Atharva Veda
12
अध्याय 12 / 20

Kanda 12

काण्ड 12

304 श्लोकभाग 4/5 · श्लोक 4.1–4.53

पूर्ण अध्याय पाठ53 श्लोक

अध्याय 12

श्लोक 4.1

वशा गौः।१-५३ कश्यपः।वशा।अनुष्टुप्, ७ भुरिक्, २० विराट्, ३१ उष्णिग्बृहतीगर्भा, ४२ बृहतीगर्भा।ददा॒मीत्ये॒व ब्रू॑या॒दनु॑ चैना॒मभु॑त्सत ।व॒शां ब्र॒ह्मभ्यो॒ याच॑द्भ्य॒स्तत् प्र॒जाव॒दप॑त्यवत्

vaśā gauḥ| 1-53 kaśyapaḥ| vaśā| anuṣṭup, 7 bhurik, 20 virāṭ, 31 uṣṇigbṛhatīgarbhā, 42 bṛhatīgarbhā| dadāmītyeva brūyādanu caināmabhutsata | vaśāṃ brahmabhyo yācadbhyastat prajāvadapatyavat

हिन्दी अर्थ

दवाय रभिषवधित, (चूतेन मिधाः) घृतभिधित है, वे (भ्रमृतस्य नाभयः) दुष मे शहद भौर घृत मिला कर सेवन करने से भ्रायु बदृती है । (निधिपाः) निधि का रक्षक गृहस्वामी, (एनं निघम्) इस निधि को, अननधिकारी हों । (भस्माभिः दत्तः) हम दवारा दी गई (निहितः) निधिभी मृहस्वामी जब तक गृहजीवन में रहे तब तक गृह्यसम्पत्ति पर गृह- स्वामी-कां हीं भ्रधिकार होना चाहिए । दान देने से भी जीवन स्वग॑मय

English

Odana for wife and husband. Numbered, they visit earth, these drops of moisture, commensu- rate with plants and vital

अध्याय 12

श्लोक 4.2

प्र॒जया॒ स वि क्री॑णीते प॒शुभि॒श्चोप॑ दस्यति ।य आ॑र्षे॒येभ्यो॒ याच॑द्भ्यो दे॒वानां॒ गां न दित्स॑ति

prajayā sa vi krīṇīte paśubhiścopa dasyati | ya ārṣeyebhyo yācadbhyo devānāṃ gāṃ na ditsati

हिन्दी अर्थ

(परिददूमः) हम सौपते ह । (नः) हमारे (तम्) उस बन्धु की (गोपायत) (नः) हम (जरसे) जरावस्था तक (निनेषत्) ले चते; (जरो) बदापा (नः) हमे (मृत्यवे) मृत्यु के लिये (परि ददातु) दे यां सौप दे, (श्रथः) तदनन्तर (पक्वेन सह) पके -भ्रत्न के साथ या कर्मो के परिपाक के साथं (सं भवेम) रादित्य की रदिमयां उस के दषुहैः वाण है, जिनं दारा वह ग्रन्धकारः,

English

Pour out the covering butter, spread it eastward: sprinkle this vessel over with the fatness. Greet this, ye Deities, with gentle murmur, as lowing cows wel- come their tender suckling. Thou hast poured oil and made the worlds: let heaven, unequal- led, be spread out in wide

अध्याय 12

श्लोक 4.3

कू॒टया॑स्य॒ सं शी॑र्यन्ते श्लो॒णया॑ का॒टम॑र्दति ।ब॒ण्डया॑ दह्यन्ते गृ॒हाः का॒णया॑ दीयते॒ स्वम्

kūṭayāsya saṃ śīryante śloṇayā kāṭamardati | baṇḍayā dahyante gṛhāḥ kāṇayā dīyate svam

हिन्दी अर्थ

(१) सुक्त (अनुवाक) ४ का विषय है “वचा । इन मस्व मे वद्या भधिकारी वर्गं तथा राजन्य के अनुयायी प्रजा मे; वेदवाणी कें प्रचारको वर्णन हभा है । यह वणेन कोई एेविहासिक वृत्त नही, अपितु सिद्धान्त के प्रतिपादन के लिये प्ररोचनालूप मे, काल्पनिक र्त है । (२) प्रकरण मे “ब्रह्य” के दो अथं दर्ाए है, १. परमेवर; तथा

English

To Deities, to Truth, to holy Fervour this treasure we consign,. this rich deposit, 193

अध्याय 12

श्लोक 4.4

वि॒लो॒हि॒तो अ॑धि॒ष्ठाना॑च्छ॒क्नो वि॑न्दति॒ गोप॑तिम्।तथा॑ व॒शायाः॒ संवि॑द्यं दुरद॒भ्ना ह्यु॑१च्यसे॑

vilohito adhiṣṭhānācchakno vindati gopatim| tathā vaśāyāḥ saṃvidyaṃ duradabhnā hyu1cyase

हिन्दी अर्थ

भे कई तो राजपक्ष के लोग होते ह भ्रौर कई प्रजा के नेतृपश्च के । राजा दोनों पक्षो के नेताभ्नों की वक्तृता्नों को सुनता है" मानो ये दोनो पर्ष के लोग दो कान रूप ह । कान सुनते ह । सुनने के कारण इन्द कान कहा है । . “वटकः” इसी प्रकार “श्रस्याः कणौ" मे वाणी कं दो कणं के है ।

English

To full old age may Destiny conduct us; may full old age deliver us to Mrityu. Then may we be with our prepared oblation. To the southern region, to Indra the Regent, to Tiraschirāji the

अध्याय 12

श्लोक 4.5

प॒दोर॑स्या अधि॒ष्ठाना॑द् वि॒क्लिन्दु॒र्नाम॑ विन्दति ।अ॒ना॒म॒नात् सं शी॑र्यन्ते॒ या मुखे॑नोप॒जिघ्र॑ति

padorasyā adhiṣṭhānād viklindurnāma vindati | anāmanāt saṃ śīryante yā mukhenopajighrati

हिन्दी अर्थ

ढ़ ढने चाहिए, ताकि उन्हें वाणी का स्वातन्त्य दिया जा. सके । ३३४४ ¦ अथववेद-माष्य कां० य सुऽ प्रचार करते ररह । राजा को जब यह ज्ञात हो जायगा कि ब्राह्मण लोग का प्रचार करे । नारद =नार (नृणां समूहः) +-द (दंप् शोधने) । सम्भवतः. नारद धर्माधिकारी दहै। य एनामवशामाह देवानां निर्हतं निधिम् । उमो तस्मै मवाशवौ प॑रिकरम्येषुमस्यतः ॥१५७॥ (यः) जो राजाधिकारी (देवानां निहितं निधिम् ) देवकोटिके

English

Whoever twitches up her ears is separated from the Gods. He deems he makes a mark, but he diminishes his wealth thereby.

अध्याय 12

श्लोक 4.6

यो अ॑स्याः॒ कर्णा॑वास्कु॒नोत्या स दे॒वेषु॑ वृश्चते ।लक्ष्म॑ कुर्व॒ इति॒ मन्य॑ते॒ कनी॑यः कृणुते॒ स्वम्

yo asyāḥ karṇāvāskunotyā sa deveṣu vṛścate | lakṣma kurva iti manyate kanīyaḥ kṛṇute svam

हिन्दी अर्थ

देकर (चिकीर्षति) यह करना चाहता है । = । + दरवाजे तोड़ कर राजा पर आक्रमण कर देते है। दुरः=द्वार (अथव ° मुखरूप या मुखिया बना करः (वलाम्) वशा की (श्रयाचन्) याचना की । म्रनादर को (न्येति) नितरां प्राप्त होता है।

English

They call it outrage on the priests when one retains her as his own. He who withholds the Cow of Gods from Rishis’ sons who ask the gift Is made an alien to the Gods, and subject to the Brāhmans’ wrath:

अध्याय 12

श्लोक 4.7

यद॑स्याः॒ कस्मै॑ चि॒द् भोगा॑य॒ बाला॒न् कश्चि॑त् प्रकृ॒न्तति॑ ।ततः॑ किशो॒रा म्रि॑यन्ते व॒त्सांश्च॒ घातु॑को॒ वृकः॑

yadasyāḥ kasmai cid bhogāya bālān kaścit prakṛntati | tataḥ kiśorā mriyante vatsāṃśca ghātuko vṛkaḥ

हिन्दी अर्थ

सब दिव्यगुणी जन राजा का निरादर करने लगते हैँ वाणी स्वात- . ही । इसलिये प्रजा द्वारा बाधित किया जा सकता है । देवानां निहितं प्राग मल्येश्चेभिभियायतें ।।२१॥ अथनां देवा अं्ुबन्नेवं हं विदुषो वशा ॥२२॥. कां०.१२। सु०४ भ्रथववेद-भाष्य ३४७

English

Then let him seek another Cow, whate’er his profit be in this. The Cow, not given, harms a man when he denies her at their prayer.

