन्वे॑षि॒ बिभ्र॑त् क्षे॒म्यस्तिष्ठ॑न् प्र॒तर॑णः सु॒वीरः॑ ।अना॑तुरान्त्सु॒मन॑सस्तल्प॒ बिभ्र॒ज्ज्योगे॒व नः॒ पुरु॑षगन्धिरेधि

ahorātre anveṣi bibhrat kṣemyastiṣṭhan prataraṇaḥ suvīraḥ | anāturāntsumanasastalpa bibhrajjyogeva naḥ puruṣagandhiredhi

हिन्दी अर्थ

समय या इसी जन्म मेँ (जहीत) छोड दो (ये भ्रसन् दुरेवाः) जो है दुःख- के (उत्तरेम) हम उत्तीणं हो जांय । हृश्मा है । इस मन्व.मे मी “भ्रनमीवांन्" दाराः रोग ..गहिकःहोने का िदेल -जन्य कष्टों वाला जीवः प्रीत हौता-है 1 ईसीं सियेकहा है किं हम: “"रोगनिंबारक संगठन" का निदश्च मिलता है जिसमें कि.मिल कर व्यक्ति भ्रण करे किं हम. इस संगठन मे,रोगो को दूर करने का सम्मिलित

English

The Breaker-up, the Burster, the Destroyer, and the Silent One, These have expelled Consumption far, far off from thee ānd all thou hast,

अध्याय 12

श्लोक 2.50

ते दे॒वेभ्य॒ आ वृ॑श्चन्ते पा॒पं जी॑वन्ति सर्व॒दा।क्र॒व्याद् यान॒ग्निर॑न्ति॒कादश्व॑ इवानु॒वप॑ते न॒डम्

te devebhya ā vṛścante pāpaṃ jīvanti sarvadā| kravyād yānagnirantikādaśva ivānuvapate naḍam

हिन्दी अर्थ

भन्न; भौषध, तथा कमं १ तरेम रोग के कष्टे सेः पा-हो जाये । (वचसे) शरीर की कान्ति-के लिये -(वैरवदेवीम्) वैर॑वदेवनाम "वाली -के"मल-से शुद्ध होते हए (पावकाः) पविक्र करने वाली, भ्रग्नि के सदृ कर (शतं हिमाः) सौ वषं (मदेम) हमं भोद-अमोद श्रनुभव करते रहे । भरकरणानुसार यह भरं सङ्जतं श्रती्तँ होता है । अथर्व ० ८।७।४ परव वनी अर्थात् वश्वदेवी "वीरे, धधि, .रोग. के विनाशन भँ

English

We drive thee forth to other folk, to alien cattle, alien steeds, Thee the corpse-eating Agni, thee the Agni who bewilders men,

अध्याय 12

श्लोक 2.51

येऽश्र॒द्धा ध॑नका॒म्या क्र॒व्यादा॑ स॒मास॑ते ।ते वा अ॒न्येषां॑ कु॒म्भीं प॒र्याद॑धति सर्व॒दा

ye'śraddhā dhanakāmyā kravyādā samāsate | te vā anyeṣāṃ kumbhīṃ paryādadhati sarvadā

हिन्दी अर्थ

खग्र है, भरर पुरषो को जीवन प्रदामे करती है † बे भोषधियां गरक्ष्म का विनाश करती है देखो (अथर्व ° ८।७।२-रअादि) । वीरषः = निर्; विविध रोगो को -भवरुद्ध करने वा; या रोगविरोधिनी भषधियां । पानि = (उदीषीनैः) उपर को चदृते हए, . (वोयुमद्धिः) वायू सम्बन्धी (परेभिः) परले या भैष्टं (पथिभिः) मागो द्वाराः. (भरवरान्) नीचे के"या भरथेष्ठ कां०-१२।भु०२. भयरवेवेद-भाष्य २८३. विजर्वप्रा्त करने का भी वर्णन है। ।

English

Whereon the Deities, whereon men too have purified themselves, Exalting fatness, cleanse thyself, Agni, therein and mount to heaven. O Agni, kindled and adored, turn not away to visit us.

अध्याय 12

श्लोक 2.52

प्रेव॑ पिपतिषति॒ मन॑सा॒ मुहु॒रा व॑र्तते॒ पुनः॑ ।क्र॒व्याद् यान॒ग्निर॑न्ति॒काद॑नुवि॒द्वान् वि॒ताव॑ति

preva pipatiṣati manasā muhurā vartate punaḥ | kravyād yānagnirantikādanuvidvān vitāvati

हिन्दी अर्थ

करना होता है +. इस प्रथं की, पुष्टि मे “्रासीनाः” पद श्रत् भासन लगा . कर, यह भाव विशेष. महत्वे का है, देखो मन्त्र (३०) । “्रच्छदन- मे इसे प्राणायाम को इक्कीस वार श्रथवा यथा सामथ्यं करना - चाहिए । स्पष्ट हो नाता; है । भरकालमृत्यु पर विजय सने के पक्ष मेँ “रेभिः. पथि- भिः” का भयं हैःेष्ठ योगमार्गं तथा त्याग मावना से जीवनयात्रा का मागं, जीवव यत्रा का मार्ग । उवीचीनः वायुमद्धिः . पथिभिः = “किसी सुखासन से बैठ कर.“ कोष्ठ स्थित वायु को नाभि से उटां कर दोनो नाधिकं पृरटो- हारा वमन की भान्ति एक् दम बाहर फक देना चाहिए". (“पातञ्जल योगप्रदीप",

English

Shine brightly even there in heaven, so that we long may see the Sun.

