Chandogya Upanishad
14
अध्याय 14 / 154

Adhyāya 14

प्रपाठक खण्ड 14

4 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ4 श्लोक

अध्याय 14

श्लोक 2.1.1

द्वितीयोऽध्यायः ॥ समस्तस्य खलु साम्न उपासनँ साधु यत्खलु साधु तत्सामेत्याचक्षते यदसाधु तदसामेति

dvitīyo'dhyāyaḥ || samastasya khalu sāmna upāsanam̐ sādhu yatkhalu sādhu tatsāmetyācakṣate yadasādhu tadasāmeti

हिन्दी अर्थ

अथोताप्याहुः स्वसंवेद्यं साम , इसके अनन्तर ठेस भी कहते £ । करने योग्य साम हमें प्राप्त हो ग ९३३ ¡हे ।' बतः इस निपातका आश्य अतः वह जो कोई पुरुष साम साधु है यानी साम साधुगुणविशिष्ट हे-एेसी उपा्ना करता है अर्थात्‌ लोकविषयक पाच प्रकारकी सामोपाततना कानि पुनस्तानि साधुदृष्टि- रफिरवे साधृदृ्िविशिष्ट उपासन , विशिष्टानि समस्तानि सामा- श्रने योग्य समत सामकोन-पे है

English

Meditation on the whole of the Sâman is good, and people, when anything is good, say it is Sâman; when it is not good, it is not Sâman.

अध्याय 14

श्लोक 2.1.2

तदुताप्याहुः साम्नैनमुपागादिति साधुनैनमुपागादित्येव तदाहुरसाम्नैनमुपागादित्यसाधुनैनमुपगादित्येव तदाहुः

tadutāpyāhuḥ sāmnainamupāgāditi sādhunainamupāgādityeva tadāhurasāmnainamupāgādityasādhunainamupagādityeva tadāhuḥ

हिन्दी अर्थ

ऊपरके कोकेमिं निम्नाङ्कितरूपसे पंच प्रकारके सामकी उपासना करनी चाहिये । पृथिवी हिकार दहे, अमि प्रस्ताव है, अन्तरिक्ष उद्गीथ ह, आदिय प्रतिशर है ओर चुरोक निषन है ननु रोकादिदृष्टथा तान्युपा- शंका कितु उन समस्त समो खाभ्नि दिवा द्टौ स्यानि साधु- रोकादिद्टिसे तथा साधृदृ्टिसे भी विरोधोद्धावनम्‌ दृष्टया चेति उपासना करनी चाहिये--रेषा आगृत्तिकाटिक अधोमुख लोके पचकिषि सामोपासना अथाटृ्तेषु थौर्हिकार आदित्यः पस्तवोऽन्तरिक्च-

English

Thus they also say, he approached him with Sâman, i. e. becomingly; and he approached him without Sâman, i. e. unbecomingly. :3. And they also say, truly this is Sâman for us, i.e. it is good for us, when it is good; and truly that is not Sâman for us, i. e. it is not good for us, when it is not good.

अध्याय 14

श्लोक 2.1.3

अथोताप्याहुः साम नो बतेति यत्साधु भवति साधु बतेत्येव तदाहुरसाम नो बतेति यदसाधु भवत्यसाधु बतेत्येव तदाहुः

athotāpyāhuḥ sāma no bateti yatsādhu bhavati sādhu batetyeva tadāhurasāma no bateti yadasādhu bhavatyasādhu batetyeva tadāhuḥ

हिन्दी अर्थ

अव अधोयुख कमं सामोपासनाका निहूपण क्रिया नाता है- यलोक हकार है, आदित्य प्रस्ताव है, अन्तरिक्ष उद्गीथ है, अग्नि लोकेषु चोर्हिकारः प्राथम्यात्‌ । प्रस्तूयन्ते कर्माणि प्राणिनाम्‌ । अब आदत्त अर्थात्‌ पुनरान्त्तिके उपासनफट्म्‌-- उपासनाका फर-- कल्पन्ते हास्मे रोका उर्ध्वाश्चादृत्ताश्च य एतदेवं विदरोषोकेषु पञ्चविधं सामोपास्ते

English

And they also say, truly this is Sâman for us, i.e. it is good for us, when it is good; and truly that is not Sâman for us, i. e. it is not good for us, when it is not good.

अध्याय 14

श्लोक 2.1.4

स य एतदेवं विद्वानसाधु सामेत्युपास्तेऽभ्याशो ह यदेनँ साधवो धर्मा आ च गच्छेयुरुप च नमेयुः

sa ya etadevaṃ vidvānasādhu sāmetyupāste'bhyāśo ha yadenam̐ sādhavo dharmā ā ca gaccheyurupa ca nameyuḥ

हिन्दी अर्थ

जो इसे इस प्रकार जाननेवाला पुरुष रोको पञ्चविध सामी उपासना करता है उसके प्रति उर्व ओर अधोभुल रोक भोग्यल्पते । कल्पन्ते समथा भवन्ति हास्म, कल्प-समर्थ होते है (भोगप लोका उर्घ्वाधाडत्ताश्च गत्या- से ्ा्त होते है ) अर्थात्‌ उपके पर क १ = गमनागमन कार्की स्थितिसे युक्त वृ्िनिषयक पोत श्रकारकी सामोणतना दृष्टौ पथचविधःसामोपासीतपुरोवातो हिंकारो

English

If any one knowing this meditates on the Sâman as good, depend upon it all good qualities will approach quickly, aye, they will become his own .

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/chhandogya.itx · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।