अध्याय 12

श्लोक 4.8

यद॑स्या गोप॑तौ स॒त्या लोम॒ ध्वाङ्क्षो॒ अजी॑हिडत्।ततः॑ कुमा॒रा म्रि॑यन्ते॒ यक्ष्मो॑ विन्दत्यनाम॒नात्

yadasyā gopatau satyā loma dhvāṅkṣo ajīhiḍat| tataḥ kumārā mriyante yakṣmo vindatyanāmanāt

हिन्दी अर्थ

पृथिवीपति से (वशाम्, याचेयुः) वा मार्गे, (श्रथ) तो भी (एनाम्) इस किवरा इस प्रकारकेज्ञानीकीहीदहै। वाणी-स्वातनत्य देना चाहिए, एेसा भ्रभिप्राय है । स्थान मे, (दुर्गा) दुःख पहुंचाती है (

English

Like a rich treasure stored away in safety is the Brāhmans’ Cow. Therefore men come to visit her, with whomsoever she is born. So when the Brāhmans come unto the Cow they come unto their own.

अध्याय 12

श्लोक 4.9

यद॑स्याः॒ पल्पू॑लनं॒ शकृ॑द् दा॒सी स॒मस्य॑ति ।ततोऽप॑रूपं जायते॒ तस्मा॒दव्ये॑ष्य॒देन॑सः

yadasyāḥ palpūlanaṃ śakṛd dāsī samasyati | tato'parūpaṃ jāyate tasmādavyeṣyadenasaḥ

हिन्दी अर्थ

नेताभ्रो के साथ मिल कर उमे उसके निवासि स्थान परजा कर कष्ट देवा वु्ञाम॑याचन् यस्मिन्नग्रे अजायत । तामेतां विध न्नारदः सद देवैर्दांजत ॥२४॥ (देवाः) देवों ने (वशाम्) वेदवाणी की (ञ्नयाचन्) याचना उससे (उदाजत) समस्त करतः है । ““भरप्रे भरजायत'” देखो (मन्त्र १४) । सहायता सभी देवकोटि के विद्धान् कर के वेदविद्या को समून्नति मेँ सहयोग दे । नारदःन=नार (नर नारियों का समाज) +-द (देप शोधने) ।.

English

For this is her withholding, to oppress these in another life. Thus after three years may she go, speaking what is not under- stood.

अध्याय 12

श्लोक 4.10

जाय॑माना॒भि जा॑यते दे॒वान्त्सब्रा॑ह्मणान् व॒शा।तस्मा॑द् ब्र॒ह्मभ्यो॒ देयै॒षा तदा॑हुः॒ स्वस्य॒ गोप॑नम्

jāyamānābhi jāyate devāntsabrāhmaṇān vaśā| tasmād brahmabhyo deyaiṣā tadāhuḥ svasya gopanam

हिन्दी अर्थ

३२९२ -अय्वेवेद माष्य कां० १२।यु०३ मक्षी यह पशाची विचार (इह) इस हमारे जीयन मेँ (मा प्रपास्त) हमारा रक्तन पीएु । (एनं नुदाम). इसे हम दुर करतें है, (अस्मत्) भ्रपने पास भ्राने का इसका मागे (अपरष्मः) दुर सेही रोक देते दहै) (श्रादित्याः) है । नास्तिके जीवन मे जीवन निरड कृश हो जाता है श्रौर पैशाची विचार . जीवन में मांस खाने लगते श्रौर रक्त पीने लगते ह । “ष्मः” दवारा यहु भी सूचित कियाद कि यत्नपुवेक हमे भीेसे विचारोंको रोकते रहना कोटि कै विद्वानों के लिये (वृतेन मिश्रम्) धृत सहित (इदं मवु) यह मधु

English

breathings, Unnumbered, scattered, beautiful in colour, the bright, ones have pervaded all refulgence. Heated, they rage and boil in agitation, they cast about their foam and countless bubbles

अध्याय 12

श्लोक 4.11

य ए॑नां व॒निमा॒यन्ति॒ तेषां॑ दे॒वकृ॑ता व॒शा।ब्र॒ह्म॒ज्येयं॒ तद॑ब्रुव॒न् य ए॑नां निप्रिया॒यते॑

ya enāṃ vanimāyanti teṣāṃ devakṛtā vaśā| brahmajyeyaṃ tadabruvan ya enāṃ nipriyāyate

हिन्दी अर्थ

उपकारी है, पिषले घत का पान, तथा घृत मिधित मघु का सेवन । कांऽ १२। सु० ३ प्रथवेवेद-भाष्य २९३ तथा वेदवेत्ता के (एतम्) इस माग का (अनिहत्य) हनन न करके, (शुद्ध- हस्तौ) शुदढध हाथो वाते तुम दोनों पति-पत्नी, (सुकृतौ) सुकर्मो वाले हो कर, -के दान दवारा इनकी सेवा करे । दृष्टान्त शूप मे. शुद्ध गोघृत तथा शुद्ध मवु पापों से रहित होना । पंशाची विचारों से रहित.होकर शुद्धहस्त पति पत्नी

English

Like a fond woman when she sees her husband—what time ye waters and these rice-grains

अध्याय 12

श्लोक 4.12

य आ॑र्षे॒येभ्यो॒ याच॑द्भ्यो दे॒वानां॒ गां न दित्स॑ति ।आ स दे॒वेषु॑ वृश्चते ब्राह्म॒णानां॑ च म॒न्यवे॑

ya ārṣeyebhyo yācadbhyo devānāṃ gāṃ na ditsati | ā sa deveṣu vṛścate brāhmaṇānāṃ ca manyave

हिन्दी अर्थ

तथा पिघते घी को (श्रासिञ्च). तु उदर में सीच, (समङड शग्धि) भ्रौर इस जानने वालो (भ्रव) इस प्राश्रममे (नः) हमारा (एष भागः) यह (अ्रथवं° १०।२।१७) । सपिः= पिघला घी । श्रासिञ्च=भ्राश्रम.का ३२४ भथर्ववेद-माष्यः काऽ १२। युज ड

English

mingle, Take up these rice-grains lying at the bottom: led them be blent and mingled with the waters. This water I have measured in the vessel, if as mid-points the rice-grains have been meted.

अध्याय 12

श्लोक 4.13

यो अ॑स्य॒ स्याद् व॑शाभो॒गो अ॒न्यामि॑च्छेत॒ तर्हि॒ सः ।हिंस्ते॒ अद॑त्ता॒ पुरु॑षं याचि॒तां च॒ न दित्स॑ति

yo asya syād vaśābhogo anyāmiccheta tarhi saḥ | hiṃste adattā puruṣaṃ yācitāṃ ca na ditsati

हिन्दी अर्थ

सत्याय च तपसे देवताभ्यो. निषि इव॒पि परि ददम एतम् । खजाने को (परि दद्मः) हमदेते्ैःयारसौपते ह। (नः) हमारा यह घन शेवधिम् = शेवम् (सुखनाम, निधं ३।६) ¬+ चिम्, सुख के लिये अह पंचाम्यहं ददामि ममेदु कर्मन् करुणेऽिं जाया। (ग्रहं पचामि) मै पकाता हूं, (ग्रहं ददामि) म देता हु, (मम इद् उ करुणे कर्मन् प्रधि) मेरे इस करुणामय कमम ही (जाया) मेरी पत्नी सम्मिलित है । (लोकः) सब लोगं (कौमारः पुत्रः) हमारे लिए कुमार-ुत्र

English

Present the sickle: quickly bring it hither. Let them out plants and joints with hands that harm not.

