Brahmavaivarta Purana
1
अध्याय 1 / 4

Brahma Khanda — The Cosmic Krishna

ब्रह्मखण्ड

2 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय 1

श्लोक 1

सच्चिदानन्दरूपाय कृष्णायाक्लिष्टकर्मणे ।नमो वेदान्तवेद्याय गुरवे बुद्धिसाक्षिणे

saccidānandarūpāya kṛṣṇāyākliṣṭakarmaṇe | namo vedāntavedyāya gurave buddhisākṣiṇe

हिन्दी अर्थ

सच्चिदानन्दस्वरूप, अक्लिष्टकर्मा, वेदान्त द्वारा जानने योग्य, गुरु और बुद्धि के साक्षी कृष्ण को नमस्कार।

English

Salutation to Krishna who is of the nature of Sat-Chit-Ananda (existence-consciousness-bliss), whose actions are effortless, who is known through Vedanta, who is the Guru, and the witness of all intelligence.

अध्याय 1

श्लोक 7

एकमेवाद्वितीयं ब्रह्म निर्गुणं परमार्थतः ।सगुणं भक्तिसुलभं कृष्णाख्यं परमेश्वरम्

ekamevādvitīyaṃ brahma nirguṇaṃ paramārthataḥ | saguṇaṃ bhaktisulaṃbhaṃ kṛṣṇākhyaṃ parameśvaram

हिन्दी अर्थ

परमार्थ में ब्रह्म एकमेव अद्वितीय और निर्गुण है। भक्ति से सुलभ सगुण रूप में वही कृष्ण नाम से परमेश्वर कहलाता है।

English

The one without a second, Brahman — in ultimate truth it is without qualities (nirguna). With qualities (saguna), easily approached through bhakti, it is known as Krishna, the supreme Lord.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/ · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।