Chandogya Upanishad
13
अध्याय 13 / 154

Adhyāya 13

प्रपाठक खण्ड 13

4 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ4 श्लोक

अध्याय 13

श्लोक 1.13.1

॥ अयं वाव लोको हाउकारः वायुर्हाइकारश्चन्द्रमा अथकारः ।आत्मेहकारोऽग्निरीकारः

|| ayaṃ vāva loko hāukāraḥ vāyurhāikāraścandramā athakāraḥ | ātmehakāro'gnirīkāraḥ

हिन्दी अर्थ

अनिरुक्तोऽव्यक्तत्वादिदं चेदं जो अव्यक्तं होनेके कारण शह चेति निर्वक्तं न॒ शक्यत ओर यह" इस रूपे ० नही कि किया जा सकता, इसलिये अनिरुक्त स्तोमाक्षरसम्बन्धिनी उपासनाजका एल स्तोभाक्षरोपासनाफलमाद-- अब स्तोभाक्षरोकी उपास्नाका जो इस प्रकार इस सामसम्बन्धिनी उपनिषदो जानता है उसे बाणी, जो वाणीका फल है उस फलक देती है तथा वह अन्नवान्‌ ओर अन्न भक्षण करनेवाला होता है

English

The syllable Hâu is this world (the earth), the syllable Hâi the air, the syllable Atha the moon, the syllable Iha the self, the syllable î is Agni, fire.

अध्याय 13

श्लोक 1.13.2

आदित्य ऊकारो निहव एकारो विश्वे देवा औहोयिकारः प्रजपतिर्हिंकारः प्राणः स्वरोऽन्नं या वाग्विराट्

āditya ūkāro nihava ekāro viśve devā auhoyikāraḥ prajapatirhiṃkāraḥ prāṇaḥ svaro'nnaṃ yā vāgvirāṭ

हिन्दी अर्थ

वाक्यका अथं पटले (छा १।२ । ७ मे) क्डा जाचुकादहै। जो लक्षणां साम्नां सामावयवस्तो- इस उपयुक्त रक्षणविशिष्ट स्न श्रीमच्छंकरभगवःपादरृतो ऊन्दोग्योपनिषद्धिवरणे साधुदशिसे सस्त छामोपासना प्रथम अध्यायमें स्थित ओमिलये- तदक्षरम्‌" इत्यादि मन्त्रके द्वारा अनेक

English

The syllable û is the sun, the syllable E is the Nihava or invocation, the syllable Auhoi is the Visve Devas, the syllable Hiṅ is Pragâpati, Svara (tone) is breath (prâna), the syllable Yâ is food, the syllable Vâg is Virâg.

अध्याय 13

श्लोक 1.13.3

अनिरुक्तस्त्रयोदशः स्तोभः संचरो हुंकारः

aniruktastrayodaśaḥ stobhaḥ saṃcaro huṃkāraḥ

हिन्दी अर्थ

ॐ समस्त सामकी उपासना साघु है । नो सधु साम कहते दँ ओर जो असाधु होता है वह अपाम कहलाता है काराथंः साम्न उपासनं साधु । लोके साधु शोमनमनवद प्रसिद्धं समस्त अर्थात्‌ सम्पूणं अवते भक्तिक सामकी उपासना साधु है। खट" यह निपात वाक्की शोभ

English

The thirteenth stobha syllable, viz. the indistinct syllable Huṅ, is the Undefinable (the Highest Brahman).

अध्याय 13

श्लोक 1.13.4

दुग्धेऽस्मै वाग्दोहं यो वाचो दोहोऽन्नवानन्नादो भवति य एतामेवँसाम्नामुपनिषदं वेदोपनिषदं वेदेति

dugdhe'smai vāgdohaṃ yo vāco doho'nnavānannādo bhavati ya etāmevam̐sāmnāmupaniṣadaṃ vedopaniṣadaṃ vedeti

हिन्दी अर्थ

ण्ड १ शाङ्करभाष्याथं १५१ इसी विषयमे कहते है जन्‌ कहा जाय कि अयुक पुश्ष इस राजा आदि के पस सामद्रारा' गया तो एेसा कहकर रोग तत्तत्रैव साध्वसाधुविवेक- । वहां-उस साधु-असाधुका विवेक करण उताप्याहुः । साम्नेनं करने्मे ही कहते है कि जब यह कहा जाता है कि इस राजा इसके अनन्तर एेसा भी कहते है 9 हमारा साम यभ हुभ)। अर्थात्‌ जव शुभ होता है तो अहा ! ब अच्छा हुआ, रेसा कहते ह ओर देसा भी कहते है-हमारा असाम हु" अर्थात्‌ जव अह

English

Speech yields the milk, which is the milk of speech itself to him who knows this Upanishad (secret doctrine) of the Sâmans in this wise. He becomes rich in food, and able to eat food ,--yea, able to eat food.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/chhandogya.itx · प्राप्त 3/6/2026

धर्म ग्रंथ निःशुल्क और विज्ञापन-रहित है। Dharma Granth is free and has no ads. इसे ऐसा बनाए रखने में सहयोग करेंHelp keep it that way → How it is funded

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।