अध्याय 12

श्लोक 4.14

यथा॑ शेव॒धिर्निहि॑तो ब्राह्म॒णानां॒ तथा॑ व॒शा।तामे॒तद॒च्छाय॑न्ति यस्मि॒न् कस्मिंश्च॒ जाय॑ते

yathā śevadhirnihito brāhmaṇānāṃ tathā vaśā| tāmetadacchāyanti yasmin kasmiṃśca jāyate

हिन्दी अर्थ

जीवन का भ्रालम्बन करो । पति पत्नी जो कुट पकाए उस का दानं भी अन्नाभितलाषियो को करे । सब मनुष्यो को निज पृत्रबत् जार्ने । मानरहित होता हृभ्रां यह (एति) विचरता है 4 (नः) हेमारा (एतत्) यह होता । (क्वः) पका मोजन, (पुनः) अतिथि भादि की सेवा के पदचात्, कां० १२। सू: -अयवंवेद-भाष्य ३२५

English

So may the plants be free from wrath against us, they o’er whose realm Soma hath won dominion. Strew ye fresh grass for the boiled rice to rest on: fair let it be, sweet to the eye and spirit.

अध्याय 12

श्लोक 4.15

स्वमे॒तद॒च्छाय॑न्ति॒ यद् व॒शां ब्रा॑ह्म॒णा अ॒भि।यथै॑नान॒न्यस्मि॑न् जिनी॒यादे॒वास्या॑ नि॒रोध॑नम्

svametadacchāyanti yad vaśāṃ brāhmaṇā abhi| yathainānanyasmin jinīyādevāsyā nirodhanam

हिन्दी अर्थ

, गृहस्य में रह कर जीवन व्यतीत करने से कोई पाप नहीं । य्था चकने पर खाए, भ्रतिथि यज्ञ की .भरात्मा के बने रहने के लिये, भतिथि यज्ञ के लगातार बने रहने के लिये, यह् त्रत है" । समममानः= समम् (साथ) + ्ेतुर॑नदवान वयोय आयदेव 'पोरुषेयमपं मत्युं तुदन्तु ॥४९॥ जो (द्विषन्ति) हमारे साथ देष करते है (ते). वे (तम॑ः यन्तु) तमोगुण दवेषियों के साथ द्वेष न केर. उन्हे इस तमोमयी वृत्ति में रहने दे कर,

English

Hither come Goddesses with Gods, and sitting here taste in proper season this oblation. On the strewn grass. Vanaspati, be seated; commensurate with

अध्याय 12

श्लोक 4.16

चरे॑दे॒वा त्रै॑हाय॒णा दवि॑ज्ञातगदा स॒ती।व॒शां च॑ वि॒द्यान्ना॑रद ब्राह्म॒णास्तर्ह्ये॒ष्याः

caredevā traihāyaṇā davijñātagadā satī| vaśāṃ ca vidyānnārada brāhmaṇāstarhyeṣyāḥ

हिन्दी अर्थ

दुधदायक गौभ्रो, तथा खेती मे सहायक बलों का उपाजन करता रहे, ३२६ अथवेवेद-भाष्य कां १२। सु०.३ तथा (यावन्तः) जितने (देवाः) चोतमान नक्षत्र-तारागण (दिवि) धुलोक ्रभिप्रायं यह कि उक्त ज्योतियां जड हीती हई भी परस्पर में

English

Gods and Agnishtomas. Let thy fair form, wrought as by Tvashtar’s hatchet, mark these that yearn for thee within the vessel.

अध्याय 12

श्लोक 4.17

य ए॑ना॒मव॑शा॒माह॑ दे॒वानां॒ निहि॑तं नि॒धिम्।उ॒भौ तस्मै॑ भवाश॒र्वौ प॑रि॒क्रम्येषु॑मस्यतः

ya enāmavaśāmāha devānāṃ nihitaṃ nidhim| ubhau tasmai bhavāśarvau parikramyeṣumasyataḥ

हिन्दी अर्थ

हस ज्ञानवान् ज्योतियो को भी परस्पर सहानुभरतिपूवंक एक-दूसरे की सेवा करनी चाहिए । ोषधियों की भ्रम्नि, भोषपि के जलाने से प्रकट होती है । क्रो “्रादित्यव्णम्” भी.कहा है (यजु° ३१।१८) । व पुरुष के निमित्त (सं बभुव) हई ह, (ये भ्रन्ये पशवः) जो भन्य पशु वे (परिषापयाथः) सब भ्रोर से ढांपो (भ्रमोतं. वासः) धर में बुना वस्र से वच्न्वितं रहता है । भ्रमा गृहनाम (निषं० ३।४). ।

English

In sixty autumns may the Treasure-Guardian seek to gain heavenly light by cooked oblation. On this may sons and fathers live dependent. Send thou this mess to Fire that leads to heaven.

अध्याय 12

श्लोक 4.18

यो अ॑स्या॒ ऊधो॒ न वेदाथो॑ अस्या॒ स्तना॑नु॒त।उ॒भये॑नै॒वास्मै॑ दुहे॒ दातुं॒ चे दश॑कद् व॒शाम्

yo asyā ūdho na vedātho asyā stanānuta| ubhayenaivāsmai duhe dātuṃ ce daśakad vaśām

हिन्दी अर्थ

कां० १२। सुऽ ३. भ्रथवंवेद-माष्य ३२७ धन की कामना से (वदा) भसत्य बोलते हो, (समानम्) एक ही (तन्डम्) व्यापी यज्ञमावना का वस्त्र (अ्रभिसंवसानौ) पहिनते हए तुम दोनो, श्राप को लिपटे जानते हए । सादयाथः = बादल विद्यरणगत्यवसावनेषु । (भविष्यन्) होने वाला, तथा (सयोनिः) खब के लिये जो सामान्य घर है उसे

English

On the earth’s breast stand firmly as supporter: may Deities stir thee who ne’er hast shaken. So living man and wife with living children remove thee from the hearth of circling Agni. All wishes that have blessed those with fulfilment, having won all the worlds have met

अध्याय 12

श्लोक 4.19

दु॒र॒द॒भ्नैन॒मा श॑ये याचि॒तां च॒ न दित्स॑ति ।नास्मै॒ कामाः॒ समृ॑ध्यन्ते॒ यामद॑त्त्वा॒ चिकी॑र्षति

duradabhnainamā śaye yācitāṃ ca na ditsati | nāsmai kāmāḥ samṛdhyante yāmadattvā cikīrṣati

हिन्दी अर्थ

६२८ -: श्रथर्ववेद-भाष्य कां० १२। सु०३ (जुहोमि) मै तेरा-भ्राचाये भराहूत करता हूं । तीन प्रकारः की तनुषएुः भात्मा की होती है.। एकतो कृष्णा, स्थूल कहा है । तीसरी बुद्धिमयो, हते रुशती कहा. है । आश्वमः का भ्राचा्यं रजो- भरग्नि के लिये, (रकित भ्रसिताय) रक्षक भसित के लिये. (इषमते भादि

English

together. Let them plunge in both stirring-spoon and ladle: raise this and set it in a single vessel.

