Brahmavaivarta Purana
2
अध्याय 2 / 4

Prakriti Khanda — The Divine Feminine

प्रकृतिखण्ड

2 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय 2

श्लोक 1

सर्वं खल्विदं कृष्णो न भूतं न भविष्यति ।स एव सर्वशक्त्याढ्यः सर्वकारणकारणम्

sarvaṃ khalvidaṃ kṛṣṇo na bhūtaṃ na bhaviṣyati | sa eva sarvaśaktyāḍhyaḥ sarvakāraṇakāraṇam

हिन्दी अर्थ

यह सब कुछ कृष्ण ही है — न पहले कुछ और था, न भविष्य में होगा। वही सर्वशक्तिसम्पन्न, सभी कारणों का कारण है।

English

All this is indeed Krishna — there was nothing else, nor will there be. He alone, endowed with all powers, is the cause of all causes.

अध्याय 2

श्लोक 42

राधा कृष्णस्य परमा शक्तिः प्रेमस्वरूपिणी ।तयोर्भेदो न विद्यते जले शीतलता यथा

rādhā kṛṣṇasya paramā śaktiḥ premasvarūpiṇī | tayorbhedo na vidyate jale śītalatā yathā

हिन्दी अर्थ

राधा कृष्ण की परम शक्ति हैं — प्रेमस्वरूपिणी। उन दोनों में कोई भेद नहीं है, जैसे जल और उसकी शीतलता में भेद नहीं।

English

Radha is the supreme power of Krishna — of the nature of pure love. Between them there is no difference, just as there is no difference between water and its coolness.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/ · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।