अध्याय 12

श्लोक 2.53

अविः॑ कृ॒ष्णा भा॑ग॒धेयं पशू॒नां सीसं॑ क्रव्या॒दपि॑ च॒न्द्रं त॑ आहुः ।माषाः॑ पि॒ष्टा भा॑ग॒धेयं॑ ते ह॒व्यम॑रण्या॒न्या गह्व॑रं सचस्व

aviḥ kṛṣṇā bhāgadheyaṃ paśūnāṃ sīsaṃ kravyādapi candraṃ ta āhuḥ | māṣāḥ piṣṭā bhāgadheyaṃ te havyamaraṇyānyā gahvaraṃ sacasva

हिन्दी अर्थ

योगः १।३४) । इस प्रकार नामि से उदी. वायु, जिस भागं से नासिका पुटों तक यहचती ई, भर्थात् नीचे से ऊपर की श्रोर जाती है, उसे “उबीचीनेः वायुमद्िः पथिभिः द्वारा निदिष्ट किया गया है । र . -अतिक्रामन्तः भरवरान् परेभिः प्राणायाम करते समय, नाभि से भर्थात् नी से. (अवरान्); वायु को ऊपर की श्रोर (परेभिः) वे जते (वषानः) षारणः करते हए (मृत्योः पदं बोपयन्तः भौर मूतयु"के पैर को २८४ थर्वेवेद-माष्य कां० १२.। सुर व्यामोहत करते हृए (एत) योगमा की भ्रोर भाभ्रो ) (सधस्थे) उपासना

English

Wipe all away on lead and reed, on Agni, him who breaketh up, Then on a black-hued sheep, and on a cushion pain that racks. the head, Wipe off pollution, lay it in the lead and in the black-hued sheep,

अध्याय 12

श्लोक 2.54

इ॒षीकां॒ जर॑तीमि॒ष्ट्वा ति॒ल्पिञ्जं॒ दण्ड॑नं न॒डम्।तमिन्द्र॑ इ॒ध्मं कृ॒त्वा य॒मस्या॒ग्निं नि॒राद॑धौ

iṣīkāṃ jaratīmiṣṭvā tilpiñjaṃ daṇḍanaṃ naḍam| tamindra idhmaṃ kṛtvā yamasyāgniṃ nirādadhau

हिन्दी अर्थ

लिये इकटूढे बैठते के स्थान में (भ्रासीनाः) योगासन में बैठ कर (मत्युम्) भ्रकालमृत्यु को (नुदता ). धकेलो, (्रथ ) तत्यदचात् (जीवासः) जीवितं रोगरहितः, (सुरत्ना) भराभरूषणों द्वारा सुभरषित, (जनयः) सन्तानोत्पादिका (भ्रारोहन्तु) चढ़ा करर, प्रवेश पाया करे । भारोन्तु = घर की तीव पृथिवीतल से.ऊची श्रौर सीडियों वाली हारा भ्रांखो का तथा सपिः द्वारा शरीर का स्पदं ।

English

And headache in the cushion; then be cleansed and fit to sacri- fice. Go onward, Death, pursue thy special pathway apart from that which Gods are wont to travel.

अध्याय 12

श्लोक 2.55

प्र॒त्यञ्च॑म॒र्कं प्र॑त्यर्पयि॒त्वा प्र॑वि॒द्वान् पन्थां॒ वि ह्याऽवि॒वेश॑ ।परा॒मीषा॒मसू॑न् दि॒देश॑ दी॒र्घेणायु॑षा॒ समि॒मान्त्सृ॑जामि

pratyañcamarkaṃ pratyarpayitvā pravidvān panthāṃ vi hyā'viveśa | parāmīṣāmasūn dideśa dīrgheṇāyuṣā samimāntsṛjāmi

हिन्दी अर्थ

व्याकरोमि इविषाहमेतो ब्रह्मणां व्य शद कंरपयामि 1 (एतौ) इन दो को, (हविषा) हविः की दृष्टि से (म्रहम्) मै (व्याक इन दो को विशेषतया समथित करता हं । भर्थात् (पितुभ्यः) पितरों के दीघं भरायु देने वाले (भ्रायुषा). भन्न के साध. (मृजामि) सम्बरदं करवा हं ।

English

To thee I say it who hast eyes and hearest: great grow the number of these men around us! Divided from the dead are these, the living: now is our calling on the Gods successful. We have gone forth for dancing and for laughter: may we with brave sons speak to the

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।