अध्याय 12

श्लोक 4.20

दे॒वा व॒शाम॑याच॒न् मुखं॑ कृ॒त्वा ब्राह्म॑णम्।तेषां॒ सर्वे॑षा॒मद॑द॒द्धेडं॒ न्येऽति॒ मानु॑षः

devā vaśāmayācan mukhaṃ kṛtvā brāhmaṇam| teṣāṃ sarveṣāmadadaddheḍaṃ nye'ti mānuṣaḥ

हिन्दी अर्थ

मनुष्य.कौ १०० वषो की है, “जीवेम शरदः शतम्” (श्रथवं. १९।६७।१) । हन्तु रद्मिभिः"" (ग्रथ. २।३२।१) ; रदिमयो द्वारा हनन. कहने से रदिमयां इषु रूप है । पक्वेन =“भन्नाद् रेतः, रेतसः पुरषः,” परिपक्व रेतसू, या पकं लिये; (एतम् त्वा) इस तुक को । दिष्टं नो ° । पूववत् (५५) । मेदव्रर पाथिव भाग तथा सामुद्रिक भाग दोनों का महाराज है। दोनों भागों तिरद्चीं राजयेः-परमेदवर समुद्र मे टेढ़ी गतियो से चलने. वाले

English

extension. Herein be cooked the buffalo, strong-pinioned: the Gods shall give the Deities this oblation.

अध्याय 12

श्लोक 4.21

हेडं॑ पशू॒नां न्येऽति ब्राह्म॒णेभ्योऽद॑दद् व॒शाम्।दे॒वानां॒ निहि॑तं भा॒गं मर्त्य॒श्चेन्नि॑प्रिया॒यते॑

heḍaṃ paśūnāṃ nye'ti brāhmaṇebhyo'dadad vaśām| devānāṃ nihitaṃ bhāgaṃ martyaścennipriyāyate

हिन्दी अर्थ

.अिव जन्तुर का भी - राजा है। मृत्यु उस का महास्वर है, जिस से कोई जो मार देता है प्राणित कर्ता है, जिस से सब भुवन प्राणित होते है. । इस से-भी ज्ञात होताकिं मृत्यु भ्रौर जीवन का दाता परभेद्वंर ही है । ३३० भरथदेवेद-माष्व कां १२, सु०३

English

Whate’er thy wife, away from thee, makes ready, or what, O wife, apart from thee, thy husband, Combine it all: let it be yours in common while ye produce one world with joint endeavour.

अध्याय 12

श्लोक 4.22

यद॒न्ये श॒तं याचे॑युर्ब्राह्म॒णा गोप॑तिं व॒शाम्।अथै॑नां दे॒वा अ॑ब्रुवन्ने॒वं ह॑ वि॒दुषो॑ व॒शा

yadanye śataṃ yāceyurbrāhmaṇā gopatiṃ vaśām| athaināṃ devā abruvannevaṃ ha viduṣo vaśā

हिन्दी अर्थ

(प्रतीच्यै दिशे) परिचम दिशा के लिये, (भ्रषिपतये वरूणाय) भ्रकि-, तुर को० । दिष्टं नो० । पूर्ववत् (४५) 1 वरुणाय = वरुण है जलाधिपद्ि । . यथा “बरुणोषाजधिपतिः" (अथर्व ० ५१२४।४), अर्थात् वरुण जलो का भषिपति है भायः वर्षा ऋतु =पु (पालने) +-दा+क़ (इन्, उणा० ५।२८, बाहुलकात्) । इस दुष्टि से “पुदाकु,- वरुण तथा रक्षिता हो सकता है, सपं रये में नदीं । व॑रुण हारा वर्षकारी षरमेर्वर का वणेन हृभा है । “वरुण का अर्थं शेष्ठ भी है ।

English

All these now dwelling on the earth, mine offspring, these whom, this woman here, my wife, hath borne me,

अध्याय 12

श्लोक 4.23

य ए॒वं वि॒दुषेऽद॒त्त्वाथा॒न्येभ्यो॒ दद॑द् व॒शाम्।दु॒र्गा तस्मा॑ अधि॒ष्ठाने॑ पृथि॒वी स॒हदे॑वता

ya evaṃ viduṣe'dattvāthānyebhyo dadad vaśām| durgā tasmā adhiṣṭhāne pṛthivī sahadevatā

हिन्दी अर्थ

को भन्न भी कहा है, “अहमन्नम्” (उदीच्य दिशे) उत्तर दिशाः के लिये, (अधिपतये सोमाय) अधि- (एतं त्वा) इख तुरू को० ॥ दिष्टं नो ,। युवत् (४५५) । क० १२। युर ३. भ्रथर्ववेदे-भः र ३३१.

English

Invite them all unto the vessel: knowing their kinship have the children met together. Swollen with savoury meath, the stream of treasures, sources of immortality blent with fatness

अध्याय 12

श्लोक 4.24

दे॒वा व॒शाम॑याच॒न् यस्मि॒न्नग्रे॒ अजा॑यत ।तामे॒तां वि॑द्या॒न्नार॑दः स॒ह दे॒वैरुदा॑जत

devā vaśāmayācan yasminnagre ajāyata | tāmetāṃ vidyānnāradaḥ saha devairudājata

हिन्दी अर्थ

अथं वीये भीहोताहै, देखो (मरथवं° १४।१।१-५) मन्तो की व्याख्या उणा० १।१४०) । सुमन् का विकृतरूप है ऽअ (वीये) ॥ सोम भ्र्थात् गोचर होता है । परमेदवर उदीची दिशा के प्राणियों का उत्पादक है, देखो मन्त्र (५८) की टिप्पणी । (घ्रवाये दिशे) धघुवादिक्षा के लिये, (श्रधिपतये विष्णवे) चवा-

English

Soma retains all these; in sixty autumns the Guardian Lord of Treasures may desire them.

अध्याय 12

श्लोक 4.25

अ॒न॒प॒त्यमल्प॑पशुं व॒शा कृ॑णोति॒ पूरु॑षम्।ब्रा॒ह्म॒णैश्च॑ याचि॒तामथै॑नां निप्रिया॒यते॑

anapatyamalpapaśuṃ vaśā kṛṇoti pūruṣam| brāhmaṇaiśca yācitāmathaināṃ nipriyāyate

हिन्दी अर्थ

विविधश्ूपो वाली वनस्पतिरयो की माला जिसने मानो ग्रीवा में पहनी हई रक्षक परमेश्वर केलिये, (इषुमतीभ्यः) वाणो वालीं सर्वोषधिूप परमेरवर (एतं त्वा) इस तुक को° । दिष्टं नो० पूर्ववत् (५५) । ३३२. भथरवेवेद-माष्य कार्ष पुन्द

English

The Lord of Treasures may desire this treasure: lordless on. every side be all the others. Our mess, presented seeking heaven, hath mounted in three divisions all three realms of Svarga.

अध्याय 12

श्लोक 4.26

अ॒ग्नीषोमा॑भ्यां॒ कामा॑य मि॒त्राय॒ वरु॑णाय च ।तेभ्यो॑ याचन्ति ब्राह्म॒णास्तेष्वा वृ॑श्च॒तेऽद॑दत्

agnīṣomābhyāṃ kāmāya mitrāya varuṇāya ca | tebhyo yācanti brāhmaṇāsteṣvā vṛścate'dadat

हिन्दी अर्थ

घुवा दिला पृथिवी । पूर्वादि दिशाएः भिन्न-भिन्न स्थानों की म, तथा ऋषिकंश की भ्रपेक्षया परिचम में है। इस प्रकार पूवं श्रादिंदि- शाए ध्रुव नही, स्थिररूप नहीं । परम्तु पृथिवी सदा च्रवखूपा है। पाप (12171, 7, भ्राष्टे) । परमेदवर सच्चे उपासकों के चित्त के मलों . तथा पापो को निगीर्णं कर देता है, ग्रीवा गृ निगरणे ।

English

May Agni burn the God-denying demon: let no carnivorous. Pis icha drink here.

