Chandogya Upanishad
12
अध्याय 12 / 154

Adhyāya 12

प्रपाठक खण्ड 12

5 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ5 श्लोक

अध्याय 12

श्लोक 1.12.1

॥ अथातः शौव उद्गीथस्तद्ध बको दाल्भ्यो ग्लावो वा मैत्रेयः स्वाध्यायमुद्वव्राज

|| athātaḥ śauva udgīthastaddha bako dālbhyo glāvo vā maitreyaḥ svādhyāyamudvavrāja

हिन्दी अर्थ

देशे भा भां प्रातः प्रातःकालडउपः उन कोने, जिस प्रकार कर्मे बहिष्पवमान सतोतसे स्तवन कने- वारे उद्गाता परस्पर भिरकर भमण करते है उसी प्रकारं अमण क्या ओर परर वहो वठकर हकार करने रगे ते शधानस्तत्रैवागम्य ऋषेः उन कुतोने वहो उ ऋष्क समक्षं यथेह कर्माणि बहिष्पवमा- सम्पुल आकर, जिस प्रकार कर्मे नेन स्तोत्रेणस्तोष्यमाणाउद्वात्‌- बदिष्पवमान स्तोत्रस स्तवन करने.

English

Now follows the udgîtha of the dogs. Vaka Dâlbhya, or, as he was also called, Glâva Maitreya, went out to repeat the Veda (in a quiet place).

अध्याय 12

श्लोक 1.12.2

तस्मै श्वा श्वेतः प्रादुर्बभूव तमन्ये श्वान उपसमेत्योचुरन्नं नो भगवानागायत्वशनायामवा इति

tasmai śvā śvetaḥ prādurbabhūva tamanye śvāna upasametyocurannaṃ no bhagavānāgāyatvaśanāyāmavā iti

हिन्दी अर्थ

ॐ हम खाति है, ॐ हम पीते टै, ॐ देवता, वरुण, प्रजापति, सुयेदेव यहाँ अन्न खव । है अनपते यहाँ अन्न खभो, अनन सभो, ओमदामों पिबामो देवो चयो- ॐ हम खाते है, ॐ हम पीते तनात्‌, वरुणो वषेणाजगतः, है, ॐ । आदित्य ही चोतनथीर ल पारनातमजानाम्‌ होनेके कारण देव, जगतूकी वर्षा छामावयवमूत स्तोमाक्षरसम्बन्धिनी उपासना भक्तिविषयोपातनं सामा-, सामभक्ति-विषयक उपासना वद्रभित्यतः सामावयर्वोसे सम्ब । अतः

English

A white (dog) appeared before him, and other dogs gathering round him, said to him: 'Sir, sing and get us food, we are hungry.'

अध्याय 12

श्लोक 1.12.3

तान्होवाचेहैव मा प्रातरुपसमीयातेति तद्ध बको दाल्भ्यो ग्लावो वा मैत्रेयः प्रतिपालयांचकार

tānhovācehaiva mā prātarupasamīyāteti taddha bako dālbhyo glāvo vā maitreyaḥ pratipālayāṃcakāra

हिन्दी अर्थ

यह छोकं ही हाउकार है, वायु हाईकार है, चन्द्रमा भकार है, आत्मा इकार है ओर अग्नि ईकार है अयं बावायमेव रोको हाड- यह छोकं ही रथन्तर साम कारः स्तोभो रथन्तरे साम्नि प्रसिद्ध हाउकार्‌ स्तोभ है। ही सिद्धः । इवं ैरथन्तरम्‌' इत्य रथन्तर हे" इस सम्बन्धसामान्ये आदित्य उकारो निहव एकारो विखे देवा ओ- होयिकारः धरजापतिहिकारः प्राणः स्वरोऽन्नं या

English

The white dog said to them: 'Come to me to-morrow morning.' Vaka Dâlbhya, or, as he was also called, Glâva Maitreya, watched.

अध्याय 12

श्लोक 1.12.4

ते ह यथैवेदं बहिष्पवमानेन स्तोष्यमाणाः सँरब्धाः सर्पन्तीत्येवमाससृपुस्ते ह समुपविश्य हिं चक्रुः

te ha yathaivedaṃ bahiṣpavamānena stoṣyamāṇāḥ sam̐rabdhāḥ sarpantītyevamāsasṛpuste ha samupaviśya hiṃ cakruḥ

हिन्दी अर्थ

आदिल ऊकार है, निहव एकार है, विवेदेव ओहयोयिकार है, दृष्टयाथकारमुपासीत । अन्ने हीदं ्नापति हकार है तथा भरण सवर है, जन या है पव वरद्‌ वाक्‌ है आदित्य उकारः । उच्चैरूध्वं स्तोभ ऊ इत्यादित्य उकारः । निहव इत्याहवानमेकारः स्तोभः।

English

The dogs came on, holding together, each dog keeping the tail of the preceding dog in his mouth, as the priests do when they are going to sing praises with the Vahishpavamâna hymn . After they had settled down, they began to say Hiṅ.

अध्याय 12

श्लोक 1.12.5

ओ३मदा३मों३पिबा३मों३ देवो वरुणः प्रजपतिः सविता२न्नमिहा२हरदन्नपते३ऽन्नमिहा २हरा२हरो३मिति

o3madā3moṃ3pibā3moṃ3 devo varuṇaḥ prajapatiḥ savitā2nnamihā2haradannapate3'nnamihā 2harā2haro3miti

हिन्दी अर्थ

भादि उकार है; ऊँचा धरथत्‌ उपरकी ओर स्थित आदिलका ही उदूगाता रोग गान करते है, अतः अनिरक्तलयोदराः स्तोभः संचरो हकारः जिसका विरोपरूप्सो निरूपण नही क्या नाता ओर जो कारयरूपसे संचार करनेवास है वह तेरहवाँ स्तोम हुंकार है

English

'Om, let us eat! Om, let us drink! Om, may the divine Varuna, Pragâpati, Savitri bring us food! Lord of food, bring hither food, bring it, Om!'

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/chhandogya.itx · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।