अध्याय 12

श्लोक 4.27

याव॑दस्या॒ गोप॑ति॒र्नोप॑शृणु॒यादृचः॑ स्व॒यम्।चरे॑दस्य॒ ताव॒द् गोषु॒ नास्य॑ श्रु॒त्वा गृ॒हे व॑सेत्

yāvadasyā gopatirnopaśṛṇuyādṛcaḥ svayam| caredasya tāvad goṣu nāsya śrutvā gṛhe vaset

हिन्दी अर्थ

जाती है, या वात-पित्त-कफ भ्रादि दोर्षोको जो पी जाती है । रोग निवारणं करने के कारण भ्रोषधियां इषु या वाण ख्प है मानसिक भौर भ्राष्यात्मिक रोगों तथा मलों भौर पापोंकेनिवारणमें महौषधि रूप है ! यथाः--मेषचमसि भेषजं. गवेऽभ्वाय धुरषाय मेषम् ॥ सुखं मेषाय मेष्ये ॥ (यजु. ३।५९) । मन्त मे . परमेदवर को भेषज कहा-है 1 इरवधिंता दि बरहसतृयऽपिपतये सिवाय रके रषापिषमे।

English

We drive him off, we keep him at a distance. Ādityas and Angirases pursue him! This meath do I announce, mingled with butter, to the Angi- rases and the Ādityas.

अध्याय 12

श्लोक 4.28

यो अ॑स्या॒ ऋच॑ उप॒श्रुत्याथ॒ गोष्वची॑चरत्।आयु॑श्च॒ तस्य॒ भूतिं॑ च दे॒वा वृ॑श्चन्ति हीडि॒ताः

yo asyā ṛca upaśrutyātha goṣvacīcarat| āyuśca tasya bhūtiṃ ca devā vṛścanti hīḍitāḥ

हिन्दी अर्थ

(उर््वाये दिशे) ऊपर की विशा के लिये, (अधिपतये बृहरपतये) इषुमते) वर्षकं तथा वर्षारूपीः इषु वाले के लिये, (एतं त्वा) इस तुको (परिदेद्मः) हम देते है, खभपितं करते है, (नः तम्) हमारे उसर्बन्धु की का १२३ तुऽ ३; भअरथ्ववेद-माष्यः 1118 जाने के लिये । (दिष्टं) निर्दिष्ट भयु (नः) हमें (अत्र) इस जीवनम (जरते) बुढापे के लिये (निनेषत्) ते चले, (जरा) बुढापा (मृत्यवे) मृत्यु के .

English

With pure hands ne’er laid roughly on a Brahman go, pious. couple, to the world of Svarga. Of this have I obtained the noblest portion from that same world whence Parmeshthin gained

अध्याय 12

श्लोक 4.29

व॒शा चर॑न्ती बहु॒धा दे॒वानां॒ निहि॑तो नि॒धिः ।आ॒विष्कृ॑णुष्व रू॒पाणि॑ य॒दा स्थाम॒ जिघां॑सति

vaśā carantī bahudhā devānāṃ nihito nidhiḥ | āviṣkṛṇuṣva rūpāṇi yadā sthāma jighāṃsati

हिन्दी अर्थ

पके भ्रन्न के साथ (संभवेम) हम उत्पन्नहो। गदवियों तथा वृद्धियों के पालक तथा रक्षक. के लिये" रिव (गति वुद्धधोः) (बृहदा० ० २, ब्र० २ कं० १६) के भनुसार जीवात्मा पुनर्जन्म के लिये मातुयोनि मे निवास कर जनुष्य शिशु जन्म लेता है 1

English

it. Pour forth, besprinkle butter rich in fatness: the share of Angiras is here before us.

अध्याय 12

श्लोक 4.30

आ॒विरा॒त्मानं॑ कृणुते य॒दा स्थाम॒ जिघांसति ।अथो॑ ह ब्र॒ह्मभ्यो॑ व॒शा या॒ञ्च्याय॑ कृणुते॒ मनः॑

āvirātmānaṃ kṛṇute yadā sthāma jighāṃsati | atho ha brahmabhyo vaśā yāñcyāya kṛṇute manaḥ

हिन्दी अर्थ

(३) वशा का पर्याय छब्द मन्तो" “गौः पद पटिति है । इस के तीन रथं क्िहै, १. गौः वाडनाम (निधं १।११), २. स्तत नाम (निषं० ३।१६), (३) गौः -पृथिवीनाम (निषं० १।१) । इस दृष्टि से गौ वाणी; तथा “गोपति” पद का भ्रथं ह पृथिवी का पति राजन्य । (४) कई वैदिक विद्वान् “वा” का श्रयं करते ह "माभेवापिनी"

English

At play, in meeting led it not desert us, never give out to anyone besides me. I cook the offering, I present oblation: only my wife attends the holy service. A youthful world, a son hath been begotten. Begin a life that brings success and triumph.

अध्याय 12

श्लोक 4.31

मन॑सा॒ सं क॑ल्पयति॒ तद् दे॒वां अपि॑ गच्छति ।ततो॑ ह ब्र॒ह्माणो॑ व॒शामु॑प॒प्रय॑न्ति॒ याचि॑तुम्

manasā saṃ kalpayati tad devāṃ api gacchati | tato ha brahmāṇo vaśāmupaprayanti yācitum

हिन्दी अर्थ

(४५) मन्त्र २७, २८ सेज्ञात होता है कि वशा ऋवाभ्ोंका सकती । मन्तरं २७.की टिप्पणी में भथवेवेद के भा ङ्गंलमाषा मे भरनुवादकर््ता को श्र सु ४: अथवेवेद-गाष्यं . ३३१ वथा वला के स्वख्पं के परिज्ञानः के तिमे ्रथ्वेवेद १७।६।१४ का सामानि बिश्नती"",. भर्थात् ऋचा रौर सामगान को धारण करती हई

English

There is no fault in this, no reservation, none when it goes with friends in close alliance. We have laid down this vessel in perfection: the cooked mess shall re-enter him who cooked

अध्याय 12

श्लोक 4.32

स्व॒धा॒का॒रेण॑ पि॒तृभ्यो॑ य॒ज्ञेन॑ दे॒वता॑भ्यः ।दाने॑न राज॒न्योऽ व॒शाया॑ मा॒तुर्हेडं॒ न ग॑च्छति

svadhākāreṇa pitṛbhyo yajñena devatābhyaḥ | dānena rājanyo' vaśāyā māturheḍaṃ na gacchati

हिन्दी अर्थ

वद्या सथुदर मे नाची है । अभिप्राय यह कि जसे समुद्र अं जलीय लहर मानो नाचती कृदती ह । इ प्रकार उपासक के हृदय समुद्र मे ऋचाग्रो. भौर साममानों कौ .लहरे नाचती तथा कृद्तो है ।. जंसे कि कटा है कि “एताः बुद्धिग्राह्य अथं कयि गए है। ‹ (४४, ४६, ४७) ।. इन पर भी प्रका टाला है । (७) वचा के सम्बन्ध मे मनः, मनसा तथा ऋ ढा (३० ३१,३७)

English

it. To those we love may we do acts that please them. Away to darkness go all those who hate us!

अध्याय 12

श्लोक 4.33

व॒शा मा॒ता रा॑ज॒न्यऽस्य॒ तथा॒ संभू॑तमग्र॒शः ।तस्या॑ आहु॒रन॑र्पणं॒ यद् ब्र॒ह्मभ्यः॑ प्रदी॒यते॑

vaśā mātā rājanya'sya tathā saṃbhūtamagraśaḥ | tasyā āhuranarpaṇaṃ yad brahmabhyaḥ pradīyate

हिन्दी अर्थ

(३२, ३३); ब्रत: मातृरूप भें -मनः आदि का प्रयोमं अस्वामाविक नहीं है । (८) कच्छा के गुष्ठ ऊस तथा स्तनो का भी वन इभा है (श) ॥ . के अ्रभिप्रायोंको.भीदस्यादे। (वशाम्) वरीकृत वाणी, (याचदृम्यः) याचना करने वाले (ब्रह्म जव न तुक स्वरूप हो जाऊ, या तु ममः स्वरूप हो जाय, तो इसं जीवन में

English

Cow, ox, and strength of every kind approach us! Thus let them banish death of human beings.

अध्याय 12

श्लोक 4.34

यथाज्यं॒ प्रगृ॑हीतमालु॒म्पेत् स्रु॒चो अ॒ग्नये॑ ।ए॒वा ह॑ ब्र॒ह्मभ्यो॑ व॒शा म॒ग्नय॒ आ वृ॑श्च॒तेऽद॑दत्

yathājyaṃ pragṛhītamālumpet sruco agnaye | evā ha brahmabhyo vaśā magnaya ā vṛścate'dadat

हिन्दी अर्थ

वा है, स्वात्मवद है संयमित है । .यह जो कुछ बोलेगा थथाथं बोलेगा । य अर्वियेभ्यो याच ग्रो देवानां गां न -दित्ष॑ति ॥२॥ (यः) जो राजा (याचद्भ्यः) याचना करते हुए (भ्राषंयेम्यः) ऋषि स्वतन्ता को (न दित्सति) नहीं देना चाहता (खः) वह (प्रजया पशुभिः च) प्रजा भ्रौर पशनो समेत (विक्रीणीते). भरपने-भ्राप को बेच देता है, (च) भौर (उपं दस्यति) भन्यो के -समीप दास बन जता है; या उपक्षीण हो

English

Perfectly do the Agnis know each other, one visitor of plants and one of rivers, And all the Gods who shine and glow in heaven. Gold is the light of him who cooks oblation. Man hath received this skin of his from nature: of other animals not one is naked.

अध्याय 12

श्लोक 4.35

पु॒रो॒डाश॑वत्सा सु॒दुघा॑ लो॒के॑ऽस्मा॒ उप॑ तिष्ठति ।सास्मै॒ सर्वा॒न् कामा॑न् व॒शा प्र॑द॒दुषे॑ दुहे

puroḍāśavatsā sudughā loke'smā upa tiṣṭhati | sāsmai sarvān kāmān vaśā pradaduṣe duhe

हिन्दी अर्थ

कां० १२. सुर ४ ' भधर्वेवेद-भाष्य ३३७ गाम्; गौः वाङ नाम (निषं० १।१२) । जो राजा ऋषियों की 1766000 ° 9ृ06त्५ी नहीं देता, बह राज्यच्थुत भौर निर्धन हो कर त्व मँ दासवृत्ति से जीवनयापन करता है । . . कूटयांस्व सं शीयन्ते इलोणयां काटम॑हैति । बण्डयां दहन्ते गृहाः काणयां दीयते स्वम् ॥३॥

English

Ye make him clothe himself with might for raiment. Odana’s mouth is a home-woven vesture.

अध्याय 12

श्लोक 4.36

सर्वा॒न् कामा॑न् यम॒राज्ये॑ व॒शा प्र॑द॒दुषे॑ दुहे ।अथा॑हु॒र्नार॑कं लो॒कं नि॑रुन्धा॒नस्य॑ याचि॒ताम्

sarvān kāmān yamarājye vaśā pradaduṣe duhe | athāhurnārakaṃ lokaṃ nirundhānasya yācitām

हिन्दी अर्थ

(सं शीर्यन्ते) जीर्ण-लीणं हो जाती है, (इलोणया) लंगड़ीनीति के दारा (काटम्). काटे गए गढ़ में (अ्रदंति) दुःख भोगता है । (बण्डया) प्रलोभन की नीति इारा (गृहा) गृहवासी (दह्यन्ते) दग्ध हो जाते है, (काणया) निमीलन की नीति दारा (स्वम्) उस का निजघन (दीयते) क्षीण हो भिन्न नीतियों कौ चाले चलताहै तोउनका जो परिणाम होता ह उसे की नीति (२) इलोणानीति, भर्थात् वचन दे कर उसे पुरा न करना, कुछ भं मे दिये वचन को पूरा करना, भ्रव्िष्ट वचन स्थगित कर देना । तयां वश्नायाः संविदं दुरद्भ्नां शुशस्यसें ॥४॥

English

Whatever thou may say at dice, in meeting, whatever falsehood through desire of riches, Ye two, about one common warp uniting, deposit all impurity within it. Win thou the rain: approach the Gods. Around thee thou from the skin shalt make the smoke

अध्याय 12

श्लोक 4.37

प्र॒वी॒यमा॑ना चरति क्रु॒द्धा गोप॑तये व॒शा।वे॒हतं मा॒ मन्य॑मानो मृ॒त्योः पाशे॑षु बध्यताम्

pravīyamānā carati kruddhā gopataye vaśā| vehataṃ mā manyamāno mṛtyoḥ pāśeṣu badhyatām

हिन्दी अर्थ

२, शक्ना = धूम भ्रादि से;. वेज भ्रादि से (यचु° ३७।६), महि दयानन्द । - , ३३य -अ्य्ववेदमाष्य का० १२। सु०४ चू कि है वशे ! (दुरदभ्ना =दुरादभ्ना) तु कषठिनाई से वबाई जाने वाली. । पति का पराजय हो जाने पर उस का मुख पीला पड जाता हँ । गोपतिम् = (श्रस्याः) इस वाणी के (पदोः) प्रतिपाद्य दो विषयों के. (्रधि-

English

rise upward. Soon to be, decked with butter, all-embracing, come to this world wherewith one birth unites

अध्याय 12

श्लोक 4.38

यो वे॒हतं॒ मन्य॑मानो॒ऽमा च॒ पच॑ते व॒शाम्।अप्य॑स्य पु॒त्रान् पौत्रां॑श्च या॒चय॑ते॒ बृह॒स्पतिः॑

yo vehataṃ manyamāno'mā ca pacate vaśām| apyasya putrān pautrāṃśca yācayate bṛhaspatiḥ

हिन्दी अर्थ

से भीला हमा पृथिवीपति, (नाम) नम्रता को (विन्दति) प्राप्त होता ह। द्वारा; (उप जिघ्रति) समीप हो कर सुती! है । पदोः; देखो “पदवायम्” . भय के कारणः मूख के पीलेपन का वणन हुभ्रा है, भौर मन्व में मयके कारणं छूटे पसीने का वर्णेन किया है । । यो अंस्या कणीवार्छ्ुनोत्या स देवेषु शते ।

English

thee. In many a shape hath heaven transformed its body, as in itself is known, of varied eolour. Cleansing the bright, the dark form hath it banished: the red form in the fire to thee I offer.

अध्याय 12

श्लोक 4.39

म॒हदे॒षाव॑ तपति॒ चर॑न्ती॒ गोषु॒ गौरपि॑ ।अथो॑ ह॒ गोप॑तये व॒शाद॑दुषे वि॒षं दु॑हे

mahadeṣāva tapati carantī goṣu gaurapi | atho ha gopataye vaśādaduṣe viṣaṃ duhe

हिन्दी अर्थ

१. उपजिघ्रति- इस दवार ब्रह भ्रौर वेदश्च कौ वाणी को विषैली सपिणीः . , कटा है । विषैला सपं सुघने मात्र से व्यक्ति को मार देता दह । यथा “'्पुान्नपि गजो कां० १२। सु०४ भ्रयर्ववेद-भाष्य ३३९ का यल करता है, (सः) वह् (देवेषु) देवसंघ मे (वृरचते) भ्रपने-भराप को यँ इन का केवल देन करता हूं -वह देवसंघ मेँ (स्वम्) भ्रपने श्राप को (कनीयः) छोटा (कुरुते) कर लेता है । 1

English

To the eastern region, to Agni the Regent, to Asita the Protector, Āditya the Archer, we present thee, this offering of ours. Do ye preserve it from aggression

अध्याय 12

श्लोक 4.40

प्रि॒यं प॑शू॒नां भ॑वति॒ यद् ब्र॒ह्मभ्यः॑ प्रदी॒यते॑ ।अथो॑ व॒शाया॒स्तत् प्रि॒यं यद् दे॑व॒त्रा ह॒विः स्यात्

priyaṃ paśūnāṃ bhavati yad brahmabhyaḥ pradīyate | atho vaśāyāstat priyaṃ yad devatrā haviḥ syāt

हिन्दी अर्थ

तत॑ः किशोरा न्ियन्ते वस्सोश्च घातुको इकः ॥७॥ (बालान्) बालों को (प्छृन्तति) काटता है, (ततः) तदनन्तर (किशोराः) का (वातुकः). हनन करताहै १, न, . बालान् श्रकृन्तति वाणी या वक्तृता की “बालं की खाल.उता- लोभी कर्मं चारी (अजीहिंडत्) . सीव कर भनादृत करता हँ, (ततः) बुक त्न .कर् दिशुभों को सी मार देता हैः ताकि देते राजा के वरः काही र

English

Protector, to Yama the Archer, we present, etc. (as in stanza 55)

अध्याय 12

श्लोक 4.41

या व॒शा उ॒दक॑ल्पयन् दे॒वा य॒ज्ञादु॒देत्य॑ ।तासां॑ विलि॒प्त्यं भी॒मामु॒दाकु॑रुत नार॒दः

yā vaśā udakalpayan devā yajñādudetya | tāsāṃ viliptyaṃ bhīmāmudākuruta nāradaḥ

हिन्दी अर्थ

३४० . श्रयववेद-माष्य कार १्।सूग् तदनन्तर (कुमाराः) कूमार (न्रियन्ते) मर जाते है, (अ्रनामनात्) भौर „ इस मन्म मी युद्ध हौ जाने पर युदधका बुरा परिणाम दर्शाया हं । कुमाराः यौवन प्राप्त संनिकं । किदोराः= जो कि यौवन प्राप्त नहीं की उपस्थिति में । गौः==पृथिवी (निधं १।१) 1 लोम भ्रजीहिडत् =

English

To the western region, to Varuna the Regent, to Pridāku the Protector, to Food the Archer, we present, etc. To the northern region, to Soma the Regent, to Svaja the Protec- tor, to Thunderbolt the

अध्याय 12

श्लोक 4.42

तां दे॒वा अ॑मीमांसन्त व॒शेया३मव॒शेति॑ ।ताम॑ब्रवीन्नार॒द ए॒षा व॒शानां॑ व॒शत॒मेति॑

tāṃ devā amīmāṃsanta vaśeyā3mavaśeti | tāmabravīnnārada eṣā vaśānāṃ vaśatameti

हिन्दी अर्थ

वक्तृता के किसी छोटे भ्रंश कोले कर “उस की बाल की खाल उतार कर" यदस्याः पर्पंलनं शद् इसी समस्य॑ति । जैसे (दासी) गृहदासो (शकृत्) गोबर का (समस्यति) संग्रह करती. इस वाणी की जड़ को (पल्पूलनम् = पल्युलनम्) काटने वाले साधनो का (यद्) जो संग्रह करती है, (ततः) . उस से पृथिवीपति का (भ्रपरूपम्) से (भ्व्येष्यत्) विगत नहीं हो पाता, छूटता नहीं ।

English

Archer, we present, etc. To the stedfast region, to Vishnu the Regent, to Kalmāshagriva the Protector, to Plants the

अध्याय 12

श्लोक 4.43

कति॒ नु व॒शा ना॑रद॒ यास्त्वं वेत्थ मनुष्य॒जाः ।तास्त्वा॑ पृच्छामि वि॒द्वांसं॒ कस्या॒ नाश्नी॑या॒दब्रा॑ह्मणः

kati nu vaśā nārada yāstvaṃ vettha manuṣyajāḥ | tāstvā pṛcchāmi vidvāṃsaṃ kasyā nāśnīyādabrāhmaṇaḥ

हिन्दी अर्थ

(नञ्) +-वि+इष् (गतौ ) +-स्य +तु । लवन =काटना तथा काटने नायंानाभि नयते देवान्त्सन््णान् व॒शा । (वशा) वेदवाणी (जायमाना) प्रकट होती हई, (सब्राह्मणान्) राजा की निज सुरक्षा रूप कहते है ।

English

Archers, we present, etc. To the upper region, to Brihaspati the Regent, to Svitra the Protector, to Rain the Archer, we present thee, this offering of ours. Do ye preserve it from

अध्याय 12

श्लोक 4.44

वि॒लि॒प्त्या बृ॑हस्पते॒ या च॑ सू॒तव॑शा व॒शा।तस्या॒ नाश्नी॑या॒दब्रा॑ह्मणो॒ या आ॒शंसे॑त॒ भूत्या॑म्

viliptyā bṛhaspate yā ca sūtavaśā vaśā| tasyā nāśnīyādabrāhmaṇo yā āśaṃseta bhūtyām

हिन्दी अर्थ

कां० १२।सू०४ भरथवंवेद-माष्य भ ३४१. “वहा द्वारा वेदवाणी का वर्णेन हृभा है । रेतसे तथा इस प्रकार के भन्य होना चाहिए, इस से .राजा- की भी आत्मरक्षा हो सकेगी । एसे विद्धान् भ्रपनी वाणी द्रा, वेदवाणी के भनुकूल ही, प्रजा को सदपदेश दग, जिस से राष्टरोन्नति हो कर.राजा की स्थिरता बनी रहेगी । .. य॒ एनां वंनिमायन्ति तेषां देवकृता वशा । (तेषाम्) उन के लिये, (वश्चा) वेदवाणी (देवकृता) परमेश्वरः देव ने

English

aggression. To full old age may Destiny conduct us, may full old age deliver us to Mrityu. Then may we

अध्याय 12

श्लोक 4.45

नम॑स्ते अस्तु नारदानु॒ष्ठु वि॒दुषे॑ व॒शा।क॒त॒मासां॑ भी॒मत॑मा॒ यामद॑त्त्वा परा॒भवे॑त्

namaste astu nāradānuṣṭhu viduṣe vaśā| katamāsāṃ bhīmatamā yāmadattvā parābhavet

हिन्दी अर्थ

को हानि पहंचाती है (यः) जो राजा कि (एनाम्) इख . वेदवाणी को वनिम् = वनु याचने । वेदवाणी के भचार यान प्रचार का भ्रभिकार, यदि राजा, भ्रपने हाथ में रलता है तो इस से वेदज्ञो का जीवन कष्टमंय हो जाता है। परमेश्वर नेतो से विद्वानों. को, प्रचारार्थं, वेद का अधिकार य अर्षियेम्यो याचं॑दृभ्यो देवानां गां न दित्स॑ति । ।यः) जो राजा (याचदम्यः) याचना करने वाली (आषेमेम्यः) ऋषि सन्तानो को - (देवानाम्) देवों की (गाम्) वेदवाणी. पर भ्रधिकार "(न दित्सति) नहीं देना चाहता, (सः) वह (देवेषु) देव समाज मे (भा वृदचते).

English

be with our prepared oblation. On the duty of giving cows to Brāhmans, and the sin and danger of withholding the gift Give the gift, shall be his word: and straightway they have bound the Cow

अध्याय 12

श्लोक 4.46

वि॒लि॒प्ती या बृ॑हस्प॒तेऽथो॑ सू॒तव॑शा व॒शा।तस्या॒ नाश्नी॑या॒दब्रा॑ह्मणो॒ य आ॒शंसे॑त॒ भूत्या॑म्

viliptī yā bṛhaspate'tho sūtavaśā vaśā| tasyā nāśnīyādabrāhmaṇo ya āśaṃseta bhūtyām

हिन्दी अर्थ

, रस्ते अदत्ता पुरुषं याचितां च न दित्स॑ति ॥१३॥ (भरस्य) इस राजा का (यः वशा भोगः) वेदवाणी दवारा सम्पन्न जो ¦ पुरुष की (दिस्ते). हिसा कंर देती है, जीकि (याचताम्) याचना की गई को (न दित्सति) नहीं देना चाहता । निजभोगो के सम्पादन की इच्छान करे, क्योंकि वेद प्रचारनहोने से म बहुवचन, श्रौर “गाम्” में एक वचन होने से, एक गौ के लिये बहतो की

English

For Brāhman priests who beg the boon. That bringeth sons and progeny. He trades and traffics with his sons, and in his cattle suffers loss.

अध्याय 12

श्लोक 4.47

त्रीणि॒ वै व॑शाजा॒तानि॑ विलि॒प्ती सू॒तव॑शा व॒शा।ताः प्र यच्छेद् ब्र॒ह्मभ्यः॒ सोऽनाव्र॒स्कः प्र॒जाप॑तौ

trīṇi vai vaśājātāni viliptī sūtavaśā vaśā| tāḥ pra yacched brahmabhyaḥ so'nāvraskaḥ prajāpatau

हिन्दी अर्थ

माग प्रतीत होती है । यदि “गौ का भ्र्थं “गोप्राणी" किया जाये तो राजा क्रिस को गौ दे, यहु राजा के निर्वय के लिये प्रदन पदा हो जायेगा । यदि णाम्, देवानाम्“ मभेद यह हैकिजोतो वेद प्रचार करना चाहते हं उन्हें . शदो द्वारा निंदिष्ट किया है कामेतदच्छायन्ति यस्मिन् फारच जाय॑ते ॥१४॥ . (या). जैसे (निहितः) सुरक्षिल (शेव्रधिः) सुखदायक खजाना होता

English

Who will not give the Cow of Gods to Rishis children when they beg. They perish through a hornless cow, a lame cow sinks them in a pit. Through a maimed cow his house is burnt: a one-eyed cow destroys his wealth.

अध्याय 12

श्लोक 4.48

ए॒तद् वो॑ ब्राह्मणा ह॒विरिति॑ मन्वीत याचि॒तः ।व॒शां चेदे॑नं॒ याचे॑यु॒र्या भी॒माद॑दुषो गृ॒हे

etad vo brāhmaṇā haviriti manvīta yācitaḥ | vaśāṃ cedenaṃ yāceyuryā bhīmādaduṣo gṛhe

हिन्दी अर्थ

बन्ध इसलिये लगाता है कि इस के प्रचार द्वारा उस के निजभोग कहीं समाप्त न हो. जरे, क्योंकि वेदवाणी तो “तेन त्यक्तेन भृज्जीयाः, मा गृधः” का उपदेश देती है कां० १२।सु०४ भयर्वैवेद-माष्य र जिस किसी ऋषि को को यथार्थं रूप मे वेदभनत्रो का ज्ञान प्रकट यथैना नन्यरिमन् जिनीयादेवास्यां निरोधनम् ॥१५॥

English

Fierce fever where her droppings fall attacks the master of the kine.

अध्याय 12

श्लोक 4.49

दे॒वा व॒शां पर्य॑वद॒न् न नो॑ऽदा॒दिति॑ हीडि॒ताः ।ए॒ताभि॑रृ॒ग्भिर्भे॒दं तस्मा॒द् वै स परा॑भवत्

devā vaśāṃ paryavadan na no'dāditi hīḍitāḥ | etābhirṛgbhirbhedaṃ tasmād vai sa parābhavat

हिन्दी अर्थ

निरोध (एवा) एेसा ही है (यथा) जैसे कि (एनान्) इन ब्राह्यणो को वाणी; (२) ब्राह्मणों की वेदवाणी के प्रचारा्थे. वशीकृत निज वाणी का , भ्रपनी मांग को वे सफल बनाना चाहते हँ । । सती ) भ्रज्ञात रूप में (चरेत् एव). विचरती ही रदे (नारद) है नर॑समाज के

English

So have they named her Vasa, for thou art called uncontrollable. The malady Viklindu springs on him from ground whereon she stands, And suddenly, from fell disease, perish the men on whom she sniffs.

अध्याय 12

श्लोक 4.50

उ॒तैनां॑ भे॒दो नाद॑दाद् व॒शामिन्द्रे॑ण याचि॒तः ।तस्मा॒त् तं दे॒वा आग॒सोऽवृ॑श्चन्नहमुत्त॒रे

utaināṃ bhedo nādadād vaśāmindreṇa yācitaḥ | tasmāt taṃ devā āgaso'vṛścannahamuttare

हिन्दी अर्थ

विदानो की सुरक्षित वेदवाणी रूपी खजाने को (भवचयाम्) श्रवा (प्राह) जायेगी (तस्मे) उस भधिकारी को, (उभौ) दोनों (भवाशर्वौ ) भव भ्रौर शवं भव प्रधानमन्त्री; शवं = सेनापति । ये दोनों भधिकारी.उसे वाक-वाणी द्वास वीधते है, उप्त की निन्दा करते है । यो अंस्या उघो न वेदाथो अस्या स्तनानुत । , (यः) जो (अस्याः) इस वा भ्र्थात् वेद माता के, तथा वेद भ्रचारक की वाणी के (ऊषः) दुग्घाशय को (न, वेद) नहीं जानता, - (भ्रथ

English

If to his own advantage one applies the long hair of her tail, His colts, in consequence thereof. die, and the wolf destroys his calves. If, while her master owneth her, a carrion crow hath harmed her hair,

अध्याय 12

श्लोक 4.51

ये व॒शाया॒ अदा॑नाय॒ वद॑न्ति परिरा॒पिणः॑ ।इन्द्र॑स्य म॒न्यवे॑ जा॒ल्मा आ वृ॑श्चन्ते॒ अचि॑त्त्या

ye vaśāyā adānāya vadanti parirāpiṇaḥ | indrasya manyave jālmā ā vṛścante acittyā

हिन्दी अर्थ

दगधाशय तथा स्तनो दाय हौ (भस्म) इस क लिये (दुहे) दरष.देने लगे । . भ्रभिप्राय.यह है कि राजा प्रथवा राज्याधिकारी यह कहता है किः :. इस वशा-माता का न तो दुग्धाशय है रौर न स्तन है, भतः वशा निद्पयोगी . वा के दुग्धाय भौर स्तन है, भौर वह दूष देती है, प्रचार के लिये कां० १२।सु०४ भ्रथवेवेद-माष्य ३४१

English

His young boys die thereof, Decline o’ertakes them after fell disease. What time the Dāsi woman throws lye on the droppings of the

अध्याय 12

श्लोक 4.52

ये गोप॑तिं परा॒णीयाथा॒हुर्मा द॑दा॒ इति॑ ।रु॒द्रस्या॒स्तां ते हे॒तिं परि॑ य॒न्त्यचि॑त्त्या

ye gopatiṃ parāṇīyāthāhurmā dadā iti | rudrasyāstāṃ te hetiṃ pari yantyacittyā

हिन्दी अर्थ

७१।५) । इस पर यास्कमुनि लिखते हँ कि “श्रषेन्वा ह्यंष चरति मायया कृत्रिम गौ के साथ विचरता है, जो कि भ्रघेनु है, दुव नहीं दे रही, तथा एसे वृक्ष की सेवा करता है, जो फि फल श्रौर पुप्प नहीं दे रहा” (ऋ० पाठञ्चाला भादि में जिसने केवल वेदवाणी सुनी ही है, परन्तु उस के फलों है" वह न दूष. देने वाली गौ के साथ विचरता हजो कि मायाखूप है, वेदवाणी की प्रतिकृति मात्रै, वह इस श्रोता के लिये वाणी दवारा दोहे

English

Cow, Misshapen birth arises thence, inseparable from that sin. For Gods and Brāhmans is the Cow produced when first she springs to life,

अध्याय 12

श्लोक 4.53

यदि॑ हु॒तं यद्यहु॑ताम॒मा च॒ पच॑ते व॒शाम्।दे॒वान्त्सब्रा॑ह्मणानृ॒त्वा जि॒ह्मो लो॒कान्निरृ॑च्छति

yadi hutaṃ yadyahutāmamā ca pacate vaśām| devāntsabrāhmaṇānṛtvā jihmo lokānnirṛcchati

हिन्दी अर्थ

है वेद प्रौर उस का फल है प्रणव, भर्थात् परमेरवर । इस प्रकार समुच्चित वेदवाणी है गौ, चार वेददहैँ चार स्तन, श्नौर तथा स्तनो से रहित नहँ । श्रतः फल प्रदा है । न नास्मै कामाः सर्ध्यनतेवामद्॑छा चिकीषति ॥१९॥ ˆ (दुरदभ्ना) दर्वाजो को. तोड़ देने वाली कला (एनम्) इस के समीप दित्सति) नहीं देना चाहता । . (अरसप) इस के लिए. (कामाः). कामनाएु .

English

Hence to the priests must she be given: this they call guarding private wealth. The God-created Cow belongs to those who come to ask for her.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।